क्या पितृ पक्ष में घर के देवी-देवता बँध जाते हैं?

पितृ पक्ष में घर के देवी-देवताओं पर एक चर्चा।

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Questions this answers

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The notes
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01

यह मान्यता कि पितृ पक्ष में देवता बँध जाते हैं

क्या पितृ पक्ष में घर के देवी-देवता अभिचार रोकने में असक्षम हो जाते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 01:56–03:45 · Also a question

मान्यता यह है कि पितृ पक्ष में शुभ शक्तियाँ अपने स्थान को प्रस्थान कर जाती हैं, जिससे घर के देवी-देवता शत्रु के अभिचार को रोक नहीं पाते। वक्ता इसी प्रश्न को सीधे उठाते हैं और कहते हैं कि यह हर वर्ष तब आता है जब इन सोलह दिनों में लोगों की तबीयत खराब होती है या अचानक परेशानी आती है।

02

दैनिक पूजन वास्तव में कौन छोड़ते हैं और किन्हें नहीं छोड़ना चाहिए

क्या पितृ पक्ष में दैनिक पूजन पाठ छोड़ देना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 03:46–05:31 · Also a question

नहीं — जब तक कि यह परिवार की चली आ रही परंपरा न हो। जो वास्तव में छोड़ते हैं वे पूरे सोलह दिन तर्पण करने वाले घर होते हैं, और वे भी अपना नित्य कर्म नहीं छोड़ते; सुनकर नया-नया यह करने वाले को वे मना करते हैं।

03

इस पक्ष में वास्तव में कौन-से अभ्यास रुकते हैं

पितृ पक्ष में वास्तव में क्या नहीं करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 05:32–05:55 · Also a question

कोई नया अनुष्ठान आरंभ नहीं करना है, अस्त्र मंत्र की साधना नहीं करनी है, और देवी-देवताओं के आवाहन वाली कोई विशेष साधना नहीं करनी है — शताक्षरी और सहस्राक्षरी मंत्रों का पाठ इस काल में वर्जित बताया गया है।

04

पितर हर योनि में विद्यमान हैं

मृत्यु के बाद पितरों को किस-किस प्रकार का शरीर प्राप्त होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 05:56–06:36 · Also a question

केवल वायवीय शरीर नहीं, जैसा लोग मानते हैं। अपने कर्म के अनुसार पितृ हर प्रकार की योनि में गति करते हैं — वायवीय, देव, वृक्ष, कीट-पतंग, पशु और मनुष्य — और वक्ता कहते हैं कि हम-आप भी पूर्व जन्म में किसी के पितर रहे हैं।

05

गया श्राद्ध से वार्षिक कर्तव्य समाप्त क्यों नहीं होता

क्या गया में श्राद्ध कर देने से हर वर्ष का दायित्व समाप्त हो जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 06:37–07:22 · Also a question

नहीं — वक्ता इसे बहुत बड़ी भ्रांति कहते हैं। गया श्राद्ध के बाद भी हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में कम से कम तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करना चाहिए, और यह दायित्व छोड़ा नहीं जा सकता।

06

श्राद्ध किसी भी योनि में पितर तक कैसे पहुँचता है

जो पितर अगला जन्म ले चुके हैं, उन तक अर्पण कैसे पहुँचता है?

· Reviewed Sep 2026 · 07:23–09:25 · Also a question

वे जिस स्वरूप में हैं उसी के अनुरूप रूप में पहुँचता है — मनुष्य योनि में अन्न के रूप में, सर्प योनि में विष के रूप में, देव लोक में गंध के रूप में, पशु योनि में जो वह जीव खाता है उस रूप में — और श्राद्ध करने का फल करने वाले को लौटकर प्राप्त होता है।

07

पिंड दान और श्राद्ध का अधिकार

श्राद्ध कर्म का अधिकारी कौन है?

· Reviewed Sep 2026 · 09:26–09:50 · Also a question

यदि पिताजी जीवित हैं तो पिंड दान और श्राद्ध कर्म उन्हीं को करना चाहिए; केवल तब, जब वे अस्वस्थता या शारीरिक कारण से असक्षम हों, ज्येष्ठ पुत्र उनके स्थान पर यह कर सकते हैं।

08

सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध, केवल हाथ उठाकर प्रार्थना तक

जो श्राद्ध करने में आर्थिक रूप से असमर्थ हो वह क्या करे?

