पितर अशुद्ध कैसे होते हैं, और उसका उपाय

पितरों की अशुद्धि के कारण और उपाय पर व्याख्या

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01

पितर कहाँ रहते हैं और देहरहित पितर अशुद्ध कैसे हो सकते हैं

वायवीय शरीर, चौखट पर स्थान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–01:54

वक्ता कहते हैं कि जिस घर में बार-बार परेशानी आती है, वहाँ तंत्र जानने वाला प्रायः बताता है कि आपके पितृ अशुद्ध हो गए हैं, और वे पूछते हैं कि यह कैसे संभव है जब पितरों का शरीर पंच महाभूतों से बना ही नहीं है। वे समझाते हैं कि पितरों का शरीर वायवीय होता है, उनका प्रमुख स्थान घर के प्रवेश द्वार के पास कुलदेवी और कुल भैरव के साथ होता है, और परिवार का हर मांगलिक कार्य उन्हीं की कृपा से होता है। इसी अधिकार के कारण उन तक पहुँचा और उन्हें अशुद्ध किया जा सकता है — और महाविद्या की कृपा से दिव्य नेत्र पाने वाले ही इसे सही देख पाते हैं।

02

शत्रु द्वारा चौखट बाँधने से होने वाली पितृ अशुद्धि

द्वार कीलित या अशुद्ध, तो पितर भी अशुद्ध

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:55–03:48

वक्ता पहला कारण बताते हैं: जो व्यक्ति ईर्ष्या से घर में अशुद्ध और क्षुद्र शक्तियों का प्रवेश कराना चाहता है, उसे सबसे पहले चौखट का बंधन करना पड़ता है — प्रवेश द्वार को कीलित या अशुद्ध करना — और द्वार अशुद्ध होते ही 99% मामलों में पितृ अशुद्ध हो जाते हैं। अशुद्ध करने का अर्थ वे यह बताते हैं कि गौ माता से जुड़ा कोई निषिद्ध पदार्थ — उनका मांस या मृत्यु के बाद प्राप्त शरीर का कोई अंग — श्मशानी विद्या, मंत्र या तंत्र से चौखट पर फेंक दिया जाए या स्पर्श करा दिया जाए, जिसमें प्रायः भगतवाल लोग सहयोग करते हैं। इसके बाद पितर किसी मांगलिक कार्य में साथ नहीं दे पाते; घर पूजा-पाठ करता रहता है पर अचानक उत्पात शुरू हो जाता है। वे कहते हैं कि शत्रु यह तब करते हैं जब परिवार उन्नति कर रहा हो या विवाह आने वाला हो।

03

कुल परंपरा छोड़कर गई बेटी को घर में लाने से होने वाली पितृ अशुद्धि

बाहर मिलिए; प्रवेश से पहले प्रायश्चित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:49–06:08

वक्ता का दूसरा कारण है घर के किसी बेटे या बेटी का ऐसे कुल में विवाह कर लेना जो आपकी कुल परंपरा के पूरे विपरीत हो। उनका उदाहरण: सनातन घर की बेटी, जहाँ वैष्णव या दक्षिणाचार पद्धति से पूजन होता है, किसी मुस्लिम लड़के के साथ चली जाए और बाद में परिवार तरस या मोह में उसे घर ले आए — तब, वे कहते हैं, 95% से भी ज्यादा निश्चित है कि पितृ अशुद्धता के कारण कुपित होंगे, क्योंकि वहाँ धर्म के विरुद्ध जो होता है उससे उसका चरित्र और शरीर पूरी तरह अशुद्ध हो चुका होता है, और उस आभामंडल के साथ चौखट लाँघते ही अशुद्धि बच्चों और वंशजों पर पड़ती है। उनका नियम: ऐसे व्यक्ति को घर में प्रवेश न दें; दया आए तो बाहर मिलें। अगर वह सचमुच लौटना चाहे तो पहले उसे ऐसे तीर्थ ले जाएँ जहाँ गंगा जी शुद्ध हैं — हरिद्वार, रुद्रप्रयाग — ब्राह्मणों से प्रायश्चित्त विधान कराएँ (वे गंगा जी की बालू सात दिन खिलाने का उल्लेख करते हैं), और कम से कम सवा महीने वहाँ विधि-विधान से पूजन कराने के बाद ही घर लाएँ; तब कोई दोष नहीं लगता।

