दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र अनुष्ठान — दरिद्रता के दहन की मास भर की विधि

नाग केसर और शिव स्तोत्र का मास भर का प्रयोग, जो दरिद्रता और रोग से मुक्ति दिलाने वाला कहा गया है।

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01

घर की दरिद्रता के दहन हेतु दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र अनुष्ठान

सदाशिव का दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र, जब घर अन्न, धन, वस्त्र और छोटी-छोटी इच्छाओं तक के लिए तरस जाए

· Reviewed Sep 2026 · 00:06–00:35

वक्ता कहते हैं कि जब दरिद्रता घर कर जाती है तब लोग न सिर्फ अन्न, धन और वस्त्र के लिए, बल्कि अपनी छोटी से छोटी इच्छा की पूर्ति के लिए भी तरस कर रह जाते हैं, और घर का गृह स्वामी दैनिक जीवन के साधन जुटा पाने में सक्षम नहीं हो पाता। इसके लिए वे भगवान सदाशिव के दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र की साधना और अनुष्ठान करने को कहते हैं।

02

मासिक शिवरात्रि, प्रदोष या श्रेष्ठतः महाशिवरात्रि से अनुष्ठान का आरंभ

किसी भी महीने की शिवरात्रि या प्रदोष, और यदि संयोग महाशिवरात्रि का बने तो अति उत्तम

· Reviewed Sep 2026 · 00:36–00:47

वक्ता कहते हैं कि यह अनुष्ठान किसी भी महीने की मासिक शिवरात्रि या प्रदोष से आरंभ किया जा सकता है, परंतु यदि महाशिवरात्रि का संयोग प्राप्त हो रहा हो तो वह अति उत्तम है।

वक्ता कहते हैं कि यह अनुष्ठान किसी भी महीने की मासिक शिवरात्रि से, अथवा प्रदोष से आरंभ किया जा सकता है। यदि संयोग ऐसा बन जाए कि इसे महाशिवरात्रि से आरंभ किया जा सके, तो वे कहते हैं कि वह सबसे उत्तम है।

03

सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं; दिन में दो बार — 8 बजे से पहले और प्रदोष काल में

क्या दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र को प्रयोग से पहले सिद्ध करना पड़ता है, और इसका पाठ कब करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:48–01:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस स्तोत्र को पहले सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है — वस्तुतः इसका लगातार पाठ करना है। वे जोड़ते हैं कि कुछ विधान हैं, जिनके साथ यदि यह किया जाए तो प्रभाव शीघ्र आरंभ हो जाता है, और यह कि इसका पाठ प्रमुख रूप से दिन में दो समय करना चाहिए — सुबह 8 बजे से पहले, और शाम को गोधुली बेला में, यानी प्रदोष काल के आसपास।

04

दैनिक पूजन पूर्ण करके दरिद्रता और रोग दोनों के लिए संकल्प

पहले घर का दैनिक पूजन, फिर दरिद्रता और रोग दोनों को नाम लेकर संकल्प, क्योंकि रोग भी एक प्रकार की दरिद्रता है

· Reviewed Sep 2026 · 01:18–01:47

वक्ता कहते हैं कि सर्वप्रथम घर में जो दैनिक पूजन किया जा रहा है उसे पूर्ण कर लेना चाहिए। उसके पश्चात संकल्प लेना चाहिए कि हे सदाशिव, मेरे घर और परिवार में जो दरिद्रता की उपस्थिति बनी हुई है वह समाप्त हो और आपकी कृपा से धन-धान्य की वृद्धि हो। वे जोड़ते हैं कि रोग भी कहीं न कहीं एक प्रकार की दरिद्रता है, इसलिए उसी संकल्प में रोग और दुख से मुक्ति की कामना भी कर लेनी चाहिए।

05

मुट्ठी में नाग केसर रखकर स्तोत्र का आठ या सोलह बार पाठ

आसन पर बैठकर एक मुट्ठी नाग केसर हाथ में रखकर स्तोत्र का आठ बार, या अति उत्तम रूप से सोलह बार पाठ

· Reviewed Sep 2026 · 01:48–02:45

वक्ता कहते हैं कि इसमें नाग केसर का प्रयोग करना चाहिए, जो पूजन की दुकान पर मिल जाता है — या तो पीले कपड़े की एक छोटी सुंदर थैली बना लें या पीला कपड़ा रख लें, और प्रतिदिन एक मुट्ठी नाग केसर का प्रयोग करें। अपने आसन पर बैठकर नाग केसर को मुट्ठी में रखकर दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र का कम से कम आठ बार, और अति उत्तम रूप से सोलह बार पाठ करना चाहिए, उसके पश्चात नाग केसर को पीले कपड़े में बाँधकर गाँठ लगा देनी चाहिए।