· Reviewed Sep 2026 · 09:51–11:53 · Also a question

जो सामर्थ्य में हो वही कीजिए — कम से कम जीव सेवा कीजिए। एक दिन की पूरी कमाई श्राद्ध में लगाने की बात कही गई है; वह न हो तो शाक-सब्जी बोलकर अर्पित कीजिए; वह भी न हो तो दक्षिण की ओर मुख करके दोनों हाथ उठाकर की गई प्रार्थना भी स्वीकार होती है।

09

पूजन छोड़ना ही रक्षा कवच को तोड़ता है

दैनिक पूजन छोड़ देने से व्यक्ति शत्रु के अभिचार के सामने क्यों खुल जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 11:54–13:02 · Also a question

क्योंकि दैनिक साधना ही कवच है। उसे छोड़ देने पर कवच कहीं न कहीं टूटता है, कोई हानि होती है, और वही कारण बन जाता है जिससे शत्रु का अभिचार प्रभावी हो जाता है।

10

सोलह दिन का भगवद्गीता पाठ

सोलह दिनों में श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किस प्रकार करें?

· Reviewed Sep 2026 · 13:03–14:02 · Also a question

प्रतिदिन एक अध्याय, उसके माहात्म्य सहित, जिससे पंद्रह दिनों में पंद्रह अध्याय पूरे होते हैं; शेष तीन अध्याय अंतिम दिन माहात्म्य सहित एक साथ पढ़े जाते हैं। हिंदी स्पष्ट रूप से स्वीकार्य है — संस्कृत आवश्यक नहीं।

11

काले तिल और कुशा के साथ संकल्प और समर्पण

पितृ पक्ष के पाठ के साथ किया जाने वाला संकल्प और समर्पण

· Reviewed Sep 2026 · 14:03–16:02

हाथ में काला तिल, कुशा और गंगाजल या शुद्ध जल लीजिए; अपना नाम, गोत्र और स्थान बोलिए; पाठ की घोषणा कीजिए और प्रार्थना कीजिए कि उसका पूरा फल कुल के पितरों तक पहुँचे। पाठ के बाद फिर जल लेकर पाठ का फल विधिवत समर्पित कीजिए।

12

श्राद्ध पक्ष में अभिचार का लौटना

श्राद्ध पक्ष में किया गया अभिचार करने वाले पर ही क्यों लौटता है?

· Reviewed Sep 2026 · 16:03–18:27 · Also a question

क्योंकि जिन आत्माओं से वह कार्य कराया जाता है वे स्वयं किसी के पितर हैं, और इन सोलह दिनों में वे भी चाहती हैं कि उनके अपने वंशज उनकी मुक्ति के लिए कुछ करें। वक्ता कहते हैं कि करने वाले के अपने पितर सबसे पहले उस पर रुष्ट होते हैं, क्योंकि इस काल में शक्ति का प्रयोग वर्जित है।

13

करने वाले पर लौटने वाली हानि का गुणक

पितृ पक्ष में अभिचार करने वाले पर लौटने वाली हानि का गुणक

· Reviewed Sep 2026 · 18:28–19:19

जितनी भेजी गई उससे कई गुना। वक्ता कहते हैं कि जिस पर अभिचार हुआ उसे दस हानि पहुँचती है तो करने वाले को पचास पहुँचती है; जहाँ एक व्यक्ति मरता है वहाँ करने वाले के यहाँ वर्ष भर के भीतर पाँच मरते हैं, और यह पीड़ा उसके वंशजों तक चलती है।

14

देव वृक्ष पितरों तक पहुँचने का माध्यम

तुलसी और देव वृक्षों की सेवा पितरों को किस प्रकार लाभ पहुँचाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 19:20–20:30 · Also a question

देव वृक्ष पर किया गया तर्पण — दूध और जल से तुलसी का, या नारायण के 108 नामों से, और तुलसी न होने पर पीपल पर — एक छोटे अभिषेक जैसा बताया गया है, जो भगवत्कृपा से कुल के पितरों की तृप्ति का माध्यम बनता है।

15

घर के जल स्थान पर संध्या का दीपक

श्राद्ध पक्ष में घर में दीपक कहाँ जलाना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 20:31–21:33 · Also a question

जहाँ पीने का जल रखा जाता है, वही पितरों का स्थान माना गया है — कुशा पर रखा घी का दीपक, संध्या के समय, दक्षिण की ओर मुख करके। शरीर का जल पितृ कृपा से टिकता है, और उसकी कमी पितरों के रुष्ट होने का संकेत बताई गई है।

16

अध्याय का चयन, और प्रेत बाधा में ग्यारहवाँ

गीता का कौन सा अध्याय पढ़ें, और प्रेत बाधा में कौन सा?

· Reviewed Sep 2026 · 21:34–22:21 · Also a question

रुचि के अनुसार कोई भी — तीसरा, सातवाँ या नौवाँ सुझाए गए हैं। परंतु जिन्हें ज्ञात है कि उनके पितर प्रेत योनि में हैं, या जिनके घर में भारी प्रेत बाधा है, उन्हें श्राद्ध पक्ष भर ग्यारहवें अध्याय का माहात्म्य सहित बार-बार पाठ करने को कहा गया है।

17

सामर्थ्य के अनुसार देना, गिनती वाले टोटके से नहीं

पितृ पक्ष में दान और जीव सेवा किस प्रकार करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 22:22–24:25 · Also a question

अपनी सामर्थ्य के अनुसार और सच्ची श्रद्धा से, गिनी हुई संख्या से नहीं। वक्ता दो या चार रोटी गिनकर देने वाले टोटकों को अस्वीकार करते हैं, और कहते हैं कि मन मारकर दिया गया कुछ भी फल नहीं देता।

18

दिखावे के लिए किया गया कर्म निष्फल क्यों है

पितरों के निमित्त किए गए कर्म का प्रचार क्यों नहीं करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 24:26–28:11 · Also a question

क्योंकि दिखावे के लिए किया गया कर्म केवल करने वाले को ही संतुष्ट करता है। वक्ता एक व्यक्ति का उदाहरण देते हैं जिसे उन्होंने गणेश विसर्जन पर मिठाई बाँटते देखा, और जिसे पहले दस रुपये पर एक गरीब को अपमानित करते देखा था — और कहते हैं कि भगवान पहले दूसरे कर्म को देखते हैं।

19

बार-बार आने वाले साँप के स्वप्न का संकेत

क्या बार-बार साँप का सपना आना पितृ दोष का लक्षण है?

· Reviewed Sep 2026 · 28:12–29:14 · Also a question

वक्ता के आकलन में 99% संभावना है। वे कुंडली में राहु को भी देखने को कहते हैं — सूर्य या चंद्रमा के साथ युति या दृष्टि इसे और स्पष्ट कर देती है — और बताते हैं कि यही स्वप्न इस या पूर्व जन्म में साँप मारने से लगे नाग दोष से भी जुड़ा है।

20

लंबी प्रेत बाधा के लिए ग्यारहवें अध्याय और लोटे का विधान

जहाँ दशकों से किसी परिजन पर प्रेत बाधा हो, वहाँ क्या किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 29:15–33:54 · Also a question

सुबह साढ़े आठ बजे से संकल्प लेकर गीता के ग्यारहवें अध्याय का प्रतिदिन ग्यारह बार पाठ कीजिए, पास में पीतल के लोटे में जल, मिश्री, कुशा और काला तिल रखकर; पाठ के बाद वही जल सूर्यनारायण को प्रणाम करके, दक्षिण की ओर मुख करके तुलसी में डाल दीजिए।

21

विधान से उठने वाले उपद्रव की उपेक्षा

ग्यारहवें अध्याय के विधान से उठने वाला उपद्रव और उसे अनदेखा करने का निर्देश

· Reviewed Sep 2026 · 33:55–36:13

काफी उपद्रव होगा। वक्ता चेतावनी देते हैं कि आत्मा ऐसा हंगामा कर सकती है कि पाठ पूरा ही न हो, या घर में झगड़ा खड़ा हो जाए, और निर्देश देते हैं कि पूरे सोलह दिन इस सबकी पूरी तरह उपेक्षा की जाए।

22

गंगा के नाम और शिव महापुराण का गंगावतरण प्रसंग

क्या पितरों के निमित्त गंगा कवच या उनके 108 नामों का पाठ किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 36:14–37:03 · Also a question

हाँ। जिनकी श्रद्धा भगवती में है वे श्राद्ध पक्ष में भगवती गंगा के 108 नाम, उनका कवच या उनके स्तोत्र पढ़ सकते हैं, और शिव महापुराण का गंगावतरण वाला अध्याय भी पितरों को सद्गति देने वाला बताया गया है।

23

मुक्ति क्षेत्र के रूप में पुष्कर, और बंधन की आवश्यकता

क्या कर्म गया में ही करना आवश्यक है, या पुष्कर से भी मुक्ति मिल सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 37:04–40:26 · Also a question

गया अनिवार्य नहीं — पुष्कर मुक्ति क्षेत्र माना गया है और जहाँ श्रद्धा हो और कोई तांत्रिक जटिलता न हो वहाँ वह पर्याप्त है। पर वक्ता चेताते हैं कि यदि पितर स्वीकार न करें तो कहीं भी कराया गया कर्म लौट आता है।

24

जिस कक्ष में मांस-मदिरा का प्रयोग हो वहाँ पूजा

जिस कमरे में मांस-मदिरा का सेवन होता है वहाँ पूजा करने में दोष है क्या?

