घर पर महालक्ष्मी तंत्रोक्त कलश की स्थापना — 16 वस्तुएँ, महालक्ष्मी अष्टक से अभिमंत्रण, और डालने का क्रम

शरद पूर्णिमा, धनतेरस या दीपावली के लिए महालक्ष्मी अष्टक से अभिमंत्रित 16 वस्तुओं वाला तंत्रोक्त महालक्ष्मी कलश बनाने और स्थापित करने का चरण-दर-चरण घरेलू विधान।

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01

तंत्रोक्त महालक्ष्मी कलश: यह क्या है और कब बनाया जाता है

सोलह वस्तुएं क्योंकि सोलह लक्ष्मी को प्रिय है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:03–00:51

वक्ता तंत्रोक्त सामग्री का एक सेट दिखाते हैं जिससे तंत्रोक्त लक्ष्मी कलश बनाया जाता है, जिसे धन-लक्ष्मी या धनदा लक्ष्मी पोटली भी कहते हैं; यह शरद पूर्णिमा, धनतेरस या दीपावली की रात्रि का प्रयोग है। इसे अपने कुल की लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए भी बनाया जा सकता है। इसमें सोलह वस्तुएं जाती हैं क्योंकि सोलह भगवती लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है: षोडशी सोलह हैं, कमला सोलह हैं, और श्री सूक्त में भी सोलह सूक्त हैं।

02

तंत्रोक्त महालक्ष्मी कलश की सोलह वस्तुएं

हर वस्तु आठ, एक दर्पण, एक चंदन की लकड़ी के आठ टुकड़े

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:52–03:35

वक्ता सामग्री गिनाते हैं: छोटा या बड़ा कलश, ढक्कन वाला हो तो उत्तम, और मौली धागा; फिर हर एक आठ की मात्रा में, लक्ष्मी कौड़ी (चित्ती वाली कौड़ी), लघु नारियल, पीला, नारंगी, सफेद और लाल हकीक पत्थर, रक्त गुंजा, सबसे छोटी मोती शंख, तांबे के सिक्के, पीछे चक्र बना हुआ गोमती चक्र, एक सुगंधित चंदन की लकड़ी जिसे काटकर आठ टुकड़े किए जाते हैं, काली हल्दी मिल जाए तो, कमल गट्टा, सूखी पीली हल्दी की गांठ, तांबे की कील, सुपारी (तंत्रोक्त न मिले तो सामान्य), सामान्य कौड़ी, और दो प्रकार का कपूर, सामान्य और शुद्ध प्राकृतिक भीमसेनी कपूर। केवल दर्पण एक है: छोटा सा दर्पण, जिसे वे अत्यंत विशेष कहते हैं। वे कौड़ी जान-पहचान की दुकान से लेने को कहते हैं ताकि असली मिले, और कहते हैं कि ₹50 के अंदर की हेक्सो ब्लेड से चंदन कट जाएगा।

03

महालक्ष्मी कलश की वस्तुओं की तैयारी: सूर्यास्त पर बैठना, गाय के दूध से धोना, धनिया नहीं, कुमकुम तिलक

सब कुछ पूरी तरह सूखा, और अदीक्षित के लिए महालक्ष्म्यै नमः

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:36–04:19

शरद पूर्णिमा में, वक्ता कहते हैं, प्रदोष काल में, सूर्यास्त के समय पूजन में बैठें, धूप-दीप जलाकर और सबसे पहले कलश रखकर। हर वस्तु को गाय के कच्चे दूध से धोकर पोंछकर पूरी तरह सुखा लें, हो सके तो धूप दिखाकर; हल्दी को भिगोकर देर तक न रखें, और कपूर को न धोएं। पहले गोटा धनिया भी डाला जाता था, पर लोग उसे भीगा हुआ ही डाल देते हैं या कलश भीगा रह जाता है और कीड़ा लग जाता है, इसलिए अब धनिया बिल्कुल नहीं डालना है और उसकी जगह कमल गट्टा और बाकी वस्तुएं लेते हैं; सब कुछ सूखा होना चाहिए। फिर हर वस्तु पर महालक्ष्म्यै नमः, या अपना कोई महालक्ष्मी मंत्र, बोलते हुए कुंकुम या रोली का तिलक करें; अदीक्षित महालक्ष्म्यै नमः से करें, तिलक और मंत्र बार-बार, जब तक एक-एक वस्तु अभिमंत्रित न हो जाए।

