दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र अनुष्ठान — दरिद्रता के दहन की मास भर की विधि
नाग केसर और शिव स्तोत्र का मास भर का प्रयोग, जो दरिद्रता और रोग से मुक्ति दिलाने वाला कहा गया है।
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दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र अनुष्ठान: उद्देश्य, आरंभ का दिन और पाठ का समय
सिद्धि की आवश्यकता नहीं; शिवरात्रि या प्रदोष से लगातार पाठ
वक्ता कहते हैं कि जब दरिद्रता घर कर जाती है तो परिवार अन्न, धन, वस्त्र ही नहीं, छोटी से छोटी इच्छा की पूर्ति के लिए भी तरसता है और गृह स्वामी दैनिक जीवन के साधन भी पूरे नहीं कर पाता; इस दारिद्र्य के दहन के लिए वे भगवान सदाशिव के दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र की साधना और अनुष्ठान बताते हैं। इसे किसी भी महीने की मासिक शिवरात्रि या प्रदोष से आरंभ किया जा सकता है, और महाशिवरात्रि का संयोग मिल जाए तो अति उत्तम है। इस स्तोत्र को पहले सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं — बस लगातार पाठ करना है — हालांकि साथ में एक विधान करने से यह जल्दी प्रभाव देने लगता है। पाठ मुख्यतः दो समय होता है: सुबह 8 बजे से पहले, या शाम को गोधूलि बेला में, प्रदोष काल के आसपास।
वक्ता कहते हैं कि जब दरिद्रता घर कर जाती है तो परिवार न सिर्फ अन्न, धन, वस्त्र के लिए बल्कि अपनी छोटी से छोटी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी तरस कर रह जाता है; गृह स्वामी दैनिक जीवन के साधन भी पूर्ण नहीं कर पाता। इस दारिद्र्य के दहन के लिए, वे कहते हैं, भगवान सदाशिव के दारिद्र्य दहन स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। का उपयोग — उसकी साधना, उसका अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। — करना चाहिए, और वे इसका पूरा विधि-विधान बताते हैं। इसे किसी भी महीने की मासिक शिवरात्रि या प्रदोष से आरंभ किया जा सकता है; और महाशिवरात्रि का संयोग मिल रहा हो तो अति उत्तम है। वे कहते हैं कि इस स्तोत्र को पहले सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है — वस्तुतः लगातार इसका पाठ करना है। कुछ विधान है जिसके साथ करने पर यह ज्यादा जल्दी प्रभाव देना आरंभ कर देता है। पाठ मुख्य रूप से दो समय करना चाहिए: सुबह कर रहे हैं तो 8 बजे से पहले; शाम को कर रहे हैं तो गोधूलि बेलासांयकाल का गोधूलि समय — परंपरागत रूप से आकर्षण प्रयोगों हेतु उपयुक्त माना जाता है। में, यानी प्रदोष काल में — गोधूलि और प्रदोष के आसपास के समय में।
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र अनुष्ठान का मास भर का नाग केसर विधान
संकल्प, मुट्ठी भर नाग केसर, मंदिर में अर्पण, दाने धन के स्थान पर, समापन पर गौ भोजन
वक्ता का दैनिक विधान: घर का दैनिक पूजन पूर्ण करें, सदाशिव से संकल्प लें कि घर-परिवार की दरिद्रता समाप्त हो और धन-धान्य की वृद्धि हो — रोग और दुख की मुक्ति भी जोड़ें, क्योंकि रोग भी एक प्रकार की दरिद्रता है — फिर आसन पर बैठकर एक मुट्ठी नाग केसर हाथ में रखकर दारिद्र्य दहन स्तोत्र का कम से कम 8, उत्तम 16 बार पाठ करें और नाग केसर पीले कपड़े या थैली में गांठ लगाकर रखें। फिर थोड़ी मिश्री डला जल का लोटा (संभव हो तो दूध भी), घी के दो दीपक, पुष्प और