भगवान श्री कृष्ण के कवच की सिद्धि — जन्माष्टमी का सात दिवसीय अनुष्ठान और कवच का रक्षण

श्री कृष्ण के रक्षक कवच को सिद्ध करने की विधि।

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01

सर्वप्रथम सिद्धि के रूप में भगवान श्री कृष्ण का कवच

कृष्ण भक्त को साधना मार्ग पर सर्वप्रथम किसकी सिद्धि करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो लोग भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्ति करते हैं, भगवती राधा और भगवान कृष्ण के माधुर्य स्वरूप तथा उनकी कृपा की प्राप्ति करना चाहते हैं, और जो साधना मार्ग में तथा तंत्र मार्ग में भगवान श्री कृष्ण से संबंधित विषयों एवं मंत्रों की साधना करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण के कवच की सिद्धि करनी चाहिए।

02

कवच सिद्ध हो जाने पर स्मरण मात्र से रक्षण

जन्माष्टमी पर कृष्ण कवच सिद्ध कर लेने से क्या प्राप्त होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:29–00:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि श्री कृष्ण जन्माष्टमी के समय में इस कवच को सिद्ध कर लिया जाए, तो इसका प्रयोग जब कभी भी बाद में किया जाए — स्मरण मात्र भी कर लिया जाए — तो भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अवश्य ही रक्षण प्राप्त होता है। जो लोग भगवान श्री कृष्ण और भगवती राधा की सेवा पूजा करते हैं, उन्हें इस कवच को अवश्य ही सिद्ध करना चाहिए।

03

भाद्रपद कृष्ण पक्ष द्वितीया से नवमी तक — लगभग सात दिन

कृष्ण कवच का अनुष्ठान किन तिथियों में चलता है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:57–01:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी के समय में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि से आरंभ करके इस कवच का पाठ करना चाहिए, और श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन तक, यानी नवमी तिथि पर्यंत करना चाहिए। यह लगभग सात दिन का अनुष्ठान है।

वक्ता कहते हैं कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी के समय में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि से आरंभ करके इस कवच का पाठ करना चाहिए। यह श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन तक, यानी नवमी तिथि पर्यंत करना चाहिए। यह लगभग सात दिन का अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। है।

04

केवल कवच मूल — पहले श्लोक से आठवें तक, पूर्व पीठिका और फलश्रुति छोड़कर

भोजपत्र पर कृष्ण कवच का कौन सा भाग लिखा जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:08–01:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक सफेद भोजपत्र पर, या जो भोजपत्र प्राप्त हो जाए उस पर, कवच मूल लिख लेना चाहिए — यानी केवल वह भाग जिसमें रक्षण के लिए भगवान कृष्ण के प्रत्येक अलग-अलग स्वरूप के लिए कहा गया है, पूर्व पीठिका और फलश्रुति को छोड़कर। पहले श्लोक से लेकर आठवें श्लोक तक; अंत के श्लोक छोड़ दिए जाते हैं।

05

गोपी चंदन, या केसर-गोरोचन मिली अष्टगंध की स्याही, और चांदी, चंदन या तुलसी की लेखनी

कृष्ण कवच लिखने के लिए कौन सी स्याही और कौन सी लेखनी प्रयोग होती है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:39–02:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि गोपी चंदन मिल जाए तो उससे लिख लेना चाहिए। अथवा अष्टगंध की स्याही, जिसमें केसर और गोरोचन मिला लें, और यदि चांदी की लेखनी हो तो उससे लिखें; या चाहें तो चंदन की लेखनी से — सफेद चंदन या लाल चंदन की लेखनी से — लिख सकते हैं। यदि और कुछ न मिल रहा हो तो तुलसी के कलम से इन मंत्रों को, इस कवच को भोजपत्र पर छोटा-छोटा लिख लें।

06

सात दिन तक प्रतिदिन 108 पाठ, और जन्माष्टमी की रात्रि में 1100 पाठ पूर्ण

कृष्ण कवच के कितने पाठ, और कितने दिनों में किए जाते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 02:09–02:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि लिखने के पश्चात कवच को भगवान श्री कृष्ण के चरणों में रख कर, और चूँकि कवच बहुत छोटा सा है, प्रतिदिन 108 पाठ करें — यह सात दिन पर्यंत। यदि संभव हो तो कृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि में इसका अधिकाधिक पाठ कर लें, ताकि 1100 पाठ पूर्ण हो जाएँ।

वक्ता कहते हैं कि लिखने के पश्चात इसे भगवान श्री कृष्ण के चरणों में रख दें। चूँकि कवच बहुत छोटा सा है, इसलिए प्रतिदिन 108 पाठ करें। यह सात दिन पर्यंत। यदि संभव हो तो कृष्ण जन्माष्टमी की जो रात्रि है, उसमें इसका अधिकाधिक पाठ कर लें, ताकि आपका 1100 पाठ पूर्ण हो जाए।

07

कृष्ण का स्वरूप या राधा का नाम अंकित चांदी का खोल

लिखा हुआ भोजपत्र चांदी के उस खोल में रखा जाता है जिस पर कृष्ण का स्वरूप, उनके नाम या भगवती राधा का नाम अंकित हो।

· Reviewed Sep 2026 · 02:26–02:45

वक्ता कहते हैं कि 1100 पाठ पूर्ण होने के पश्चात भोजपत्र पर लिखे हुए कवच को चांदी के खोल में रखा जाता है — एक सुंदर सी खोल, जिस पर भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप बना हो, या उनके नाम लिखे हों, या भगवती राधा का नाम लिखा हो।

वक्ता कहते हैं कि 1100 पाठ पूर्ण होने के पश्चात भोजपत्र पर लिखे हुए कवच के लिए चांदी की खोल लें — एक सुंदर सी खोल, जिसमें भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप बना हो, उनके नाम लिखे हों या भगवती राधा का नाम लिखा हो; इस प्रकार का कवच निर्मित करवा लें।

08

108 नामों से हवन, पुरुषों के लिए घी और स्त्रियों के लिए सामग्री, तथा पाँच बच्चों को भोग

कृष्ण कवच के अनुष्ठान की पूर्णता किस हवन और किन भोग से होती है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:46–03:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन, जब भगवान श्री कृष्ण का पूजन होगा, तब हवन करने के उपरांत कवच धारण किया जाता है। हवन भगवान श्री कृष्ण की सतनामावली से, उनके 108 नामों से किया जाएगा, या इच्छा हो तो सहस्रनाम इत्यादि से भी। इसमें पुरुष सामान्य घी से करेंगे; स्त्रियाँ हवन सामग्री से — मिक्स हवन सामग्री, पौष्टिक हवन सामग्री से — करेंगी। पूर्णाहुति इत्यादि करके कम से कम बाल गोपालों को, छोटे-छोटे बच्चों को माखन मिश्री इत्यादि भोग खाने के लिए देना चाहिए — कम से कम पाँच बच्चों को और छोटी-छोटी बच्चियों को।

09

गले में धारण, श्रेष्ठतम किसी छोटे बच्चे के हाथ से, और सुदर्शन चक्र तथा गोपियों द्वारा रक्षा

कृष्ण कवच को किस प्रकार धारण करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 03:15–03:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उसके पश्चात इस कवच को गले में धारण करना चाहिए। यदि घर में कोई छोटा सा बच्चा है, अबोध बालक है, पाँच वर्ष या सात वर्ष तक का बालक है, तो उस बच्चे के माध्यम से, उसके हाथ से इस कवच को गले या बाहों में धारण करना और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना बड़ी उत्तम बताई गई है। कहा जाता है कि इस कवच को धारण करके जहाँ कहीं भी जाएँ, भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र और उनकी गोपियों के द्वारा सर्वत्र रक्षा होती है।

10

संतान प्राप्ति में बाधा

इसका सबसे विशिष्ट फल संतान प्राप्ति बताया गया है — जहाँ संतान नहीं हो रही, वहाँ धारण करने से संभावना बढ़ती है।

· Reviewed Sep 2026 · 03:45–04:12

वक्ता कहते हैं कि भगवान कृष्ण के इस कवच का एक सबसे विशिष्ट महत्व यह है कि यदि किसी व्यक्ति को, किसी स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति में बाधा हो रही हो, तो इस कवच के धारण करने से उसके जीवन में यह संभावना बढ़ जाती है कि शीघ्र ही उसे शिशु की प्राप्ति हो — पुत्र रत्न की, पुत्री रत्न की प्राप्ति हो सके।

11

अभिचारिक, ग्रह कृत तथा प्रेत-पिशाच कृत बाधा, और कार्यस्थल पर रक्षा

कृष्ण कवच किस-किस प्रकार की बाधा से रक्षा करता है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:13–04:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि साथ ही साथ, यदि आप भगवान श्री कृष्ण की विशिष्ट सेवा करते हैं, तो इस कवच के माध्यम से — यदि किसी भी प्रकार की कोई अभिचारिक बाधा आपके जीवन में उपस्थित हो रही हो, कोई ग्रह कृत बाधा, कोई प्रेत या पिशाच कृत बाधा हो — तो इसके द्वारा सर्वत्र आपकी रक्षा होती है। कार्यस्थल पर रक्षा होती है, पदोन्नति होती है। वे कहते हैं कि इस कवच के माध्यम से हर प्रकार के वे लाभ प्राप्त होते हैं जो आपके जीवन में होने चाहिए।

12

भाग्य के पीड़ित ग्रह, नीच राशि, गलत भाव, और राहु-केतु द्वारा ग्रसित होना

दुर्बल भाग्य जन्म कुंडली में किस प्रकार दिखता है, और उस पर यह कवच क्या करता है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:37–05:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत बार ऐसा होता है कि हमारा भाग्य दुर्बल होता है — हम सभी कार्य कर रहे हैं, लेकिन एक्सपेक्टेड रिजल्ट नहीं मिल रहा। जन्म कुंडली का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि हमारे भाग्य के जो ग्रह हैं वे कहीं पीड़ित हैं, नीच राशि में हैं, गलत भाव में हैं, जिसके कारण उनका प्रभाव सही प्रकार से नहीं मिल रहा है; या वे राहु-केतु के द्वारा ग्रसित हैं, जिसके कारण उनका वैसा प्रभाव नहीं मिल पा रहा — इसे ही हम दुर्भाग्य कहते हैं। वे कहते हैं कि इस कवच को धारण करने से इस प्रकार की ग्रह जनित बाधाएँ और कुंडली का जो प्रभाव नहीं मिल रहा होता है, वह शुभ प्रभाव आपको प्राप्त होने लगता है।

13

वृंदावन, गया, सप्तपुरी और नदी तीर्थों पर कवच का जाप

तीर्थ यात्रा पर कृष्ण कवच के साथ क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 05:15–05:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब कभी भी आप श्रीमद् धाम वृंदावन, गोलोक इत्यादि की, मथुरा इत्यादि की यात्रा पर निकलें, या भगवान नारायण के किसी भी स्वरूप पर, गया धाम जी, गया जी में, या किसी भी ऐसे मुख्य स्वरूप स्थान पर — जितनी भी पूरियाँ हैं, सप्तपुरी — अथवा गंगा जी, यमुना जी, त्रिवेणी संगम इत्यादि पर जाएँ, तो इस कवच को धारण किए रहते हुए वहाँ अवश्य ही इसका अधिकाधिक जाप करें, चलते-फिरते भी। इसका प्रभाव बहुत अधिक बढ़ जाता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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