महाभैरव मारण समकक्ष प्रयोग — शत्रु के विरुद्ध अंतिम विकल्प का विधान, तैयारी, नियम और प्रायश्चित

जिन शत्रुओं ने परिवार के लिए कोई मार्ग न छोड़ा हो उनके विरुद्ध अंतिम-विकल्प महाभैरव प्रयोग — उसकी तैयारी, मंदिर की शर्त, दैनिक विधान, नियम-निषेध, बाद की सेवा और प्रायश्चित, जैसा वक्ता ने बताया।

17 notes, in the order they are taught. Jump to any one.

The notes
EN हिंदी
01

शत्रुओं के विरुद्ध उग्र प्रयोग कब उचित है

अंतिम विकल्प, केवल जब आप सत्य पक्ष में हों

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:04–01:38

वक्ता कहते हैं कि जब कोई परिवार बहुत अधिक प्रताड़ित हो, समाज, बंधु-बांधवों या किसी का सहयोग न हो, और बाहुबली उसकी जमीन-धन हड़प रहे हों और बेटी को प्रताड़ित कर रहे हों, तब उसके पास एक ही मार्ग बचता है कि किसी उग्रतम स्वरूप का सहयोग ले ताकि शत्रु को उचित दंड मिले। वे चेतावनी देते हैं कि यह स्वयं के लिए भी घातक हो सकता है, काउंटर बैक आ सकता है, इसलिए यह अंतिम विकल्प ही रहे: जब कोई सहयोग न कर पा रहा हो, मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट निकट हो, और आप सत्य हों, गलत न हों। यदि आप गलत हैं और आपके साथ गलत हो रहा है, वे कहते हैं, तो आप अपने कर्म का दंड भुगत रहे हैं।

02

पूर्व कर्म कायरता का बहाना नहीं; मंत्र जाप में बैठने की मानसिक क्षमता

जिम का बल जाप का बल नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:39–02:24

वक्ता कहते हैं कि यद्यपि हमारे साथ जो कुछ होता है वह हमारे पूर्व कर्म ही हैं, फिर भी वर्तमान स्थिति में नपुंसक बनकर बँधे नहीं बैठना चाहिए; नपुंसकता के साथ या कायर बनकर जीवन नहीं जिया जा सकता। जब सामर्थ्य हो, शरीर में बल हो कि पाँच-दस घंटे, या दो-चार घंटे भी बैठकर मंत्र जप कर सकें, तो उसका उपयोग करना चाहिए। पर शरीर का बल पर्याप्त नहीं: कोई चार घंटे जिम में पसीना बहा ले या दस-बीस किलोमीटर दौड़ ले, पर एक घंटा, आधा घंटा या पंद्रह मिनट भी बैठकर जाप करने की मानसिक क्षमता भी भीतर होनी चाहिए। वह, वे कहते हैं, भगवती की कृपा से होती है और तभी जब मन को एकाग्र कर पाएँ।

03

कोई मार्ग न बचे तब सबसे तीव्र आघात करने वाली शक्ति महाभैरव

परिवार समाप्त होता लगे तब शरणागति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:25–02:52

वक्ता कहते हैं कि इस क्षमता की आवश्यकता तब पड़ती है जब कोई मार्ग न हो और लगे कि परिवार समाप्त हो जाएगा, हम नहीं बचेंगे; तब शरणागति लेनी चाहिए। इनमें सबसे तीव्रतम आघात करने वाली शक्ति, वे कहते हैं, महाभैरव हैं। महाभैरव का प्रयोग चैनल पर पहले से है, पर उनका कोई मरण प्रयोग या दुष्ट को दंड देने का प्रयोग अब तक नहीं बताया गया।

04

द्वेष में या सत्य जाने बिना महाभैरव प्रयोग करने का उल्टा फल

केवल धर्मयुक्त; अन्यथा सौ गुना प्रताड़ना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:53–03:34

