जब रुद्र गण साधना स्थल पर आ गए — रुद्रगण साधना के तीन अनुभव, बंधन से मुक्ति और नौकरी की प्राप्ति

रुद्रगण साधना की तीन सत्य कथाएँ — दरवाज़े पर गण के दर्शन के बाद कुल शक्ति का बंधन हटना, और दो नौकरी चाहने वालों को नौकरी मिलना — और उनसे वक्ता द्वारा निकाले गए ग्रहण नियम, रामचरितमानस का आधार, शिवलिंग के चारों ओर गण क्षेत्र और निरंतरता के नियम।

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01

लंबे अनुष्ठानों के लिए समय न रखने वालों के लिए शीघ्र फल देने वाली रुद्रगण साधना

एक कामना, बहुत जल्द फलित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–01:19

वक्ता कहते हैं कि हर किसी के पास लंबी साधनाओं और अनुष्ठानों के लिए समय नहीं होता, इसलिए वे हमेशा कहते हैं कि रुद्रगण की साधना हर व्यक्ति करके रख ले। उनके अनुसार यह बहुत जल्दी फल देती है — जो भी इसे एक कामना लेकर करता है, उसकी वह कामना लगभग बहुत जल्द पूरी हो ही जाती है।

02

अनुभव मिलने लगने पर नए साधक के दो जाल: लोगों को बताना, और दिव्य दृष्टि की खोज

गलत व्यक्ति से जो मिला है वह भी चला जाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:20–02:18

वक्ता कहते हैं कि जब भी कोई नया व्यक्ति साधना मार्ग में उतरता है और उसे अनुभव मिलने लगते हैं तो दो बातें होती हैं: वह लोगों को अपने स्वप्न और अनुभव बताने लगता है, और वह "जानकारों" के पास जाकर पूछने लगता है कि इसमें वृद्धि कैसे हो — जो बंद आँखों से दिखता है वह खुली आँखों से कैसे दिखे, तीसरा नेत्र कैसे खुले, देवता से बात कैसे हो। वे कहते हैं कि इसी जल्दबाज़ी से लोगों के जीवन में बहुत-सी अप्रिय बातें होने लगती हैं, क्योंकि गलत व्यक्ति से पाला पड़ गया तो जो कुछ मिला हुआ है वह भी चला जाएगा।

03

प्रसंग: रुद्रगण साधना में गण के दर्शन के बाद कुल-शक्ति का बंधन खुला

गाँव के साधक का बंधन, द्वार पर लंगोटधारी आकृति, देवता की वापसी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:19–02:55

वक्ता एक अच्छे साधक का प्रसंग सुनाते हैं जिन पर उनकी कुल शक्ति, एक प्रचंड और जागृत देव, की पूरी कृपा थी — जब तक उनके ही गाँव के एक साधक ने यह जानकर कुछ क्रियाएँ करके उस शक्ति या उनके शरीर का ऐसा बंधन कर दिया कि देवता का आना बंद हो गया और कोई साधना पूरा फल नहीं देती थी। रुद्रगण साधना करते समय उन्होंने अपने दरवाज़े के पास — शायद तंद्रा में, वक्ता जोड़ते हैं — केवल लंगोट पहने, चिमटा-कमंडल लिए, बड़े खुले बालों वाली एक आकृति देखी, जो जितनी तेज़ी से आई उतनी तेज़ी से ओझल हो गई और रोम-रोम खड़ा कर गई। अगले ही दिन देवता की सवारी फिर आने लगी और उसने बताया कि किसने बंधन किया, कैसे किया, कौन-सा उतारा करना है और भाई की बीमारी में क्या करना है; लगभग उसी समय बंधन और परेशानियाँ खत्म हो गईं।

04

पूर्ण चंद्र या सूर्य ग्रहण में रुद्रगण साधना प्रभावी नहीं होती

आंशिक, उपछाया, या ऐसा ग्रहण जिसका सूतक स्थानीय रूप से मान्य न हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:56–03:36