04

कुल के नियम तोड़ने वाली बहू से होने वाली पितृ अशुद्धि

मांस, पूजा की उपेक्षा, रजस्वला स्पर्श

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:09–07:31

वक्ता का तीसरा कारण है घर के बेटे का ऐसी स्त्री से विवाह — जरूरी नहीं कि मुस्लिम लड़की हो, वे कहते हैं, कोई भी युवती — जो पूरी तरह कुल परंपरा के विपरीत चलती हो। उनके उदाहरण: आपके घर में मांस नहीं खाया जाता, पितृ स्थान और देवी-देवता इसका निषेध करते हैं, पर वह बिना मांस के रह नहीं सकती; झाड़ू-पोछा नहीं करेगी, पूजा समय से नहीं या करेगी ही नहीं, या शुद्धि-शौच (अशौच) का ध्यान नहीं रखेगी; बहुत आधुनिक होने से रजस्वला अवस्था को नहीं मानेगी और उसी अवस्था में पितरों का स्थान, देव प्रतिमाएँ छू लेगी या देव स्थान में चली जाएगी। इससे, वे कहते हैं, पितरों को कष्ट और अशुद्धि होती है और फिर वे परिवार को कष्ट देते हैं — और यह तब भी लागू है जब विवाह आपने स्वयं कराया हो।

05

यात्रा या तीर्थ में अनजाने में लगने वाली पितृ अशुद्धि

चर्म रोग सबसे बड़ा लक्षण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:32–08:32

वक्ता एक और विशेष कारण जोड़ते हैं जो अनजाने में होता है: घर का कोई सदस्य यात्रा में बिना जाने किसी निषिद्ध वस्तु को छू ले, कोई और व्यक्ति (अनजाने में या जानबूझकर) ऐसी चीज़ उसके शरीर से स्पर्श करा दे, या तीर्थ क्षेत्र में लोग जो गलत प्रकार का उतारा छोड़ जाते हैं उसे लाँघ ले — और उसी अवस्था में घर में प्रवेश कर जाए। इससे अनजाने में ही पितृ अशुद्ध हो जाते हैं, और सबसे बड़ा लक्षण, वे कहते हैं, यह है कि शरीर में त्वचा से जुड़े रोग बहुत बढ़ने लगते हैं। उनका नियम: जब भी कोई कहीं से लौटे और घर में किसी को बहुत अधिक चर्म समस्या हो जिसका कोई विशेष कारण न मिले, तो पितृ से जुड़े उपाय करने चाहिए।

06

अनजाने में लगी पितृ अशुद्धि का एक-दिवसीय उपाय: गीता पाठ और तुलसी अभिषेक

ताँबे का लोटा, ग्यारह पाठ, दोपहर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:33–10:46

वक्ता कहते हैं कि दोषों के अनुसार उपाय अलग-अलग हैं, पर एक सामान्य उपाय बताते हैं। घर का लड़का ताँबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें थोड़ा गोमूत्र और गंगाजल डाले, और दोनों हाथों में लोटा लेकर श्रीमद् श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें अध्याय का 11 बार पाठ करे — किसी भी रविवार (कोई भी पक्ष) या अमावस्या को, एक ही दिन में, सुबह 10 से 12:30 के बीच समाप्त करते हुए (पाठ 7–8 बजे से शुरू कर सकते हैं), जल पर फूँके बिना और उसे जूठा किए बिना। फिर यह अभिमंत्रित जल सूर्य के सम्मुख रखे तुलसी के पौधे पर चढ़ाया जाता है, सूर्य नारायण और तुलसी जी से प्रार्थना करते हुए कि पितृ जाने-अनजाने लगी जिस भी अशुद्धि से मुक्त होकर पूर्ण शुद्ध हों, और सभी पितरों से निवेदन कि वे अंश रूप से तुलसी में उपस्थित होकर अपना भाग ग्रहण करें। वे कहते हैं कि तुलसी की जड़, तना और शीर्ष में अलग-अलग प्रकार के पितर — ऊत, पितृ और जुझार — रहते हैं, और सूर्य नारायण, भगवान नारायण और तुलसी की कृपा से पितर पूर्ण शुद्ध हो जाते हैं। यह एक-दिवसीय प्रयोग है; अनजाने में लगे दोष पर काम करता है, जानबूझकर की गई गलती पर उतना प्रभावी नहीं है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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