जब रुद्र गण साधना स्थल पर आ गए — रुद्रगण साधना के तीन अनुभव, बंधन से मुक्ति और नौकरी की प्राप्ति
रुद्रगण साधना की तीन सत्य कथाएँ — दरवाज़े पर गण के दर्शन के बाद कुल शक्ति का बंधन हटना, और दो नौकरी चाहने वालों को नौकरी मिलना — और उनसे वक्ता द्वारा निकाले गए ग्रहण नियम, रामचरितमानस का आधार, शिवलिंग के चारों ओर गण क्षेत्र और निरंतरता के नियम।
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लंबे अनुष्ठानों के लिए समय न रखने वालों के लिए शीघ्र फल देने वाली रुद्रगण साधना
एक कामना, बहुत जल्द फलित
वक्ता कहते हैं कि हर किसी के पास लंबी साधनाओं और अनुष्ठानों के लिए समय नहीं होता, इसलिए वे हमेशा कहते हैं कि रुद्रगण की साधना हर व्यक्ति करके रख ले। उनके अनुसार यह बहुत जल्दी फल देती है — जो भी इसे एक कामना लेकर करता है, उसकी वह कामना लगभग बहुत जल्द पूरी हो ही जाती है।
वक्ता शुरू में कहते हैं कि आज का अनुभव रुद्रगण साधना से जुड़ा है। जीवन में, वे कहते हैं, हर किसी के पास लंबी साधनाओं और अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं।ों के लिए बहुत समय नहीं होता। ऐसे लोगों के लिए वे हमेशा, अपने लाइव वीडियो में भी, कहते हैं कि रुद्रगण की साधना हर व्यक्ति करके रख ले। इसका कारण, वे कहते हैं, यह है कि यह साधना बहुत जल्दी फल देती है। उनके अनुसार जितने भी लोग इस साधना को किसी एक कामना को लेकर करते हैं, उनकी वह कामना लगभग हमेशा और बहुत जल्द पूरी हो जाती है। जो अनुभव वे बताने जा रहे हैं, वे उन साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी।ों के हैं जिन्होंने अपने अनुभव बताने की अनुमति दी है, और वे कहते हैं कि ऐसे तीन अनुभव इसी एक वीडियो में बताएँगे।
अनुभव मिलने लगने पर नए साधक के दो जाल: लोगों को बताना, और दिव्य दृष्टि की खोज
गलत व्यक्ति से जो मिला है वह भी चला जाता है
वक्ता कहते हैं कि जब भी कोई नया व्यक्ति साधना मार्ग में उतरता है और उसे अनुभव मिलने लगते हैं तो दो बातें होती हैं: वह लोगों को अपने स्वप्न और अनुभव बताने लगता है, और वह "जानकारों" के पास जाकर पूछने लगता है कि इसमें वृद्धि कैसे हो — जो बंद आँखों से दिखता है वह खुली आँखों से कैसे दिखे, तीसरा नेत्र कैसे खुले, देवता से बात कैसे हो। वे कहते हैं कि इसी जल्दबाज़ी से लोगों के जीवन में बहुत-सी अप्रिय बातें होने लगती हैं, क्योंकि गलत व्यक्ति से पाला पड़ गया तो जो कुछ मिला हुआ है वह भी चला जाएगा।
पहली कहानी से पहले वक्ता एक ऐसी बात बताते हैं जो उनके अनुसार वे हमेशा से देखते आए हैं। जब भी कोई व्यक्ति नया-नया साधना मार्ग में उतरता है और उसे अनुभव मिलने लगते हैं, तो उसके जीवन में दो घटनाएँ होती हैं। पहली, अगर व्यक्ति नया है और उसे सब बातों की जानकारी नहीं है तो वह लोगों को अपने अनुभव बताने लगता है — कि मुझे इस तरह के स्वप्न आते हैं, इस तरह के अनुभव होते हैं। दूसरी, एक और तरह के लोग होते हैं जो अन्य "जानकारों" से जाकर मिलने लगते हैं कि इसमें वृद्धि कैसे हो: जो मैं बंद आँखों