· Reviewed Sep 2026 · 40:27–43:11 · Also a question

हाँ, और वक्ता कहते हैं कि इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। देवता सब कुछ गंध के रूप में ग्रहण करते हैं, इसलिए परदा रखने से भी कुछ नहीं होता — जहाँ मांस-मदिरा का सेवन होता है वहाँ सात्विक पूजा नहीं की जा सकती।

25

नवदुर्गा के हर नाम से नौ आहुति वाला देवी कवच हवन

देवी कवच का हवन किस प्रकार किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 43:12–43:52 · Also a question

आदर्श रूप से कवच में आने वाली सभी देवियों के नामों से, पर सामान्य नियम यह कि नवदुर्गा के नौ नामों में से प्रत्येक से नौ आहुति — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक। पुरुष घी से आहुति देते हैं, स्त्रियाँ हवन सामग्री से।

26

आधार साधना कितनी बार दोहराई जाए

आधार साधना का दोहराव: ग्यारह दिन के पाँच क्रम, या इक्कीस दिन के तीन क्रम

· Reviewed Sep 2026 · 43:53–48:02

ग्यारह-ग्यारह दिन के क्रम में कम से कम पाँच बार, या इक्कीस-इक्कीस दिन के क्रम में तीन बार — लगभग 108 दिन की आधार साधना। इससे तपोबल बनता है, पूर्व कर्म कटता है, और आगे की साधना के साधन जुटते हैं।

27

अंतिम चरण में कार्य बिगड़ने पर भद्रकाली और विनायक

जब हर कार्य अंतिम चरण में बिगड़ जाए तो क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 48:03–50:38 · Also a question

भगवती भद्रकाली की उपासना भगवान विनायक के साथ कीजिए — संकटनाशन गणेश स्तोत्र का अनुष्ठान अर्गला के प्रथम मंत्र के साथ, जिसमें भद्रकाली का नाम आता है, कम से कम सवा महीने तक।

28

सूर्य की ओर या दक्षिण की ओर — पिता के जीवित होने के अनुसार

पितरों के निमित्त कर्म करते समय किस दिशा की ओर मुख करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 50:39–52:31 · Also a question

यदि पिताजी जीवित हैं तो सूर्य की ओर मुख कीजिए — अर्पण सूर्यनारायण के माध्यम से पितरों तक पहुँचता है। यदि पिताजी नहीं रहे तो दक्षिण की ओर मुख कीजिए, जहाँ वह पितृ स्वरूप में स्थित यम के माध्यम से पहुँचता है।

29

यह चैनल तामसिक विधियाँ क्यों नहीं देता

यह चैनल गृहस्थों के लिए है, और भगवती तथा महादेव अपने गृहस्थ स्वरूप में पूर्णतः सात्विक मार्ग पर चले।

· Reviewed Sep 2026 · 52:32–53:37

क्योंकि चैनल का नाम ही गृहस्थ तंत्र है और वह गृहस्थों के लिए है। वक्ता कहते हैं कि भगवती और महादेव अपने गृहस्थ स्वरूप में पूर्णतः सात्विक मार्ग पर चले, और उसके साथ तामसिक विधि नहीं दी जा सकती।

30

अपने आराध्य के माध्यम से पितरों को जप अर्पित करना

क्या मंत्र जप का फल पितरों को अर्पित किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 53:38–54:49 · Also a question

सीधे कभी नहीं। जप अपने आराध्य को समर्पित किया जाता है और वही उसे पहुँचाते हैं — पहले संकल्प कर लीजिए कि यह जप पितरों की गति और तृप्ति के निमित्त है, और बाद में हाथ में जल लेकर उसका फल विधिवत समर्पित कीजिए।

31

महामृत्युंजय के लिए वैदिक अधिकार आवश्यक

महामृत्युंजय जप का अधिकारी कौन है?

· Reviewed Sep 2026 · 54:50–55:49 · Also a question

यह वैदिक मंत्र है और इसके लिए वैदिक अधिकार तथा वैदिक विधि चाहिए। वक्ता यज्ञोपवीत, महामृत्युंजय की दीक्षा, या कम से कम 24,000 की गायत्री पुरश्चरण की अपेक्षा रखते हैं, साथ ही वैदिक आचार्य से सीखा हुआ शुद्ध उच्चारण।

32

गाड़ी गई वस्तु पर हवन और राख गाड़ने का उपाय

यदि घर में कोई नकारात्मक वस्तु गाड़ दी गई हो तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 55:50–1:01:25 · Also a question

