जन्म, विवाह और मृत्यु में तंत्र सबसे आसान क्यों

अशुद्धि व मांगलिक अवसरों पर प्रहार क्यों टिकता है।

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01

सूतक-पातक और घर के मांगलिक कार्यों के समय तंत्र सबसे अधिक प्रभावी क्यों होता है?

देव शक्तियाँ हटती हैं, पितृ पहरे पर होते हैं, और पितृ अशुद्ध किए जा सकते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–00:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि घर में शादी-ब्याह, बच्चे के जन्म या किसी की मृत्यु के समय किया गया तंत्र वह होता है जो बाद में किसी को दिखाने-सुनाने पर पता चलता है, जबकि होना यह चाहिए कि सूतक-पातक में तंत्र का प्रभाव विशेष न हो। उनकी व्याख्या: इन सभी समयों में घर के कुल पितृ आए होते हैं; मांगलिक कार्य में देव शक्तियाँ उपस्थित रहती हैं, पर सूतक-पातक में वे उस स्थान से हटकर अलग रहती हैं, तब पितृ ही देव-तुल्य होकर हर चीज का दायित्व सँभालते हैं, और पितरों को क्षुद्र विद्या से आसानी से अशुद्ध किया जा सकता है। ईर्ष्यालु लोग और तंत्र-प्रवृत्ति वाले करने वाले यह जानते हैं और इसी का लाभ उठाते हैं; और ईर्ष्यालु व्यक्ति, वे जोड़ते हैं, कभी आपका भला नहीं चाहता और परवाह नहीं करता कि किस माध्यम से, किस स्तर तक गिरकर प्रयोग करवा रहा है।

02

विवाह, जन्म और मृत्यु के समय कुल पितृ क्यों आते हैं?

वंश वृद्धि से सातवीं पीढ़ी के पितृ की गति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:58–01:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मांगलिक कार्य में हम पितृ को बुलाते हैं और वे प्रसन्न होकर आते हैं, क्योंकि विवाह का अर्थ है वंश की वृद्धि। कारण वे यह बताते हैं: माना जाता है कि सातवीं पीढ़ी के जिस कुल पितृ की किसी कारण गति नहीं हुई, उसकी गति तब हो जाती है जब सातवाँ वंश जन्म लेता है, इसलिए पितृ प्रसन्न होते हैं कि विवाह होगा, वंश बढ़ेगा, हमारी मुक्ति होगी। बच्चे के जन्म पर भी कुल पितृ आशीर्वाद देने आते-जाते हैं, और मृत्यु के समय कुल पितरों का आवागमन इसलिए रहता है कि जिनकी देह छूटी है उन्हें लेकर जाना है। इसे वे इस विषय को समझने का सरल तरीका कहते हैं।

03

भजन-कीर्तन के साथ निकली बुजुर्ग की शव-यात्रा पर ईर्ष्या, और उससे बुलाए गए क्षुद्र तंत्र

शोकग्रस्त घर पर छोड़ी गई नियम-रहित प्रेत-पिशाच शक्तियाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:37–03:34

वक्ता कहते हैं कि किसी जवान की अकाल मृत्यु तो अलग और गलत बात है, पर जब कोई बहुत बुजुर्ग लंबे शारीरिक कष्ट के बाद देह छोड़ता है तो घर के लोग कहीं न कहीं थोड़े प्रसन्न भी होते हैं कि कष्ट से मुक्ति मिली, और ऐसे बुजुर्गों की वैकुंठ की अंतिम यात्रा में शव-यात्रा के साथ प्रायः भजन-कीर्तन करते हुए खुशी-खुशी विदा किया जाता है। ऐसे समय भी, वे कहते हैं, लोग ईर्ष्या कर देते हैं कि अरे इनकी मृत्यु हुई है और ये भजन-कीर्तन करवा रहे हैं। इसी ईर्ष्या से ग्रसित होकर लोग क्षुद्र तंत्रों का प्रयोग करते हैं, जिनमें किसी प्रकार का कोई नियम-बंधन नहीं होता: किसी नियम को न मानने वाली प्रेत शक्ति, पिशाच शक्ति, और वैसे ही लतखोर तांत्रिक जो किसी के घर पर बिना देखे-सुने ये क्रियाएँ कर देते हैं।

04

छठिहार से पहले नवजात को दुनिया को दिखाना नजर और तंत्र को न्योता है

पचास देखने वाले, सच में खुश कम, और उनमें शत्रु भी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:35–05:09

वक्ता कहते हैं कि घर में बच्चे का जन्म केवल वंश वृद्धि के कारण जलन पैदा करता है, लड़की से अधिक लड़के पर, और आज लोग माँ के ठीक से देखने से पहले ही बच्चे को फेसबुक, स्टोरी और व्हाट्सएप स्टेटस पर डाल देते हैं। इसे वे सबसे बड़ी गलती कहते हैं: सबको यह नियम पता है कि बच्चा सतईसा में पड़े तो पिता को उसका मुख नहीं देखना चाहिए, पर यह नहीं पता कि chhathihar तक बच्चे को बचाकर रखना है, दुनिया को नहीं दिखाना है। पचास लोग बच्चे को देखते हैं तो नज़र लगती है; सच में खुश बहुत कम होते हैं, अधिकांश के मन में बधाई के पीछे ईर्ष्या आती है, और उन्हीं में आपके शत्रु भी होते हैं, जो फिर कुछ करवाकर छठिहार में बच्चे के कपड़ों में ही कुछ करवाकर दे जाते हैं। अगर जीवन में कभी घर की रक्षा के लिए कोई पूजन-पाठ नहीं किया, वे कहते हैं, तो घर में परेशानी हो जाती है।

05

छठिहार तक नवजात के लिए सावधानियाँ

किसी की गोद नहीं, आशीर्वाद दूर से, शुद्ध और संवेदनशील आभा-मंडल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:10–07:04

वक्ता कहते हैं कि कोई भी आए, बच्चे को किसी को भी गोद में लेने, ले जाने, खिलाने के लिए मत दे दीजिए; परहेज कीजिए, क्योंकि वंश बहुत कृपा से बढ़ता है, इसलिए नियमों का पालन करना सीखिए। वे कहते हैं कि बुद्धिमान पत्नियाँ इस बात पर अपने पतियों को डाँटकर रखती हैं और पहले के समय में माएँ बच्चे को बचाकर रखती थीं, जबकि आज ढोल-बाजा बजाने वाले को खुशी से बच्चे का वीडियो दे रहे हैं और घर आए ट्रांसजेंडर लोगों की गोद में खुशी से दे रहे हैं; उनका नियम है \"आशीर्वाद दीजिए भाई, दूर से दीजिए\", और किसी की भी गोद में क्यों दे रहे हैं? नवजात का आभामंडल बहुत शुद्ध और बहुत संवेदनशील होता है, इसीलिए उसे सबसे ज्यादा परेशानी होती है, और वह बोल नहीं सकता कि क्या कष्ट है; बेचारा रोएगा। नुकसान तुरंत दिख सकता है, या जो उस समय लगा दिया गया, बच्चे या वंश के लिए जो प्रेत-पिशाच कर दिया गया, वह दो, चार या आठ साल बाद जरूर हावी होता है और बचपन से दिक्कत हो जाती है।

06

विवाह में खुली हल्दी रस्म: हल्दी के साथ मली गई श्मशान की भस्म

हल्दी वही लगाएँ जिन्हें नियम कहता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:05–07:59

वक्ता कहते हैं कि शादी-ब्याह में भी आज लोग बड़े-बुजुर्गों के नियम नहीं मानते, हर चीज ताक पर रख देते हैं, और जो दिखावा करते हैं वह भी लिमिट में नहीं रहता, जिससे ईर्ष्यालु लोगों को मौका बहुत आसानी से मिल जाता है; पहले लड़का-लड़की को बंधन में रखा जाता था, किसी से नहीं मिलते थे। अब हल्दी लगाने पूरी दुनिया के लोग आते हैं, कोई नियम नहीं पलता, और अगर कोई हाथ में श्मशान की भस्म लेकर आए, हल्दी के साथ मलकर जो करना था करके चला जाए, तो आप क्या कर लेंगे? नियम, वे कहते हैं, यह है कि जितने लोग लगाते हैं, उन्हीं को लगाना चाहिए; पर लोग दिखाना चाहते हैं कि पूरा कुटुंब, पूरा शहर, यहाँ तक कि जिन्हें जानते नहीं वे भी आकर लगाएँगे, और किसके मन में क्या है, कौन जाने।

07

रक्षा-सूत्र को अंधविश्वास कहकर ठुकराना, और उसके बाद की परेशानियाँ

अपनी सुरक्षा खुद छोड़ना, फिर देवी-देवताओं को दोष देना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:00–09:50

वक्ता कहते हैं कि माता-पिता गले में पहनने को कुछ देते हैं, या कुल पुरोहित, पंडित जी मंत्र पढ़कर हाथ में बाँधने का बंधन देते हैं कि इसे बाँधकर रखो, तो आज के बच्चे कहते हैं \"खुल गया, गिर गया, भूल गया, क्या मम्मी तुम इतना परेशान हो रही हो\" और कमाने लगने पर \"यह बाँधने से कुछ नहीं होता\"। वे कहते हैं कि समय पर अनुशासन मिला होता तो कम से कम महत्व समझते। बाद में जब बच्चा नहीं हो रहा होता तो आईवीएफ, यह-वह करवाने दौड़ो और फिर रोते रहो। अपनी सुरक्षा आप खुद छोड़ते हैं, वे कहते हैं, और जिन चीजों को आप अंधविश्वास कहकर एक सिरे से नकारते हैं वही समय पर तेजाब की तरह लगती हैं कि कोई काम नहीं बनता; फिर आप रोते हैं, देवी-देवताओं को गलत बोलते हैं और ऐसी बातें बताने वालों को आडंबरी कहते हैं, जबकि भीतर चोट बहुत सही लगती है। ऐसी परेशानी वालों को उनकी सलाह है कि अगर किसी ने कहा है कि विवाह के समय करवाया गया है, तो अपने विवाह के समय का अच्छे से अवलोकन करें कि नीति-नियम कैसे निभाए गए; हो सकता है आप निभा रहे हों, पर बिगाड़ने वाले बहुत होते हैं, इन चीजों में बहुत सोच-समझकर चलना होता है और आने वाली पीढ़ी को सही से यह ज्ञान देना होता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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