चौखट पर पंद्रह दिन का हवन — देव श्राप और पितृ श्राप हेतु कुल शक्ति का प्रयोग

कुल शक्ति की कृपा पुनः प्राप्त करने हेतु एक हवन प्रयोग।

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01

कुल की अधिष्ठात्री शक्ति की कृपा हेतु हवनात्मक प्रयोग

अपने कुल की अधिष्ठात्री शक्ति की कृपा प्राप्ति हेतु एक हवनात्मक प्रयोग

· Reviewed Sep 2026 · 00:01–00:21

वक्ता कहते हैं कि यह प्रयोग अपने कुल की अधिष्ठात्री शक्ति की कृपा प्राप्ति हेतु है, और यह पूर्ण रूप से हवनात्मक प्रयोग है — अर्थात् पूरा का पूरा अग्नि के माध्यम से किया जाने वाला।

02

कुल शक्ति के श्राप, पितृ श्राप या देव दंड से ग्रसित व्यक्ति

यह प्रयोग उनके लिए है जो कुल शक्ति के श्राप, पितृ श्राप या देव दंड से ग्रसित हैं

· Reviewed Sep 2026 · 00:22–00:54

हर वह व्यक्ति जो कहीं न कहीं कुल शक्ति के श्राप से या पितृ शक्ति के श्राप से ग्रसित है, अथवा जिसे किसी प्रकार का देव दंड प्राप्त हो रहा है। वे कारण गिनाते हैं: पूजा-पाठ में कोई गलती, किसी मंदिर में जाने-अनजाने हुआ अपराध, श्री विग्रह का खंडन, मंदिर की कोई वस्तु टूट जाना, या भ्रमवश मंदिर में की गई किसी प्रकार की चोरी।

03

साधनों का अभाव नहीं, बल्कि उन्हें भोगने की क्षमता का अभाव

देव श्राप व्यक्ति के साथ क्या करता है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:55–01:25 · Also a question

कुल की शक्तियाँ पूरी तरह रुष्ट हो जाती हैं और दिमाग इतना चाटित और भ्रमित हो जाता है कि सारे योग्य साधन होने के बावजूद व्यक्ति कुछ नहीं कर पाता। वे दो उदाहरण देते हैं: करोड़ों की प्रॉपर्टी होने पर भी बैठकर ठीक से खा न पाना; घर के सामने बीस लाख की कार खड़ी होने पर भी उसमें पेट्रोल डालने तक की क्षमता अपने भीतर न रहना।

04

एक जगह अटक जाना, और उत्तर का न मिलना या उससे संतुष्ट न हो पाना

कैसे पहचानें कि जो कष्ट है वह देव दोष है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:26–02:00 · Also a question

वक्ता एक सीधी कसौटी देते हैं। जब आपको लगे कि आप बहुत कुछ करने का प्रयास कर रहे हैं, चाहते भी हैं, पर इतने भ्रमित हो चुके हैं कि समझ ही नहीं आ रहा कि क्या करना है; जब आप बार-बार किसी से पूछते हैं कि मेरा कष्ट क्या है और उसका मूल कारण क्या है; जब आप एक जगह जाकर अटक जाएँ और या तो उत्तर ही न मिले, या किसी एक व्यक्ति के उत्तर से संतुष्ट न हो पाएँ — तब, वे कहते हैं, सौ प्रतिशत मान लीजिए कि यह देव दोष है, आपके ऊपर देवों का कोप है।

05

देवताओं के अपमान से उत्पन्न वैचारिक अवस्था

देवताओं का अपमान भी उसी वैचारिक अवस्था को उत्पन्न कर देता है

· Reviewed Sep 2026 · 02:01–02:46

वक्ता कहते हैं कि चाहे यह अवस्था वैचारिक अवस्था के कारण हो, या आपने देवताओं का किसी प्रकार से अपमान किया हो और उसके कारण यह वैचारिक अवस्था आपके साथ उत्पन्न हो गई हो, घटित हो गई हो — दोनों ही स्थितियों में आप इसी अवस्था को प्राप्त हो जाएँगे। और उसी अवस्था के लिए वे एक बहुत ही सरल विधि प्रस्तुत करते हैं।