हवनात्मक प्रयोग कीजिए, और उसके बाद हवन की राख तथा सामग्री बार-बार भूमि में गाड़िए — संभव हो तो घर के मध्य के ब्रह्म भाग में, अन्यथा चारों कोणों में।

33

आधार के बिना सिद्ध कुंजिका खतरनाक क्यों है

बिना समझे पाठ करने वालों के लिए सिद्ध कुंजिका खतरनाक क्यों है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:01:26–1:03:23 · Also a question

वक्ता इसे दोधारी तलवार कहते हैं जिसके बीजाक्षरों में सारी शक्तियाँ समाई हैं। वे त्रेता युग में मेघनाद की मृत्यु का कारण इसी में हुई एक त्रुटि बताते हैं, और उन लोगों से सावधान करते हैं जो भैरव या गुरु की पूजा किए बिना इसका पाठ करते हैं।

34

पूरे पक्ष में भोजन संबंधी नियम

पितृ पक्ष में क्या नहीं खाना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 1:03:24–1:05:07 · Also a question

पूर्णतः सात्विक भोजन, लहसुन और प्याज भी छोड़कर। वक्ता इससे आगे भी सुझाते हैं — अभी से छोड़कर कार्तिक पूर्णिमा के बाद ही आरंभ कीजिए, और जो मार्गशीर्ष में भैरव साधना करना चाहते हैं वे उसके पूरे होने तक इसे जारी रखें।

35

वक्ता का यह दावा कि गति केवल सनातन धर्म में है

क्या अन्य धर्मों में भी पितरों की गति और पुनर्जन्म का सिद्धांत है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:05:08–1:08:14 · Also a question

वक्ता मानते हैं कि नहीं है। वे कहते हैं कि मुक्ति के लिए सनातन धर्म में आना ही पड़ता है, पुनर्जन्म और पितरों का विषय और कहीं नहीं है, और हैलोवीन या शब-ए-बरात जैसे आयोजन यह दावा नहीं करते कि उनसे मृतकों की गति होती है।

36

पाँच ऋण और पंचबलि महायज्ञ

जन्म से ही व्यक्ति किन ऋणों से बँधा होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:08:15–1:09:20 · Also a question

पाँच ऋण माने गए हैं। पितृ ऋण इसलिए है कि यह जीवन और यह शरीर पितृ के माध्यम से मिला; ऋषि ऋण इसलिए कि ऋषियों ने ज्ञान की हर शाखा दी। इनसे मुक्ति पंचबलि महायज्ञ, पूजन तथा जीव और प्रकृति की सेवा से होती है।

37

सर्प दोष का बताया गया पारिस्थितिक कारण

साँप मारने से पितृ दोष और सर्प दोष क्यों लगता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:09:21–1:10:08 · Also a question

क्योंकि सर्प पृथ्वी के भीतर से निकलने वाली विषैली गैसों को पीते हैं, और उसी से उनकी ग्रंथियों में विष बनता है। उनके बिना पृथ्वी की विषैली गैस बहुत बढ़ जाएगी और ऑक्सीजन घट जाएगी — यही मुख्य कारण बताया गया है।

38

बेल, पीपल और बरगद — ये तीन वृक्ष

पितरों के निमित्त कर्म किन वृक्षों के नीचे करने चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 1:10:09–1:11:45 · Also a question

बेल, पीपल और बरगद। श्राद्ध पक्ष में इन तीन के नीचे किया गया कोई भी शुभ कर्म भगवत्कृपा से सीधे पितरों तक पहुँचता है, और बेल वृक्ष में स्वयं भगवती का वास बताया गया है।

39

घर की ऊर्जा के सूचक — अपराजिता और तुलसी

अपराजिता और तुलसी के पौधे घर के विषय में क्या बताते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 1:11:46–1:13:36 · Also a question

तुलसी को सबसे संवेदनशील पौधा बताया गया है, जो नकारात्मकता खींचते हुए बार-बार सूखती है; वक्ता कहते हैं कि फिर भी लगाते रहिए। जहाँ अपराजिता फैलकर फूलने लगे, वहाँ वे कहते हैं कि उस घर में शुभ शक्ति आने लगी है।

40

पितृ पक्ष और नवरात्रि में ब्रह्मचर्य

क्या पितृ पक्ष में ब्रह्मचर्य आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:13:37–1:16:49 · Also a question

हाँ — पितृ पक्ष में भी नवरात्रि की तरह पूर्ण ब्रह्मचर्य का महत्व है, और वक्ता स्पष्ट कहते हैं कि किसी भी विधान को करते समय इसका पालन मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से करना है।

41

विवाह के बाद के वर्ष में घर पर श्राद्ध

क्या विवाह के अगले वर्ष घर पर श्राद्ध करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 1:16:50–1:19:40 · Also a question