बिल्व पत्र लेकर, जिस घर में रहते हैं — किराए का ही क्यों न हो — उसकी चौखट को लोटे से स्पर्श कराकर शिव मंदिर जाएं: दोनों दीपक जलाएं, अभिषेक और श्रृंगार करें, गणपति, गौरी, नंदी और स्कंद पर जल की धार दें (गणपति को दूर्वा, बाकी को बिल्व पत्र और पुष्प, शमी पत्र मिले तो शिवलिंग पर), पोटली खोलकर कामना दोहराएं और पूरा नाग केसर शिवलिंग पर चढ़ा दें। दो-तीन दाने उठाकर घर लाएं और धन रखने के स्थान पर रखें; वही कपड़ा प्रतिदिन प्रयोग होता है। यह शिवरात्रि से अगले महीने की मासिक शिवरात्रि तक — पूरे एक मास (जैसे फाल्गुन महाशिवरात्रि से चैत्र की मासिक शिवरात्रि) — प्रतिदिन चलता है, और अंतिम दिन यथाशक्ति गौ वंश को भोजन कराया जाता है, ₹100 का ही सही, आवारा पशु को हो तो अति उत्तम।
वक्ता कहते हैं कि सर्वप्रथम घर में जो दैनिक पूजन हो रहा है उसे पूर्ण कर लें। फिर संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लें: "हे सदाशिव, मेरे घर में, मेरे परिवार में जो दरिद्रता बनी हुई है वह समाप्त हो और आपकी कृपा से धन-धान्य की वृद्धि हो।" रोग भी, वे कहते हैं, कहीं न कहीं एक प्रकार की दरिद्रता है, इसलिए उसी संकल्प में रोग और दुख से मुक्ति की कामना भी करें। इसके बाद ही पाठ करना है। इसमें पूजन की दुकान से मिलने वाले नाग केसरएक सूखी पुष्प-कली, जो समृद्धि के प्रयोगों में धन के साथ रखी जाती है अथवा हवन में अर्पित की जाती है। का प्रयोग होता है: पीले कपड़े की छोटी सी थैली बना लें या पीला कपड़ा रख लें, और प्रतिदिन एक मुट्ठी के हिसाब से जितना अट जाए उतना ले आएं। अपने स्थान पर, अपने आसन पर बैठें, नाग केसर मुट्ठी में रखें और दारिद्र्य दहन स्तोत्र का पाठ करें — कम से कम 8 बार, 16 बार अति उत्तम। फिर नाग केसर पीले कपड़े में रखकर गांठ लगा दें। सुबह कर रहे हैं तो, वे कहते हैं, अब एक लोटा जल लें जिसमें थोड़ी मिश्रीमिश्री, जो नैवेद्य के रूप में अर्पित की जाती है। डाल दें — संभव हो तो दूध भी — घी के दो दीपक, पुष्प और बिल्वभगवान शिव से संबद्ध पवित्र बेल वृक्ष — इसके नीचे साधना की जाती है, इसकी लकड़ी बंधन-मुक्ति अनुष्ठान में घी व तिल की आहुति के लिए हवन-सामग्री के रूप में प्रयुक्त होती है, तथा इसका त्रिदल पत्र (बिल्वपत्र) शिव को अर्पित किया जाने वाला मुख्य द्रव्य है। पत्र लेकर शिव मंदिर की ओर चलें। जाने से पहले जिस घर में रह रहे हैं उसकी चौखट को लोटे से स्पर्श करा लें — भले घर किराए का हो, जितना क्षेत्र आपका है, जिसका आप पैसा देते हैं, उसकी चौखट। मंदिर में सर्वप्रथम घी के दोनों दीपक प्रज्वलित करें, कपड़े में बंधा नाग केसर साथ लेकर जाएं। फिर शिव जी का अभिषेकजल और अन्य निर्धारित द्रव्यों से देवता की प्रतिमा या प्रतीक का विधिवत स्नान कराना। करें और दीपक के बाद उनका श्रृंगार करें। गणपति जी का पूजन जरूर करें: गणेश, गौरी, नंदी और कार्तिकेय जी सभी पर जल की धार दें; गणपति को दूर्वादेवताओं — विशेषकर गणेश जी — को अर्पित की जाने वाली पवित्र घास, नए स्थान पर जाने से पूर्व देवता को औपचारिक निमंत्रण देने की सामग्री में सम्मिलित होती है। और बाकी को बिल्व पत्र व पुष्प चढ़ाएं, जैसा सामर्थ्य हो, जो उपलब्ध हो। शमीउपाय-अनुष्ठानों में प्रयुक्त एक पत्ता — परंपरागत रूप से शनिवार को नहीं तोड़ा जाता; शनिवार के अनुष्ठान हेतु आवश्यक हो तो इसे पूर्व शुक्रवार को तोड़ लिया जाता है। पत्र मिल जाए तो वह भी शिवलिंगघर व मंदिरों में पूजित शिव जी का अमूर्त (निराकार) रूप। पर अवश्य अर्पित करें। फिर नाग केसर की पोटली खोलें, अपनी कामना पुनः बोलें, और कपड़े से खोलकर पूरा नाग केसर शिवलिंग पर चढ़ा दें। चढ़ाने के बाद उसमें से कुछ दाने नाग केसर के उठाकर पोटली में पुनः रख लें और घर ले आएं; पोटली घर में धन रखने के स्थान पर रख दें। प्रतिदिन चढ़ाकर लौटते समय जो दो-तीन दाने उठाकर लाएं उन्हें उसी जगह रखते जाएं। अगले दिन से, वे कहते हैं, आज प्रयोग किया वही कपड़ा बार-बार प्रयोग किया जा सकता है। यह काम, वे कहते हैं, शिवरात्रि से आरंभ करके कम से कम अगली मासिक शिवरात्रि तक — पूरे एक मास — करना है। महाशिवरात्रि से करें तो अति उत्तम; तब भी उस दिन से अगली मासिक शिवरात्रि तक जरूर करें — यानी फाल्गुन की महाशिवरात्रि से आरंभ किया तो चैत्र में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि पर पूर्ण करना है। अंतिम दिन, उस अगली शिवरात्रि पर, यथाशक्ति गौ वंश को भोजन दें, सीधे या किसी गौशाला में; जरूरी नहीं कि ₹10,000 या ₹5,000 का दें — ₹100 का दीजिए, लेकिन दीजिए। आवारा गौ वंश को — बैल, सांड या गौ माता, जो मिल जाए — भोजन कराएं तो अति उत्तम।
गंभीर रोग या अभिचार बाधा में दारिद्र्य दहन प्रयोग में बिल्व गिरी
दूसरा प्रयोग: प्रतिदिन एक बिल्व गिरी, शिवलिंग पर छोड़ दी जाती है
वक्ता दूसरा प्रयोग बताते हैं जब रोग बहुत अधिक हो और बिल्कुल पीछा न छोड़ रहा हो, घर में सभी को कुछ न कुछ कष्ट हो — और तब भी जब धन की समस्या के साथ अभिचारिक बाधा हो। इसमें बिल्व वृक्ष का सूखा गोंद — बेल गोंद या बिल्व गिरी, जो पूजन की दुकान पर मिलता है — प्रयोग होता है: प्रतिदिन एक, नाग केसर के साथ। बस इतना अंतर है कि नाग केसर मुट्ठी में लेते समय एक बिल्व गिरी भी लें, कपड़े पर रखें और मंदिर ले जाएं; नाग केसर की तरह इसे वापस नहीं लाना — शिवलिंग पर चढ़ाकर वहीं छोड़ देना है, और रोग से मुक्ति की कामना करनी है।
वक्ता कहते हैं कि दूसरा प्रयोग विशेष रूप से तब करना चाहिए जब रोग बहुत अधिक हो — जब रोग बिल्कुल पीछा ही न छोड़ रहा हो। यहां बिल्वभगवान शिव से संबद्ध पवित्र बेल वृक्ष — इसके नीचे साधना की जाती है, इसकी लकड़ी बंधन-मुक्ति अनुष्ठान में घी व तिल की आहुति के लिए हवन-सामग्री के रूप में प्रयुक्त होती है, तथा इसका त्रिदल पत्र (बिल्वपत्र) शिव को अर्पित किया जाने वाला मुख्य द्रव्य है। वृक्ष के गूदे का प्रयोग होता है: सूखा हुआ बेल गोंद, जिसे बिल्व गिरी कहते हैं, जो पूजन का सामान मिलने वाली दुकान पर मिलता है। प्रतिदिन एक बिल्व गिरी की आवश्यकता होगी, नाग केसर के साथ। रोग बहुत अधिक हो, घर में सभी के शरीर पीड़ित हों, कुछ न कुछ कष्ट हो — या, वे कहते हैं, अभिचार बाधा इत्यादि भी हो — तो भी यही प्रयोग करना है। यानी धन के साथ-साथ अभिचार की बाधा हो तो भी यही प्रयोग। बस इतना ध्यान रखना है कि नाग केसर जब मुट्ठी में लें तो उसमें एक बिल्व गिरी भी ले लें, कपड़े के ऊपर उसे भी रखें और साथ लेकर जाएं। लेकिन बिल्व गिरी को वापस नहीं लाना है: शिवलिंगघर व मंदिरों में पूजित शिव जी का अमूर्त (निराकार) रूप। पर चढ़ाने के बाद उसे वहीं छोड़ देना है, और रोग से मुक्त होने की कामना भी करनी है।
दारिद्र्य दहन अनुष्ठान के अभिषेक में महामृत्युंजय 108 नामावली
बड़े लोटे से पतली धार, या मंदिर और घर के जल से भरा जलहरी का लोटा
वक्ता कहते हैं कि संभव हो तो दारिद्र्य दहन पाठ के साथ मंदिर में महामृत्युंजय महादेव की 108 नामावली का पाठ करते हुए शिव जी का अभिषेक करें: थोड़ा बड़ा लोटा लें, पहले शिवलिंग के आगे दोनों दीपक प्रज्वलित करें, फिर पतली धार से जल देते हुए 108 नाम पढ़ें — आसान है, वे कहते हैं, कर सकते हैं। या फिर शिवलिंग के ऊपर टंगी जलहरी के छिद्र वाले लोटे को मंदिर के जल की बाल्टी और घर से लाए जल से भर दें और फिर पाठ करें। यह भी करेंगे, वे कहते हैं, तो भगवान शिव बहुत जल्दी सुनेंगे।
वक्ता कहते हैं कि दारिद्र्य दहन पाठ के साथ-साथ संभव हो तो महामृत्युंजय महादेव की 108 नामावलीदेवता के नामों की लिखित सूची — जैसे दुर्गा के 108 नाम, हवन में प्रत्येक नाम पर पृथक आहुति देने की सुविधा हेतु अलग से लिखे जाते हैं। का पाठ करते हुए वहां शिव जी का अभिषेकजल और अन्य निर्धारित द्रव्यों से देवता की प्रतिमा या प्रतीक का विधिवत स्नान कराना। भी करें। इसके लिए लोटा थोड़ा बड़ा रखना होगा। पहले मंदिर में शिवलिंगघर व मंदिरों में पूजित शिव जी का अमूर्त (निराकार) रूप। के आगे दोनों दीपक प्रज्वलित कर दें; फिर जल की धार देते समय धार पतली रखें और साथ में महामृत्युंजय महादेव के 108 नामों का पाठ करें। आसान है, वे कहते हैं — कर सकते हैं। या फिर शिव जी के ऊपर जो जलहरी टंगी होती है उसमें छिद्र होता है: उस लोटे में बाल्टी से मंदिर का ही जल भर दें और उसमें घर से ले गया जल भी डाल दें, और उसके बाद पाठ करें। यह भी करेंगे, वे कहते हैं, तो भगवान शिव बहुत जल्दी सुनेंगे।
सावधानी: दारिद्र्य दहन प्रयोग सुबह उत्तम, क्योंकि कई मंदिर शाम को अभिषेक नहीं करने देते
जल न चढ़ाने दें तो दीपक और नाग केसर ही पर्याप्त
वक्ता कहते हैं कि यह काम सुबह करें तो अति उत्तम, क्योंकि शाम के समय बहुत से मंदिरों में अभिषेक नहीं करने दिया जाता। ऐसी स्थिति में भी जाकर दीप प्रज्वलित करके नाग केसर और बिल्व गिरी चढ़ाकर आ सकते हैं; जल भी न चढ़ाने दें तो कोई बात नहीं। सुविधा अनुसार मास भर यह प्रयोग करें और महादेव से निवेदन करें, वे कहते हैं: वे शीघ्र सुनेंगे, कामना पूर्ण करेंगे, धन प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होगा, और व्यक्ति व उसके परिवार की दरिद्रता से अवश्य मुक्ति होगी।
वक्ता कहते हैं कि यह काम सुबह करें तो अति उत्तम, क्योंकि शाम के समय बहुत सारे मंदिरों में अभिषेकजल और अन्य निर्धारित द्रव्यों से देवता की प्रतिमा या प्रतीक का विधिवत स्नान कराना। नहीं करने दिया जाता। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, आप जाकर दीप प्रज्वलित करके वहां नाग केसरएक सूखी पुष्प-कली, जो समृद्धि के प्रयोगों में धन के साथ रखी जाती है अथवा हवन में अर्पित की जाती है। और बिल्व गिरी चढ़ाकर आ सकते हैं। जल भी न चढ़ाने दें तो भी कोई बात नहीं। तो सुविधा अनुसार यह प्रयोग मास भर करें और महादेव से निवेदन करें; वे शीघ्र ही सुनेंगे, कामना पूर्ति करेंगे, धन प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। वे कहते हैं कि आपकी और आपके परिवार की दरिद्रता से अवश्य मुक्ति हो जाएगी।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।