04

तंत्रोक्त लक्ष्मी कलश का वार्षिक नवीकरण

अगले वर्ष वही तिथि, केवल कपूर नया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:20–04:34

वक्ता कहते हैं कि प्रयोग अगले वर्ष उसी अवसर पर दोहराया जाता है: इस वर्ष शरद पूर्णिमा में किया है तो अगले वर्ष पुनः शरद पूर्णिमा में करें। केवल कपूर उसमें नहीं रहेगा, इसलिए कपूर फिर से डालना है; बाकी सभी सामग्री कलश से निकालकर पुनः अभिमंत्रित करके वापस डाल दी जाती है।

और अगले वर्ष, वक्ता कहते हैं: मान लीजिए इस वर्ष आप शरद पूर्णिमा में यह प्रयोग कर रहे हैं, तो अगले वर्ष पुनः शरद पूर्णिमा में इसी प्रयोग को करेंगे। सिर्फ कपूरकपूर, जिसे पूजन के अंत में जलाया जाता है। उसमें नहीं रहेगा, तो कपूर फिर से डालना है। बाकी सभी सामग्रियों को निकालकर पुनः अभिमंत्रित करके कलश में डाल देंगे।

05

तंत्रोक्त लक्ष्मी कलश स्थापना का संकल्प

हाथ में पुष्प, अक्षत, दक्षिणा, कुश और जल, नाम और गोत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:19–06:13

कुछ भी कलश में डालने से पहले, वक्ता कहते हैं, संकल्प लिया जाता है: हाथ में पुष्प, अक्षत, थोड़ी दक्षिणा और कुश लेकर, हल्का सा जल लेकर, अपना नाम और गोत्र बोलकर, आता हो तो संस्कृत में पूरे विधि-विधान से। भाव यह: मेरे कुल में सदैव के लिए भगवती महालक्ष्मी की स्थापना हो और वे सदैव कुल में निवास करें, इसके लिए आज मैं तंत्रोक्त लक्ष्मी कलश स्थापित करने और उसकी सभी वस्तुओं को अभिमंत्रित करके कलश में आबद्ध करने का संकल्प लेता हूं या लेती हूं। फिर अक्षत और पुष्प कलश के पास छोड़ दिए जाते हैं।

06

लक्ष्मी कलश को श्री सूक्त से नहीं, महालक्ष्मी अष्टक से क्यों अभिमंत्रित किया जाता है

अधिकार, वैदिक स्वर, और दुर्वासा शाप के बाद इंद्र का पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:14–07:06

वक्ता कहते हैं कि महालक्ष्मी अष्टकम् की अनंत महिमा है और यहां वही सर्वश्रेष्ठ है। श्री सूक्तम का पाठ, वे कहते हैं, यज्ञोपवीत धारण करने वाले पुरुष कर सकते हैं; बाकी लोगों को उसे सीखना पड़ता है, क्योंकि वह ऋग्वेद का सूक्त है और स्वर का उच्चारण सही होना चाहिए, इसलिए बहुत लोग नहीं कर पाते, और स्त्रियों को तो करना ही नहीं चाहिए, बहुत जगह मनाही है और विद्वान भी कहते हैं। जब दुर्वासा ऋषि के शाप से तीनों लोक श्री-विहीन हो गए थे, तब इंद्र ने इसी अष्टक का पाठ किया था; महालक्ष्मी प्रसन्न हुईं और आशीर्वाद स्वरूप समुद्र मंथन से चौदह रत्नों में एक रत्न बनकर पुनः प्रकट हुईं, इसीलिए वे क्षीर समुद्र की पुत्री कही जाती हैं। इसलिए सभी को महालक्ष्मी अष्टक से ही अभिमंत्रित करना है, जो "नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते, शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते" से आरंभ होता है; वे कहते हैं कि उसकी पीडीएफ का लिंक डिस्क्रिप्शन में देंगे।

07

सोलह वस्तुओं को महालक्ष्मी अष्टक से अभिमंत्रित करना और कलश भरने का क्रम

हर वस्तु पर एक पूरा अष्टक सर्वश्रेष्ठ; कपूर पहले, सारी औषधि फिर, दर्पण अंत में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:07–11:15

संकल्प के बाद और गुरु-गणेश का स्मरण करके, वक्ता आठ-आठ वस्तुओं को अभिमंत्रित करने के दो तरीके बताते हैं: एक वस्तु मुट्ठी में बंद करके हृदय के पास रखें, एक बार पूरा महालक्ष्मी अष्टकम् पढ़ें, कलश में डाल दें, और आठों के लिए यही दोहराएं; या आठों को एक साथ लेकर एक बार अष्टक पढ़ें। दोनों ठीक हैं, पर एक-एक वस्तु वाली विधि सर्वश्रेष्ठ है, और जिसके कुल को श्री की अत्यंत आवश्यकता हो, जिनकी लक्ष्मी रूठ चुकी हों, जो कर्ज में डूबे हों, वे पूरा समय देकर यही करें। डालने का क्रम: सबसे पहले भीमसेनी कपूर, फिर काली हल्दी, कमल गट्टा और हल्दी की गांठ, हर औषधि सबसे पहले; फिर सुपारी, कौड़ी, तांबे की कील, हकीक, रक्त गुंजा और चंदन; अंत में एक अष्टक के साथ दर्पण, और सबसे ऊपर कपूर। फिर ढक्कन बंद करें या कपड़े से बांधें, माला हो तो रुद्राक्ष माला से आबद्ध करके सजाएं, धूप-दीप-फूल से सजाकर महालक्ष्मी का पाठ-पूजा और हवन करके स्थापना संपन्न करें।

08

महालक्ष्मी कलश स्थापित होने के बाद की दैनिक साधना

रोज आठ या सोलह अष्टक पाठ, एक वर्ष में कृपा, कुछ खराब नहीं होता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:16–11:50

प्रत्येक दिन, वक्ता कहते हैं, स्थापित कलश के सामने बैठकर कम से कम आठ या फिर सोलह बार महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ करें; निश्चित ही एक वर्ष के भीतर महालक्ष्मी कृपा करती हैं। इस कलश में कोई वस्तु खराब नहीं होती: धनिए वाले प्रयोग में धनिया किसी कारण गीला हो जाए तो खराब हो जाता है, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्र में नमी कम-ज्यादा होती है, पर यहां ऐसी ही वस्तुएं ली गई हैं जो खराब नहीं होतीं, साथ ही मंत्र का दिव्यतम प्रयोग। स्वयं घर में कलश स्थापित करके देखें, वे कहते हैं: कुछ खराब नहीं होगा, लंबे समय तक चलेगा, और भगवती महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।

09

लक्ष्मी कलश विधि सीखने के बाद वक्ता के नाम से घी का दीपक, ऋण दोष से बचाव

बताने वाले और सुनने वाले के बीच कोई ऋण न रहे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:11–12:34

ऋण दोष से मुक्ति के लिए वक्ता कहते हैं कि जो यह प्रयोग करे वह यथाशक्ति भगवती महालक्ष्मी के सामने एक या पांच घी के दीपक उनके नाम से अवश्य जलाए, ताकि दोनों के बीच कोई ऋण दोष न रहे और दोनों को उससे मुक्ति मिले।

ऋण दोष से मुक्ति हेतु, वक्ता कहते हैं, यथाशक्ति भगवती महालक्ष्मी के सामने एक या पांच दीपक घी का उनके नाम से अवश्य जलाएं, ताकि हम दोनों के बीच कोई ऋण दोष न रहे और हमें ऋण दोष से मुक्ति मिले।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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