चौखट पर पंद्रह दिन का हवन — देव श्राप और पितृ श्राप हेतु कुल शक्ति का प्रयोग

कुल शक्ति की कृपा पुनः प्राप्त करने हेतु एक हवन प्रयोग।

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01

कुल की अधिष्ठात्री शक्ति की कृपा हेतु हवन प्रयोग: उद्देश्य और किसे करना चाहिए

देव श्राप या पितृ श्राप से ग्रसित लोगों के लिए अग्नि प्रयोग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:11–00:57

वक्ता एक ऐसा प्रयोग प्रस्तुत करते हैं जो अपने कुल की अधिष्ठात्री शक्ति की कृपा प्राप्ति हेतु है, और कहते हैं कि यह पूर्ण रूप से हवनात्मक प्रयोग है, अग्नि के माध्यम से किया जाने वाला। वे कहते हैं कि इसे हर उस व्यक्ति को करना चाहिए जो कुल शक्ति के श्राप से, पितृ शक्ति के श्राप से ग्रसित है, या जिसे किसी प्रकार का देव दंड मिल रहा है। कारण वे ये गिनाते हैं: पूजा-पाठ में गलती, मंदिर में जाने-अनजाने हुआ अपराध, श्री विग्रह का खंडन, मंदिर की कोई चीज़ टूटना, या भ्रमवश मंदिर में की गई चोरी; ऐसे कृत्यों से, वे कहते हैं, देवताओं का श्राप लगता है और कुल की शक्तियाँ पूरी तरह रुष्ट हो जाती हैं।

02

देव श्राप और पितृ श्राप के लक्षण

साधन तो हैं, पर उन्हें उपयोग करने की क्षमता नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:58–02:14

वक्ता कहते हैं कि देव श्राप या पितृ श्राप में दिमाग इतना चाटित और भ्रमित हो जाता है कि सारे योग्य साधन होते हुए भी व्यक्ति कुछ नहीं कर पाता: करोड़ों की प्रॉपर्टी हो पर बैठकर ठीक से खा भी न पाए, दरवाज़े पर बीस लाख की कार खड़ी हो पर उसमें पेट्रोल डालने की क्षमता भी भीतर न रहे। देव दोष की पहचान वे यह बताते हैं कि व्यक्ति बार-बार दूसरों से पूछता है कि मेरा कष्ट क्या है, उसका मूल कारण क्या है, पर उसे उत्तर मिलता ही नहीं, या मिलता है तो वह स्वीकार नहीं करता। वे जोड़ते हैं कि देवताओं का अपमान करने से भी यही वैचारिक अवस्था बनती है।

03

ज्ञात या अज्ञात कुलदेवी के साथ कुल प्रयोग, और कुलदेवी के साथ सदा रहने वाले कुल भैरव

भैरव एक पद है जो कुल के रक्षक को मिलता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:47–03:38

वक्ता कहते हैं कि व्यक्ति दो में से एक स्थिति में होगा, या तो उसे पता है कि कुलदेवी कौन हैं, या पता ही नहीं कि कुल की शक्ति कौन है, और प्रयोग दोनों ही स्थितियों में करना है। वे कहते हैं कि यह केवल कुलदेवी के लिए नहीं, बल्कि कुल के उन रक्षक देवों के लिए भी है जो भैरव के पद पर हैं। वे कहते हैं कि सौ प्रतिशत निश्चित मानें कि कुलदेवी के साथ कुल भैरव, रक्षण देव, होते हैं, आपकी जानकारी में हों या न हों, चाहे पद कोई भी हो, वीर हों, महावीर हों, हनुमान जी के स्वरूप में हों या भैरव जी के स्वरूप में। भैरव, वे कहते हैं, एक पद है जो रक्षात्मक देव को मिलता है, संभवतः कुल के किसी पहले के सिद्ध व्यक्ति को देवी की कृपा से, और कालांतर में लोग भूल जाते हैं या जानकारी ही नहीं रहती।

04

कुल हवन कब आरंभ करें, किस समय करें, और कितने दिन करें

पूर्णिमा से अमावस्या, या नवरात्रि; सत्ताईस दिन सर्वोत्तम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:39–04:15

वक्ता कहते हैं कि प्रयोग किसी भी पूर्णिमा से आरंभ करके अमावस्या तक, पंद्रह दिन, करना है, या फिर किसी भी नवरात्रि के पहले दिन से दशमी तक। इसे सूर्योदय या सूर्यास्त के समय करना है, पर वे कहते हैं कि सूर्यास्त के समय करें तो उस दिन नमक इत्यादि नहीं खाना है, इसलिए सुबह करना अच्छा है; नवरात्रि उपासना में शाम को भी कर सकते हैं। वे कहते हैं कि हो सके तो कम से कम सत्ताईस दिन करें, जो अत्यंत उत्तम है, नहीं तो पंद्रह दिन या नवरात्रि की अवधि, सुबह के समय।