06

दोनों ही स्थितियाँ, और भैरव के पद पर स्थित कुल के रक्षक देव

क्या कुलदेवी को जाने बिना भी कुल का प्रयोग किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:47–03:26 · Also a question

हाँ। वक्ता कहते हैं कि दो ही स्थितियाँ होती हैं — या तो आपको जानकारी है कि आपकी कुलदेवी कौन हैं, या आपको पता ही नहीं है कि कुल की शक्ति कौन है — और दोनों ही स्थितियों में यह प्रयोग करना है। यह केवल कुलदेवी के लिए भी नहीं है: यह आपके कुल के उन रक्षक देवों के लिए भी है जो भैरव के पद पर होंगे।

07

रक्षात्मक देव को प्राप्त होने वाले एक पद के रूप में भैरव

भैरव क्या हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 03:27–03:38 · Also a question

वे कहते हैं कि भैरव एक पद है, जो रक्षात्मक देव को प्राप्त होता है। हो सकता है कि आपके ही कुल का कोई पहले का सिद्ध व्यक्ति हो जिसे वह पद देवी की कृपा से प्राप्त हुआ हो; पर वे होते अवश्य हैं। कालांतर में लोग भूल जाते हैं, या जानकारी न होने के कारण पता नहीं रहता।

भैरव, वक्ता कहते हैं, एक पद है जो रक्षात्मक देव को प्राप्त होता है। हो सकता है कि आपके कुल का कोई पहले का सिद्ध व्यक्ति हो जिसे वह पद देवी की कृपा से प्राप्त हुआ हो। लेकिन वे होते हैं। कालांतर में लोग भूल जाते हैं, या जानकारी न होने के कारण उसका पता नहीं रहता।

08

पूर्णिमा से अमावस्या, पंद्रह दिन — या नवरात्रि की प्रतिपदा से दशमी

पूर्णिमा से अमावस्या तक, या नवरात्रि की प्रतिपदा से दशमी तक — प्रयोग कब आरंभ करें

· Reviewed Sep 2026 · 03:39–03:56

वक्ता कहते हैं कि यह प्रयोग किसी भी पूर्णिमा के दिन से आरंभ करके अमावस्या के दिन तक करना है — अर्थात् पंद्रह दिन। या फिर किसी भी नवरात्रि के पहले दिन से लेकर दशमी तिथि तक करना है।

प्रयोग कब से करना है, इस पर वक्ता उत्तर देते हैं कि यह प्रयोग किसी भी पूर्णिमा के दिन से आरंभ करके अमावस्या के दिन तक किया जा सकता है — अर्थात् पंद्रह दिन तक। या फिर इसे नवरात्रि में करना है: किसी भी नवरात्रि के पहले दिन से लेकर दशमी तिथि तक।

09

सूर्योदय या सूर्यास्त, और सूर्यास्त के साथ जुड़ा नमक का निषेध

सूर्योदय या सूर्यास्त — और सूर्यास्त के हवन से जुड़ा नमक का निषेध

· Reviewed Sep 2026 · 03:57–04:15

सुबह सूर्योदय के समय, या शाम को सूर्यास्त के समय। लेकिन यदि आप सूर्यास्त के समय कर रहे हैं, वक्ता कहते हैं, तो निश्चिंत मानकर चलिए कि उस दिन आपको नमक इत्यादि नहीं खाना है। इसीलिए वे कहते हैं कि सुबह करना अच्छा रहेगा — और यदि आप नवरात्रि उपासना करते हैं तो नवरात्रि में शाम को भी कर सकते हैं।

10

मिट्टी का बड़ा पात्र या तांबे का कुंड — एलुमिनियम या लोहे का नहीं

मिट्टी का बड़ा पात्र, या तांबे का कुंड — एलुमिनियम या लोहे का कभी नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 04:16–04:43

