मिलन (मुतकरनी): नाम लेकर पुकारने वाला मारण प्रयोग

मिलन नामक क्षेत्रीय मारण विधि पर नोट्स।

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The notes
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01

भगतवाल क्षेत्र का क्षेत्रीय मारण: माध्यम के साथ या बिना माध्यम

सिद्ध देव सीधे कार्य करें, या शरीर से जुड़ी वस्तु चाहिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–01:21

वक्ता कहते हैं कि तंत्र और भगतवाल के क्षेत्र में अनेक क्षेत्रीय षट्कर्म प्रचलित हैं, और जब कोई तंत्र-प्रवृत्ति का व्यक्ति मारण कर्म करता है तो गुरु परंपरा के भेद से प्रक्रिया अलग-अलग होती है। कुछ परंपराओं में किसी वस्तु की आवश्यकता ही नहीं पड़ती: साधक के आराध्य सिद्ध देव इतने प्रबल होते हैं कि वे स्वयं जाकर लक्ष्य पर सीधे कार्य कर देते हैं और मारण पूर्ण हो जाता है। कुछ में माध्यम चाहिए — लक्ष्य के शरीर से जुड़ी कोई वस्तु, उसका वस्त्र, या उसके पैर के नीचे की मिट्टी के कण। उद्देश्य और तरीके भिन्न हो सकते हैं, पर लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार मारण पूरा करते हैं।

02

मिलान, मुठकरणी, मुठ और हांडी: उत्तर प्रदेश-बिहार की एक मारण प्रक्रिया के नाम

चुने हुए स्वरूप में प्रक्षेपित ऊर्जा लक्ष्य को बेधती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:22–02:35

वक्ता कहते हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार के भगतवाल क्षेत्र में एक मारण प्रक्रिया अलग-अलग स्थानीय नामों से चलती है: कहीं इसे मुठकरणी चलाना या मुठ चलाना कहते हैं, कहीं हंडी के द्वारा मारण कर्म। इसी का एक भेद, जो विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में होता है, मिलन भेजकर मारना कहलाता है। वे इसे ऐसी तंत्र-प्रक्रिया बताते हैं जिसमें भगतवाल का तांत्रिक एक शक्ति का संयोजन करके अपने लक्ष्य पर ऊर्जा का संधान और प्रक्षेपण करता है, और वह उस शक्ति को जो स्वरूप देता है, वह शक्ति उसी स्वरूप में जाकर लक्ष्य को बेधती है।

03

मिलान इस तरह रचा जाता है कि मृत्यु का कारण कभी तंत्र न लगे

बलि-भोग और माध्यम वाला तामसिक कर्म, जो एक छलावा है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:36–03:21

मिलान शब्द क्यों रखा गया, इस पर वक्ता कहते हैं कि संकल्प के समय जिस भी स्वरूप की व्याख्या की गई हो — और पूरी प्रक्रिया, वे जोड़ते हैं, तामसिक प्रवृत्ति की ही रहती है — साधक पहले बलि, भोग आदि देता है, और उस ऊर्जा को लक्ष्य पर प्रक्षेपित करने से पहले एक विशेष क्रिया करता है जिसमें किसी चीज को माध्यम बनाया जाता है। कर्म इस तरह किया जाता है कि लक्ष्य की मृत्यु का कारण कभी तंत्र न माना जाए: जब भी बाद में कारण की खोज हो, यह कभी न लगे कि वास्तविक कारण तंत्र की प्रक्रिया थी। एक तरह से, वे कहते हैं, यह एक छलावा है।

04

मिलान का पहला चरण: परिचित आवाज में नाम लेकर पुकारा जाना

नाम औरों को भी सुनाई देता है; बाहर कोई नहीं दिखता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:22–04:39

वक्ता कहते हैं कि हर मिलन में दो बातें बहुत सामान्य होती हैं। पहली: साध्य व्यक्ति को उसके अपने नाम से बुलाया जाता है — जब शक्ति प्रक्षेपित होती है तो वह जाकर उसके नाम से उसका आवाहन करती है। समय कोई भी हो सकता है, सुबह, दोपहर या रात, पर विशेष रूप से रात, और आवाज सदा किसी जान-पहचान वाले की होती है: उसके बच्चे की, किसी मित्र की, पुत्र, भाई या पिता की। केवल साध्य को ही नहीं, प्रायः साथ बैठे सभी को वह नाम सुनाई देता है, पर बुलाया वही एक व्यक्ति जाता है। यदि वह बुलाते ही तुरंत बाहर चला जाए तो उसके साथ घात हो सकता है — और बाहर आने पर उसे कोई दिखाई नहीं देता।