होलिका दहन पर संवत बदलने तक घर के भीतर नहीं। वार्षिक श्राद्ध छोड़ा नहीं जाता — वह बाहर किया जाता है: नदी किनारे, पीपल या बेल वृक्ष के नीचे, मंदिर में या तीर्थ स्थान पर।

42

देव दीक्षा प्रवेश का द्वार, और उसकी सीमा

जिसने गुरु दीक्षा नहीं ली, क्या वह किसी मंत्र को सिद्ध कर सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:19:41–1:22:50 · Also a question

देव दीक्षा की विधि करने के बाद सात्विक और सामान्य मंत्रों का जप किया जा सकता है। परंतु उपदेव श्रेणी से जुड़ा कार्य — प्रेत और पिशाच से संबंधित मंत्र-तंत्र — दिक्कत देगा; उसके लिए प्रत्यक्ष विधि विधान से सब कुछ करना पड़ेगा।

43

सोलह दिन का ग्यारहवाँ अध्याय क्या कर सकता है और क्या नहीं

क्या गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ तुलसी को अर्पित करने से नकारात्मक शक्ति समाप्त होती है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:22:51–1:25:27 · Also a question

वक्ता सीधे कहते हैं कि बिल्कुल समाप्त होगा — यह पूछते हुए कि ऐसा कैसे हो सकता है कि न हो — और प्रश्नकर्ता से श्रद्धा और विश्वास के साथ करने को कहते हैं। पर वे एक सीमा जोड़ते हैं: सोलह दिन में तीस साल की समस्या जड़ से नहीं हटेगी, यद्यपि उसकी जड़ें हिल जाएँगी और उसका रास्ता अवरुद्ध हो जाएगा।

44

पितृ गायत्री की संख्या, तीन कुशा, और दूब क्यों नहीं चलेगी

क्या सामान्य गृहस्थ पितृ गायत्री का जप कर सकते हैं, और क्या कुशा के स्थान पर दूब चलेगी?

· Reviewed Sep 2026 · 1:25:28–1:27:03 · Also a question

हाँ — संख्या 27 रखिए, या 54, अधिकतम 108, और श्राद्ध पक्ष तक ही रखिए। सामग्री के विषय में: तीन कुशा का अर्थ तीन लंबी पत्तियाँ हैं, हर एक लगभग एक उँगली के माप की काट लीजिए। दूर्वा इसका स्थान नहीं ले सकती — उसका प्रयोग भूतों के लिए होता है, पितरों के लिए कुशा ही चाहिए।

45

अविवाहित कन्या, विवाहित स्त्री और घूँघट का नियम

क्या अविवाहित कन्या या विवाहित स्त्री पितरों के निमित्त कुछ कर सकती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 1:27:04–1:28:30 · Also a question

अविवाहित कन्या को पितरों के निमित्त कुछ करने की आवश्यकता नहीं — वह गीता पढ़कर उसे नारायण को अर्पित कर सकती है, पितरों का नाम लिए बिना, क्योंकि विवाह पर उसका कुल पति का हो जाता है। विवाहित स्त्री संकल्प लेकर सात्विक विधान कर सकती हैं।

46

रक्षक के रूप में कुल भैरव, और भैरव पद पाने वाले पितर

अपने कुल के भैरव को प्रसन्न करना क्यों आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:28:31–1:29:28 · Also a question

क्योंकि रक्षण भैरव ही देते हैं। जैसे भैरव शक्तिपीठों के रक्षक हैं, वैसे ही कुल भैरव कुल के रक्षक हैं — और जिन पितरों ने जीवन में बड़ी उपासना की, वे मृत्यु के बाद भैरव पद प्राप्त करते हैं।

47

देवी साधना पितृ पक्ष में नहीं, नवरात्रि में आरंभ करना

क्या पितृ पक्ष में माता की साधना आरंभ की जा सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:29:29–1:31:49 · Also a question

नहीं। वक्ता प्रश्नकर्ता से कहते हैं कि अभी साधना आरंभ मत कीजिए — माता की साधना नवरात्र में आरंभ कीजिए।

48

ननिहाल पक्ष के पितरों के लिए अर्पण

क्या ननिहाल पक्ष के पितरों को भी अर्पण किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:31:50–1:35:20 · Also a question

हाँ, और वक्ता कहते हैं कि यह अवश्य करना चाहिए — ननिहाल पक्ष के पितरों को जल, तिल, जौ और फूल आदि अर्पित किए जा सकते हैं, और उनका श्राद्ध भी जब होता है तब होता है।

यह पूछे जाने पर कि ननिहाल पक्ष के पितरों को जल, तिल, जौ, फूल आदि अर्पित किए जा सकते हैं क्या, वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं। वे जोड़ते हैं कि जब श्राद्ध होता है तो ननिहाल का भी होता है, और स्पष्ट कहते हैं कि यह एकदम करना चाहिए।

49

सेवा के नियम विधान पर भारी पड़ते हैं, और कोई दोष नहीं लगता

जहाँ नौकरी के नियम पितृ पक्ष में दाढ़ी-बाल बनाने के लिए बाध्य करते हों, वहाँ दोष लगता है क्या?

