बगलामुखी साधना: उद्देश्य के अनुसार जप का सही समय

भगवती पीतांबरा साधना के समय पर नोट्स।

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The notes
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01

महाविद्या साधना के लिए निश्चित तिथि, योग या नक्षत्र चाहिए या नहीं: शास्त्र के दो मत

किस मत पर चलना है यह साधक का अपना निर्णय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:48–01:32

वक्ता कहते हैं कि महाविद्या साधना करने वाला सबसे पहले यह जान ले कि तंत्र शास्त्र में दो ऐसे मत मिलते हैं जो कहीं न कहीं एक-दूसरे के विरोध में हैं। एक मत हर महाविद्या के लिए अलग-अलग तिथि, योग और नक्षत्र बताता है। दूसरा मत कहता है कि महाविद्या साधना के लिए किसी देश, काल या परिस्थिति को देखने की आवश्यकता ही नहीं है, पंचक का विचार किए बिना भी साधना की जा सकती है। इनमें से किस मत को मानकर चलना है, वे कहते हैं, यह हर साधक का अपना अलग निर्णय है।

02

एक ही बगलामुखी स्तोत्र, अलग-अलग समय: संकल्प का उद्देश्य तय करता है कब जप करें

प्रभाव संकल्प में निहित उद्देश्य के अनुसार मिलता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:33–02:11

वक्ता कहते हैं कि असली प्रश्न यह है कि भगवती पीताम्बरा की जो भी साधना की जा रही है, उसके पीछे उद्देश्य क्या है, क्योंकि प्रभाव संकल्प में निहित उद्देश्य के अनुसार ही मिलता है। मंत्र या स्तोत्र एक ही रहता है, पर हर उद्देश्य के लिए जप का समय अलग हो जाता है और उसी समय के अनुसार प्रभाव भी अलग हो जाता है। अंत में वे यही कहते हैं कि केवल संकल्प और समय बदलना है, और उद्देश्य के अनुरूप समय पर स्तोत्र का प्रयोग करने पर प्रभाव अत्यंत तीव्र और अत्यंत शीघ्र होता है।

03

शत्रु के अभिचार के नाश हेतु बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम का समय

रात्रि में, नौ बजे के बाद

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:12–02:32

पहले उदाहरण के रूप में वक्ता कहते हैं कि जब शत्रु ने परकृत्या प्रयोग किया हो और उसका नाश करना हो, तो उस अभिचार के नाश का संकल्प लेकर रुद्रयामल तंत्र से भगवती पीताम्बरा के अष्टोत्तरशतनाम का पाठ किया जाता है। यह, वे कहते हैं, निश्चित समय पर करना है: रात के समय, 9:00 बजे के बाद।

04

विशेष स्थिति: मारण से जुड़ा अभिचार जो शरीर पर घात कर चुका हो

रात्रि का विशेष समय और संकल्प के शब्द

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:33–03:22

वक्ता कहते हैं कि यदि अभिचार मारण से संबंधित हो और किसी के शरीर पर काफी अधिक घात कर चुका हो, तो पाठ रात 11:00 बजे से शुरू करना चाहिए और 11:00 बजे से 2:00–2:30 बजे के बीच करना चाहिए। इसे परतंत्र प्रयोग नाश, परकृत्या प्रयोग नाश और शत्रुओं के सब हानिकारक कर्मों के विनाश के संकल्प के साथ करना है, जिसमें अर्धरात्रि का समय और रुद्रयामल तंत्र से भगवती पीताम्बरा बगला के अष्टोत्तरशतनाम का नाम लिया जाता है। संकल्प के बाद जप करके विधि-विधान के अनुसार भगवती को समर्पण किया जाता है।

05

ग्राहक न आने वाली दुकान के लिए बगलामुखी आकर्षण: गोधूलि बेला और हल्दी-नारियल की क्रिया

केवल पाठ से यह संकल्प पूरा नहीं होता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:23–04:34

जिस व्यापार में ग्राहक नहीं आ रहे हों, वक्ता कहते हैं कि वहाँ भी रुद्रयामल तंत्र से भगवती के उसी 108 नाम वाले अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का प्रयोग होता है, पर आकर्षण का संकल्प शाम को, गोधूलि बेला में लिया जाता है। यह संकल्प केवल पाठ से पूरा नहीं होता: हरिद्रा (हल्दी) जल को अभिमंत्रित करना है, नारियल की गड़ी को अभिमंत्रित करके काली या कच्ची हल्दी से चारों ओर से वेष्टित करना है, शाम के समय अभिमंत्रित करके दुकान में अलग-अलग जगह लगाना है जिससे ग्राहक आकर्षित हों। जो ग्राहक आएँ उन्हें भगवती पीताम्बरा का नाम लेते हुए चाय-पानी पिलाना चाहिए। वे कहते हैं कि वेष्टन का पूरा विधान अलग है जो वे कभी और बताएँगे, और आकर्षण के लिए कोई गलत प्रयोग नहीं करना है।

06

बार-बार परेशान करने वाले शत्रुओं पर बगलामुखी विद्वेषण: दोपहर का समय

शत्रुओं में आपस में झगड़ा कराना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:35–05:22

वक्ता कहते हैं कि जब शत्रु बार-बार अभिचार करते हों या भौतिक रूप से परेशान करते हों, लड़ाई-झगड़ा और बहुत दिक्कत करते हों, और व्यक्ति यह न चाहे कि भगवती कुछ करें बल्कि स्वयं ऐसा संकल्प लेना चाहे कि शत्रुओं के घर में झगड़ा हो जाए, तो यह विद्वेषण का प्रयोग है। विद्वेषण की क्रियाएँ वे यहाँ नहीं बताएँगे, पर कहते हैं कि इसके लिए दोपहर का समय सर्वश्रेष्ठ है। स्तोत्र वही है; संकल्प बदल गया, समय बदल गया।

07

केवल कृपा और शरणागति के लिए बगलामुखी जप: कोई भी समय, भोर सर्वश्रेष्ठ

समर्पित साधक के लिए जगदंबा हर क्षण उपस्थित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:23–05:44

यह पूछे जाने पर कि यदि केवल भगवती की कृपा चाहिए, सब कार्य सिद्ध हों, जो करना हो भगवती करें, और साधक उनकी शरणागति में है, तब कब जप करें, वक्ता उत्तर देते हैं कि 24 घंटे आपके हैं: जब इच्छा हो तब कर लीजिए, क्योंकि जगदम्बा हर क्षण उपस्थित हैं, और जो उन्हें समर्पित है उसे समय देखने की आवश्यकता नहीं। फिर भी, वे कहते हैं, सुबह नहा-धोकर भोर में 4 से 5 बजे के समय करना सर्वश्रेष्ठ होगा।

08

तंत्र ज्ञान या ब्रह्मास्त्र विद्या के लिए बगलामुखी जप: महानिशीथ काल

विद्या के लिए अर्धरात्रि, सांसारिक कार्यों के लिए नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:45–06:05

वक्ता कहते हैं कि यदि जप तंत्र संबंधी ज्ञान की प्राप्ति, तंत्र की विभिन्न विद्याओं की प्राप्ति, या भगवती पीताम्बरा की ब्रह्मास्त्र विद्या का ज्ञान पाने योग्य स्वयं को बनाने के लिए करना हो, तो महानिशीथ काल, यानी अर्धरात्रि 12:00 बजे का समय सर्वश्रेष्ठ है, और जप उसी समय करना चाहिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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