05

कुल हवन की सामग्री: कुंड, गेहूँ का आटा, गुड़, घी, चौमुख दीपक, तेल और सिंदूर

हर वस्तु पर शुद्धता की शर्त, और क्या वर्जित है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:16–05:17

वक्ता सामग्री गिनाते हैं। मिट्टी का एक बड़ा पात्र जिसमें हवन हो सके, या तांबे का हवन कुंड, एलुमिनियम या लोहे का नहीं, मध्यम आकार का, क्योंकि यहाँ वेदी नहीं बनाई जा सकती। गेहूँ का आटा, या तो स्वयं गेहूँ लाकर धोकर पिसवाया हुआ, या ऐसी जगह से जहाँ पूजा के लिए शुद्ध गेहूँ मिलता हो, ढाई से तीन किलो; अच्छा गुड़ ऐसी पूजा दुकान से जहाँ नमक न मिलता हो ताकि उसमें दोष न हो; और घी। रोज़ दो चौमुख दीपक दीपक, रोज़ नए, यानी पूर्णिमा से अमावस्या के लिए लगभग तीस और नवरात्रि के लिए बीस, सरसों का तेल और तिल का तेल, और कलावा की बाती। और असली नारंगी महाबीरी सिंदूर, जिसे वे कहते हैं कि बखरा सिंदूर भी कहते हैं।

06

घर में कुल हवन कौन कर सकता है

पहली प्राथमिकता बड़े बेटे या घर के मुखिया को

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:18–05:45

वक्ता कहते हैं कि यह प्रयोग घर का बड़ा लड़का या घर का मुखिया कर सकता है। विशेष परिस्थिति में घर की बेटी या बहू भी कर सकती है, पर वे कहते हैं कि प्रयास करें कि बड़ा लड़का या कोई भी पुत्र करे, क्योंकि वह ज़्यादा अच्छा होता है। वे कहते हैं कि इस बात का ध्यान रखें कि किसे प्राथमिकता देनी है।

07

कुल हवन का चौखट विधान: कुश और आम का पत्ता, पाँच टीके और मुख्य द्वार पर दो दीपक

दाहिने सरसों तेल भैरव के लिए, बाएँ तिल तेल कुलदेवी के लिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:46–08:52

वक्ता कहते हैं कि घर एक दिन पहले साफ किया जाए और प्रयोग दृढ़ संकल्प के साथ घर के मुख्य द्वार पर आरंभ हो, किराए के घर में उस द्वार पर जहाँ से अपनी हद शुरू होती है। द्वार को गंगाजल में भीगे कपड़े से पोंछा जाता है। आम के पत्ते का अगला भाग काटकर पीछे कम से कम तीन कुश के साथ बाँधते हैं, गंगाजल में डुबोकर द्वार के ठीक बीचोंबीच लटकाते हैं; उस पर घी मिला महाबीरी सिंदूर का टीका करते हैं, और चौखट पर कुलदेवी के नाम से पाँच जगह टीका करते हैं। घर से बाहर की ओर मुख करके दाहिनी ओर सरसों तेल का चौमुख दीपक दीपक कुल के रक्षक भैरव के नाम से और बाईं ओर तिल तेल का दीपक कुलदेवी के नाम से जलाते हैं, हर दीपक थोड़े अक्षत या फूल पर, कभी खाली ज़मीन पर नहीं।

08

कुल प्रयोग का दैनिक हवन: रोट, तीस आहुतियाँ और उनका क्रम, और राख

नमः अनिवार्य, ओम नहीं; नाम न पता हो तो कुलदिब्बे नमः

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:53–11:37

वक्ता कहते हैं कि मिट्टी के पात्र या कुंड में गाय के गोबर के उपले या आम की लकड़ी से अग्नि प्रज्वलित की जाती है। उससे पहले, नहा-धोकर, गेहूँ के आटे, गुड़ और घी में थोड़ा काला तिल मिलाकर घी में रोट बनाते हैं, फिर उसे तोड़कर चूरा करके तीस टुकड़े बनाते हैं: सत्ताईस कुलदेवी के लिए और तीन अलग। घर से बाहर की ओर मुख करके, फटाफट, मंत्र मन में बोलते हुए, पहली तीन आहुति गणेश, कुल गुरु और हनुमान के नाम से; कुलगुरु पता हों तो वे पहले और गणपति दूसरे, नहीं तो गणपति पहले। बाकी सत्ताईस कुलदेवी के नाम से, नाम के आगे नमः लगाकर, बिना ओम, जैसे दुर्गाय नमः, स्वाहा बोल सकते हैं; नाम न पता हो तो कुलदिब्बे नमः स्वाहा। वे कहते हैं कि यहाँ नमः अनिवार्य है और हवन की सामान्य पद्धति कि स्वाहा हो तो नमः नहीं, यहाँ नहीं चलेगी। बाद में हाथ में पानी लेकर कुंड के चारों ओर तीन बार घुमाकर वहीं डाल देते हैं, अग्नि को जलने देते हैं, और राख हटाकर एक जगह इकट्ठा करते जाते हैं।

09

कुल हवन का समापन: अंतिम अग्नि से जला चांदी का दीपक पूजा स्थान पर

अंतिम अग्नि को कुलदेवी के नाम से घर के भीतर ले जाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:02–12:40

वक्ता कहते हैं कि जब पूरे प्रयोग की अंतिम आहुति दी जाए, तो संभव हो तो एक छोटा सा चांदी का दीपक खरीद लें, उसमें लाल मौली धागे की बाती बनाएँ, घी डालें, अंतिम आहुति के बाद उसी हवन की अग्नि से उसे प्रज्वलित करें, और अपने पूजा स्थान पर ले जाकर कुलदेवी के नाम से रख दें। उस अंतिम दिन तक, वे कहते हैं, बस रोज़ का विधान लगातार करते रहना है।

10

सावधानी: द्वार पर बंधे कुश और आम का पत्ता अंतिम दिन तक नहीं बदलना

इतना कसकर बाँधें कि सूखकर गिरे नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:41–12:55

वक्ता कहते हैं कि पहले दिन द्वार के मध्य में बाँधे गए तीन कुश और आम का पत्ता प्रयोग के अंतिम दिन तक नहीं बदलने हैं। वे कहते हैं कि इसे बहुत कसकर बाँधें ताकि यह सूखकर गिर न जाए।

वक्ता कहते हैं कि शुरू में द्वार के मध्य में जो तीन कुश और आम का पत्ता बाँधे थे, वह अंतिम दिन तक नहीं बदलना है। ध्यान रखें कि वह सूखकर गिरे नहीं, वे कहते हैं; इसके लिए उसे बहुत कसकर बाँधना है।

11

कुल हवन का फल: स्वप्न में कुलदेवी के दर्शन, और कुछ न हो तो प्रयोग दोहराना

पंद्रह दिन रुकें, फिर पूर्णिमा से करें, हार न मानें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:56–13:31

वक्ता कहते हैं कि इतना कर लें तो कुलदेवी सौ प्रतिशत प्रयोग की अवधि में स्वप्न के माध्यम से दर्शन देंगी; इतना मार्गदर्शन अवश्य मिलेगा कि देवी हैं, वे प्रसन्न हैं या नहीं यह भी समझ आएगा, और आगे के लिए मार्गदर्शन भी मिलेगा। एक बार के प्रयोग से कुछ न हो तो वे कहते हैं कि पंद्रह दिन रुककर फिर पूर्णिमा से करें, और एक बार में हार न मानें: प्रारब्ध वैसा होगा, बड़ी गलतियाँ या बड़े अपराध किए होंगे, तो दंड भी वैसा ही मिलेगा, और बहुत से अपराध ऐसे होते हैं जो लोग बताते नहीं। वे कहते हैं कि इसमें न बहुत खर्च है, न बहुत कुछ जाता है, पर मिलता बहुत कुछ है।

12

घर में अभिचारिक प्रयोग चल रहा हो तो क्या चौखट का भोग कोई और शक्ति ले सकती है?

चौखट की पूजा सही शक्ति तक ही जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:32–14:11 · Also a question

इस प्रश्न पर कि घर में अभिचार प्रयोग या तंत्र-मंत्र चल रहा हो तो यह प्रयोग कैसे करें, क्योंकि भोग कोई और शक्ति ले सकती है, वक्ता कहते हैं कि निश्चिंत रहें: चौखट पर की पूजा इतनी आसानी से लेने की किसी की औकात नहीं होती। वहाँ कुलदेवी के नाम से जो दिया जाता है, वे कहते हैं, उसे भगवती पार्वती की ही अंश शक्ति ग्रहण करती हैं। अपने कर्म के कारण फल भले न मिले, पर पूजा वहाँ गलत नहीं हो सकती। चौखट की पूजा, और चौक यानी चौराहे की पूजा, सही चीज़ तक ही जाती है; गलत चीज़ उसे जल्दी नहीं ले पाती। इसलिए वे कहते हैं कि प्रयोग निश्चिंत होकर करें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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