06

चौखट स्पर्श कराकर मिश्री-युक्त जल, घी के दीपक और बिल्व पत्र मंदिर ले जाना

मिश्री मिला एक लोटा जल, घी के दो दीपक, पुष्प और बिल्व पत्र — और निकलने से पहले लोटे से घर की चौखट का स्पर्श

· Reviewed Sep 2026 · 02:46–03:20

वक्ता कहते हैं कि यदि यह सुबह के समय कर रहे हों तो एक लोटा जल लें, उसमें थोड़ी मिश्री (और संभव हो तो दूध भी) डालें, घी के दो दीपक, पुष्प और बिल्व पत्र लेकर शिव मंदिर की ओर जाएँ। जाने से पहले जिस घर में रह रहे हैं — भले वह किराए का ही क्यों न हो — उसकी चौखट, यानी जिस क्षेत्र में रहते हैं और जिसका पैसा देते हैं उसकी चौखट, को लोटे से स्पर्श करा लेना चाहिए।

07

दीपक प्रज्वलन, अभिषेक और श्रृंगार, फिर शिवलिंग पर नाग केसर अर्पण

दोनों दीपक प्रज्वलित, अभिषेक और श्रृंगार, गणपति, गौरी, नंदी और स्कंद का पूजन, फिर पूरा नाग केसर शिवलिंग पर अर्पित

· Reviewed Sep 2026 · 03:21–04:00

वक्ता कहते हैं कि मंदिर में सर्वप्रथम घी के दोनों दीपक प्रज्वलित करें, फिर कपड़े में बँधा नाग केसर लेकर जाएँ, शिव जी का अभिषेक करें और उसके पश्चात श्रृंगार करें, तथा गणपति, गौरी, नंदी और स्कंद जी सभी के ऊपर जल की धार दें — गणपति जी को दुर्बा और शेष को बिल्व पत्र तथा पुष्प अर्पित करें, और शमी जी का पत्र मिल जाए तो वह भी शिवलिंग पर अवश्य चढ़ाएँ। उसके बाद नाग केसर की पोटली खोलकर, अपनी कामना पुनः बोलकर, पूरा नाग केसर शिवलिंग पर अर्पित कर देना चाहिए।

08

कुछ दाने घर लाकर धन के स्थान पर रखना और वही कपड़ा बार-बार प्रयोग करना

कुछ दाने वापस उठाकर घर में धन रखने के स्थान पर, और वही पीला कपड़ा प्रतिदिन दोबारा प्रयोग

· Reviewed Sep 2026 · 04:01–04:29

वक्ता कहते हैं कि नाग केसर चढ़ाने के पश्चात उसमें से कुछ दाने वापस उठाकर पोटली में रख लेने चाहिए और उन्हें घर लाकर उस स्थान पर रख देना चाहिए जहाँ घर में धन रखा जाता है। जिस दिन का कपड़ा प्रयोग किया गया वह रख दिया जाता है, और अगले दिन से वही एक कपड़ा बार-बार प्रयोग किया जा सकता है, तथा मंदिर से लौटकर प्रतिदिन दो-तीन दाने उसी स्थान पर रखते जाना चाहिए।

09

एक शिवरात्रि से अगले मास की शिवरात्रि तक प्रतिदिन जारी रखना

एक शिवरात्रि से अगले मास की शिवरात्रि तक प्रतिदिन — पूरा एक मास, जैसे फाल्गुन की महाशिवरात्रि से चैत्र की मासिक शिवरात्रि तक

· Reviewed Sep 2026 · 04:30–04:54

वक्ता कहते हैं कि यह काम शिवरात्रि से आरंभ करके कम से कम अगले मास की मासिक शिवरात्रि तक जारी रखना चाहिए — यानी पूरे एक मास तक। यदि महाशिवरात्रि से आरंभ किया जाए तो वह अति उत्तम है, तब भी उस दिन से अगली मासिक शिवरात्रि तक अवश्य करना चाहिए; जैसे फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि से आरंभ करें तो चैत्र मास में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि में इसे पूर्ण करना चाहिए।

10

अंतिम दिन यथाशक्ति गौ वंश को भोजन कराना

अंतिम दिन यथाशक्ति गौ वंश को भोजन — गौशाला में या अन्यत्र, सौ रुपये का भी पर्याप्त, और आवारा पशु हों तो अति उत्तम

