बगलामुखी साधना: उद्देश्य के अनुसार जप का सही समय
भगवती पीतांबरा साधना के समय पर नोट्स।
8 notes, in the order they are taught. Jump to any one.
महाविद्या साधना के लिए निश्चित तिथि, योग या नक्षत्र चाहिए या नहीं: शास्त्र के दो मत
किस मत पर चलना है यह साधक का अपना निर्णय
वक्ता कहते हैं कि महाविद्या साधना करने वाला सबसे पहले यह जान ले कि तंत्र शास्त्र में दो ऐसे मत मिलते हैं जो कहीं न कहीं एक-दूसरे के विरोध में हैं। एक मत हर महाविद्या के लिए अलग-अलग तिथि, योग और नक्षत्र बताता है। दूसरा मत कहता है कि महाविद्या साधना के लिए किसी देश, काल या परिस्थिति को देखने की आवश्यकता ही नहीं है, पंचक का विचार किए बिना भी साधना की जा सकती है। इनमें से किस मत को मानकर चलना है, वे कहते हैं, यह हर साधक का अपना अलग निर्णय है।
वक्ता उस प्रश्न से शुरू करते हैं जो सबके मन में आता है: दिन-रात के 24 घंटों में वह कौन सा समय है जब भगवती पीताम्बरा"पीत वस्त्रधारिणी" — भगवती बगलामुखी का एक नाम। का जप करने पर सबसे तीव्र प्रभाव मिले, ताकि एक बार करने पर सौ गुना फल मिले। उत्तर से पहले वे कहते हैं कि किसी भी महाविद्या की साधना करने वाला सबसे पहले यह जान ले कि तंत्र शास्त्र में दो विषय मिलते हैं, और दोनों कहीं न कहीं एक-दूसरे के विरोधाभास में हैं। पहला विषय है हर महाविद्या से संबंधित अलग-अलग तिथिचंद्र पंचांग की एक तिथि — कुछ प्रतिमाओं (जैसे शिवलिंग) को प्रतिदिन स्नान आवश्यक है, जबकि अन्य को केवल अपने निर्धारित साप्ताहिक दिन या तिथि पर।, योग, नक्षत्रअनुष्ठानों का समय निर्धारित करने हेतु प्रयुक्त 27 चंद्र नक्षत्रों में से एक — हंडी प्राप्ति जैसी कुछ तांत्रिक प्रक्रियाएँ किसी विशेष नक्षत्र की अवधि में ही संपन्न करनी होती हैं। आदि का वर्णन। दूसरा कहता है कि महाविद्या साधना के लिए किसी देश, काल या परिस्थिति को देखने की आवश्यकता ही नहीं है; पंचक आदि का विचार किए बिना भी साधना की जा सकती है। शास्त्र के अनुसार चलें तो, वे कहते हैं, दोनों नियम मिलते हैं। इनमें से किस विषय को मानकर आप और वे चलते हैं, यह अलग बात हो जाती है और साधक पर छोड़ी गई है।
एक ही बगलामुखी स्तोत्र, अलग-अलग समय: संकल्प का उद्देश्य तय करता है कब जप करें
प्रभाव संकल्प में निहित उद्देश्य के अनुसार मिलता है
वक्ता कहते हैं कि असली प्रश्न यह है कि भगवती पीताम्बरा की जो भी साधना की जा रही है, उसके पीछे उद्देश्य क्या है, क्योंकि प्रभाव संकल्प में निहित उद्देश्य के अनुसार ही मिलता है। मंत्र या स्तोत्र एक ही रहता है, पर हर उद्देश्य के लिए जप का समय अलग हो जाता है और उसी समय के अनुसार प्रभाव भी अलग हो जाता है। अंत में वे यही कहते हैं कि केवल संकल्प और समय बदलना है, और उद्देश्य के अनुरूप समय पर स्तोत्र का प्रयोग करने पर प्रभाव अत्यंत तीव्र और अत्यंत शीघ्र होता है।