से देख पा रहा हूँ वह खुली आँख से कैसे देखूँ? लोगों को, वे कहते हैं, दिव्य दृष्टि पाने की, तीसरा नेत्र खोलने की, आँख खुल जाए और हर चीज़ दिखे, देवता दिखें और उनसे बात हो — इसकी बहुत जल्दी होती है। वक्ता कहते हैं कि इसी जल्दी के कारण लोगों के जीवन में बहुत-सी अप्रिय बातें होने लगती हैं — क्योंकि गलत व्यक्ति से पाला पड़ गया तो जो कुछ भी आपको प्राप्त है वह भी चला जाएगा। वे कहते हैं कि पहली कहानी के साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। के साथ भी ठीक ऐसा ही हुआ।
प्रसंग: रुद्रगण साधना में गण के दर्शन के बाद कुल-शक्ति का बंधन खुला
गाँव के साधक का बंधन, द्वार पर लंगोटधारी आकृति, देवता की वापसी
वक्ता एक अच्छे साधक का प्रसंग सुनाते हैं जिन पर उनकी कुल शक्ति, एक प्रचंड और जागृत देव, की पूरी कृपा थी — जब तक उनके ही गाँव के एक साधक ने यह जानकर कुछ क्रियाएँ करके उस शक्ति या उनके शरीर का ऐसा बंधन कर दिया कि देवता का आना बंद हो गया और कोई साधना पूरा फल नहीं देती थी। रुद्रगण साधना करते समय उन्होंने अपने दरवाज़े के पास — शायद तंद्रा में, वक्ता जोड़ते हैं — केवल लंगोट पहने, चिमटा-कमंडल लिए, बड़े खुले बालों वाली एक आकृति देखी, जो जितनी तेज़ी से आई उतनी तेज़ी से ओझल हो गई और रोम-रोम खड़ा कर गई। अगले ही दिन देवता की सवारी फिर आने लगी और उसने बताया कि किसने बंधन किया, कैसे किया, कौन-सा उतारा करना है और भाई की बीमारी में क्या करना है; लगभग उसी समय बंधन और परेशानियाँ खत्म हो गईं।
पहला अनुभव, वक्ता कहते हैं, एक बहुत अच्छे साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। का है जो साधनाएँ करते हैं और जिन पर उनके कुल की शक्ति की पूरी कृपा रही। उनके ही गाँव के किसी साधक को — जिसे पता चल गया था कि इनकी कुल शक्ति इन पर आती है और वह बहुत प्रचंड, बहुत जागृत देव हैं — उसने कुछ ऐसी क्रियाएँ करके उस शक्ति का या इनके शरीर का ऐसा बंधन कर दिया कि वह देव इन पर आना ही छोड़ दिए। इसके बाद इन्हें अनुभव नहीं होते थे। कई साधनाएँ करके देख लीं, पर उनका कोई सकारात्मक फल नहीं मिल रहा था — जो होना चाहिए वह नहीं हो रहा था। कुछ समय के लिए कुछ होता, लगता कि साधना का कुछ असर है, लेकिन पूरी तरह से ये एक तरह से बंधन में पड़ गए थे। वक्ता अब बताते हैं कि पहले साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। ने जब रुद्रगण साधना की तो क्या हुआ। साधना करते समय इन्होंने अपने दरवाज़े के पास मानो साक्षात — हालाँकि वक्ता कहते हैं कि वे यह कहना चाहते हैं कि शायद तंद्रा की अवस्था रही होगी — देखा कि एक व्यक्ति खड़े हैं जो सिर्फ़ लंगोट पहने हैं, चिमटा और कमंडल लिए हैं, बड़े-बड़े खुले बाल हैं। इन्होंने जितनी देर हो सका बिना पलक झपकाए देखा। साधना में कोई भी व्यक्ति अचानक किसी को खड़ा देखे तो भयभीत हो ही जाएगा, वक्ता कहते हैं। कुछ समय बाद वह आकृति ओझल हो गई — बड़ी तेज़ी से आई और चली गई। यह इनका पहला अनुभव था, और बहुत तीव्र: इनकी पूरी हालत खराब हो गई, रोम-रोम खड़ा हो