वक्ता रुद्रगण साधना का एक नियम बताते हैं: जब भी पूर्ण चंद्र ग्रहण या पूर्ण सूर्य ग्रहण हो, तब यह प्रभावी नहीं होती। यह आंशिक चंद्र ग्रहण, उपछाया चंद्र ग्रहण, या ऐसे ग्रहण में की जाती है जो दुनिया में कहीं और दिखता हो पर आपके क्षेत्र में उसका सूतक मान्य न हो। वे कहते हैं कि ऐसी साधनाएँ परंपरागत रूप से गुरु परंपरा से मिलती हैं, और इसका सरलतम विधान उनके चैनल पर दो वीडियो में है — एक चंद्र शिव ग्रहण साधना का और एक रुद्रगण का।

05

रुद्रगण साधना के मंत्र के रूप में रामचरितमानस की चौपाई

हरि-हर एक-दूसरे के पूरक, इसलिए दोनों की कृपा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:37–04:08

वक्ता कहते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के बहुत-से मंत्र, यों कहें तो हर चौपाई, उसमें लिखी हर चीज़ मंत्र है — और उसी का प्रयोग इस साधना में किया जाता है। क्योंकि नारायण नित्य सदाशिव की उपासना करते हैं और सदाशिव नित्य नारायण का स्मरण करते हैं, हरि-हर एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए इस साधना में दोनों की कृपा मिलती है।

06

शिव मंदिर के पास घर क्यों नहीं बनाना चाहिए?

शिवलिंग के चारों ओर 100 धनुष का गण-क्षेत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:09–05:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मंदिर में स्थापित किसी भी ज्योतिर्लिंग या शिवलिंग के चारों ओर 100 धनुष की त्रिज्या से खींचा गया पूरा वृत्त शिव गणों का क्षेत्र है, जहाँ शिव के अलग-अलग गण अलग-अलग जगह निवास करते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि शिव मंदिर के आसपास घर नहीं बनाना चाहिए — और यह असल में सभी मंदिरों पर लागू होता है: जहाँ तक मंदिर की छाया पड़ती है वहाँ तक घर नहीं बनाना चाहिए। आज तो, वे कहते हैं, कहीं भी मंदिर बन जाता है और बगल में घर होते हैं; उन घरों के लोग सुखी हैं या दुखी, यह अलग चर्चा है जो फिर कभी होगी।

07

रुद्र के गण मृत्युलोक की सबसे सक्रिय शक्तियाँ हैं, इसलिए रुद्रगण साधना जल्दी फलती है

शिव के बिना कोई मंदिर नहीं, इसलिए वे हर जगह हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:12–05:51

वक्ता कहते हैं कि जब आप महादेव के मंदिर में दिए गए निर्देश के अनुसार रुद्रगण की साधना करते हैं तो वहाँ के गण प्रतिक्रिया देते हैं — और इस मृत्युलोक में अगर सबसे अधिक सक्रिय कोई शक्तियाँ हैं तो वे रुद्र के गण हैं। वे कहीं भी विद्यमान हो सकते हैं, किसी जगह पर उनकी रोक नहीं है, और क्योंकि शिव के बिना कोई मंदिर है ही नहीं, वे हर मंदिर में उपस्थित होते हैं। इसीलिए जब भी आप साधना करते हैं, उनकी कृपा बहुत तीव्रता से मिलती है।

08

रुद्रगण साधना कितने दिन जारी रखें और कब आरंभ करें

पहली बार ग्रहण में; फिर मासिक शिवरात्रि से 11, 21 या 27 दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:02–08:05

वक्ता कहते हैं कि जब कोई मार्ग न दिखे और बड़ी साधनाएँ अपने बस की न हों, तो इस साधना को जारी रखिए: मासिक शिवरात्रि से शुरू करके तब तक करते रहिए जब तक इच्छित फल न मिले, कम से कम 11, 21 या 27 दिन ज़रूर कीजिए। यह एक दिन की साधना है; पहली बार इसे आंशिक या उपछाया चंद्र ग्रहण में कीजिए — समय की कमी हो तो आंशिक सूर्य ग्रहण में भी चलेगा, हालाँकि चंद्र ग्रहण में सबसे अधिक प्रभावी है। उसके बाद जीवन में जब भी ज़रूरत पड़े, इसे 11, 21 या 27 दिन की साधना के रूप में फिर उठा लीजिए। दूसरे अनुभव के रूप में वे अपने ही साधक-परिवार के एक व्यक्ति का ज़िक्र करते हैं जिन्होंने यह प्रयोग लगभग दो बार किया: उनकी नौकरी चली गई थी, उन्होंने यह साधना फिर आरंभ की और उन्हें दोबारा नौकरी मिली — पहले से अच्छी।