वक्ता कहते हैं कि यह प्रयोग तभी करना है जब कोई मार्ग न हो और धर्मयुक्त रहकर ही। यदि आप जानबूझकर किसी को हानि पहुँचाने के लिए, या यह सत्य जाने बिना कि सामने वाला गलत है या सही, अंधकार में यह प्रयोग कर देते हैं, तो इसका सौ प्रतिशत विपरीत परिणाम आपको और आपके परिवार को भुगतना पड़ेगा। यदि द्वेष में आकर किया, कि इसके पास बड़ा पैसा है, बहुत दिखा रहा है, तो जो प्रताड़ना अभी झेल रहे हैं उससे सौ गुना अधिक प्रताड़ित होंगे, मर भी नहीं पाएँगे, और मानसिक विक्षिप्तता की अवस्था हो जाएगी। वे कहते हैं कि यह डराने की बात नहीं, यथार्थ है, ताकि लोगों का कल्याण हो।

05

महाभैरव प्रयोग की अवधि: 90 दिन का संकल्प, 41 दिन, फिर लगातार 90 तक

41 दिन में 90 प्रतिशत मामले सुलझ जाते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:35–03:46

वक्ता कहते हैं कि इसमें करना मात्र इतना है कि 90 दिन की पूरी संख्या बना लेनी है: यह भी नहीं पता कि कल जीवित बचेंगे या नहीं, फिर भी मन में 90 दिन का दृढ़ संकल्प होना चाहिए। प्रयोग पहले 41 दिन किया जाता है, जिसमें, वे कहते हैं, 90 प्रतिशत मामला सलट जाता है, बशर्ते आप सही हों। यदि 41 दिन में काम न हो तो लगातार 90 दिन तक करते जाना है; 41 के बाद दोबारा 41 नहीं होगा, पूरा 90 दिन तक कंटिन्यू।

06

महाभैरव प्रयोग का स्थान: ऐसा उग्र भैरव मंदिर जहाँ मदिरा चढ़ती हो

न शिव मंदिर, न सात्विक भैरव मंदिर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:47–04:26

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले भैरव जी का मंदिर खोजना पड़ेगा; इसका कोई विकल्प नहीं। क्या शिव जी के मंदिर में चलेगा, इस पर वे कहते हैं नहीं। क्या बटुक भैरव का मंदिर या ऐसा मंदिर जहाँ केवल सात्विक विधि से पूजन होता हो, चलेगा, इस पर भी वे कहते हैं नहीं: यह प्रयोग जैसा है उसमें उग्र देवता ही चाहिए, कोई विकल्प नहीं। चाहिए आसपास का ऐसा भैरव क्षेत्र जहाँ उग्रात्मक, वामाचार विधि से पूजन हो और जहाँ भगवान भैरव को कारण आदि पात्र, यानी मदिरा, जरूर चढ़ता हो। वहीं यह प्रयोग होगा।

07

महाभैरव प्रयोग से पहले पंद्रह दिन का पंचाक्षरी जाप और हवन

प्रतिदिन 100 माला, 10 माला हवन, कोई भी पक्ष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:27–06:11

वक्ता कहते हैं कि प्रयोग का आप पर विपरीत प्रभाव न पड़े, इसके लिए सबसे पहले प्रयोग शुरू करने से कम से कम 15 दिन पहले महादेव के पंचाक्षरी मंत्र का जप करें, प्रतिदिन 100 माला, और शिव के समक्ष यह विषय रखें कि हम महाभैरव का प्रयोग करने वाले हैं, इसलिए कोई विपरीत प्रभाव न मिले, हमारी और हमारे घर की रक्षा हो, और शत्रु को उचित दंड मिले। 14 दिन 100-100 माला के बाद 15वें दिन कम से कम 10 माला की आहुति पौष्टिक सामग्री से हवन में दें (सामग्री चैनल के वीडियो में दिखाई गई है; बाजार से खरीदनी है)। ये 15 दिन कभी भी कर सकते हैं, कृष्ण-शुक्ल पक्ष न देखें; इमरजेंसी हो तो किसी भी दिन से शुरू कर दें। दिन देखने हों तो प्रतिपदा या पंचमी से शुरू करें; सबसे अच्छा है प्रतिपदा से चतुर्दशी तक जप और अमावस्या या पूर्णिमा को हवन, किसी भी पक्ष में।