गया, शरीर की हल्की थकान भी दूर हो गई कि यह साक्षात कौन आ गया। अगले ही दिन, वक्ता कहते हैं, इनके देवता की सवारी — कुल शक्ति का इन पर आना — फिर शुरू हो गया। आने पर देवता ने एक-एक चीज़ बता दी: किसने बंधन किया था, कैसे किया था, और कौन-सा उतारा करना है। इनके भाई की तबीयत खराब थी, उसके बारे में भी बताया कि क्या है और क्या करना है। लगभग उसी समय, वक्ता कहते हैं, ये सारी चीज़ें खत्म हो गईं — बंधन भी खत्म हुआ, और जो परेशानियाँ थीं वे भी देवता ने खत्म कर दीं।
पूर्ण चंद्र या सूर्य ग्रहण में रुद्रगण साधना प्रभावी नहीं होती
आंशिक, उपछाया, या ऐसा ग्रहण जिसका सूतक स्थानीय रूप से मान्य न हो
वक्ता रुद्रगण साधना का एक नियम बताते हैं: जब भी पूर्ण चंद्र ग्रहण या पूर्ण सूर्य ग्रहण हो, तब यह प्रभावी नहीं होती। यह आंशिक चंद्र ग्रहण, उपछाया चंद्र ग्रहण, या ऐसे ग्रहण में की जाती है जो दुनिया में कहीं और दिखता हो पर आपके क्षेत्र में उसका सूतक मान्य न हो। वे कहते हैं कि ऐसी साधनाएँ परंपरागत रूप से गुरु परंपरा से मिलती हैं, और इसका सरलतम विधान उनके चैनल पर दो वीडियो में है — एक चंद्र शिव ग्रहण साधना का और एक रुद्रगण का।
वक्ता रुद्रगण साधना का एक नियम बताते हैं: जब भी पूर्ण चंद्र ग्रहण या पूर्ण सूर्य ग्रहण हो, तब यह साधना प्रभावी नहीं होती। यह आंशिक चंद्र ग्रहण, उपछाया चंद्र ग्रहण, या ऐसे ग्रहण के लिए है जो दुनिया में कहीं और देखा जा सकता हो लेकिन आप जिस क्षेत्र में रहते हैं वहाँ उसका सूतक काल मान्य न हो। इस तरह की साधनाएँ, वे कहते हैं, आपको परंपरागत तरीके से, गुरु परंपरा से मिलती हैं। इसका सरलतम विधान, वे जोड़ते हैं, उन्होंने अपने चैनल पर डाला है: दो वीडियो हैं, एक चंद्र ग्रहण के लिए चंद्र शिव नाम से और दूसरा रुद्रगण पर। दोनों को सुनने से, वे कहते हैं, पूरा विधान मिल जाता है — क्या फ़ायदा है और कैसे करना है।
रुद्रगण साधना के मंत्र के रूप में रामचरितमानस की चौपाई
हरि-हर एक-दूसरे के पूरक, इसलिए दोनों की कृपा
वक्ता कहते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के बहुत-से मंत्र, यों कहें तो हर चौपाई, उसमें लिखी हर चीज़ मंत्र है — और उसी का प्रयोग इस साधना में किया जाता है। क्योंकि नारायण नित्य सदाशिव की उपासना करते हैं और सदाशिव नित्य नारायण का स्मरण करते हैं, हरि-हर एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए इस साधना में दोनों की कृपा मिलती है।
वक्ता कहते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के बहुत-से मंत्र, यों कहें तो हर एक चौपाई, उसमें लिखी हर एक चीज़ मंत्र है। उसी का, एक तरह से, इस साधना में प्रयोग किया जाता है। वे इसका आधार समझाते हैं: भगवान श्री नारायण नित्य भगवान सदाशिव की उपासना कर रहे हैं और भगवान सदाशिव नित्य श्री नारायण का स्मरण कर रहे हैं। हरि और हर एक-दूसरे के पूरक हैं। इस साधना का भी, वे कहते हैं, ऐसा ही प्रभाव है — इसमें नारायण और सदाशिव दोनों की कृपा मिलती है।
शिव मंदिर के पास घर क्यों नहीं बनाना चाहिए?