समय पर शास्त्र के दो मत रखने के बाद वक्ता कहते हैं कि तब यह प्रश्न आता है कि भगवती पीताम्बरा"पीत वस्त्रधारिणी" — भगवती बगलामुखी का एक नाम। से संबंधित जो भी साधना हम कर रहे हैं, उसके पीछे उद्देश्य क्या है। साधना का प्रभाव, वे कहते हैं, उसमें जो उद्देश्य सन्निहित है उसी के अनुसार प्राप्त होगा। वे उदाहरण देते हैं कि किसी ने संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लिया कि शत्रु द्वारा किए गए अभिचार के नाश के लिए भगवती पीतांबरा के इस स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। का पाठ कर रहे हैं। मंत्र, वे कहते हैं, एक ही रहेगा। लेकिन जप के उद्देश्य के अनुसार सबका समय अलग हो जाएगा, और उसी समय के अनुसार उसका प्रभाव भी अलग हो जाएगा। यही विषय, वे कहते हैं, वे पूरी बात में स्पष्ट कर रहे हैं। अंत में वे यही बात दोहराते हैं: उन्होंने एक ही स्तोत्र का एक उदाहरण दिया है, स्तोत्र एक ही रहेगा; केवल संकल्प और समय बदल देना है। इस प्रकार भगवती पीतांबरा के स्तोत्र-मंत्र जप का अलग-अलग समय में प्रयोग करने पर उसका प्रभाव समय के अनुसार और संकल्प के अनुसार अत्यंत तीव्र और अत्यंत शीघ्र होगा, और वे आशा करते हैं कि लोग अपने उद्देश्य शीघ्र अति शीघ्र प्राप्त कर सकेंगे।
शत्रु के अभिचार के नाश हेतु बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम का समय
रात्रि में, नौ बजे के बाद
पहले उदाहरण के रूप में वक्ता कहते हैं कि जब शत्रु ने परकृत्या प्रयोग किया हो और उसका नाश करना हो, तो उस अभिचार के नाश का संकल्प लेकर रुद्रयामल तंत्र से भगवती पीताम्बरा के अष्टोत्तरशतनाम का पाठ किया जाता है। यह, वे कहते हैं, निश्चित समय पर करना है: रात के समय, 9:00 बजे के बाद।
वक्ता का पहला उदाहरण अभिचार नाश का है। यदि शत्रु ने आप पर परकृत्या प्रयोग किया है और आप उसका नाश करना चाहते हैं, तो उसी आशय का संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लेकर रुद्रयामल तंत्र से आए भगवती पीताम्बरा"पीत वस्त्रधारिणी" — भगवती बगलामुखी का एक नाम। के अष्टोत्तरशतनामकिसी देवता के 108 नामों का पाठ — सहस्रनाम (1000 नाम) से छोटा, और प्रायः संगत हवन या दैनिक जप की गणना हेतु प्रयुक्त। स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। का पाठ किया जाता है। इस उद्देश्य के लिए, वे कहते हैं, निश्चित समय पर कीजिए: रात के समय कीजिए, और 9:00 बजे के बाद कीजिए।
विशेष स्थिति: मारण से जुड़ा अभिचार जो शरीर पर घात कर चुका हो
रात्रि का विशेष समय और संकल्प के शब्द
वक्ता कहते हैं कि यदि अभिचार मारण से संबंधित हो और किसी के शरीर पर काफी अधिक घात कर चुका हो, तो पाठ रात 11:00 बजे से शुरू करना चाहिए और 11:00 बजे से 2:00–2:30 बजे के बीच करना चाहिए। इसे परतंत्र प्रयोग नाश, परकृत्या प्रयोग नाश और शत्रुओं के सब हानिकारक कर्मों के विनाश के संकल्प के साथ करना है, जिसमें अर्धरात्रि का समय और रुद्रयामल तंत्र से भगवती पीताम्बरा बगला के अष्टोत्तरशतनाम का नाम लिया जाता है। संकल्प के बाद जप करके विधि-विधान के अनुसार भगवती को समर्पण किया जाता है।
फिर वक्ता अभिचार-नाश पाठ की एक विशेष स्थिति बताते हैं। यदि अभिचार मारण से संबंधित हो, और किसी के शरीर पर काफी अधिक घात कर चुका हो, तो ऐसे समय में पाठ रात 11:00 बजे से करना चाहिए, रात 11:00 बजे से 2:00–2:30 बजे के बीच में। इस समय में जो भी पाठ किया जाए, वे कहते हैं, संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लेकर करना है। वे उसके शब्द बताते हैं: परतंत्र प्रयोग नाश हेतु, परकृत्या प्रयोग नाश हेतु, शत्रुओं के सर्व हानिकारक कर्म आदि के विनाश हेतु, अर्धरात्रि में यथाशक्ति — या अर्धरात्रि में इतनी आवृत्ति — "रुद्रयामल तंत्र युक्त भगवती पीताम्बरा"पीत वस्त्रधारिणी" — भगवती बगलामुखी का एक नाम। बगला की अष्टोत्तर शतनामावली का जप मैं करूँगा" (अर्थात अष्टोत्तरशतनामकिसी देवता के 108 नामों का पाठ — सहस्रनाम (1000 नाम) से छोटा, और प्रायः संगत हवन या दैनिक जप की गणना हेतु प्रयुक्त।)। इस प्रकार संकल्प लेने के बाद, वे कहते हैं, जप किया जाता है, और फिर जो विधि-विधान है उसके अनुसार भगवती को समर्पण किया जाता है।