· Reviewed Sep 2026 · 1:35:21–1:37:28 · Also a question

कोई दोष नहीं लगता। पैरामिलिट्री में सेवारत पति के विषय में पूछे जाने पर, जिन्हें रोज दाढ़ी-बाल बनाना पड़ता है, वक्ता कहते हैं कि वहाँ के नियम का पालन करना चाहिए — वे किसी के अधीन हैं और देश की सेवा कर रहे हैं — और इससे न दोष लगता है न लगेगा।

50

जब अपने ही पितरों का अभिचार में प्रयोग हो

जब किसी परिवार के अपने ही पितरों को उसी के विरुद्ध कर दिया जाए तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 1:37:29–1:43:49 · Also a question

वक्ता इसे सबसे टेढ़ा मामला कहते हैं। पहले जिम्मेदार व्यक्ति के नाम से क्षेत्रपाल का पूजन कराइए, फिर पूरे श्राद्ध पक्ष ग्यारहवें अध्याय का विधान कीजिए, फिर पीपल या बरगद पर दत्तात्रेय तर्पण कीजिए।

51

कुल गम्य विद्या के लिए उसकी परंपरा क्यों आवश्यक है

कुल गम्य विद्याएँ उस परंपरा में दीक्षित हुए बिना नहीं करनी चाहिए

· Reviewed Sep 2026 · 1:43:50–1:46:09

क्योंकि गृहस्थ ऐसी साधना को जीवन भर नहीं ढो सकता, और जब वह छूटती है तब उसे रोकने और बचाने के लिए कुछ चाहिए — जो परंपरा के बिना संभव नहीं है। निग्रह दारुण सप्तक कर रहे एक प्रश्नकर्ता से वक्ता कहते हैं कि उनकी स्थिति सुरक्षित नहीं है।

52

जीवों को खीर-पूरी, और घूँघट रखकर हिंदी में गीता का एक अध्याय

घर में अकेली स्त्री पितरों के निमित्त क्या कर सकती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 1:46:10–1:46:36 · Also a question

वे खीर और पूरी बनाकर कौआ, कुत्ता और गौ माता को खिला सकती हैं; और यदि वे हिंदी पढ़ना जानती हैं तो भगवान नारायण के सम्मुख बैठकर, घूंघट रखकर, श्रीमद्भगवद्गीता का जो अध्याय इच्छा हो वह हिंदी में पढ़कर भगवान को समर्पित कर दें।

53

मांस-मदिरा पाठ को निष्फल कर देते हैं

जो मांस खाता हो, उसके भगवद्गीता पाठ का फल होगा क्या?

· Reviewed Sep 2026 · 1:46:37–1:47:05 · Also a question

वक्ता का उत्तर है कि पाठ ही मत कीजिए। यह पूछे जाने पर कि मांसाहारी व्यक्ति के ग्यारह पाठ का फल होगा क्या, वे प्रश्नकर्ता से कहते हैं कि मत करिए — भगवद्गीता का पाठ करके और मांस खाकर क्यों परेशान होइएगा।

54

दिवंगत बुजुर्ग के लिए सातवें अध्याय और श्वेत पुष्प का विधान

जब कोई दिवंगत बुजुर्ग भोजन या वस्त्र माँगते दिखाई दें तो क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 1:47:06–1:53:26 · Also a question

भगवान के सम्मुख हाथ में श्वेत पुष्प या गेंदे का फूल लेकर श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का माहात्म्य सहित हिंदी में, सात बार तक पाठ कीजिए, फिर उसी फूल पर जल लेकर उसका फल नारायण के चरणों में समर्पित कीजिए — और सर्व पितृ अमावस्या के दिन अन्न-वस्त्र किसी पंडित जी या घर के पुरुष के हाथ से दिलवाइए।

55

पंचमुखी हनुमत कवच में मरकट स्वरूप

कुछ लोग पंचमुखी हनुमत कवच का पाठ करने से मना क्यों करते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 1:53:27–1:55:05 · Also a question