09

एक रुद्रगण साधना में एक ही संकल्प, और वह धर्म-संगत हो

आध्यात्मिक उन्नति या भौतिक कामना, दोनों नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:06–08:19

वक्ता कहते हैं कि रुद्रगण साधना किसी एक ही संकल्प को लेकर की जाती है — या तो आध्यात्मिक उन्नति का या भौतिक कामना का, सूची नहीं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि रुद्र के गण महादेव और नारायण की कृपा से वह हर कार्य पूरा कर देंगे जो एक संकल्प लेकर किया जाए; संकल्प धर्म-युक्त, धर्म-संगत हो तो तुरंत फलित होता है — आप सही होने चाहिए, वे कहते हैं, तो हो जाएगा।

10

प्रसंग: सात अस्वीकृतियों वाले 27 दिन के रुद्रगण संकल्प के अगले दिन तीन नौकरी के प्रस्ताव

साधना के दौरान मनोबल की परीक्षा, समाप्ति के अगले दिन फल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:26–13:02

वक्ता अपने एक मित्र का प्रसंग सुनाते हैं, जो स्वयं साधक हैं, जिनकी उम्र बिना नौकरी के बीती जा रही थी और जो हवन वाली कोई बड़ी साधना नहीं उठा सकते थे; वक्ता ने रुद्रगण साधना सुझाई। उन्होंने दो ग्रहणों में की और फिर 27 दिन का संकल्प लिया, जिसके दौरान सात जगह से इंटरव्यू के कॉल आए, हर दूसरे दिन जाना पड़ा और सब जगह से अस्वीकार हुए — वक्ता पूछते हैं कि ऐसा फल साधक का मनोबल कहाँ तक तोड़ सकता है — फिर भी उन्होंने कहा कि उठाया है तो पूरा करेंगे। समाप्ति के अगले दिन उन्होंने तीन बार फोन किया: 11:30 बजे, मना करने वाली जगहों में से एक ने जॉइन करने को कहा; 2:00 बजे, जिस फर्म ने अनुभव न होने पर मना किया था उसने ज़्यादा पैकेज दिया; 6:30 बजे, सबसे प्रतिष्ठित फर्म ने 5.5 से 6 लाख, कंपनी का फ्लैट और सीधे अधिकारी पद दिया, और इंटरव्यू लेने वाले ने बताया कि उसके क्षेत्र में केवल इन्होंने उसे संतुष्ट किया था, और इंटरव्यू में की गई बेइज़्ज़ती की माफ़ी माँगी।

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रुद्रगण अनुभवों की सीख: जब कोई मार्ग न दिखे, सदाशिव के सम्मुख चौपाई गणों की सहायता लाती है

साधना कभी पुरानी नहीं होती; नौकरी मिलने तक करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:03–15:45

वक्ता सीख निकालते हैं: अगर जीवन में कोई मार्ग न दिखे, डूबने की स्थिति हो और बड़ी साधनाओं के लिए पैसा न हो, तो केवल रामचरितमानस की इस चौपाई का सहारा लेकर सदाशिव के सम्मुख इस विधि-विधान से प्रार्थना कर दें, उनके गण सहायता के लिए ज़रूर आएँगे और जिससे भला हो वह करके देंगे — इस पर उनका विश्वास पक्का हो गया। वे जोड़ते हैं कि साधना कभी पुरानी नहीं होती और उसका तरीका नहीं बदलता, वीडियो के 10-15 साल बाद भी; नौकरी की परिस्थिति वाला श्रोता नौकरी मिलने तक यह साधना करे। भगवती और रुद्र की कृपा से नौकरी मिले तो माता-पिता हृदय से आशीर्वाद देंगे और अपनी कमाई से घर के देवी-देवता और पितृ तृप्त होंगे। अगर आप टूट रहे हैं तो विश्वास करके एक बार उनकी शरण लें जो समस्त विश्व को शरण देते हैं — मार्ग अवश्य निकलेगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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