सबसे पहले जो चीज़ चाहिए वह है मिट्टी का एक बड़ा पात्र, जिसमें आप हवन कर सकें। यदि आपके पास हवन कुंड है तो वह चलेगा, पर कुंड तांबे का होना चाहिए — एलुमिनियम का या लोहे का नहीं। इस प्रयोग में वेदी बनाई नहीं जा सकती, इसलिए कुंड चाहिए होगा। या तो मिट्टी का कुंड ले आइए या तांबे का, मध्यम आकार का — न बहुत छोटा, न बहुत बड़ा।

11

गेहूँ का आटा, गुड़ और घी — और उन पर लगी शुद्धता की शर्तें

गेहूँ, गुड़ और घी — तीन सामग्री और उनमें से हर एक की शुद्धि की शर्त

· Reviewed Sep 2026 · 04:44–05:17

तीन सामग्री। गेहूँ जिसे आप स्वयं लाकर, धोकर पिसवाएँ, या ऐसी जगह से आटा जहाँ पूजा-पाठ के लिए शुद्ध गेहूँ मिलता हो — कम से कम ढाई से तीन किलो गेहूँ। अच्छा गुड़ ऐसी पूजा दुकान से जहाँ नमक इत्यादि नहीं मिलता हो, ताकि गुड़ में कोई दोष न हो। और घी।

12

घर का बड़ा लड़का या मुखिया, और विशेष परिस्थिति में बेटी तथा बहू

घर में कुल का हवन कौन कर सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 05:18–05:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह प्रयोग घर का बड़ा लड़का कर सकता है, या घर के जो मुखिया हों वे कर सकते हैं। विशेष परिस्थिति में घर की बेटी भी कर सकती है और बहू भी कर सकती है — पर वे कहते हैं कि प्रयास यही करें कि घर का लड़का करे, बड़ा लड़का या कोई भी पुत्र, क्योंकि वह ज्यादा अच्छा होता है। वे श्रोताओं से कहते हैं कि ध्यान रखें कि प्राथमिकता किसे देनी है।

13

एक दिन पहले घर की साफ-सफाई, और दृढ़ संकल्प

पहले दिन से एक दिन पहले घर की सफाई, और मन में दृढ़ संकल्प

· Reviewed Sep 2026 · 05:46–06:18

मान लीजिए आपने पूर्णिमा से — या नवरात्रि की प्रतिपदा से — आरंभ किया है; तो एक दिन पहले घर की अच्छे से साफ-सफाई कर लीजिए, और बिल्कुल शुद्ध मन से मन में दृढ़ संकल्प होना चाहिए। कष्ट कितना भी हो, वक्ता कहते हैं, चाहे आप पर झूठे मुकदमे लगे हों या शरीर में बहुत अधिक कष्ट हो, यह दस-पंद्रह मिनट का प्रयोग है, इससे ज्यादा का नहीं, और इसे करना ही है — दोनों ही स्थितियों में, कुलदेवी पता हो तब भी और न पता हो तब भी।

14

प्रतिदिन दो नए चौमुख दीपक, सरसों और तिल का तेल, कलावे की बाती

रोज़ दो नए चौमुख दीपक, सरसों और तिल का तेल, कलावे की बाती

· Reviewed Sep 2026 · 06:19–06:45

दो दीपक लगेंगे, दोनों चौमुख, और रोज़ नए दीपक। यदि आप पूर्णिमा से अमावस्या तक कर रहे हैं तो तीस दीपक लग जाएँगे; यदि नवरात्रि में दस दिन कर रहे हैं तो लगभग बीस दीपक लगेंगे। सरसों का तेल और तिल का तेल दोनों लाकर रख लीजिए। इनमें बाती कलावे की बनेगी — कलावे की बाती बनाकर चौमुख दीपक के लिए तैयार रख लीजिए।

15

नारंगी महाबीरी सिंदूर, और घर का मुख्य द्वार — किराए का हो या अपना

नारंगी महाबीरी सिंदूर, और घर का मुख्य द्वार — किराए का घर हो तब भी

· Reviewed Sep 2026 · 06:46–07:12

नारंगी रंग का महाबीरी सिंदूर, जिसे बहुत जगहों पर भखरा सिंदूर भी कहते हैं — असली, बढ़िया वाला लाकर रख लीजिए। पहले दिन यह काम अपने घर के मुख्य द्वार पर होता है; और यदि आप किराए के घर में रहते हैं, वह अपना घर न हो, तो जो भी आपका मुख्य द्वार होगा — जहाँ तक का पैसा आप देते हैं, जहाँ से आपकी हद शुरू होती है।