05

मिलान की पुकार पर बाहर जाने के बाद बचना किस पर निर्भर है

रक्षक देव, बंधन, कवच, पुण्य — अन्यथा 80-85 प्रतिशत हानि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:40–05:11

वक्ता कहते हैं कि मिलन की पुकार पर बाहर निकलने वाले के साथ क्या होगा, यह प्रक्रिया से अलग विषय है और उसकी तैयारी पर निर्भर करता है: उसके रक्षक देवी-देवताओं की स्थिति, उसका घर बंधन में है या नहीं, शरीर पर कोई कवच है या नहीं, और वह साधनात्मक व्यक्ति है या साधारण। वे कहते हैं कि वहाँ आपका पुण्य, तपोबल, पूजा-पाठ और घर के देवी-देवता — सब कुछ ताक पर रख दिया जाता है। यदि पुण्य उदय हों और देवता रक्षण में सक्षम हों तो बाहर जाने के बाद भी बच सकते हैं। अन्यथा, यदि कर्म पूरी तरह किया गया हो और आप उनकी हद में बाहर आ गए हों, तो बहुत बार 80 से 85 प्रतिशत यही संभावना है कि बचना मुश्किल हो जाए — कारण चाहे कुछ भी बना दिया जाए।

06

मिलान का दूसरा चरण: संकल्प में तय स्वरूप में घात

वृद्ध संत जिन मांत्रिक सर्पों की बात करते हैं, वही मिलान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:12–05:57

वक्ता कहते हैं कि लक्ष्य को बुला लिए जाने पर मिलन का पहला चरण पूरा हो जाता है; दूसरा चरण घात है, यानी प्रहार। जब वह व्यक्ति बाहर आता है, तो संकल्प लेकर जिस स्वरूप में शक्ति भेजी गई थी, वही स्वरूप उसके सामने आता है। वे बताते हैं कि भारत भूमि के बहुत वयोवृद्ध संत अपने जीवन की घटनाएँ बताते समय बार-बार कहते हैं कि तंत्रोक्त मांत्रिक सर्पों से उन पर अभिचारिक कर्म किए गए — और क्षेत्रीय भाषा में जिन्हें वे मांत्रिक सर्प कहते हैं, उन्हीं को उत्तर प्रदेश-बिहार में मिलान कहा जाता है।

07

सर्प रूप मिलान: सर्पदंश जैसी मृत्यु, पर दंश कहीं नहीं मिलता

सर्प काटे या न काटे, महत्व नहीं रखता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:58–06:50

वक्ता कहते हैं कि यदि मिलन में सर्प की इस प्रकार की ऊर्जा का प्रयोग किया गया है तो सामने सर्प आएगा; वह काटे या न काटे, महत्व नहीं रखता। जिस पर अभिचार किया गया है, उसे मंत्रोक्त विधि से बुला लिया गया और वह घर से, अपनी हद से बाहर आ गया, तो वह ऊर्जा उस पर प्रभाव डालती है, और सर्प के डसे बिना ही उसकी मृत्यु का कारण बिल्कुल ऐसा लगता है जैसे सर्प ने काटा हो — सर्पदंश से शरीर में जो-जो केमिकल परिवर्तन होते हैं, वे सब होंगे। पर शरीर की जाँच में, वे कहते हैं, मेडिकल साइंस धोखा खा जाता है, क्योंकि सर्प ने कहाँ काटा, यह पता ही नहीं चलता। इसे साइकोलॉजिकल फेनोमेनन मानिए या जो भी मानिए, वे जोड़ते हैं; तंत्र की दृष्टि से यह क्रिया इसी प्रकार होती है।

08

मिलान प्रायः कब भेजा जाता है: नवरात्रि, दीपावली, अमावस्या और पूर्णिमा

बड़े-बुजुर्ग और भुक्तभोगी क्या बताते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:51–07:22