शिवलिंग के चारों ओर 100 धनुष का गण-क्षेत्र
वक्ता कहते हैं कि मंदिर में स्थापित किसी भी ज्योतिर्लिंग या शिवलिंग के चारों ओर 100 धनुष की त्रिज्या से खींचा गया पूरा वृत्त शिव गणों का क्षेत्र है, जहाँ शिव के अलग-अलग गण अलग-अलग जगह निवास करते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि शिव मंदिर के आसपास घर नहीं बनाना चाहिए — और यह असल में सभी मंदिरों पर लागू होता है: जहाँ तक मंदिर की छाया पड़ती है वहाँ तक घर नहीं बनाना चाहिए। आज तो, वे कहते हैं, कहीं भी मंदिर बन जाता है और बगल में घर होते हैं; उन घरों के लोग सुखी हैं या दुखी, यह अलग चर्चा है जो फिर कभी होगी।
वक्ता कहते हैं कि यह जानकारी होनी चाहिए: जब भी हम शिव की साधना करते हैं, महादेव की उपासना-पूजा करते हैं, तो आपके क्षेत्र में मंदिर में महादेव का जो भी ज्योतिर्लिंग — या कहें शिवलिंगघर व मंदिरों में पूजित शिव जी का अमूर्त (निराकार) रूप। — स्थापित है, उस जगह से 100 धनुष की त्रिज्या से खींचा गया पूरा वृत्त शिव गणों का क्षेत्र होता है। वहाँ शिव के अलग-अलग गण उस क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में निवास करते हैं। इसीलिए, वे कहते हैं, कहा जाता है कि शिव मंदिर के आसपास घर नहीं बनाना चाहिए। असल में यह सभी मंदिरों पर लागू होता है: जहाँ तक मंदिर की छाया पड़ती है वहाँ तक घर नहीं बनाना चाहिए। इस नियम के पीछे यही सब कारण रहे हैं। आज के समय में, वे कहते हैं, कहीं भी मंदिर बन जाता है, अगल-बगल घर होते हैं और मंदिर की छाया भी उन पर पड़ती है — 100 धनुष की तो बात ही अलग है; 100 धनुष के अंदर तो कितने ही घर आ जाते हैं। उनमें से कुछ घरों के लोग सुखी हैं और कुछ दुखी, यह अलग बात है, जिस पर पूरी तरह फिर कभी चर्चा होगी। आज वे बस यह बता रहे हैं कि ये चीज़ें कैसे प्रभाव देती हैं।
रुद्र के गण मृत्युलोक की सबसे सक्रिय शक्तियाँ हैं, इसलिए रुद्रगण साधना जल्दी फलती है
शिव के बिना कोई मंदिर नहीं, इसलिए वे हर जगह हैं
वक्ता कहते हैं कि जब आप महादेव के मंदिर में दिए गए निर्देश के अनुसार रुद्रगण की साधना करते हैं तो वहाँ के गण प्रतिक्रिया देते हैं — और इस मृत्युलोक में अगर सबसे अधिक सक्रिय कोई शक्तियाँ हैं तो वे रुद्र के गण हैं। वे कहीं भी विद्यमान हो सकते हैं, किसी जगह पर उनकी रोक नहीं है, और क्योंकि शिव के बिना कोई मंदिर है ही नहीं, वे हर मंदिर में उपस्थित होते हैं। इसीलिए जब भी आप साधना करते हैं, उनकी कृपा बहुत तीव्रता से मिलती है।
वक्ता इस पर आते हैं कि रुद्रगण साधना इतनी जल्दी फलित क्यों होती है। जब भी आप महादेव के मंदिर में रुद्रगण की साधना करते हैं, जैसा दिशा-निर्देश दिया गया है ठीक वैसा करते हैं, तो वहाँ जो गण होते हैं वे प्रतिक्रिया देते हैं — और अगर कहा जाए कि इस मृत्युलोक में सबसे अधिक सक्रिय कोई शक्तियाँ हैं, तो वे रुद्र के गण हैं। ऐसा इसलिए कि रुद्र के गण हर जगह विद्यमान हो सकते हैं; कोई जगह उन्हें रोकती नहीं। वे हर मंदिर में हैं, क्योंकि शिव के बिना तो कोई मंदिर है ही नहीं — इसलिए उनकी उपस्थिति हर जगह होती ही होती है। इसी कारण, वे कहते हैं, जब भी आप साधना करते हैं, उनकी कृपा बहुत तीव्रता से मिलती है।