16

गंगाजल से पोंछना, और द्वार के मध्य में लटकाया गया कुश तथा आम का पत्ता

द्वार को गंगाजल से पोंछना, और आम के पत्ते में बँधा कुश द्वार के ठीक बीचोंबीच

· Reviewed Sep 2026 · 07:13–07:51

सबसे पहले कपड़ा भिगोकर पूरे द्वार को गंगाजल से सही से पोंछ लीजिए — पहले से धो-पोंछ लिया हो तब भी पूजा के समय पुनः पोंछना है। फिर कुश लाइए, जो पूजा दुकान पर मिल जाएगा; तीन-चार कुश रहेंगे। आम के पत्ते का आगे का भाग काट लीजिए, पीछे के भाग में कम से कम तीन कुश के साथ उस पत्ते को बाँध दीजिए, उसे गंगाजल में डुबोकर अपने मुख्य द्वार के ठीक बीचोंबीच लटका दीजिए।

17

बँधे पत्ते पर घी मिला सिंदूर, और चौखट पर पाँच टीके

बँधे हुए पत्ते पर घी मिला सिंदूर, और चौखट पर पाँच जगह टीका

· Reviewed Sep 2026 · 07:52–08:11

लटकाने के पश्चात, जो नारंगी महाबीरी सिंदूर आप लाए हैं उसे घी में मिलाकर उस पर टीका कीजिए। उसके बाद मुख्य द्वार की चौखट पर कुलदेवी के नाम से पाँच जगह टीका करना है। वक्ता कहते हैं कि चौखट सबसे महत्वपूर्ण है, और कुलदेवी का वास कहाँ तथा कैसे होता है, यह वे पहले के वीडियो में बता चुके हैं।

18

दाहिने हाथ सरसों का तेल भैरव हेतु, बाएँ हाथ तिल का तेल कुलदेवी हेतु

दाहिनी ओर सरसों के तेल का दीपक भैरव के नाम, बाईं ओर तिल के तेल का कुलदेवी के नाम

· Reviewed Sep 2026 · 08:12–08:52

मुख घर से बाहर की ओर रखते हुए — यानी जैसे आप घर से बाहर निकल रहे हों — आपके दाहिनी ओर वाला चौमुख दीपक सरसों के तेल का जलेगा, और चौखट के बाईं ओर वाला तिल के तेल का; दोनों चौमुख रहेंगे। हर दीपक के नीचे थोड़ा-सा अक्षत या एक फूल अवश्य रखा जाता है, क्योंकि दीपक खाली नहीं रखते, उसे आसन देकर रखा जाता है। दाहिनी ओर सरसों के तेल का दीपक भैरव जी के नाम से जलता है, आपके कुल के रक्षक भैरव के नाम से; और बाईं ओर वाला कुलदेवी के नाम से जलता है।

19

गाय के गोबर के उपले या आम की लकड़ी, और गेहूँ-गुड़-घी-काले तिल का रोट

अग्नि प्रज्वलित करना, और गेहूँ, गुड़, घी तथा काले तिल का रोट

· Reviewed Sep 2026 · 08:53–09:37

इतना करने के पश्चात, मिट्टी के पात्र या हवन कुंड में गाय के गोबर के उपले से या आम की लकड़ी से अग्नि प्रज्वलित कीजिए। इससे पहले, नहा-धोकर, जो गेहूँ का आटा लाए हैं उसे लीजिए, उसमें गुड़ और घी तथा थोड़ा-सा काला तिल मिलाइए, और इतना आटा सानिए कि एक बढ़िया रोट बन जाए। घी लगाकर अच्छा-सा रोट बनाइए, फिर उसे तोड़कर चूरा कर लीजिए, और चूरे से आहुति के लिए छोटे-छोटे गोल लड्डू जैसे टुकड़े बना लीजिए।