वक्ता कहते हैं कि अपने बड़े-बुजुर्गों से या किसी भुक्तभोगी से पूछेंगे तो सुनेंगे कि इस क्षेत्र में जिस घर पर बार-बार मिलन भेजा जाता है, वहाँ यह विशेष रूप से नवरात्रि के समय, दीपावली के आसपास, और अमावस्या-पूर्णिमा के समय होता है: कोई जान-पहचान की आवाज घर के बाहर से किसी सदस्य को उसके नाम से आवाहन देती है — "अरे सुनो" — उसके अपने नाम से पुकारती है। यही, वे कहते हैं, पहला चरण है।

09

मिलान की सिद्धि कैसे होती है: श्मशान की हांडी और चुने नक्षत्र में पका उड़द

शूद्र जाति, विशेषकर तेली, के शव के पीछे उसकी अग्नि-हांडी के लिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:00–09:49

ऐसा वास्तव में होता है या नहीं, इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि हाँ, यह एक प्रक्रिया है जिसमें होता है, और फिर संक्षेप में बताते हैं कि इसे सिद्ध कैसे किया जाता है। मारण के क्रम में श्मशान की वस्तुओं का प्रयोग होता है, और यह प्रयोग लगभग उन्हीं हंडी कर्मों से जुड़ा है जो लोगों ने सुने होंगे ("हांडी उड़ाना", "हांडी चलाना")। पूरी प्रक्रिया बहुत जटिल है और सब बताई नहीं जा सकती, वे कहते हैं; पर एक विशेष नक्षत्र होता है जिसे लोग देखते हैं कि कब है, और उसी नक्षत्र में जब कोई शव श्मशान जा रहा हो तो जाति देखी जाती है — यदि वह शूद्र से संबंधित जाति का हो, विशेष रूप से तेली जाति का, तो सिद्धि चाहने वाला उसके पीछे-पीछे चला जाता है। सनातन धर्म में मृत्यु पर घर से अग्नि एक हांडी में जाती है; साधक वह हांडी कैसे भी प्राप्त करता है और, उसी नक्षत्र के रहते, उसी जलती अग्नि में उड़द पकाता है (कैसे पकाएगा, यह उसका अपना तरीका है) और पका उड़द रख लेता है। यही, वक्ता कहते हैं, पहला चरण है।

10

मिलान एक निश्चित समय तक ही क्यों चलता है, और तीन असफलताओं के बाद का नियम

पका उड़द इसे चलाता है; चौथा प्रयोग किसी और के हाथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:50–10:13

वक्ता कहते हैं कि बाद में मिलन की पूरी प्रक्रिया श्मशान की हंडी में पके उड़द के दानों के प्रभाव से ही चलती है, इसीलिए यह एक निश्चित समय तक ही चलती है। यदि आप पर यह प्रयोग तीन बार कर दिया गया और तीनों बार असफल हो गया, तो चौथा वह व्यक्ति स्वयं नहीं कर सकता: चौथा प्रयोग किसी और से करवाना होगा, या फिर उसे रुकना होगा और दोबारा शुरू से करना होगा। इसमें और बहुत सी चीजें हैं, वे जोड़ते हैं, बिना गिनाए।

11

मिलान से बचाव: रात की पुकार पर बिना "कौन हो?" पूछे कभी न जाएँ

सामान्य व्यक्ति जवाब देता है; अधनींद में निकलना ही खतरा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:14–10:36

वक्ता कहते हैं कि जब भी आपको लगे कि आप पर अभिचारिक प्रयोग हो रहे हैं, तो यह ध्यान रखें: रात के समय कोई भी आपको बुलाए तो एक बार में सीधे नहीं जाना चाहिए। पूछना चाहिए "कौन हो?" — यदि सामान्य व्यक्ति होगा तो उधर से जवाब देगा। रात में या दोपहर में बिना पूछे कभी दरवाजा न खोलें, और आधी नींद में उठकर सीधे बाहर न चले जाएँ।

12

असफल मिलान भी मृत्यु-तुल्य कष्ट दे जाता है

पूजा-पाठ मृत्यु रोक सकता है, बीमारी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:37–10:54

वक्ता कहते हैं कि बहुत बार ऐसा भी होता है कि मिलन का प्रयोग पूरी तरह सफल न हो — क्योंकि आप पूजा-पाठ करते हैं — तो भी वह आपका शरीर खराब कर देगा, तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ जाएगी। कम से कम, वे कहते हैं, मरेंगे नहीं, पर मरण जैसी अवस्था जरूर हो जाएगी; मृत्यु-तुल्य कष्ट अवश्य मिलेगा। इसलिए इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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