क्योंकि उसमें मरकट स्वरूप का वर्णन है, जिसे वहाँ एक प्रकार से मरकट भैरव का स्वरूप माना गया है — उग्र स्वरूप, जिसे मसानी हनुमान कहा जाता है। इस आपत्ति का वक्ता का अपना उत्तर यह है कि कह दीजिए कि हम पूरे विश्व के कल्याण के लिए पाठ कर रहे हैं।

56

तंत्र दीक्षा स्वयं नहीं ली जा सकती; गृहस्थों के लिए शंकराचार्य परंपरा

जिसका कोई गुरु न हो, क्या वह स्वयं तंत्र दीक्षा ले सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:55:06–1:58:11 · Also a question

यह नहीं होगा — तंत्र दीक्षा इस प्रकार नहीं होगी, यद्यपि देव दीक्षा की जो विधियाँ बताई गई हैं वे हो सकती हैं। गृहस्थ रहते हुए भगवती की उपासना के लिए वक्ता शंकराचार्य परंपरा की ओर भेजते हैं, पत्नी के साथ, गृहस्थ रहते हुए दीक्षा।

57

पितृ गायत्री सबसे अंत में, दैनिक पूजन के समर्पण के बाद

दैनिक पूजन में पितृ गायत्री का जप कहाँ रखना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 1:58:12–1:58:50

सबसे अंत में। अपना दैनिक पूजन पितृ गायत्री छोड़कर पूरा कीजिए, भगवती का जप समर्पित कीजिए और आरती आदि कर लीजिए, तभी पितृ जप कीजिए — और कम से कम कीजिए, 27 बार, उससे अधिक नहीं।

58

केवल पश्चाताप से पाप क्यों नष्ट नहीं होते

क्या केवल पश्चाताप से संचित पाप नष्ट हो जाते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 1:58:51–2:01:04 · Also a question

नहीं — पश्चाताप के साथ सत्कर्म भी करना होगा, अन्यथा साथ-साथ नया पाप बनता रहेगा। तब भी केवल संचित ब्याज नष्ट होता है; मूल तो भोगना ही पड़ता है, यद्यपि सेवा किए गए जीवों का आशीर्वाद उसे सहज कर देता है।

59

त्रिपिंडी श्राद्ध पूरी तरह निष्फल क्यों हो सकता है

त्रिपिंडी श्राद्ध से कभी-कभी कोई लाभ क्यों नहीं होता?

· Reviewed Sep 2026 · 2:01:05–2:07:03 · Also a question

दो कारण। यदि पितर पहले से अभिचार में बँधे हैं तो पहले उन्हें मुक्त कराना होगा — बँधी आत्मा पर यह कर्म थोपा नहीं जा सकता। और यदि पितर की अपनी इच्छाएँ और विकार समाप्त नहीं हुए हैं तो कितने भी कर्म कराइए, उनकी गति नहीं होगी।

60

क्या पितर मांस का भोग माँगते हैं

क्या पितर कभी मांस का भोग माँगते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 2:07:04–2:07:52 · Also a question

वक्ता के अनुसार कभी नहीं। मांस केवल प्रेत या पिशाच माँगते हैं, या पितरों के नाम पर कोई और माँगता है — जो वास्तव में पितृ स्वरूप को प्राप्त हो चुका है वह नहीं माँगेगा, चाहे जीवन में उसने कितना भी मांस-मदिरा लिया हो।

61

सातवीं पुश्त में मुक्ति, और पंचमी को नाग पूजन

जिस पितर को नाग योनि प्राप्त हुई हो, उनके लिए क्या किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 2:07:53–2:12:20 · Also a question

जहाँ उनके लिए मंदिर बन चुका है, वहाँ उनकी मुक्ति उनकी अपनी इच्छा से होगी। वक्ता कहते हैं कि पितृ योनि में जाने के बाद मुक्ति सातवीं पुश्त में होती है, और तीसरी के बाद उसकी संभावना आरंभ हो जाती है, तथा महादेव की सेवा-पूजा — अभिषेक के साथ पंचमी तिथि को वासुकी नाग, नव नाग और द्वादश नाग का पूजन — से उन्हें शांति प्राप्त होती है।

62

दत्तात्रेय की विधि में गुरु की आवश्यकता नहीं, यह सबके लिए खुली है

पीपल पर दत्तात्रेय के 108 नामों वाली पूजा विधि बिना गुरु के की जा सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 2:12:21–2:12:37 · Also a question

हाँ — सभी कर सकते हैं और गुरु की कोई आवश्यकता नहीं, क्योंकि भगवान दत्तात्रेय साक्षात गुरु हैं। वक्ता कहते हैं कि उन्हीं को लेकर यह किया जा सकता है, और स्त्री-पुरुष सभी कर सकते हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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