20

सत्ताईस आहुतियाँ और तीन अतिरिक्त — कुल तीस टुकड़े

आहुति के सत्ताईस टुकड़े और तीन अतिरिक्त — कुल तीस

· Reviewed Sep 2026 · 09:38–09:55

सत्ताईस आहुतियाँ डालनी हैं, रोट के टुकड़ों से इसी प्रकार बनाकर: सत्ताईस टुकड़े अलग-अलग बनाकर रख लीजिए। इन सत्ताईस के सिवाय तीन टुकड़े और होने चाहिए, अलग से रखे हुए — यानी कुल मिलाकर आपके पास तीस टुकड़े होने चाहिए।

सत्ताईस आहुति डालनी हैं, वक्ता कहते हैं, रोट के टुकड़े से इसी प्रकार बनाकर। सत्ताईस टुकड़े अलग-अलग बनाकर रख लेंगे। इन सत्ताईस टुकड़ों के सिवाय तीन टुकड़े और होने चाहिए। तीन टुकड़े और इसमें अलग से रहेंगे — यानी कुल मिलाकर आपके पास तीस टुकड़े होने चाहिए।

21

गणपति, कुल गुरु और हनुमान — और क्रम का नियम

पहली तीन आहुतियाँ — गणपति, कुल गुरु और हनुमान

· Reviewed Sep 2026 · 09:56–10:40

अग्नि प्रज्वलित कीजिए, मुख घर से बाहर की ओर ही रखिए, और फटाफट कीजिए, ज्यादा देर मत लगाइए। मंत्र मन में बोलने हैं। पहली आहुति गणपति जी के नाम से, दूसरी कुल गुरु के नाम से — कुल के गुरु के नाम से, वे गुरु चाहे जहाँ भी हों, जहाँ भी वंश चल रहा हो। वक्ता एक क्रम का नियम जोड़ते हैं: यदि आपको अपने कुल गुरु पता हैं तो पहली आहुति कुल गुरु के नाम से और दूसरी गणपति जी के नाम से; यदि पता नहीं हैं तो पहली गणपति जी के नाम से और दूसरी कुल गुरु के नाम से। तीसरी आहुति हनुमान जी के नाम से।

22

उनके नाम के आगे नमः, और ओम नहीं

शेष सत्ताईस आहुतियाँ कुलदेवी के अपने नाम से

· Reviewed Sep 2026 · 10:41–10:58

यदि आपको अपनी कुलदेवी का नाम पता है, तो शेष सत्ताईस आहुतियाँ उनके नाम से देते जाइए, उनके नाम के आगे नमः लगाते हुए। वक्ता उदाहरण देते हैं: मान लीजिए कुलदेवी का नाम भवानी है, या कुलदेवी का नाम दुर्गा है — तो ओम लगाने की आवश्यकता नहीं है; "दुर्गाय नमः" बोलकर डालना है। स्वाहा आप बोल सकते हैं, वे जोड़ते हैं, इसमें कोई दिक्कत नहीं है।

23

कुलदिब्बे नमः स्वाहा — और यहाँ नमः क्यों अनिवार्य है

जब कुलदेवी का नाम पता न हो तब क्या बोला जाए

· Reviewed Sep 2026 · 10:59–11:17

यदि आपको उनका नाम पता नहीं है, वक्ता कहते हैं, तो "कुलदिब्बे नमः" बोलकर डालते जाइए — "कुलदिब्बे नमः" बोलकर आहुति देते जाइए, "कुलदिब्बे नमः स्वाहा"। यहाँ नमः लगाना अनिवार्य है। वे कहते हैं कि यहाँ हवन की वह सामान्य पद्धति नहीं चलेगी जिसके अनुसार स्वाहा लगाने पर नमः नहीं लगाते। यहाँ केवल उसी तरीके से कीजिए जैसा वे बता रहे हैं।