रुद्रगण साधना कितने दिन जारी रखें और कब आरंभ करें
पहली बार ग्रहण में; फिर मासिक शिवरात्रि से 11, 21 या 27 दिन
वक्ता कहते हैं कि जब कोई मार्ग न दिखे और बड़ी साधनाएँ अपने बस की न हों, तो इस साधना को जारी रखिए: मासिक शिवरात्रि से शुरू करके तब तक करते रहिए जब तक इच्छित फल न मिले, कम से कम 11, 21 या 27 दिन ज़रूर कीजिए। यह एक दिन की साधना है; पहली बार इसे आंशिक या उपछाया चंद्र ग्रहण में कीजिए — समय की कमी हो तो आंशिक सूर्य ग्रहण में भी चलेगा, हालाँकि चंद्र ग्रहण में सबसे अधिक प्रभावी है। उसके बाद जीवन में जब भी ज़रूरत पड़े, इसे 11, 21 या 27 दिन की साधना के रूप में फिर उठा लीजिए। दूसरे अनुभव के रूप में वे अपने ही साधक-परिवार के एक व्यक्ति का ज़िक्र करते हैं जिन्होंने यह प्रयोग लगभग दो बार किया: उनकी नौकरी चली गई थी, उन्होंने यह साधना फिर आरंभ की और उन्हें दोबारा नौकरी मिली — पहले से अच्छी।
दूसरा अनुभव — उनके ही साधक परिवार के एक व्यक्ति का नौकरी का मामला, जिन्होंने इस प्रयोग को लगभग दो बार किया है — बताते हुए वक्ता समझाते हैं कि साधना को कैसे जारी रखा जाता है। वे कहते हैं कि जब भी कोई मार्ग न दिखे, लगे कि बड़ी-बड़ी साधनाएँ अपने से नहीं हो पा रहीं, तो इस साधना को जारी रखिए: मासिक शिवरात्रि से आरंभ करके तब तक करते रहिए जब तक इच्छित फल न मिले। कम से कम 11 दिन, 21 दिन या 27 दिन तो ज़रूर कीजिए। यह एक दिन की साधना है। पहली बार जब भी करें, आंशिक चंद्र ग्रहण या उपछाया ग्रहण के समय कीजिए; सूर्य ग्रहण आंशिक हो तब भी चलेगा। हालाँकि, वे कहते हैं, पिछले वीडियो में उन्होंने कहा है कि चंद्र ग्रहण में ही सबसे अधिक प्रभावी है — तो उसी में करने का प्रयास करें — पर समय की कमी हो और सामने सूर्य ग्रहण लग रहा हो तो उसमें भी चलेगा, उसमें भी काम करेगा। तो पहली बार वैसे कर लीजिए, वे कहते हैं, और उसके बाद जीवन में जब भी ज़रूरत पड़े, इन्हीं चीज़ों को 11, 21, 27 दिन की साधना के रूप में उठा लीजिए। उन्हें पूरा विश्वास है कि महादेव और नारायण की कृपा से रुद्र के गण हर उस कार्य को पूरा कर देंगे जिसका संकल्प लेकर आप कर रहे होंगे। यही, वे कहते हैं, दूसरा अनुभव है: उस साधक की नौकरी चली गई थी; उन्होंने यह साधना फिर आरंभ की और उन्हें दोबारा नौकरी मिली — पहले से अच्छी नौकरी।
एक रुद्रगण साधना में एक ही संकल्प, और वह धर्म-संगत हो
आध्यात्मिक उन्नति या भौतिक कामना, दोनों नहीं
वक्ता कहते हैं कि रुद्रगण साधना किसी एक ही संकल्प को लेकर की जाती है — या तो आध्यात्मिक उन्नति का या भौतिक कामना का, सूची नहीं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि रुद्र के गण महादेव और नारायण की कृपा से वह हर कार्य पूरा कर देंगे जो एक संकल्प लेकर किया जाए; संकल्प धर्म-युक्त, धर्म-संगत हो तो तुरंत फलित होता है — आप सही होने चाहिए, वे कहते हैं, तो हो जाएगा।
