दत्त माला मंत्र — गुरु विहीन साधक के लिए पूर्णिमा से आरंभ होने वाला अनुष्ठान

गुरु विहीन साधक के लिए दत्तात्रेय साधना का मार्गदर्शन।

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01

मार्गदर्शन के बिना साधना मार्ग और गुरु स्वरूप देवता का चुनाव

जब साधक के जीवन में भौतिक रूप से कोई गुरु नहीं होता तो उसके सामने कौन सी कठिनाई आती है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:07–00:47 · Also a question

जब भौतिक रूप से हमारे जीवन में कोई गुरु या कोई मार्गदर्शक नहीं होते, तो हमारे लिए यह चुनना काफी कठिन हो जाता है कि हम कौन से साधना मार्ग को चुनें, किस प्रकार की साधना करें, साबर में पौराणिक मंत्रों को करें या तंत्रोक्त मंत्रों को, और भगवान के किस स्वरूप की पूजा करें। सर्वप्रथम यह विकट परिस्थिति आती है कि गुरु स्वरूप में किस देवता का चुनाव करें, किस महाशक्ति का गुरु स्वरूप में पूजन करें। विकल्प बहुत सारे होते हैं, लेकिन विकल्पों को चुनने की जो क्षमता हमारे अंदर होनी चाहिए, निर्णय लेने की जो क्षमता होनी चाहिए, वह कहीं न कहीं साथ नहीं दे पाती।

02

भटकाव और संशय — साधना के पूर्ण फल में बाधा

अपने चुने हुए इष्ट पर संशय करने से साधक को क्या हानि होती है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:48–01:31 · Also a question

चुनाव कर भी लें तब भी हमारे भीतर यह संशय बना रहता है कि हमने जो किया है वह सही है या गलत। ऐसी अवस्था में जब भटकाव आने लगेगा, और जब आप उस महाशक्ति पर शक और संशय करेंगे जिन्हें आपने अपना इष्ट और अपना गुरु माना है, तो कहीं न कहीं आपकी साधना का पूर्ण फल आपको प्राप्त नहीं होगा। इन सभी परिस्थितियों को देखकर, वे कहते हैं, आज की साधना हर साधक के लिए है — नए हों या पुराने, किसी भी प्रकार की साधना करते हों, पौराणिक या तंत्रोक्त, या साबर क्षेत्र के साधक हों, स्त्री हों, पुरुष हों, साधिकाएं हों।

03

ब्रह्मा, विष्णु और शिव का सम्यक स्वरूप, गिरनार पर नित्य निवास

भगवान दत्तात्रेय को ही क्यों चुना जाता है, और उनका निवास कहाँ कहा गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:32–02:02 · Also a question

क्योंकि भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव — तीनों महाशक्तियों का जो सम्यक स्वरूप है, वह भगवान दत्तात्रेय को कहा गया है। जिस प्रकार कैलाश पर्वत पर सदैव नित्य भगवान सदाशिव महारुद्र का वास कहा गया है और विभिन्न प्रकार की शक्तियों का निवास कहा गया है, उसी प्रकार अनेकों-अनेक कोटि के सिद्धों का वास भगवान दत्तात्रेय के साथ गिरनार पर्वत पर कहा गया है, जहाँ वे नित्य निवास करते हैं।

04

मार्गशीर्ष पूर्णिमा, और तीनों देवों द्वारा माता अनुसूया की परीक्षा

दत्तात्रेय जयंती कब है, और उनके प्राकट्य की कथा क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:03–02:35 · Also a question

मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को दत्तात्रेय जयंती, यानी उनके अवतरण दिवस के रूप में माना जाता है। कथा में, जब माता अनुसूया की परीक्षा के लिए — उनके सतीत्व की परीक्षा के लिए — ब्रह्मा, विष्णु और महेश आए और निर्वाण दीक्षा हेतु प्रार्थना की, तब माता अनुसूया ने अपने सतीत्व और अपने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए उसके प्रभाव से तीनों को बाल स्वरूप में कर दिया।