· Reviewed Sep 2026 · 04:55–05:23

वक्ता कहते हैं कि जिस दिन अनुष्ठान पूर्ण हो, उस दिन यथाशक्ति गौ वंश को भोजन देना चाहिए — या तो सीधे, या फिर किसी गौशाला में। यह आवश्यक नहीं कि दस हज़ार या पाँच हज़ार का दिया जाए, सौ रुपये का भी पर्याप्त है, पर देना अवश्य चाहिए। वे जोड़ते हैं कि यदि भोजन आवारा पशुओं को कराया जाए — चाहे बैल हो, सांड हो या गौ माता — तो अति उत्तम है।

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11

रोग या अभिचार बाधा में नाग केसर के साथ बिल्व गिरी जोड़ना

रोग या अभिचार बाधा होने पर नाग केसर के साथ एक बिल्व गिरी, जिसे वापस नहीं लाना — शिवलिंग पर ही छोड़ देना है

· Reviewed Sep 2026 · 05:24–06:28

वक्ता कहते हैं कि दूसरा प्रयोग विशेष रूप से तब करना चाहिए जब रोग बहुत अधिक हो और बिल्कुल पीछा ही न छोड़ रहा हो — तब बिल्व गिरी (बिल्व वृक्ष का सूखा हुआ गोंद, जो पूजन की दुकान पर मिलता है) जोड़नी चाहिए, प्रतिदिन एक, नाग केसर के साथ। वे कहते हैं कि यह तब भी लागू होता है जब धन की समस्या के साथ-साथ अभिचार की बाधा भी हो — एक बिल्व गिरी नाग केसर के साथ लेकर मंदिर जाना है। नाग केसर के विपरीत बिल्व गिरी वापस नहीं लानी है — उसे शिवलिंग पर चढ़ाकर वहीं छोड़ देना है, और रोग से मुक्ति की कामना भी करनी है।

12

जलधारा देते समय महामृत्युंजय महादेव के 108 नामों का पाठ

शिव जी के अभिषेक में पतली धार देते हुए महामृत्युंजय महादेव की 108 नामावली का पाठ

· Reviewed Sep 2026 · 06:29–06:57

वक्ता सुझाते हैं कि यदि संभव हो तो दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र के साथ-साथ महामृत्युंजय महादेव की 108 नामावली का पाठ करते हुए वहाँ शिव जी का अभिषेक करें — इसके लिए लोटा कुछ बड़ा रखना होगा, पहले दोनों दीपक प्रज्वलित कर लें, और फिर जल की पतली धार देते हुए 108 नामों का पाठ करें।

13

जलहरी के छिद्र वाले लोटे में मंदिर का और घर का जल एक साथ भरना

जलहरी के छिद्र के ऊपर रखे लोटे को मंदिर के जल और घर से लाए जल से भरकर पाठ करना

· Reviewed Sep 2026 · 06:58–07:14

वक्ता एक विकल्प बताते हैं कि शिवलिंग के ऊपर जो जलहरी टँगी होती है, उसके छिद्र वाले लोटे में मंदिर की बाल्टी से मंदिर का ही जल और घर से लाया हुआ जल भरकर, उसके बाद पाठ किया जा सकता है। वे कहते हैं कि यह भी करेंगे तो भगवान शिव बहुत जल्दी आपकी सुनेंगे।

14

सुबह श्रेष्ठ; शाम को जल अर्पण की रोक हो तो केवल दीप और अर्पण से भी काम चलेगा

सुबह करना अति उत्तम, क्योंकि कई मंदिरों में शाम को अभिषेक नहीं करने दिया जाता; ऐसी स्थिति में केवल दीप और नाग केसर अर्पण भी पर्याप्त

· Reviewed Sep 2026 · 07:15–07:43

वक्ता कहते हैं कि यह काम सुबह करें तो अति उत्तम है, क्योंकि शाम के समय बहुत सारे मंदिरों में अभिषेक नहीं करने दिया जाता। ऐसी स्थिति में भी जाकर दीप प्रज्वलित करके नाग केसर (और बिल्व गिरी, यदि लागू हो) चढ़ाकर आया जा सकता है — और यदि जल भी न चढ़ाने दें, तो भी कोई बात नहीं। वे कहते हैं कि सुविधा अनुसार यह प्रयोग मास भर करें और महादेव से निवेदन करें, वे शीघ्र ही सुनेंगे, कामना पूर्ति करेंगे, धन प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होगा और व्यक्ति तथा उसके परिवार की दरिद्रता से मुक्ति हो जाएगी।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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