वक्ता कहते हैं कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि भगवान रुद्र के गण, महादेव की कृपा से और भगवान नारायण की कृपा से, आपका वह हर कार्य पूर्ण कर देंगे जिसे आप एक संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लेकर कर रहे होंगे। इस साधना में, वे कहते हैं, किसी एक ही संकल्प को लेकर किया जाता है। या तो आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लें, या भौतिक कामनाओं का। आपके संकल्प धर्म-युक्त, धर्म-संगत होंगे तो तुरंत फलित होंगे — आप सही होने चाहिए, तो हो जाएगा।
प्रसंग: सात अस्वीकृतियों वाले 27 दिन के रुद्रगण संकल्प के अगले दिन तीन नौकरी के प्रस्ताव
साधना के दौरान मनोबल की परीक्षा, समाप्ति के अगले दिन फल
वक्ता अपने एक मित्र का प्रसंग सुनाते हैं, जो स्वयं साधक हैं, जिनकी उम्र बिना नौकरी के बीती जा रही थी और जो हवन वाली कोई बड़ी साधना नहीं उठा सकते थे; वक्ता ने रुद्रगण साधना सुझाई। उन्होंने दो ग्रहणों में की और फिर 27 दिन का संकल्प लिया, जिसके दौरान सात जगह से इंटरव्यू के कॉल आए, हर दूसरे दिन जाना पड़ा और सब जगह से अस्वीकार हुए — वक्ता पूछते हैं कि ऐसा फल साधक का मनोबल कहाँ तक तोड़ सकता है — फिर भी उन्होंने कहा कि उठाया है तो पूरा करेंगे। समाप्ति के अगले दिन उन्होंने तीन बार फोन किया: 11:30 बजे, मना करने वाली जगहों में से एक ने जॉइन करने को कहा; 2:00 बजे, जिस फर्म ने अनुभव न होने पर मना किया था उसने ज़्यादा पैकेज दिया; 6:30 बजे, सबसे प्रतिष्ठित फर्म ने 5.5 से 6 लाख, कंपनी का फ्लैट और सीधे अधिकारी पद दिया, और इंटरव्यू लेने वाले ने बताया कि उसके क्षेत्र में केवल इन्होंने उसे संतुष्ट किया था, और इंटरव्यू में की गई बेइज़्ज़ती की माफ़ी माँगी।
तीसरा अनुभव, जिसे वक्ता सबसे ज़बरदस्त कहते हैं, वह भी नौकरी से जुड़ा है। ये साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। उनके मित्र हैं, साधना क्षेत्र की अच्छी जानकारी रखते हैं और साधना करते रहते हैं। उन्होंने कहा था: उम्र बीती जा रही है और नौकरी नहीं मिल रही; प्राइवेट नौकरी भी मिल जाए तो कम से कम बेरोज़गार का ठप्पा हट जाए। वक्ता ने सुझाया था कि वे रुद्रगण की ही साधना कर लें — आसान भी है, और मित्र खुद कह रहे थे कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि हवन आदि वाली कोई बड़ी साधना उठा सकें। तो उन्होंने रुद्रगण की साधना आरंभ की और दो ग्रहणों में की। तीसरी बार, जैसा वक्ता ने कहा था, 27 दिन का संकल्प लेकर साधना की। उन 27 दिनों के दौरान, वे बताते हैं, लगभग सात जगह से इंटरव्यू के लिए कॉल आया; हर दूसरे दिन इंटरव्यू देने जाना पड़ता था, साधना काल में ही इंटरव्यू दे रहे थे। सात जगह इंटरव्यू दिए और कहीं भी चयन नहीं हुआ — हर जगह से अस्वीकार कर दिया गया। वक्ता सुनने वाले से सोचने को कहते हैं कि साधना करने के बाद अगर हर जगह इंटरव्यू में साफ़ मना कर दिया जाए, हतोत्साहित कर दिया जाए, तो साधक का मनोबल कहाँ तक टूट सकता है: हम इतनी मेहनत कर रहे हैं, अपने क्षेत्र में भी मेहनत की है, भगवान की सेवा-पूजा कर रहे हैं, साधना भी कर रहे हैं, और ऊपर से कोई फल ही नहीं। लेकिन मित्र ने कहा कि अब उठाया