24

कुंड के चारों ओर तीन बार जल, और राख का संग्रह

कुंड के चारों ओर तीन बार जल घुमाना, और राख को एक जगह एकत्रित करना

· Reviewed Sep 2026 · 11:18–11:37

यह काम पूरा कर लेने और तीसवीं आहुति डाल देने के बाद, हाथ में पानी लेकर उस कुंड के चारों ओर तीन बार घुमाकर वहाँ पानी डाल दीजिए, और जितनी देर वह जले उतनी देर उसे जलने दीजिए। जल कर जब वह राख हो जाए तो उसे हटा दीजिए — और उसी राख को एक जगह एकत्रित करते जाइए।

यह काम आपने पूरा कर लिया, वक्ता कहते हैं; आपने तीसवीं आहुति डाल दी। आहुतियाँ डालने के बाद, हाथ में पानी लेकर उस कुंड के चारों ओर तीन बार घुमाकर वहाँ पानी डाल देंगे, और जितनी देर तक वह जले उसे जलने देंगे। जल कर जब वह राख हो जाएगा तो उसे हटा देंगे। और उसी राख को एक जगह एकत्रित करते जाइए।

25

सत्ताईस दिन सर्वोत्तम, पंद्रह दिन या नवरात्रि की अवधि न्यूनतम

सत्ताईस दिन सर्वोत्तम, पंद्रह दिन या नवरात्रि न्यूनतम

· Reviewed Sep 2026 · 11:38–12:01

वक्ता कहते हैं कि यह काम कम से कम सत्ताईस दिन तक करना चाहिए; यदि आप सत्ताईस दिन तक करते हैं तो ठीक है। नहीं तो, जैसा बताया गया: कम से कम पूर्णिमा से अमावस्या तक — यानी पंद्रह दिन — या नवरात्रि की प्रतिपदा से दशमी तिथि तक, सुबह के समय में। सत्ताईस दिन कर पाएँ तो अत्यंत ही उत्तम है; नहीं तो जितने दिन उन्होंने बताए हैं उतने ही दिन कीजिए।

26

हवन की अग्नि से जलाया गया छोटा चाँदी का दीपक और पूजन स्थान

अंतिम अग्नि से प्रज्वलित एक छोटा चाँदी का दीपक, पूजन स्थान पर ले जाकर रखा हुआ

· Reviewed Sep 2026 · 12:02–12:35

जब आप अंतिम आहुति दे दें, तो यदि आपके लिए संभव हो, एक छोटा ही सही, चाँदी का दीपक खरीद लीजिए। उसमें लाल मौली धागे से बाती बनाइए, घी डालिए, और अंतिम आहुति के पश्चात उसी अग्नि से उस दीपक को प्रज्वलित करके अपने पूजन स्थान पर ले जाकर कुलदेवी के नाम से रख दीजिए।

27

द्वार का बंधन अंतिम दिन तक अछूता रहता है

द्वार पर बँधा कुश और आम का पत्ता अंतिम दिन तक बदला नहीं जाता

· Reviewed Sep 2026 · 12:36–12:55

वक्ता कहते हैं कि आरंभ में द्वार के मध्य में जो तीन कुश और आम का पत्ता बाँधा था, उसे अंतिम दिन तक बदलना नहीं है। वे कहते हैं कि ध्यान रखें कि वह सूखकर गिर न जाए — इसलिए उसे बहुत टाइट बाँधना है। यह पूरी प्रक्रिया अंतिम दिन तक करनी है; सिर्फ इतना ही निरंतर करते रहना है।

यह पूरी चीज़, वक्ता कहते हैं, आपको अंतिम दिन तक करनी है। सिर्फ इतना ही आपको निरंतर करते रहना है। और जो शुरू में द्वार के मध्य में तीन कुशपवित्र घास, जो आसन, पवित्री और मार्जन में प्रयुक्त होती है; आध्यात्मिक रूप से रोधक मानी जाती है। और आम का पत्ता बाँधा था, उसे अंतिम दिन तक बदलना नहीं है। ध्यान रखें कि वह सूखकर गिरे नहीं, वे कहते हैं: उसे बहुत टाइट बाँधना है।

