दत्तात्रेय तर्पण और दुर्गा पाठ से मुसलमानी तंत्र का बंधन कैसे कटा — एक सत्य घटना

सवारी और मुसलमानी तंत्र के बंधन से पीड़ित एक घर की सत्य घटना, और वक्ता द्वारा बताया गया क्रम — संकट नाशन स्तोत्र, पितृ पक्ष में दत्तात्रेय तर्पण, नवरात्र में हवन सहित दुर्गा के 108 नामों का पाठ, और वाराह दंत गोमूत्र प्रयोग — तथा उनके निष्कर्ष।

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01

पीड़ित घर का लक्षण: हर पूजा के अंतिम चरण में सवारी आकर उसे तोड़ देती है

जो अनुष्ठान पूर्ण न हो, उसका फल नहीं मिलता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–01:20

वक्ता अभी बीते शारदीय नवरात्रि की एक सत्य घटना से आरंभ करते हैं: एक साधक जो लंबे समय से साधनाएँ कर रहे थे, जिनके परिवार में वर्षों से उपद्रव मचे थे। जब भी कोई पूजा-पाठ होता, घर में किसी पर — किसी पर भी — सवारी आ जाती और खूब उत्पात मचाती, जिससे उनके जीवन में कोई पूजा कभी पूर्ण नहीं हो पाई थी। नवरात्र में, वे कहते हैं, सप्तमी-अष्टमी तक सब ठीक बीत सकता था, और फिर बिल्कुल अंतिम समय पर सवारी पूजन स्थान पर उत्पात मचा देती, कलश हिला देती, किसी से मारपीट कर किसी को घायल कर देती, या ऐसी कोई घटना घट जाती कि पूजा सही से पूर्ण न हो पाती; और जब पूरी ही न हो तो फल कहाँ से मिले।

02

क्या हिंदू घर में सैयद या पीर को स्थान देकर पूजना चाहिए?

स्थानीय जानकारों का "बीच का रास्ता", और वक्ता का इनकार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:21–03:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि परिवार जहाँ भी दिखाता-सुनाता, दो बातें सामने आतीं: उनके पितृ बंधे हैं, और घर में मुसलमानों की एक चीज है जिसे सैय्यद कहते हैं — बहुत खराब चीज — जो कहा जाता था कि पहले के समय से उनके पुश्तैनी घर में रही है और अब पुरानी हो जाने से अपना स्थान चाहती है; इसी कारण वह पूजा पूरी नहीं होने देती, और मुसलमानी चीज होने से उसे उनकी हिंदू पूजा से परेशानी भी होती है। बीच का रास्ता यह बताया गया कि उसे घर के बाहर अपनी ही जगह में कहीं स्थान दे दें और नित्य मीठे जल और बताशे से उसकी सेवा-पूजा करें। वक्ता का पक्ष है कि सनातनी संस्कृति से जुड़ा हिंदू परिवार ऐसी चीजों को न पूजे; उनके चैनल पर दो-तीन वीडियो स्पष्ट कहते हैं कि साईं, पीर, फकीर को स्थान देकर नहीं पूजना है। बहुत से साधक-भक्त, वे कहते हैं, शक्तियों से शक्तियों को हटाना जल्दी नहीं चाहते — 'कौन इतना करेगा, घर पर पूज लो' — जबकि कट्टर सनातनी जिन्हें भगवती कृपा से यह सद्बुद्धि है कि ऐसी चीजों को नहीं पूजना, हार नहीं मानते। इस परिवार ने इनकार किया, यद्यपि बड़े-बुजुर्ग बच्चों के कष्ट देखकर डगमगाने लगे थे; वे वीडियो सुनकर वे दृढ़ हुए और संपर्क करके पूछा कि क्या किया जाए।

03

मुसलमानी तंत्र से घर कैसे बाँधा जाता है: मंत्र लिखी लोहे की कीलें हर कोने में गाड़ना

बंधन के बाद छह-सात महीने में रोजी-रोटी बंद

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:36–04:19

वक्ता कहते हैं कि परिवार ने घर मुसलमानी मौलवियों को भी दिखाया-सुनाया था, जो कुछ नहीं कर पाए — बहुत होता तो दरगाह पर पूजा करवाते, पैसे लेते, घर में दस तरह की चीजें करते — और उन लोगों ने घर को मुसलमानी विद्या से बाँध भी दिया था। मुसलमानों की तंत्र विद्या में, वे बताते हैं, एक लोहे की कील आती है जिस पर उर्दू में मंत्र लिखे होते हैं; उसे अलग-अलग प्रकार से सिद्ध किया जाता है और फिर घर के हर कोने में गाड़ा जाता है, और इसी प्रकार इस घर का बंधन किया गया (उत्कीलन से गृह बंधन)। उस बंधन के बाद परिवार का अनुभव था कि छह-सात महीने होते-होते रोजी-रोटी के दो-चार पैसे आने का मार्ग भी पूरी तरह बंद हो गया और उत्पात और बढ़ गया; कोई राहत नहीं मिली, और अंत में उन लोगों ने हाथ खड़े कर दिए।