08

मंदिर में महाभैरव प्रयोग की दैनिक सामग्री

दो चार-मुख दीपक, आठ-आठ बाती; वस्त्र-दिशा-आसन का बंधन नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:12–06:56

वक्ता बताते हैं कि मंदिर में प्रतिदिन क्या ले जाना है: सरसों तेल में मीडियम साइज के चार मुख वाले दो दीपक, हर मुख में डबल बाती (दो-दो बाती आपस में मिलाकर, यानी एक दीये में आठ बाती); थोड़ा सा चमेली का तेल; बूंदी के कम से कम दो लड्डू; दो लौंग और एक इलायची; और लौंग-कपूर अलग से। जप के लिए रुद्राक्ष की माला या काले हकीक की प्राण-प्रतिष्ठित माला हो; माला कहीं से भी लें, बस ओरिजिनल हो, और प्राण प्रतिष्ठा का विधान चैनल पर लाइव दिखाया गया है। इस प्रयोग में, वे कहते हैं, वस्त्र का, दिशा का, आसन का कोई बंधन नहीं है।

09

मंदिर में महाभैरव प्रयोग का दैनिक क्रम

मिट्टी के खप्पर में मदिरा, फिर जाप और स्तोत्र की गिनती

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:57–07:57

वक्ता कहते हैं कि प्रतिदिन कारण पात्र आपके पास होना चाहिए: मदिरा की बोतल और साथ में छोटा, मीडियम साइज का मिट्टी का खप्पर ले जाना है; उसमें पूरा मदिरा भरकर, दो लौंग और एक इलायची डालकर, भैरव जी को नैवेद्य में लगाना है। क्रम है: सबसे पहले चार मुख वाला दीपक प्रज्वलित करें और कारण पात्र अर्पण करें; फिर आसन पर बैठकर गुरु-गणेश स्मरण करके पंचाक्षरी मंत्र की एक माला, फिर महाभैरव मंत्र की कम से कम पाँच माला, पाँच बार महाभैरव स्तोत्र का पाठ, और पुनः पाँच माला मंत्र, सब भैरव जी की ओर देखते हुए। फिर लौंग-कपूर जलाकर किसी पात्र में अर्पित करें। लड्डू आदि नैवेद्य पहले ही भोग लगा लें, और जो प्रसाद मिले वह पूजन समर्पण करके उठने पर उसी स्थान पर ग्रहण करें; घर नहीं लाना है। घर आकर स्नान करके पुनः घर में पूजन करें।

10

महाभैरव प्रयोग के निषेध: मदिरा सेवन नहीं, जीव बलि नहीं, घर में नहीं, पूर्णतः दक्षिणाचारी

केवल नैवेद्य और जाप, कुछ भी तामसिक नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:58–08:09

वक्ता कहते हैं कि इस प्रयोग में किसी भी प्रकार का मदिरा सेवन आपको नहीं करना है, और किसी प्रकार की जीव बलि नहीं देनी है; केवल मदिरा का भोग लगाकर वहाँ जप आदि करना है। यह प्रयोग घर में नहीं करना है, और इसमें किसी वामाचार विधि में संलिप्त नहीं होना है: केवल उन्हें नैवेद्य लगेगा। यह पूर्ण रूप से दक्षिणाचार प्रयोग है, वे कहते हैं; केवल नैवेद्य लग रहा है, जाप हो रहा है, कोई निकृष्ट या तामसिक प्रयोग नहीं हो रहा।

