भगवान श्री कृष्ण के कवच की सिद्धि — जन्माष्टमी का सात दिवसीय अनुष्ठान और कवच का रक्षण

श्री कृष्ण के रक्षक कवच को सिद्ध करने की विधि।

6 notes, in the order they are taught. Jump to any one.

The notes
EN हिंदी
01

कृष्ण भक्त की पहली सिद्धि: भगवान श्री कृष्ण का कवच

जन्माष्टमी पर सिद्ध, स्मरण मात्र से रक्षण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–00:56

वक्ता कहते हैं कि जो लोग भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्ति करते हैं, भगवती राधा और भगवान कृष्ण के माधुर्य स्वरूप और कृपा की प्राप्ति चाहते हैं, या साधना मार्ग और तंत्र मार्ग में कृष्ण से संबंधित मंत्रों की साधना करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण के कवच की सिद्धि करनी चाहिए। वे कहते हैं कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी के समय यह कवच सिद्ध कर लिया जाए तो बाद में जब भी इसका प्रयोग किया जाए — स्मरण मात्र भी कर लिया जाए — तो भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अवश्य रक्षण प्राप्त होता है। जो कृष्ण और राधा की सेवा-पूजा करते हैं, उन्हें यह कवच अवश्य सिद्ध करना चाहिए।

02

कृष्ण कवच की सिद्धि का सात दिवसीय जन्माष्टमी अनुष्ठान

भोजपत्र, 1100 पाठ, चांदी का खोल, हवन, बच्चे के हाथ से धारण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:57–03:44

वक्ता लगभग सात दिन का अनुष्ठान बताते हैं जो भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की द्वितीया से आरंभ होकर जन्माष्टमी के अगले दिन नवमी तक चलता है। केवल कवच मूल — पहले से आठवें श्लोक तक, पूर्व पीठिका और फलश्रुति छोड़कर — सफेद भोजपत्र पर गोपी चंदन से, या केसर और गोरोचन मिली अष्टगंध की स्याही से चांदी, सफेद चंदन या लाल चंदन की लेखनी से, या कम से कम तुलसी की कलम से छोटे-छोटे अक्षरों में लिखा जाता है। इसे कृष्ण के चरणों में रखकर सात दिन प्रतिदिन 108 पाठ किए जाते हैं और जन्माष्टमी की रात अधिकाधिक पाठ करके 1100 पाठ पूरे किए जाते हैं। फिर भोजपत्र को कृष्ण के स्वरूप, उनके नाम या राधा के नाम वाले चांदी के खोल में डालते हैं; जन्माष्टमी के अगले दिन कृष्ण के 108 नामों या सहस्रनाम से हवन होता है (पुरुष सामान्य घी से, स्त्रियां मिक्स पौष्टिक हवन सामग्री से), कम से कम पांच छोटे बच्चों और छोटी बच्चियों को माखन मिश्री आदि खिलाया जाता है, और कवच गले में धारण किया जाता है — उत्तम यह है कि पांच-सात वर्ष तक का अबोध बालक अपने हाथ से गले या बांह पर पहनाए। वे कहते हैं कि ऐसे धारण करने पर कहा जाता है कि सुदर्शन चक्र और गोपियां सर्वत्र रक्षा करती हैं।

03

संतान प्राप्ति के लिए कृष्ण कवच

कवच का सबसे विशिष्ट फल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:45–04:12

वक्ता कहते हैं कि इस कृष्ण कवच का सबसे विशिष्ट महत्व संतान प्राप्ति में है। यदि किसी व्यक्ति को, किसी स्त्री या पुरुष को, संतान प्राप्ति में बाधा हो रही हो तो इस कवच को धारण करने से उसके जीवन में यह संभावना बढ़ जाती है कि शीघ्र ही उसे शिशु की — पुत्र रत्न या पुत्री रत्न की — प्राप्ति हो।

04

अभिचार, ग्रह और प्रेत-पिशाच बाधा के विरुद्ध कृष्ण कवच

कृष्ण की विशिष्ट सेवा के साथ; कार्यस्थल पर रक्षा और पदोन्नति भी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:13–04:36

वक्ता कहते हैं कि कवच धारण के साथ-साथ यदि भगवान श्री कृष्ण की विशिष्ट सेवा की जाए तो इस कवच के माध्यम से जीवन में उपस्थित होने वाली किसी भी प्रकार की अभिचारिक बाधा, ग्रह कृत बाधा और प्रेत-पिशाच कृत बाधा से सर्वत्र रक्षा होती है। कार्यस्थल पर रक्षा होती है और पदोन्नति होती है। वे कहते हैं कि इस कवच के माध्यम से जीवन में होने चाहिए ऐसे हर प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।

05

जन्म कुंडली में दुर्बल भाग्य के लिए कृष्ण कवच

पीड़ित भाग्य ग्रह, नीच राशि, गलत भाव, राहु-केतु

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:37–05:14

वक्ता कहते हैं कि बहुत बार भाग्य दुर्बल होता है — सभी कार्य कर रहे हैं लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा। जन्म कुंडली का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि भाग्य के ग्रह पीड़ित हैं, नीच राशि में या गलत भाव में हैं, जिससे उनका प्रभाव सही प्रकार से नहीं मिल रहा, या वे राहु-केतु से ग्रसित हैं — इसे वे दुर्भाग्य कहते हैं। वे कहते हैं कि इस कवच को धारण करने से ऐसी ग्रह जनित बाधाएं और कुंडली का जो प्रभाव नहीं मिल रहा था, वह शुभ प्रभाव मिलने लगता है।

06

तीर्थ यात्रा में कृष्ण कवच का जाप

वृंदावन, गया, सप्तपुरी और नदी तीर्थ; आजीवन आश्रय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:15–05:49

वक्ता कहते हैं कि जब कभी श्रीमद् धाम वृंदावन, गोलोक, मथुरा इत्यादि की यात्रा पर निकलें, भगवान नारायण के किसी स्वरूप जैसे गया जी में, किसी भी पुरी — सप्तपुरी — में, या गंगा जी, यमुना जी, त्रिवेणी संगम इत्यादि पर जाएं, तो इस कवच को धारण किए हुए वहां अवश्य ही इसका अधिकाधिक जाप करें, चलते-फिरते भी। वे कहते हैं कि कवच का प्रभाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। आजीवन इसके आश्रय में रहकर भगवान कृष्ण और भगवती राधा की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic