ज़्यादा पूजा-पाठ के बाद भी तंत्र अभिचार क्यों लगता है — कुल शक्ति और पितरों का बंधन, पूजा की चुराई हुई ऊर्जा, और उपाय घर में क्यों नहीं होता

योजनाबद्ध अभिचार घर की कुल शक्ति और पितरों को कैसे बाँधता है ताकि पूजा की ऊर्जा शत्रु की मसान शक्ति को मिले — और उपाय न घर का अनुष्ठान है न एक बार का उतारा, बल्कि घर के बाहर की गई अपनी साधना क्यों है।

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01

नियमित पूजा-पाठ करने वाला अभिचार पर संदेह सबसे बाद में क्यों करता है

इष्ट-सेवा सुरक्षा की गारंटी लगती है, और तंत्र इसी सोच के लिए बना है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:03–01:17

वक्ता कहते हैं कि यह विषय उन साधकों और सामान्य गृहस्थों के लिए है जिन पर शत्रुओं ने तंत्र क्रियाएँ कर रखी हैं, जिनसे दुर्घटनाएँ और परेशानियाँ आ रही हैं और छुटकारा नहीं मिल रहा। शुरू में किसी को पता नहीं चलता कि अभिचार हुआ है, और मुख्य कारण यह है कि जो व्यक्ति किसी भी रूप में आस्तिक है और नियमित पूजा-पाठ करता है वह इसे मानेगा ही नहीं: उसे लगता है कि मैं इष्ट की सेवा करता हूँ, भगवान में रमा हूँ, मेरे साथ गलत हो ही नहीं सकता। वे कहते हैं कि तंत्र इसी सोच के लिए बना है; केवल सच्चा समर्पण अलग बात है, और तब भी आपके साथ रहने वालों तक वह पहुँच सकता है। जब तक वह गंभीरता से लेता है समस्या बढ़ चुकी होती है, क्योंकि अभिचार को जितना समय दें उतना बढ़ता है।

02

क्या कवच किसी अपने द्वारा खिलाई गई अभिमंत्रित वस्तु से बचा सकता है?

घर के भीतर से किया गया अभिचार हर कवच को बेकार कर देता है — शील्ड के भीतर बम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:18–02:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं नहीं: आप कितना भी सुरक्षात्मक कवच पहने हों, अगर आपका कोई अपना ही व्यक्ति खाने में मिलाकर कोई अभिमंत्रित वस्तु खिला दे तो वह कवच किस काम का — जैसे बहुत अच्छी शील्ड में बैठकर उसी जगह खुद बम फोड़ लेना। अभिचार का प्रक्षेपण दूर बैठकर ही हो, यह आवश्यक नहीं; ईर्ष्यालु अपना व्यक्ति कुछ खिला जाए, घर में कुछ रख जाए या वहाँ मसानी क्रिया कर जाए और पता भी न चले, और आस्तिक व्यक्ति यही मानता रहता है कि कोई शक्ति उसका अहित नहीं कर सकती, जब तक कि समस्या बढ़ न चुकी हो — क्योंकि अभिचार को जितना समय दिया जाए वह उतना बढ़ता है।

03

योजनाबद्ध अभिचार पूजा करने वाले घर की कुल शक्ति और कुल पितरों को कैसे बाँधता है

घर का भेद लो, शक्ति बाँधो, द्वार के पितरों को हटाओ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:30–05:19

वक्ता कहते हैं कि जो घर नियमित पूजा करता है, अपनी शक्तियों को भोग-भेंट देता है और अपने कुल देवी-देवता को जानता है, उस पर सामान्य अभिचार काम नहीं करता; काम करता है पूरी तरह योजनाबद्ध अभिचार, जिसे वे अपने जीवन के अनुभव से बताते हैं कि लोग कैसे धोखा करते हैं। शत्रु पहले घर का भेद लेता है: कौन-सी शक्ति पूजित है और उसे कैसे मनाया जाता है। फिर वह कुल शक्ति को वचन, भोग या मंत्रात्मक शक्ति से बाँधने का प्रयास करता है; सामान्य लोक-देव रुक जाते हैं, जबकि बहुत समय से पूजित बृहद शक्ति आसानी से नहीं बँधती और स्वप्न या सवारी के माध्यम से परिवार को सावधान करती है। चेतावनी न आए तो समझिए वह रोक दी गई है। उसके बाद कुल पितृ, जो सदैव द्वार पर रहते हैं जबकि कुल शक्तियाँ पूजन स्थान से द्वार पर पहरा देती हैं, भोग या अन्य उपाय से रोके जाते हैं। यह सब पूरी जानकारी वाली घुसपैठ है; तभी अभिचार का प्रयोग किया जाता है।

04

कुल रक्षक बँधने पर शत्रु की मसान शक्ति को मिलने वाली पूजा की ऊर्जा

जितनी पूजा बढ़ाएँ, घुसपैठिया शक्ति उतनी बलवान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:20–06:35

वक्ता कहते हैं कि इसके बाद शत्रु किसी वस्तु के माध्यम से या अभिमंत्रित चीज़ छिड़ककर आपके घर में मसानिक शक्ति स्थापित कर देता है — एक बार में न हुई तो दो-तीन बार में। आप पूजा-पाठ करते रहते हैं और ऊर्जा बनती भी है, पर जप-पूजा की वह ऊर्जा अब आपके इष्ट, कुल शक्तियों या कुल पितरों तक पहुँच ही नहीं पाती, क्योंकि तंत्र प्रक्रिया से उन्हें छानकर अलग कर दिया गया है, बाँध दिया गया है। तो वह ऊर्जा उस शक्ति के पास जाती है जिसका प्रक्षेपण शत्रु ने किया है, और वह आपकी पूजा ग्रहण करने लगती है। परेशानी बढ़ने पर आप पूजा, भोग और क्रियाएँ बढ़ाते हैं, और वह शक्ति और अधिक बलवान होती जाती है।

05

सावधानी: वक्ता की विशेष हनुमान साधना केवल बंधित कुल शक्ति वालों के लिए

जो बंधित नहीं, वे करेंगे तो बंध जाएँगे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:36–07:06

ग्रुप में डाली गई पोस्ट के प्रश्न का उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि जिस विशेष हनुमान साधना की बात उन्होंने कही थी वह उन्हीं लोगों के लिए है जिनके साथ यह घटना हुई है — जिन्हें पता है कि उनकी कुल शक्ति बंधित है। यह केवल उन्हीं के लिए है; जिनकी शक्ति बंधी हुई नहीं है वे अगर करेंगे तो बंधित हो जाएँगे। उनका आशय उन लोगों से था जिनके कुल पितृ और शक्तियाँ बंधी हैं, जिन्हें पूरा पता है कि अभिचार हुआ है और अभिचार शक्ति उनकी पूजा-पाठ ग्रहण कर रही है।

06

अभिचार-पीड़ित का पहला नियम: घर में बड़ा अनुष्ठान नहीं, और वैदिक मार्ग पहुँच से बाहर क्यों

दुर्लभ शास्त्री और डेढ़-दो लाख का खर्च

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:07–07:59

ऐसी स्थिति में व्यक्ति क्या करे, इस पर वक्ता कहते हैं कि सबसे पहला काम यह है कि घर में कभी कोई बड़ा अनुष्ठान न करें। अगर सामान्य वैदिक मार्ग अपनाएँ तो, वे कहते हैं, आजकल ऐसे धर्म-धुरंधर शास्त्री-पंडित सामान्य रूप से मिलते नहीं जो पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ और अनुष्ठान पूर्ण कर दें, और मिलें भी तो उनकी फीस से अलग वास्तविक खर्च ही डेढ़-दो लाख रुपए हो जाता है, जो पीड़ा से पहले ही टूट चुका व्यक्ति वहन नहीं कर पाता और वहीं धरा रह जाता है।

07

जेन्युइन साधक का उतारा एक-दो पक्ष में क्यों पलट जाता है

शत्रु बलि दोगुनी करता है; अदृश्य तंत्र विश्वास तोड़ता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:00–09:38

वक्ता कहते हैं कि तंत्र के मार्ग में कोई व्यक्ति आपका साथ कब तक देगा: शत्रु जैसे ही देखेगा कि इस पूजन-भोग-भेंट से उसका काम रोका गया है, वह उसका दोगुना दे देगा — अगर उसने एक मुर्गे का कलेजा दिया है तो अब दो देने होंगे, तंत्र में यही होता है। जेन्युइन तांत्रिक आपको ईमानदारी से बताएगा कि कितना लगेगा, और चूँकि आप कुछ देख नहीं रहे, आपको शक होगा कि वह ठग रहा है और आप छोड़ देंगे। मान लीजिए सही व्यक्ति ने कम पैसे में उतारा कर दिया और सब लाइन पर आ गया, तो वह एक-दो पक्ष चलेगा; शत्रु को पता चलते ही वह पलट देगा, फिर वही स्थिति, साधक पर वही संशय, और विश्वास टूट जाएगा — क्योंकि भीतर जो तंत्र की प्रक्रिया चल रही है उसे आप समझ ही नहीं पाते, इसलिए कुछ पूरा नहीं होता और आप भटकते रह जाते हैं।

08

अभिचार के विरुद्ध उग्र शस्त्र-मंत्र प्रयोग घर में कभी क्यों नहीं करने चाहिए

जमी मसान शक्ति को कष्ट दो तो वह चार गुना पलटवार करती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:39–11:19

वक्ता कहते हैं कि ऐसी स्थिति में साधक महाशक्तियों के उग्र तंत्रोक्त कवच या तंत्रोक्त-मंत्रोक्त पाठ करवाता है — बाँधने, मारने, तोड़ने-फोड़ने वाले शस्त्र मंत्र, "बंध बंध, भक्ष भक्ष, रक्ष रक्ष" वाले — पूरे विधि-विधान के साथ, पर अगर आपके साथ यह समस्या है तो वह विधान घर में कभी नहीं होता। घर में करने पर, बिना पहले सिद्ध किए, ये मंत्र आपके एंटी-पार्टी बनकर बैठी मसान शक्ति को कष्ट देते हैं; उसे जैसे ही कष्ट होगा वह आपको और कष्ट देगी। जिस शक्ति को आपने डेढ़-दो साल इष्ट के लिए दी गई पूजा खिलाई है, उसे अब लाठी मारकर निकालने चलेंगे तो वह निकलेगी नहीं — आप ही को चार लाठी और देगी, शरीर में समस्या पैदा करेगी, पूजा करने जाइएगा तो एक्सीडेंट करवा देगी, और आप कहेंगे कि महादेव की पूजा भी फलित नहीं हो रही और महादेव पर से विश्वास उठ जाएगा — क्योंकि चल कुछ और रहा है और आप देख कुछ और रहे हैं।

09

अभिचार से स्थायी सुरक्षा: आकलन के बाद निवारण, फिर घर के बाहर अपनी साधना

एक बार में इलाज नहीं, और पीड़ित के लिए घर में साधना कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:20–11:58

वक्ता कहते हैं कि इन चीज़ों को करवाने का विशेष तरीका भी एक बार में प्रभावी नहीं हो सकता; पूरी तरह देखना पड़ता है कि यह प्रभावी होगा या नहीं और इसे हटाया भी जा सकता है या नहीं। और एक बात सदैव ध्यान रखें: आप कितने भी बड़े साधक के पास जाएँ, अगर किसी शत्रु ने आप पर अभिचार किया है तो जीवन में पूर्ण रूप से सुरक्षित आप तभी होंगे जब स्वयं साधना शुरू करेंगे। समापन में उनका निर्देश है कि इस प्रकार की समस्या वाले लोग कभी घर पर साधना न करें; साधनाएँ घर के बाहर करनी होती हैं। बाकी विवरण, वे कहते हैं, आगे के वीडियो में बताएँगे।

10

एक साधक से परामर्श लें, दस से नहीं: समस्या हर जगह भेजने से कुछ क्यों नहीं होता

तीन सलाहकार, तीन उपाय; भटकना ही प्रारब्ध

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:59–13:21

वक्ता कहते हैं कि वे हर व्यक्ति को अच्छा समय देते हैं, और अगर नहीं देते तो उसके पीछे कारण होता है — जैसे जब कॉपी-पेस्ट किया हुआ मैसेज ही बता देता है कि उस व्यक्ति ने वही समस्या दस-पंद्रह लोगों को फ़ॉरवर्ड की है। ऐसे लोगों से वे कहते हैं कि किसी एक व्यक्ति से परामर्श लें: हर जेन्युइन साधक कोई एक चीज़ देखेगा, उसी को पकड़ेगा और अपने अनुसार बताएगा, तो तीन लोग तीन अलग बातें बता देंगे और बंदा कुछ नहीं कर पाएगा। वे कहते हैं कि ऐसे लोगों की स्थिति द्वार-द्वार जाकर पचास तरह का खाना सूँघने वाले कुत्तों जैसी होती है, जिनका पेट सूँघने से ही भर जाता है और खाते कुछ नहीं — और इसमें उनकी गलती भी नहीं; उनका प्रारब्ध ही ऐसा है कि केवल भटकना लिखा है, और अगर करने बैठ भी गए तो घर में जो चीज़ बैठी है वह करने नहीं देगी।

11

एक बार किए सप्तशती या सप्तश्लोकी अनुष्ठान की राहत क्यों चुक जाती है

पहले फल की माया, और बिना नई जमा के खर्च होती पूँजी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:22–15:05

वक्ता कहते हैं कि माया बहुत प्रबल होती है: कोई भी अनुष्ठान एक बार कर लीजिए — दुर्गा सप्तशती या सप्तश्लोकी का अनुष्ठान, नवरात्रि के नौ दिन सुबह 108 शाम 108 — तो काम बने या न बने, शक्ति बहुत भयानक माया दिखाती है और कहीं न कहीं जगदंबा की कृपा भी हो जाती है। व्यक्ति की समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है, पर उसे भीतर बनी ऊर्जा, मणिपूरक चक्र का स्पंदन महसूस होने लगता है, स्वप्न में दृष्टांत और चित्र दिखने लगते हैं, और साधना का शुभ प्रभाव मिलते ही वह स्वयं को तुरंत सिद्ध मान लेता है और दूसरों को परामर्श देने लगता है। कुछ दिन बाद फिर मैसेज आता है कि परेशानी लौट आई — क्योंकि जो साधना जारी नहीं रखी गई उसकी ऊर्जा पंद्रह दिन, बीस दिन, ज़्यादा से ज़्यादा तीन-छह महीने रहती है; जमा पूँजी खत्म हो रही है और नया कुछ डाला नहीं जा रहा, तो समस्या फिर बढ़ जाती है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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