ग्राहक न आने वाली दुकान के लिए बगलामुखी आकर्षण: गोधूलि बेला और हल्दी-नारियल की क्रिया
केवल पाठ से यह संकल्प पूरा नहीं होता
जिस व्यापार में ग्राहक नहीं आ रहे हों, वक्ता कहते हैं कि वहाँ भी रुद्रयामल तंत्र से भगवती के उसी 108 नाम वाले अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का प्रयोग होता है, पर आकर्षण का संकल्प शाम को, गोधूलि बेला में लिया जाता है। यह संकल्प केवल पाठ से पूरा नहीं होता: हरिद्रा (हल्दी) जल को अभिमंत्रित करना है, नारियल की गड़ी को अभिमंत्रित करके काली या कच्ची हल्दी से चारों ओर से वेष्टित करना है, शाम के समय अभिमंत्रित करके दुकान में अलग-अलग जगह लगाना है जिससे ग्राहक आकर्षित हों। जो ग्राहक आएँ उन्हें भगवती पीताम्बरा का नाम लेते हुए चाय-पानी पिलाना चाहिए। वे कहते हैं कि वेष्टन का पूरा विधान अलग है जो वे कभी और बताएँगे, और आकर्षण के लिए कोई गलत प्रयोग नहीं करना है।
वक्ता व्यापार की परेशानी पर आते हैं: ग्राहक नहीं आ रहे, आकर्षण का भाव नहीं है। यहाँ भी, वे कहते हैं, रुद्रयामल तंत्र से भगवती के उसी स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। का प्रयोग होता है, जो 108 नामों का है, अष्टोत्तरशतनामकिसी देवता के 108 नामों का पाठ — सहस्रनाम (1000 नाम) से छोटा, और प्रायः संगत हवन या दैनिक जप की गणना हेतु प्रयुक्त। का। पर आकर्षण का प्रयोग शाम के समय, गोधूलि बेलासांयकाल का गोधूलि समय — परंपरागत रूप से आकर्षण प्रयोगों हेतु उपयुक्त माना जाता है। में करना है; उसी बेला में बैठकर आकर्षण का संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लिया जाता है। यह संकल्प, वे कहते हैं, सिर्फ पाठ से पूर्ण नहीं होगा। कुछ क्रियात्मक कार्य भी करने होंगे। आकर्षण के लिए हरिद्रा जल (हल्दी का जल) को अभिमंत्रित करना है। नारियल की गड़ी को अभिमंत्रित करके काली हल्दी या कच्ची हल्दी से वेष्टित करना है, यानी सब ओर से लगाना है। वह वेष्टन, वे कहते हैं, अलग विधान है, जिसे स्पष्ट रूप से कैसे क्या करना है, वे कभी और बता देंगे। उस वस्तु को शाम के समय अभिमंत्रित करके अपनी दुकान में अलग-अलग जगह लगाना है जिससे ग्राहक आकर्षित हों। जो ग्राहक आएँ उन्हें भगवती पीताम्बरा"पीत वस्त्रधारिणी" — भगवती बगलामुखी का एक नाम। का नाम लेते हुए चाय-पानी पिलाना चाहिए। इस प्रकार, वे कहते हैं, आकर्षण बढ़ता है। वे जोड़ते हैं कि इसमें आकर्षण के लिए कोई गलत प्रयोग नहीं करना है।
बार-बार परेशान करने वाले शत्रुओं पर बगलामुखी विद्वेषण: दोपहर का समय
शत्रुओं में आपस में झगड़ा कराना
वक्ता कहते हैं कि जब शत्रु बार-बार अभिचार करते हों या भौतिक रूप से परेशान करते हों, लड़ाई-झगड़ा और बहुत दिक्कत करते हों, और व्यक्ति यह न चाहे कि भगवती कुछ करें बल्कि स्वयं ऐसा संकल्प लेना चाहे कि शत्रुओं के घर में झगड़ा हो जाए, तो यह विद्वेषण का प्रयोग है। विद्वेषण की क्रियाएँ वे यहाँ नहीं बताएँगे, पर कहते हैं कि इसके लिए दोपहर का समय सर्वश्रेष्ठ है। स्तोत्र वही है; संकल्प बदल गया, समय बदल गया।
वक्ता ऐसी स्थिति बताते हैं जहाँ शत्रु बार-बार अभिचार कर्म करते हों, या जैसा बहुत बार होता है, भौतिक रूप से परेशान करते हों, लड़ाई-झगड़ा करते हों, बहुत दिक्कत करते हों। ऐसे में, वे कहते हैं, व्यक्ति प्रायोगिक विधान चाहता है। वह यह नहीं चाहता कि "भगवती कुछ करें"; वह चाहता है कि स्वयं ऐसा संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लेकर पाठ करे कि उसका अपना लक्ष्य पूरा हो, यानी उनके घर में झगड़ा हो जाए। यही विद्वेषण का प्रयोग करवाना है। विद्वेषण की जो क्रियाएँ होती हैं, वे कहते हैं, उनका वर्णन वे यहाँ नहीं करेंगे। पर समय की बात यह है कि विद्वेषण कराने के लिए दोपहर का समय सर्वश्रेष्ठ होता है; दोपहर के समय में कीजिए। वे फिर वही बात दोहराते हैं: स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। एक ही है, संकल्प बदल गया, समय बदल गया।
केवल कृपा और शरणागति के लिए बगलामुखी जप: कोई भी समय, भोर सर्वश्रेष्ठ
समर्पित साधक के लिए जगदंबा हर क्षण उपस्थित
यह पूछे जाने पर कि यदि केवल भगवती की कृपा चाहिए, सब कार्य सिद्ध हों, जो करना हो भगवती करें, और साधक उनकी शरणागति में है, तब कब जप करें, वक्ता उत्तर देते हैं कि 24 घंटे आपके हैं: जब इच्छा हो तब कर लीजिए, क्योंकि जगदम्बा हर क्षण उपस्थित हैं, और जो उन्हें समर्पित है उसे समय देखने की आवश्यकता नहीं। फिर भी, वे कहते हैं, सुबह नहा-धोकर भोर में 4 से 5 बजे के समय करना सर्वश्रेष्ठ होगा।
फिर वक्ता उस व्यक्ति की बात करते हैं जिसे केवल भगवती की कृपा चाहिए: मेरे सभी कार्य सिद्ध हों, जो करना हो वह भगवती करें, हम उनकी शरणागति में हैं। ऐसा व्यक्ति कब जप करे? उनका उत्तर है कि 24 घंटे आपके हैं। जब इच्छा हो तब कर लीजिए; जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम। हर क्षण उपस्थित हैं। वहाँ फिर कुछ देखना नहीं है, क्योंकि आप उन्हें समर्पित हैं। फिर भी, वे कहते हैं, सुबह नहा-धोकर भोर में 4-5 बजे के समय करेंगे तो वह सर्वश्रेष्ठ होगा।
तंत्र ज्ञान या ब्रह्मास्त्र विद्या के लिए बगलामुखी जप: महानिशीथ काल
विद्या के लिए अर्धरात्रि, सांसारिक कार्यों के लिए नहीं
वक्ता कहते हैं कि यदि जप तंत्र संबंधी ज्ञान की प्राप्ति, तंत्र की विभिन्न विद्याओं की प्राप्ति, या भगवती पीताम्बरा की ब्रह्मास्त्र विद्या का ज्ञान पाने योग्य स्वयं को बनाने के लिए करना हो, तो महानिशीथ काल, यानी अर्धरात्रि 12:00 बजे का समय सर्वश्रेष्ठ है, और जप उसी समय करना चाहिए।
अंतिम उद्देश्य जो वक्ता लेते हैं, वह ज्ञान का है। यदि जप तंत्र संबंधी ज्ञान की प्राप्ति के लिए, तंत्र संबंधी विभिन्न प्रकार की विद्याओं की प्राप्ति के लिए, या भगवती पीताम्बरा"पीत वस्त्रधारिणी" — भगवती बगलामुखी का एक नाम। की ब्रह्मास्त्रतांत्रिक व पौराणिक कथाओं का सर्वोच्च व अंतिम अस्त्र — किसी अद्वितीय व निर्णायक शक्ति वाले प्रयोग या विद्या हेतु प्रतीकात्मक रूप से प्रयुक्त। विद्या संबंधी ज्ञान पाने के योग्य स्वयं को बनाने के लिए करना हो, तो उसके लिए भी एक समय निश्चित है। इसके लिए, वे कहते हैं, महानिशीथ काल, यानी अर्धरात्रि 12:00 बजे का समय सर्वश्रेष्ठ होता है। उसी समय जप करना चाहिए।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।