05

चंद्रमा, दुर्वासा और दत्तात्रेय; तीन मस्तक और छह भुजाएं

तीनों देवों से चंद्रमा, दुर्वासा और दत्तात्रेय प्रकट हुए; दत्तात्रेय के तीन मस्तक और छह भुजाएं हैं, जिनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं।

· Reviewed Sep 2026 · 02:36–03:08

इन तीनों की कृपा से जो स्वरूप प्रकट हुए, उनमें एक स्वरूप भगवान चंद्रमा कहे गए, एक स्वरूप भगवान दुर्वासा कहे गए, और एक स्वरूप भगवान दत्तात्रेय कहे गए। भगवान दत्तात्रेय को प्रमुख रूप से विष्णु जी के अंश से माना गया है, लेकिन सम्यक रूप इसमें तीनों महाशक्तियों का है। छह भुजाओं के साथ जिनके तीन मस्तक हैं, जिनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों हैं।

06

ब्रह्मांड की हर गुरु परंपरा का ब्रह्मा, विष्णु और महेश से निकलना

ब्रह्मांड की हर गुरु परंपरा और गुरु मंडल ब्रह्मा, विष्णु और महेश से ही निकले हैं, इसीलिए दत्तात्रेय का नित्य महागुरु स्वरूप में पूजन किया जाता है।

· Reviewed Sep 2026 · 03:09–03:35

इनकी प्रसन्नता के लिए महागुरु के स्वरूप में इनका नित्य ही पूजन करना चाहिए। इस ब्रह्मांड में जितनी भी गुरु परंपराएं हैं, जितने भी गुरु मंडल हैं, वे सब ब्रह्मा, विष्णु और महेश की ही परंपरा से निकले हैं; कहीं न कहीं उन्हीं की परंपरा है। और मां जगदंबा भगवती महाशक्ति के सम्यक प्रभाव से, उनकी कृपा और आशीर्वाद से ही ये सबसे बड़ी शक्तियां बने।

07

किसी भी गुरु मंडल की कृपा से वंचित न रहना, चाहे बाद में किसी भी परंपरा में जाएं

गिरनार के महाप्रभु का आश्रय ग्रहण करने से क्या प्राप्त होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 03:36–04:08 · Also a question

जब हम गिरनार के इस महाप्रभु, इस महाशक्ति का आश्रय ग्रहण करते हैं, तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि हम किसी गुरु की, किसी गुरु मंडल की कृपा से वंचित रह जाएं। चाहे आप किसी भी परंपरा में जाना चाहते हों, लेकिन आपको पता ही न हो कि कैसे क्या करना है, आपके सामने विकल्प बहुत सारे हों और आप निर्णय न ले पा रहे हों — ऐसी अवस्था में भगवान दत्तात्रेय की शरण ग्रहण करें, क्योंकि जिनके अंदर तीनों महाशक्तियां सम्यक रूप से हैं, उनकी कृपा से आपकी हर मनोकामना सिद्ध होगी।

08

बुरे प्रारब्ध का कटना, तपोबल का बढ़ना, भविष्य में रक्षण

दत्त माला मंत्र नए साधक के लिए क्या करता है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:09–04:31 · Also a question

जो साधना-आराधना सामने रखी जा रही है — दत्त माला मंत्र का जाप, इसका प्रयोग और इसका अनुष्ठान — हर साधक को करना चाहिए, चाहे वह नया साधक हो या पुराना। नए साधक अगर इसको करते हैं तो सर्वप्रथम यह होगा कि उनके पुराने अर्जित कर्मों के कारण जितने भी बुरे प्रारब्ध हैं, वे कटेंगे। उनके भीतर तपोबल बढ़ेगा। भविष्य में रक्षण प्राप्त होगा।

09

मंत्र का स्वयं बंधन कर देना; और गुरु मंत्र के हेतु बीज मंत्र

दत्त माला मंत्र स्वयं ही आसन, दिशा और शरीर बंधन कर देता है, इसलिए इन्हें अलग से करने की आवश्यकता नहीं।

· Reviewed Sep 2026 · 04:32–04:55

जब आप यह साधना करेंगे तो आपको आसन बंधन, दिशा बंधन इत्यादि, या शरीर बंधन अलग से करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस मंत्र के प्रभाव से हर चीज हो जाएगी; वे कहते हैं कि सबसे बड़ी बात यही है। इसके साथ-साथ गुरु मंत्र के हेतु आप भगवान दत्तात्रेय के बीज मंत्र का जप कर सकते हैं, और मानसिक रूप से जप भी कर सकते हैं।

10

भौतिक रूप से गुरु प्रदान करने की नित्य प्रार्थना

जिसे किसी से गुरु मंत्र प्राप्त नहीं हुआ, उसे क्या प्रार्थना करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 04:56–05:31 · Also a question

अगर आपको सामने से भौतिक रूप से किसी भी गुरु के द्वारा गुरु मंत्र नहीं मिला है, नाम मंत्र नहीं मिला है, तो जब तक उनकी प्राप्ति नहीं हो जाती, तब तक आप भगवान दत्तात्रेय के शरणागत होकर उनसे यह नित्य प्रार्थना कर सकते हैं: कि हे प्रभु, आप हमें शिष्य स्वरूप में आशीर्वाद देते हुए भौतिक रूप से गुरु प्रदान करें।

11

मार्गशीर्ष पूर्णिमा या किसी भी माह की पूर्णिमा; 6 इंच से छोटा विग्रह, या यंत्र, या सदाशिव

जाप किसी भी माह की पूर्णिमा से आरंभ होता है — मार्गशीर्ष पूर्णिमा दत्तात्रेय जयंती है — 6 इंच से छोटे विग्रह, यंत्र, या भगवान सदाशिव के सम्मुख।

· Reviewed Sep 2026 · 05:32–06:30

अगर आप मार्गशीर्ष पूर्णिमा से करते हैं तो उस दिन दत्तात्रेय जयंती है, उस दिन से आप इसे आरंभ कर सकते हैं; अथवा आप किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि से इसका जाप आरंभ करेंगे। विधि-विधान के लिए घर में आप चाहें तो भगवान दत्तात्रेय की 6 इंच से छोटी प्रतिमा, यानी श्री विग्रह स्थापित कर सकते हैं; दत्तात्रेय यंत्र स्थापित कर सकते हैं; अथवा अगर आप नहीं करना चाहते, तो भगवान सदाशिव के सम्मुख इनके मंत्र का जप कर सकते हैं।

12

पीले वस्त्र में लपेटे यंत्र के ऊपर श्री विग्रह, और पूर्णिमा का अभिषेक

जिसे कोई दीक्षा प्राप्त नहीं हुई, वह दत्तात्रेय को आदि गुरु के रूप में कैसे स्थापित करे?

· Reviewed Sep 2026 · 06:31–06:50 · Also a question

अगर आपको किसी भी प्रकार की दीक्षा प्राप्त नहीं हुई है और आप चाहते हैं कि भौतिक रूप से एक दीक्षा प्राप्त करें, तो भगवान दत्तात्रेय को प्रथम गुरु के रूप में, आदि गुरु के रूप में स्थापित करके आप दो प्रकार से स्थापित कर सकते हैं: या तो उनके श्री विग्रह को, या उनके यंत्र को, अथवा उनके यंत्र के ऊपर उनके श्री विग्रह को — यंत्र को पीले वस्त्र में लपेट कर उसके ऊपर भगवान दत्तात्रेय के श्री विग्रह को स्थापित करेंगे। किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को पंचामृत इत्यादि से अभिषेक करके, इनके श्री विग्रह को अच्छे से सुसज्जित करके, धूप, दीप, नैवेद्य इत्यादि से यथाशक्ति पूजन करके, इनके समक्ष घी डालकर दीपक जलाएंगे और उसमें थोड़ी सी हल्दी डाल देंगे।

13

पीला या श्वेत वस्त्र; कुशा, पीला या भगवा आसन

पीला, श्वेत या भगवा वस्त्र, और कुशा या पीले आसन पर बैठकर।

· Reviewed Sep 2026 · 06:51–07:05

तत्पश्चात, पीला या श्वेत वस्त्र पहन कर, कुशा के आसन पर अथवा पीले आसन पर बैठ कर, अथवा नारंगी — यानी भगवा, सैफ्रॉन — वस्त्र और आसन पहन कर, आप दत्त माला मंत्र का जाप आरंभ करेंगे।

वक्ता कहते हैं कि तत्पश्चात, पीला या श्वेत वस्त्र पहन कर, और कुश आसन पर अथवा पीले आसन पर बैठ कर — अथवा नारंगी, यानी कि भगवा आसन, भगवा वस्त्र, सैफ्रॉन, उसे पहन कर — आप दत्त माला मंत्र का जाप आरंभ करेंगे।

14

कृपा, बुरे प्रारब्ध का शमन, पुण्यों का उदय, गुरु, और आगामी साधनाओं में सफलता

संकल्प में दत्तात्रेय की कृपा, बुरे प्रारब्ध के शमन, पुण्यों के उदय, भौतिक रूप से गुरु की प्राप्ति, और आगामी साधनाओं में सफलता की याचना होती है।

· Reviewed Sep 2026 · 07:06–07:39

संकल्प में आप यह लेंगे: कि भगवान दत्तात्रेय की परम कृपा प्राप्ति हेतु, तथा उनकी कृपा से अपने समस्त बुरे प्रारब्ध के शमन हेतु, पुण्यों के उदय हेतु, भौतिक जीवन में गुरु की प्राप्ति हेतु, तथा आगामी समय में की जाने वाली साधनाओं में पूर्ण रूप से सफलता प्राप्ति हेतु, मैं दत्त माला मंत्र के जप का संकल्प लेता हूं। यह बोल कर आप जल समर्पित करेंगे, और उसके पश्चात दत्त माला मंत्र का 108 बार पाठ करेंगे।

15

विनियोग केवल एक बार; पंचमुखी रुद्राक्ष माला पर 108, दाहिने हाथ में समर्पित

विनियोग और आरंभ के श्लोक केवल एक ही बार लिए जाते हैं; 108 का जप पंचमुखी रुद्राक्ष की माला पर करके भगवान के दाहिने हाथ में समर्पित किया जाता है।

· Reviewed Sep 2026 · 07:40–08:11

विनियोग और आरंभ की जो चीजें हैं, वे सिर्फ एक ही बार करनी हैं। आरंभ के जो सारे श्लोक हैं वे एक बार पढ़ेंगे, विनियोग सिर्फ एक बार लेंगे, और उसके पश्चात दत्त माला मंत्र जो दिया हुआ है, वह आप 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप कर सकते हैं। पंचमुखी रुद्राक्ष की माला हो; उससे जप करके वह जप भगवान के दाहिने हाथ में समर्पित करेंगे।

16

पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 दिन; कम से कम 11; 27 सर्वश्रेष्ठ

पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 दिन अति उत्तम है, कम से कम 11 दिन, और 27 दिन सर्वश्रेष्ठ है।

· Reviewed Sep 2026 · 08:12–08:33

यह कार्य अगर आप पूर्णिमा तिथि से लेकर अमावस्या तक, 15 दिन करते हैं, तो अति उत्तम है। अथवा कम से कम आप 11 दिन तो अवश्य करें — 11 दिन आपको करनी चाहिए। और अगर आप 27 दिन तक करते हैं तो सर्वश्रेष्ठ है। प्रतिदिन 108 बार जप सुबह के समय में करें; सर्वश्रेष्ठ समय सुबह का होता है।

17

पक्षी, कुत्ते और गाय को भोजन — उनके स्वरूप के जीव

पक्षियों को दाना, कुत्तों और गाय को भोजन प्रतिदिन देना चाहिए — दत्तात्रेय का स्वरूप पूर्ण रूप से प्रकृति को समर्पित है।

· Reviewed Sep 2026 · 08:34–09:16

यह जप, यह अनुष्ठान जब तक चलेगा, तब तक प्रतिदिन यथाशक्ति पक्षियों को दाना जरूर डालना चाहिए। कुत्तों को भोजन जरूर कराना चाहिए। गाय को भोजन कराना चाहिए। वे कहते हैं कि आप सदैव देखिएगा कि भगवान दत्तात्रेय के पीछे गौ माता खड़ी होती हैं; चरणों के पास कुत्ते रहते हैं, और उनके आसपास पक्षी जरूर उड़ते रहते हैं। यानी वे प्रकृति से पूर्ण रूप से संबंध रखते हैं — भगवान का यह स्वरूप पूर्ण रूप से प्रकृति को समर्पित है — तो इनकी सेवा आपके लिए अति आवश्यक है।

18

सौ से अधिक अक्षरों के मंत्रों को दीक्षा की आवश्यकता न होना, और कोई तिरछा प्रभाव न होना

क्या दत्त माला मंत्र के लिए दीक्षा आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 09:17–09:55 · Also a question

वे एक विशेष बात कहते हैं: चूंकि यह माला मंत्र है, इसलिए इसके लिए किसी भी प्रकार की दीक्षा की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए मन से संशय निकाल लीजिए। 100 की संख्या से अधिक, 100 शब्दों से अधिक शब्द या बीजाक्षर के मंत्र होने पर ग्रंथों में, तंत्र ग्रंथों में यह वर्णन आता है कि उसके लिए दीक्षा की आवश्यकता नहीं होती — तो आप बगैर किसी दीक्षा के इस मंत्र का जप कर सकते हैं। इसका कोई भी तिरछा प्रभाव नहीं है, क्योंकि यह मंत्र अपने आप में सर्वश्रेष्ठ और सिद्ध, स्वयं सिद्ध है; करना यह है कि स्वयं को इस मंत्र के योग्य बनाएं ताकि इसका प्रभाव हमें प्राप्त हो।

19

ब्राह्मण को अन्न और दक्षिणा का दान, और पांच बच्चों को भोजन

अंतिम दिन मंदिर में ब्राह्मण को दक्षिणा सहित अन्न का दान, और पांच बच्चों को भोजन, संभव हो तो खीर।

· Reviewed Sep 2026 · 09:56–10:37

जब आप 11 दिन, 21 दिन अथवा 27 दिन, अथवा पूर्णिमा से अमावस्या तक, यथाशक्ति उतने दिन तक जप कर लेंगे, तो अंतिम दिन — जितने दिन का भी आपका संकल्प हो — आपको जरूर मंदिर जाकर ब्राह्मण को यथाशक्ति दान देना है। अन्न का दान करना है, दक्षिणा सहित दान करके। और अगर संभव हो तो कम से कम पांच बच्चों को भोजन जरूर कराना चाहिए; अंतिम दिन पांच बच्चों को भोजन जरूर कराएं, संभव हो तो मीठी खीर, चाहे मंदिर में खिलाएं या घर में।

20

प्रतिदिन पांच, सात, ग्यारह, इक्कीस या सत्ताईस बार; और 64 कोटि मंत्रों का जागरण

इसके बाद प्रतिदिन पांच से सत्ताईस बार पाठ करने पर यह मंत्र 64 कोटि के मंत्रों को चलायमान कर देता है, ऐसा कहा गया है।

· Reviewed Sep 2026 · 10:38–11:25

यह साधना पूर्ण करने के पश्चात प्रतिदिन कम से कम पांच बार, अथवा सात, 11, 21 या 27 बार इसका पाठ करते रहना चाहिए, निर्विघ्न और निरंतर। प्रत्येक दिन जब भी आप आसन पर बैठेंगे, तो सर्वप्रथम इसी मंत्र का जप करेंगे, चाहे पांच बार कीजिए या 27 बार, जितनी आपकी शक्ति और सामर्थ्य हो। इस मंत्र के जागरण के प्रभाव से, भगवान दत्तात्रेय की कृपा से, 64 कोटि के मंत्र चलते हैं — यानी हर प्रकार के मंत्र जागृत और चलायमान हो जाते हैं, प्रभाव देने लगते हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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