04

संकट नाशन गणेश स्तोत्र अनुष्ठान: 40 दिन तक सुबह-शाम 108 पाठ

पूरी बात बताए जाने से पहले दी गई पहली साधना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:20–05:43

वक्ता साफ कहते हैं कि करने वाली भगवती जगदम्बा हैं — अच्छा और बुरा दोनों वही करती हैं। जब परिवार उनके गृहस्थ तंत्र साधक परिवार से जुड़ा तो उन्होंने अपनी परेशानी बड़े सामान्य ढंग से बताई और सवारी वाली पूरी घटना नहीं बताई, इसलिए पहली साधना उन्होंने यह दी कि गणेश जी के संकट नाशन स्तोत्र का नित्य पाठ करें और दीक्षित हों तो अपने गुरु मंत्र आदि का जाप करें। साधक ने इसका काफी लंबा और तगड़ा अनुष्ठान किया — इसकी फलश्रुति में कहा गया है कि जो चाहते हो वह प्राप्त होगा: सुबह 108 और शाम 108 पाठ, छोटा स्तोत्र होने से आराम से हो जाता है, लगभग सवा महीना यानी 40 दिन। वे जोर देते हैं कि '40 दिन' वे बार-बार इसलिए बोलते हैं क्योंकि यह अनुभव की बात है, ऐसे ही नहीं बोलते।

05

40 दिन के स्तोत्र अनुष्ठान के बाद पितरों और कुलदेवी से स्वप्न में मार्गदर्शन

लाठी लिए एक बुजुर्ग, और श्वेत वस्त्रों में एक देवी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:44–06:49

वक्ता कहते हैं कि 40 दिन के बाद साधक को जीवन में पहली बार ऐसी घटना हुई: शाम को गणपति स्तोत्र का पाठ करते-करते थकान से लगभग निद्रा जैसी अवस्था बन गई, कंठस्थ होने से पाठ नींद में भी चलता रहा, और उन्हें दिखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति लाठी लेकर खड़े हैं और बार-बार कह रहे हैं, 'जिनसे तुम बात कर रहे हो उन्हें सारी बातें बताओ — देखो हम लोगों की अवस्था क्या है; सही तरीके से जानकर करोगे तो हमें यहाँ से मुक्ति मिलेगी और तुम्हारा कार्य भी सिद्ध होगा।' साधक ने इसे टाल दिया, क्योंकि जिस चीज के बारे में बहुत सोचते हैं वही स्वप्न में आती लगती है और वे अर्ध-निद्रा में थे। उसी रात स्वप्न में एक देवी श्वेत वस्त्रों में दिखीं और बोलीं: सबसे पहले अपने कुल की देवी भगवती की सही तरीके से सेवा-पूजा करो, और उसका विधि-विधान जानकर करो। दोनों बातें सुनकर वक्ता ने कहा: जो तुम बता रहे हो, वैसे घर के बड़े-बुजुर्ग पितृ होते हैं, और देवी घर की देवी (कुलदेवी) होंगी जो यह बता रही हैं — तो घर के पितृ क्यों बंधे पड़े हैं?

07

मंदिर में साधना की दो गलतियाँ: दूसरे के आसन पर बैठना और पंडित के हाथ से पुष्प समर्पण

तंत्र की प्रक्रिया में आपके जाप की ऊर्जा की बात आती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:38–08:50

जब पूछा गया कि साधनाएँ कितने दिन की कीं, तो साधक ने कहा कि घर पर कोई साधना पूरी नहीं हो पाती, इसलिए सब मंदिर में कीं। वक्ता कहते हैं कि वहाँ एक गलती सब करते हैं: बड़े मंदिरों में जो आसन दूसरों का पहले से रखा रहता है उसी पर बैठ जाना; बाहर साधना करने वाले को अपना आसन लेकर जाना है। साथ ही किसी भी देवी-देवता को पुष्प का समर्पण आपके हाथ से सीधे देवता के चरणों में जाना चाहिए — दूर से फेंककर करें या पास जाकर, दोनों चलेगा — समर्पण का शुद्ध भाव हो; पंडित जी से करवाएँ तो पुष्प किसी पत्ते पर रखकर दें ताकि उनके हाथ का स्पर्श पुष्प से न हो और वह वहाँ तक चला जाए। इन बातों का ध्यान न रखें तो, वे कहते हैं, कोई विशेष लाभ नहीं होता, क्योंकि तंत्र की इस प्रक्रिया में भाव से थोड़ा अधिक आपके जाप की ऊर्जा की बात आ जाती है; इन गलतियों के कारण भी साधक की चीजें प्रभावी नहीं हो रही थीं।

08

बंधे पितरों तक पहुँचाने के लिए पितृ पक्ष भर चौखट पर दत्तात्रेय माला मंत्र दुग्ध तर्पण

गणपति और दत्तात्रेय: बंधे पितरों तक के दो सबसे सुगम मार्ग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:51–09:52

वक्ता कहते हैं कि इस नवरात्रि में उन्होंने साधक को दो साधनाएँ करने को कहा। पहली, पितृ पक्ष में, दत्तात्रेय माला मंत्र की साधना पूरी तर्पण विधि के साथ, क्योंकि जो पितृ बंधन में हैं उन तक कुछ भी नहीं पहुँचता — आप पितरों के निमित्त जो भी करते हैं वह पहुँच नहीं रहा। उसे पहुँचाने के दो सबसे सुगम साधन हैं भगवान गणेश का तंत्र प्रयोग और भगवान दत्तात्रेय, जो सर्वश्रेष्ठ हैं क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों शक्तियाँ उनमें विराजमान हैं। उन्होंने दत्तात्रेय तंत्रोक्त यंत्र पर दूध से तर्पण की विधि बताई, तर्पण किया दूध पीपल, बरगद और तुलसी तीनों जगह डालने को कहा — और क्योंकि मुसलमानी चीज थी, तर्पण घर की चौखट पर दीप प्रज्वलित करके करवाया; उस विधान को वे कभी और स्पष्ट करेंगे। साधक ने पितृ पक्ष के पूरे सोलह दिन, पूर्णिमा से अमावस्या तक, इसी विधि से दत्त तर्पण किया और बताया कि पहले दिन से ही काफी शांति मिली।

09

नवरात्र में नित्य हवन के साथ दुर्गा 108 नामों की सिद्धि, और बाद में परिणाम की जाँच

धमकी भरे स्वप्न इस बात का संकेत कि सही चीज हो रही है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:53–11:37

अगला विधान नवरात्रि का था। वक्ता कहते हैं कि उन्होंने साधक से दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम — 108 नामों — की सिद्धि चैनल पर दी गई सिद्धि विधि से करने को कहा, पाठ शुरू करके और हवन करके; एक चीज उन्होंने करवाई कि नित्य हवन हो। नौ दिन, नवमी पर्यंत, पूरा पाठ और हवन हुआ, और नवमी को सुबह कन्या पूजन। साधक ने कहा कि जीवन में पहली बार उन्होंने अनुष्ठान पूर्ण होते देखा: पितृ पक्ष से अब तक किसी पर कोई सवारी नहीं आई। केवल बीच-बीच में कोई बहुत तेज बोलने लगता या शरीर में अकड़न शुरू होती, पर पूरी तरह ठीक हो जाता; और बीच में बहुत से खराब स्वप्न आए, जैसे कोई धमकी दे रहा हो कि यह मत करो, जिससे विश्वास और प्रबल हुआ कि सही चीज हो रही है। नवरात्र के बाद वक्ता ने कहा — क्योंकि पहले बहुत से स्थानीय लोगों को दिखाया था — कि फिर किसी स्थानीय को दिखाकर विश्वास में लें कि चीज किस स्तर पर है; उन्होंने बताया कि घर में जो मुसलमानी चीज थी वह फिलहाल कहीं दिख नहीं रही, कहीं न कहीं हट चुकी है। जो भी हुआ, वे कहते हैं, देव योग और भगवती कृपा से हुआ।

10

पहले पितरों को मुक्त करें, फिर मुसलमानी चीज को कमजोर करें: वराह-दंत गौमूत्र प्रयोग

बंधन-मुक्ति की एक विधि हर जगह नहीं चलती; मंत्र गुप्त रखा गया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:38–13:27

वक्ता कहते हैं कि वे यह अनुभव इसलिए रखते हैं कि आप जो भी करते हैं उसका पूरा प्रभाव मिलता है, लेकिन थोड़ा तरीका बदलना पड़ता है। जब स्पष्ट पता चल जाए कि पितृ बंधन में हैं और मुसलमानी चीज है, तो सबसे पहला काम है पितरों को बंधन से मुक्त करना — और बंधन-मुक्ति की एक ही विधि हर जगह लागू नहीं होती: जहाँ मुसलमानी चीज हो वहाँ साथ में कुछ ऐसा भी हो कि उस चीज का प्रभाव कम हो। यहाँ दो-तीन ऐसे विधि-विधान करवाए गए, जिनमें वराह प्रयोग भी था: वराह के दंत को गौ माता के मूत्र में अभिमंत्रित किया गया, उसी दंत में कुश बाँधी गई, और विशेष मंत्र से अभिमंत्रित गोमूत्र घर में छिड़कवाया गया। वह मंत्र वे उजागर नहीं करेंगे — जिसे आवश्यकता हो उसी को दिया जाए तो उत्तम; कुछ चीजें गुप्त रहनी ही चाहिए। इन सबका प्रभाव पड़ा कि वह चीज कमजोर हुई, यद्यपि पुरानी थी; लेकिन निर्णायक बात यह थी कि घर में सभी मानसिक रूप से सबल थे, सबने साथ दिया, सबने पूजन-पाठ-हवन अच्छे से किया। कलह-क्लेश अवश्य मचा और समय शांति से नहीं बीता; वे उन्हें प्रेरित करते रहे: करो, अभी छोड़ना नहीं है। भगवती की कृपा से इस नवरात्र के बाद घर में काफी शांति है, चीजें सौम्य हो चुकी हैं, और विशेष साधनाएँ पुनः आरंभ कर दी गई हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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