11

महाभैरव प्रयोग के दौरान अनुभव और उन पर क्या करें

उग्र शक्तियाँ प्रचंडता से आती हैं; जाप और प्रार्थना से उत्तर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:10–08:53

वक्ता कहते हैं कि आपको तीक्ष्ण अनुभव हो सकते हैं और थोड़ा मानसिक रूप से डिस्टर्ब हो सकते हैं, क्योंकि इस प्रकार की उग्र शक्तियाँ तुरंत आवागमन शुरू कर देती हैं; यदि आपका आभामंडल पहले से तैयार न हो तो थोड़ा डिस्टरबेंस हो सकता है, इसीलिए उन्होंने पहले पंचाक्षरी जप करने को कहा। जब ये शक्तियाँ आती हैं तो एकदम साएँ-फाएँ, पूरी प्रचंडता के साथ आती हैं, इसलिए घबराना नहीं है। जब ऐसा आभास होने लगे कि कोई है, कोई आ रहा है, रात्रि में कुछ हो रहा है, तो तुरंत महाभैरव मंत्र का जाप करके प्रार्थना करें कि प्रभु हमारे शत्रु का भक्षण करें, उसे उचित दंड दें, और पूरा विषय बोलें कि वह कैसे प्रताड़ित कर रहा है: बहन को, माँ को, बेटी को, जगह-जमीन को।

12

महाभैरव प्रयोग सिद्ध होने पर भैरव की आजीवन सेवा का वचन

हर महीने अष्टमी को नैवेद्य सहित दर्शन, कोई बंधन नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:15–09:39

वक्ता कहते हैं कि यदि 41 दिन में आपका कार्य सिद्ध हो जाए तो भैरव जी से यह विषय बोल देना है: "प्रभु, हम प्रत्येक महीने की अष्टमी तिथि को, या जब हमें सुलभ हो सकेगा, एक बार आकर आपकी सेवा-पूजा करके जाएँगे।" और आपको जीवन पर्यंत उनकी सेवा करनी है ताकि उनकी कृपा बनी रहे। वे कहते हैं कि आप किसी बंधन में नहीं बँध रहे; एक दिव्य शक्ति की कृपा आपके साथ हो जाएगी, और जब भी कष्ट में पड़ेंगे यह शक्ति साथ देगी। जब भी जाएँ, उन्हें नैवेद्य चढ़ाएँ।

13

महाभैरव प्रयोग में भोजन और ब्रह्मचर्य

भोजन का नियम नहीं; ब्रह्मचर्य न हो तो कष्ट असली नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:49–10:37

वक्ता कहते हैं कि इस प्रयोग में खाने-पीने का कोई नियम-निषेध नहीं है। ब्रह्मचर्य पालन हो सके तो अति उत्तम है; बिना उसके सफलता की संभावना कम हो जाएगी। वे तर्क देते हैं कि जो सचमुच विपत्ति में है उसका ब्रह्मचर्य अपने आप पलता है, क्योंकि डिस्टर्ब मन अपनी स्त्री का स्पर्श भी नहीं कर पाएगा; तो यदि आप पालन नहीं कर रहे तो आपके पास कोई ओरिजिनल कष्ट नहीं है और आप भगवान को, स्वयं को और सबको ठग रहे हैं। बिना इसके, वे कहते हैं, संदेह बढ़ता जाएगा और पाँच-पाँच माला जप करने का बल भी नहीं रहेगा; हालत खराब हो जाएगी।

14

महाभैरव प्रयोग सिद्ध होने पर भैरव का श्रृंगार पूजन और नींबू बलि

चार भैरवों का अग्नि-तत्व मंत्र; 18 नींबू या 108 नींबू की माला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:38–11:03