28

स्वप्न के माध्यम से कुलदेवी का दर्शन, और उससे मिलने वाला मार्गदर्शन

इस बीच कुलदेवी स्वप्न के माध्यम से दर्शन देती हैं

· Reviewed Sep 2026 · 12:56–13:10

वे कहते हैं कि इतना आप कीजिए तो सौ प्रतिशत आपकी कुलदेवी इस बीच स्वप्न के माध्यम से दर्शन देंगी — किसी न किसी माध्यम से, स्वप्न में। इतना मार्गदर्शन आपको अवश्य मिल जाएगा कि हाँ, देवी हैं; और वे प्रसन्न हैं कि नहीं, यह भी आपकी समझ में आएगा, तथा आगे के लिए मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा।

इतना आप कीजिए, वक्ता कहते हैं, और सौ प्रतिशत आपकी कुलदेवी इस बीच स्वप्न के माध्यम से, किसी न किसी माध्यम से, स्वप्न में दर्शन देंगी। इतना मार्गदर्शन आपको अवश्य प्राप्त होगा: कि हाँ, देवी हैं। वे प्रसन्न हैं कि नहीं, यह भी आपकी समझ में आएगा, और आगे के लिए मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा।

29

पंद्रह दिन रुकना और पुनः पूर्णिमा से आरंभ करना

यदि कुछ न हो, तो पंद्रह दिन रुककर पुनः पूर्णिमा से आरंभ करना

· Reviewed Sep 2026 · 13:11–13:31

यदि एक बार के प्रयोग से यह चीज़ नहीं होती, तो पंद्रह दिन रुककर पुनः पूर्णिमा से कीजिए। एक बार में हार नहीं मान लेनी है कि बस हो गया, नहीं हुआ। आपका प्रारब्ध वैसा होगा, वक्ता कहते हैं — बड़ी गलतियाँ की होंगी, बड़ा अपराध किया होगा, तो दंड भी वैसा ही मिलेगा। बहुत सारे अपराध होते हैं जिन्हें लोग बोलते नहीं। तो इसे बार-बार कीजिए। इसमें बहुत अधिक न खर्च आने वाला है, न बहुत कुछ आपका जाने वाला है — लेकिन मिलेगा बहुत कुछ।

30

चौखट पर की गई पूजा को भगवती पार्वती की अंश शक्ति ग्रहण करती हैं

यदि घर में अभिचारिक प्रयोग चल रहा हो, तो क्या चौखट का भोग कोई और ले सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 13:32–14:05 · Also a question

वक्ता स्वयं यह प्रश्न उठाते हैं: यदि घर में अभिचारिक प्रयोग हो, तंत्र-मंत्र का प्रयोग हो, तो क्या दिक्कत नहीं हो जाएगी, शक्तियाँ कोई और नहीं ले लेगा, भोग कोई और नहीं ले लेगा? निश्चिंत रहें, वे उत्तर देते हैं: चौखट पर की गई पूजा को इतनी आसानी से ले लेने की किसी की औकात नहीं होती। जहाँ आप कुलदेवी के नाम से देंगे, वहाँ भगवती पार्वती की ही अंश शक्ति उसे ग्रहण करेंगी। फल भले आपके कर्म के कारण आपको न मिले — वह अलग बात है — पर आपकी पूजा वहाँ गलत नहीं हो सकती। चौखट की पूजा, चौक यानी चौराहे की पूजा की तरह, सही चीज़ को ही जाती है; गलत चीज़ उसे जल्दी नहीं ले पाती।

31

निश्चिंत होकर प्रयोग करना, और आशीर्वाद

यह प्रयोग निश्चिंत होकर करना चाहिए, और इसे करने से अत्यंत ही लाभ प्राप्त होता है

· Reviewed Sep 2026 · 14:06–14:22

वे कहते हैं कि इसीलिए इस प्रयोग को निश्चिंत होकर करना चाहिए, और इसे करने से अत्यंत ही लाभ प्राप्त होगा। अंत में वे आशा करते हैं कि श्रोता को कुलदेवी की कृपा प्राप्त हो और भगवती प्रसन्नतापूर्वक उनके कुल में वास करें — यह जोड़ते हुए कि जब उनके परिवार का कल्याण होगा तो कहीं न कहीं उनका आशीर्वाद उन्हें भी प्राप्त होगा।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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