है तो पूरा करेंगे, उसके बाद देखा जाएगा क्या होगा। साधना पूरी होने के अगले दिन, वक्ता कहते हैं, दिन के क़रीब 11:30 बजे मित्र का फोन आया। उन्होंने कहा: साधना कल पूरी हुई, और हालाँकि हर जगह से मना हुआ था, उनमें से एक जगह से फोन आया है और जॉइन करने को कहा है — पैकेज भी ठीक-ठाक है, चलेगा; कम से कम बेरोज़गारी का ठप्पा सिर से हट गया, और वे जल्दी जॉइनिंग चाहते हैं। वक्ता ने कहा कि बहुत अच्छी बात है, आपकी मेहनत रंग लाई, जगदंबा की कृपा मिली और रुद्रगण आपके साथ हैं — आरंभ कीजिए, आगे कहीं न कहीं प्रगति होगी। क़रीब 2:00 बजे फिर फोन आया, बोले कि यह तो चमत्कार हो गया: एक जगह जहाँ इंटरव्यू दिया था वहाँ साफ़ मना कर दिया गया था यह कहकर कि आपको कोई अनुभव नहीं है और फ्रेशर्स के लिए हमारे पास जगह नहीं — और अब वही लोग बुलाकर नौकरी दे रहे हैं, पहले से ज़्यादा पैकेज पर। वक्ता ने कहा कि यह तो और भी अच्छी बात है, और तय हुआ कि इसी को जॉइन करना है, क्योंकि फर्म काफ़ी बड़ी है और पैकेज बेहतर है। शाम 6:30 बजे तीसरी बार फोन आया, बोले कि यह तो ज़बरदस्त हो गया, ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता, मुझे खुद विश्वास नहीं हो रहा। सबसे प्रतिष्ठित फर्म से कॉल आया था: 5.5 से 6 लाख का पैकेज, कंपनी की ओर से फ्लैट आवंटित, और सीधे अधिकारी पद पर प्रवेश। अनुभव उनके पास नहीं था, लेकिन कारण यह बताया गया कि जिस व्यक्ति ने इंटरव्यू लिया था उसने ठीक उसी क्षेत्र के प्रश्न पूछे थे जिसमें ये मित्र विशेषज्ञ थे, और इन्होंने उसे पूरी तरह संतुष्ट किया था; वह इंटरव्यू लेने वाला इस्तीफ़ा देकर जाने वाला था, इसीलिए इंटरव्यू ले रहा था। बाकी अनुभवी लोगों को शायद उस क्षेत्र में उतनी जानकारी नहीं थी या वे अपने इंटरव्यू में खरे नहीं उतरे थे, जबकि ये उसे समझाने में सफल रहे थे — पर अनुभव न होने के कारण रोके गए थे। इंटरव्यू लेने वाले ने कहा कि मेरा नोटिस पीरियड दो महीने बाकी है: आप जॉइन कर लीजिए, सब कुछ मिलेगा, और दो महीने में मैं आपको इस विषय में खड़ा कर दूँगा; बाद में ज़रूरत पड़े तो सहयोग के लिए और लोग रहेंगे, कृपया जॉइन कर लीजिए। वक्ता सबसे बड़ी बात जोड़ते हैं जो उसने कही। इंटरव्यू में अगर हम बहुत आत्मविश्वास में हों और इंटरव्यू लेने वाले का अहं आहत हो जाए तो वह कहीं न कहीं नीचा दिखा देता है — और चूँकि मित्र ने हर सवाल का जवाब दिया था और कुछ बातें अति-आत्मविश्वास में कह दी थीं, उस दिन उसे बुरा लगा था और उसने इनकी बेइज़्ज़ती की थी। उसके लिए उसने फोन पर माफ़ी माँगी कि ऐसा पेशेवर ढंग से नहीं बोलना चाहिए था पर बोल दिया, और कहा कि कृपया आकर फर्म जॉइन कर लीजिए ताकि मैं यहाँ से जा सकूँ और चीज़ें सही तरीके से आपको सौंप सकूँ।
रुद्रगण अनुभवों की सीख: जब कोई मार्ग न दिखे, सदाशिव के सम्मुख चौपाई गणों की सहायता लाती है
साधना कभी पुरानी नहीं होती; नौकरी मिलने तक करें
वक्ता सीख निकालते हैं: अगर जीवन में कोई मार्ग न दिखे, डूबने की स्थिति हो और बड़ी साधनाओं के लिए पैसा न हो, तो केवल रामचरितमानस की इस चौपाई का सहारा लेकर सदाशिव के सम्मुख इस विधि-विधान से प्रार्थना कर दें, उनके गण सहायता के लिए ज़रूर आएँगे और जिससे भला हो वह करके देंगे — इस पर उनका विश्वास पक्का हो गया। वे जोड़ते हैं कि साधना कभी पुरानी नहीं होती और उसका तरीका नहीं बदलता, वीडियो के 10-15 साल बाद भी; नौकरी की परिस्थिति वाला श्रोता नौकरी मिलने तक यह साधना करे। भगवती और रुद्र की कृपा से नौकरी मिले तो माता-पिता हृदय से आशीर्वाद देंगे और अपनी कमाई से घर के देवी-देवता और पितृ तृप्त होंगे। अगर आप टूट रहे हैं तो विश्वास करके एक बार उनकी शरण लें जो समस्त विश्व को शरण देते हैं — मार्ग अवश्य निकलेगा।
जब मित्र ने यह सब बताया तो वक्ता कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि सुनने वाला यह वीडियो कब सुन रहा है और उसके जीवन की क्या परिस्थिति है — लेकिन यह अनुभव सुनकर उनका अपना उत्साह रुद्र के गणों के प्रति, भगवान महादेव के प्रति और भगवान नारायण के प्रति बहुत बढ़ गया। विश्वास, वे कहते हैं, यह है: अगर जीवन में कहीं कोई मार्ग न दिख रहा हो, डूबने की स्थिति आ गई हो, बड़ी-बड़ी साधनाएँ करने के लिए हमारे पास धन-संपत्ति, पैसा न हो — तो सिर्फ़ रामचरितमानस की इस चौपाई का सहारा लेकर, भगवान सदाशिव के सामने जाकर इस विधि-विधान से प्रार्थना कर दें, तो उनके गण हमारी सहायता के लिए ज़रूर आ जाएँगे, और जिस विधि से हमारा भला हो सकता है वह ज़रूर करके देंगे। मित्र के जीवन का अनुभव देखकर, वक्ता कहते हैं, इस पर उनका विश्वास पक्का हो गया। समापन में वक्ता कहते हैं कि यह वीडियो कभी पुराना नहीं हो सकता, न ही इसकी महत्ता कभी कम हो सकती है। कोई इसे यूट्यूब पर अपलोड होने के 10-15 साल बाद भी देख रहा हो और उसके जीवन में ऐसी घटना हुई हो, तो याद रखे कि साधना कभी पुरानी नहीं हो सकती और उसका तरीका कभी नहीं बदलेगा। दोनों साधनाओं का विधि-विधान, वे कहते हैं, डिस्क्रिप्शन में लिंक है, जिसे देश-काल-परिस्थिति के अनुसार करना है। अगर सुनने वाले के जीवन में नौकरी से जुड़ी परिस्थिति है, वे कहते हैं, तो तब तक यह साधना कीजिए जब तक नौकरी न मिल जाए — विश्वास करके करके देखिए। आपके घर की परिस्थिति जो भी रही हो, भगवती की कृपा से, रुद्र की कृपा से नौकरी मिलेगी और उस नौकरी से घर में चार पैसे आएँगे, तो माता-पिता प्रसन्न होंगे और उनके हृदय से आशीर्वाद निकलेगा; आप कहीं न कहीं धन्यवाद देंगे। आपके ही कमाए पैसे से घर के देवी-देवता और पितृ तृप्त होंगे। इन सब आशीर्वादों का कुछ अंश, वे कहते हैं, उन्हें भी मिलेगा जिन्होंने इस वीडियो में अपने अनुभव साझा किए, और उन्हें भी, क्योंकि वे सब आपके घर में खुशियाँ आने का माध्यम बनेंगे। तो यह चीज़ कभी पुरानी नहीं हो सकती। इससे सीख लीजिए, वे कहते हैं: अगर आप टूट रहे हैं तो विश्वास करके एक बार उनकी शरण में जाइए जो समस्त विश्व को शरण देते हैं — मार्ग अवश्य निकलेगा। वे इस आशा के साथ समापन करते हैं कि वीडियो से सबको लाभ मिले, और महादेव से कामना करते हैं कि आपकी जो भी धर्म-संगत इच्छा हो उसे महादेव और उनके गण पूरा करें।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।