वक्ता कहते हैं कि यह मंत्र बहुत अग्नि तत्व से संपन्न है, उग्र मंत्र है जिसमें चार-चार भैरव चलते हैं, इसलिए भैरव जी की कृपा से कार्य पूर्ण रूप से अवश्य सिद्ध होता है। जब कार्य सिद्ध हो जाए तब उनका श्रृंगार पूजन और बलि दें: बलि में नारियल बलि ही, निंबू बलि ही, कम से कम 18 नींबू या 108 नींबू की माला, उनकी पूरी सेवा-पूजा दें और उन्हें प्रसन्न रखें। भैरव जी की कृपा से, वे कहते हैं, अनेक कार्य सिद्ध होते हैं।

15

महाभैरव प्रयोग के बाद घर में पूजन: केवल बटुक भैरव स्वरूप

घर में महाभैरव या कालभैरव की स्थापना कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:04–11:23

वक्ता कहते हैं कि घर में इसका पाठ-पूजा यदि करेंगे तो बाद में, शुरू में नहीं: शुरू में जब तक कारण (मदिरा) चढ़ेगा तब तक मंदिर में ही। घर में करेंगे तब चार मुँह वाला दीया जलाने की अनिवार्यता नहीं रहती; एक मुख वाला दीया भी जला सकते हैं, और बटुक भैरव स्वरूप का पूजन करेंगे। घर में, वे कहते हैं, महाभैरव या काल भैरव के स्वरूप की स्थापना नहीं करेंगे।

16

महाभैरव प्रयोग से शत्रु के प्राण चले जाएँ तो प्रायश्चित

पांडवों का उदाहरण: परिक्रमा, तीर्थ स्नान, दान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:24–12:16

वक्ता कहते हैं कि यदि किसी भी प्रकार प्राणघात हो जाए, उदाहरण के लिए यह प्रयोग करते हुए शत्रु का प्राण ही चला जाए, तो प्रायश्चित्त विधि अवश्य करें, क्योंकि कहीं न कहीं आप उसके प्राण जाने का कारण बने हैं। वे कुरुक्षेत्र का उदाहरण देते हैं: अर्जुन, भीमसेन और पांडवों ने जिन-जिन का वध किया, उसके दोष का प्रायश्चित उन्होंने बाद में किया। इसके लिए किसी तीर्थ क्षेत्र में प्रदक्षिणा करें, जैसे विंध्याचल में त्रिकोण परिक्रमा या गोवर्धन जी की परिक्रमा; तीर्थों में स्नान करें, त्रिवेणी जी में स्नान करें; और यथासामर्थ्य दान करके प्रायश्चित पूर्ण करें। भगवान की सदैव सेवा-पूजा करें और पंचाक्षरी मंत्र का जप बिल्कुल न छोड़ें: उनकी कृपा एक बार हो गई तो जीवन में मुड़कर नहीं देखना पड़ेगा, धन-धान्य से परिपूर्ण होंगे और शत्रु से मुक्त होंगे।

17

महाभैरव प्रयोग दूसरों के लिए कभी नहीं करना है

दूसरों के लिए करने से दुर्गति; केवल आपात स्थिति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:17–12:59

वक्ता चेतावनी देते हैं कि यह प्रयोग एक बार हो गया तो ऐसा नहीं कि अब आप दूसरों के लिए यह प्रयोग करना शुरू कर दें। लोगों का स्वयं का कार्य सिद्ध हो जाता है, फिर वे उसी प्रयोग को दूसरे के लिए करने लगते हैं, और फिर उनकी दुर्गति शुरू हो जाती है; रोते हैं कि पहले कार्य होता था, अब नहीं होता। जब दूसरों के लिए किया जाता है, वे कहते हैं, तो उन सबका विधान अलग होता है। यह केवल इमरजेंसी का प्रयोग है: जब आपकी प्राण हानि होने वाली हो और कानून, प्रशासन, संगठन, समाज कोई सहयोग न कर रहा हो; ऐसी विपरीत परिस्थिति में यह शरणागति लेनी चाहिए और यह प्रयोग करना चाहिए।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic