तांत्रिक आक्रमण आप पर कौन करवाना चाहता है — कवच का मज़ाक उड़ाने वाले, गुप्त रूप से सुरक्षित लोग, और अपनी सुरक्षा अपने हाथ

कौन चाहता है कि आप तांत्रिक आक्रमण से असुरक्षित रहें: कवच का मज़ाक उड़ाने वाले पर स्वयं गुप्त रूप से सुरक्षित लोग, अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्वयं लेना, कवच लेने से पहले विश्वास दृढ़ करना, अनुभव का लालच, और दस राय सुनकर कोई कवच न कर पाने पर वक्ता की बात।

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01

तांत्रिक आक्रमण से सुरक्षा आपके अपने हाथ में है: विरोध करने वाले और न मानने वाला

पूजा का सबसे बड़ा विरोधी प्रायः गुप्त रूप से सुरक्षित बैठा है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–03:12

वक्ता पूछते हैं कि क्या आप अभिचार और तांत्रिक आक्रमण से सुरक्षित हैं, और कहते हैं कि जिनके घर के देवी-देवता मजबूत हैं और जिनके पास सुरक्षात्मक कवच है, वही लोग इस विषय की चर्चा मात्र से आपको ढोंगी, पाखंडी, अंधविश्वासी घोषित कर देते हैं; यदि कोई रिश्तेदार या इष्ट मित्र पूजन-पाठ का सबसे बड़ा विरोधी है, तो जान लें कि वह गुप्त रूप से कहीं न कहीं अपनी सुरक्षा करके बैठा है और नहीं चाहता कि आप इन विषयों को जानें, समझें, करें। इसीलिए आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है। वे जोड़ते हैं कि अति आधुनिक व्यक्ति तब तक इसे नहीं मानता जब तक वह स्वयं या उसका कोई अति प्रियजन — धर्मपत्नी, प्रेमिका, बच्चे — इससे बुरी तरह प्रताड़ित न हो जाए; तब तक यह उसके लिए काल्पनिक और अंधविश्वास का विषय रहता है। जब कोई कवच, साधना, मंत्र, सिद्धि, हवन, पूजन को सिरे से बेकार कहे, तो दो में से एक बात है: या तो उसने कभी देखा नहीं (ऐसे लोग अब कम हैं), या वह बहुत सयाना है, स्वयं की सुरक्षा कर रखी है, आपसे ईर्ष्या करता है और आपको सुरक्षित होने देने के बजाय गिरते देखना चाहता है। वक्ता का आग्रह: अपनी, अपने बच्चों और अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में लें।

02

पंडित के पास जाने या कवच सिद्धि शुरू करने से पहले अपना विश्वास दृढ़ करना

उसकी दुकान पर तुम्हें किसी ने नहीं बुलाया; पहले तथ्य परखो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:13–04:46

वक्ता कहते हैं कि लोगों के कहने में आकर अपनी साधनाएँ न छोड़ें; यदि आप किसी भी माध्यम से — पढ़कर, सुनकर, उन्हें या किसी और को देखकर — कन्विंस हुए हैं कि कवच आदि की सिद्धि कर लेनी चाहिए, तो कर लें। वे उस आदत पर बरसते हैं जिसमें लोग पंडितों को ढोंगी, पैसे लूटने वाला कहते हैं और फिर भी उनके पास जाते हैं: तुम्हें किसी ने बुलाया नहीं, वह अपनी दुकान खोलकर बैठा है, मत जाओ। किसी के बहकावे में न आएँ; ओरिजिनैलिटी देखें, तथ्यों को परखें, पढ़ें, जानें, समझें, उचित लगे तभी जाएँ, अपना विश्वास दृढ़ करके — वरना हाल उस व्यक्ति जैसा होगा जिसने खटाल जैसे स्कूल में सिम्बायोसिस जैसी सुविधा के वादे पर एडमिशन लिया और फिर कहा गया कि गोबर साफ करना ही तुम्हारी फीस है। दृढ़ विश्वास से जाएँ ताकि कभी यह कहने का अवसर न मिले कि 'मेरा विश्वास खंडित हो गया' या 'हमने कुछ किया और परिणाम नहीं मिला'; इन विषयों की सूक्ष्मता आसान नहीं, और कुछ लोग जल्दी समझ जाते हैं क्योंकि उनके साथ घटनाएँ हो चुकी हैं।

03

रत्न, माला, यंत्र या कवच दृढ़ विश्वास से ही लें; अन्यथा मना करें और विधान स्वयं सीखें

दस विधानों में इस बार चार, अगली बार पाँच; साल भर में सब

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:47–05:35

वक्ता कहते हैं कि जब कोई आपको रत्न, माला, यंत्र या कवच दे, तो या तो उसे लेकर आपका विश्वास दृढ़ हो और फिर उसे विधिवत नियम से करें, या — यदि सामने वाला केवल कन्विंस कर रहा है और आपको विश्वास नहीं — तो मत लें और साफ कहें कि मेरा विश्वास दृढ़ नहीं है। उसके बजाय उसकी जानकारी करें: वे अपने वीडियो में कवच की रचना और अभिमंत्रण इसीलिए बताते हैं कि आप स्वयं करें, बाहरी सहायता को अंतिम विकल्प रखें। करने के प्रयास में ही सीखते हैं: दस विधानों में चार कर पाएँगे, अगली बार पाँच, और छह महीने-साल भर में सब सीख जाएँगे, क्योंकि हर चीज का एक विधि-विधान है।

04

सूक्ष्म शरीर पर स्वयं का प्रयास बनाम स्थूल शरीर पर ऑपरेशन

सीमा के भीतर सौम्य शक्तियों के विधान स्वयं किए जा सकते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:36–06:22

वक्ता इस आपत्ति का पहले ही उत्तर देते हैं कि ऑपरेशन तो स्वयं सीखकर नहीं किया जा सकता: वह विषय अलग है — वह आयुर्वेद और चिकित्सा विभाग है, यह अध्यात्म है। चीड़-फाड़ दोनों जगह होती है — वहाँ स्थूल शरीर की, यहाँ सूक्ष्म शरीर की — लेकिन सूक्ष्म शरीर के लिए आप स्वयं प्रयास कर सकते हैं क्योंकि इसका विधि-विधान है और एक सीमा तक आप जा सकते हैं, जबकि ऑपरेशन में रिस्क नहीं ले सकते क्योंकि वहाँ तत्काल हानि होने लगेगी। जितनी सौम्य शक्तियाँ हैं, उनसे संबंधित जितने प्रयोग-विधान एक सीमित सीमा में रहकर करने को कहे जाते हैं, वे कहते हैं, आप कर सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं। लेकिन यदि आप केवल लोगों का 'ढोंग है, पाखंड है' सुनकर दिमाग घुमाते रहें और करना ही न चाहें, तो, वे कहते हैं, आप खत्म, कहानी खत्म।

05

समस्या से कन्विंस होकर भी साधना न करने वाला व्यक्ति

चालीस दिन को देवी-देवताओं पर एहसान समझना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:23–07:05

वक्ता दूसरा पहलू बताते हैं: आपको कोई दूसरा हतोत्साहित नहीं कर रहा, आप स्वयं कन्विंस हैं कि यही आपकी समस्या है, फिर भी साधना करना ही नहीं चाहते। जब सामने वाला कहता है कि इतने दिन की यह साधना करो, तो चार दिन बाद आप उसी को गाली देने लगते हैं — 'कुछ नहीं होता, कुछ नहीं होता' — और यह सब जगह है। वे ऐसे लोग देखते हैं जो एक, दो, यहाँ तक कि तीन साल में एक भी साधना पूर्ण नहीं कर पाते, और जो कर लेते हैं वे देवी-देवताओं पर एहसान जैसा करने लगते हैं: 'हम 40 दिन कर लिए, कुछ क्यों नहीं हो रहा?' देखो अपना जीवन कैसे बिताया है, वे कहते हैं, और अब ऐसे बोल रहे हो जैसे 40 दिन में देवी-देवता तुम्हारे गुलाम बन जाएँगे।

06

कुब्जिका कवच: लगभग दो घंटे का छोटा दैनिक कवच पाठ, जिसे भी लोग नहीं करते

चौबीस में दो घंटे अपने देवता को; अपना स्टैंड खुद लो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:06–07:59

वक्ता कहते हैं कि कुछ लोगों को दस-ग्यारह दिन की साधना, जैसे नवरात्रि की साधना, में भी नानी याद आ जाती है। वे कुब्जिका कवच का उदाहरण देते हैं, जो बहुत छोटा कवच है — लगभग चार श्लोक का मंत्र — जिसका प्रतिदिन एक पाठ सवा-डेढ़ घंटे का विषय है, और नया व्यक्ति भी दो घंटे में आराम से कर लेता है। तुम्हें शर्म आनी चाहिए, वे कहते हैं, कि 24 घंटे में से दो घंटे भी अपने देवी-देवता को नहीं दे सकते, दो घंटे का जाप नहीं कर सकते, और फिर बैठकर कहते हो कुछ नहीं होता; ऐसे लोगों का कुछ होगा भी नहीं। स्वयं करोगे नहीं, जो करते हैं उन्हें पाखंडी कहोगे, किसी से करवाओगे नहीं, तो लाभ आसमान से नहीं टपकेगा। यह तुम्हारा विषय है, स्टैंड खुद लो: यदि चाहते हो कि दो रुपये भी खर्च न हों, तो स्वयं कर लो — करके देखो।

07

अनुष्ठान में पैसे क्यों लगते हैं: स्वयं करो, वक्ता का 99% पक्ष

"कुछ नहीं होता" के पीछे का असली कारण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:00–08:41

जो लोग पूछते हैं कि अनुष्ठान आदि में इतने पैसे क्यों लगते हैं, उनसे वक्ता कहते हैं कि उन्हें स्वयं करना चाहिए — और वे इसी बात के पक्षधर हैं: सदैव कहते हैं किसी से मत करवाओ; 99% वे बोलते हैं स्वयं करो, क्योंकि पूरा विधि-विधान एक-एक चीज सामने रख दिया जाता है। केवल एकाध विशेष विषय में कहते हैं कि यदि न हो तो जरूरत पड़ने पर बोल देना। समस्या, वे कहते हैं, यह है कि करने में लोगों की फट जाती है, और फिर दूसरों को उल्टा-सीधा बोलना, डिमोरलाइज करना और सबके सामने कहना कि कुछ नहीं होता। उस 'कुछ नहीं होता' के पीछे कारण यह है कि तुम करना नहीं चाहते, तुमसे नहीं हुआ, तो दूसरों से भी न हो — ऐसा तुम चाहते हो — जबकि सामने वाला, बहुत अच्छा अनुष्ठान कर रहा है और उसे 'अनुभव' से कोई सरोकार नहीं।

08

वर्षों की साधना के बाद भी मुझे अनुभव क्यों नहीं होता?

अनुभव का लालच, और पाप के लिए पेट की गैस का दृष्टांत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:42–10:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आजकल की दुनिया एक ही जगह अटकी है — 'हम तीन साल साधना कर लिए, अनुभव क्यों नहीं हुआ?' — जबकि एक समय लोगों के जीवन साधना में बीत जाते थे और कोई अनुभव नहीं होता था। साधना किसलिए कर रहे हो, वे पूछते हैं; तुच्छ अनुभव के लिए शर्म आनी चाहिए। सुगंध आए, देवी की पायल छनके, देवी सामने प्रकट हों — तब साधना करोगे? यह लालच है, यह व्यवसाय है, कुछ अर्जित करने की कामना। 'लाभ नहीं तो साधना क्यों करें' पर वे कहते हैं: तो मत करो — पर किसने कहा लाभ नहीं है? भगवान का नाम एक बार भी लिया जाए तो लाभ होता है; लेकिन तुम्हारे पाप इतने भरे पड़े हैं, उन्हें भी तो देखो। उनका दृष्टांत: पेट में कीटाणु भरे हों जिनसे गैस बन रही हो, तो डॉक्टर पहले गैस कम करने का इंजेक्शन देता है, चाकू से पेट फाड़कर गैस नहीं निकालता वरना फट कर मर जाओगे; केवल गैस से हार्ट, बीपी, कमर और रीढ़ का दर्द — एक छोटी जड़, ढेरों समस्याएँ। तुम्हारे साथ भी वही: जो कीड़ा काटता है, 'कुछ नहीं होता, कुछ नहीं होगा, कुछ मिल नहीं रहा, क्यों कर रहे हो', वही तुम्हारी बर्बादी की जड़ है।

09

साधना के प्रति नकारात्मक करने वाले लोगों से दूरी रखना

रिश्तेदार, सहकर्मी, चाय की दुकान और शादी-ब्याह के परिचित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:08–10:30

वक्ता श्रोताओं से कहते हैं कि ऐसे नकारात्मक लोगों को सुनना बंद करें। जो भी आपको नकारात्मक करे — आस-पास के लोग, रिश्तेदार, साथ काम करने वाले सहकर्मी, बाजार के दोस्त, जहाँ चाय पर बैठते हैं वहाँ के लोग, शादी-ब्याह में मिलने वाले — उनसे दूरी बनाएँ। नहीं तो, वे कहते हैं, आप भौतिक जीवन में भी प्रगति नहीं कर पाएँगे, और आध्यात्मिक जीवन तो भूल ही जाइए।

10

साधना गुप्त क्यों रखी जाती है: दस राय हर कवच को खारिज कर देती हैं

देवी-देवताओं या दूसरों पर दोष लगाने से पहले भीतर झाँको

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:31–12:27

वक्ता कहते हैं कि इसीलिए साधना को गुप्त रखने को कहा गया है: लोग हल्ला करते हैं और दस जगह से निर्णय लेते हैं। वे पूरी शृंखला दिखाते हैं — फलाने बाबा ने कहा हनुमान चालीसा से फल मिलेगा; कोई और कहता है चालीसा से कुछ नहीं हो सकता, 'हम दस साल से कर रहे हैं, कुछ न हुआ, तेरा भी कुछ न होगा'; बजरंग बाण नहीं करना चाहिए क्योंकि हनुमान जी गुस्सा हो जाते हैं; दुर्गा कवच, चंडी कवच मत करना क्योंकि उसमें भैरू जी बंध जाते हैं, जबकि भैरव को बाँधने की बात देवी स्वयं कर रही हैं; कामाख्या कवच — 'कामाख्या की पूजा घर में नहीं होती, किस बेवकूफ ने कहा'; बैरी नाशन या कालिका कवच — 'नहीं नहीं, बहुत उग्र शक्ति है'; पंचमुखी हनुमान कवच — 'ब्रह्मचर्य पालन करना पड़ेगा, पूरी तरह शुद्ध रहना पड़ेगा, पॉसिबल नहीं, लड़कियों के बारे में उल्टा-सीधा सोचे बिना कैसे रहें' — और इस तरह कोई कवच हो ही नहीं सकता। वे इस स्थिति को दयनीय, पशु से भी गिरी हुई कहते हैं: जो अपनी मानसिक अवस्था शुद्ध नहीं रख सकता, स्वयं को एक जगह स्थित नहीं रख सकता, जिसका अपने पर नियंत्रण नहीं, और फिर देवी-देवताओं पर लांछन लगाता है। उनका अंतिम आग्रह: आप कहाँ सुरक्षित हैं, कहाँ नहीं, यह मंथन अपने भीतर करें — तांत्रिक आक्रमण से बचाव कैसे होगा, कौन से कवच की सिद्धि करेंगे, किस विधि और किन नियमों से, और कौन आपको नकारात्मक करता है, बाहर के लोग, भीतर के, या आप स्वयं; आत्म-मंथन से निर्णय लें, दूसरों पर दोषारोपण से पहले भीतर झाँकें, मार्ग पर चलें, और न दूसरों को नकारात्मक करें, न स्वयं नकारात्मक बनें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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