घर पर स्वयं से तंत्र काट कैसे करें — बार-बार अभिचार करने वाले शत्रु के विरुद्ध शक्तिपीठ आधारित चार चरणों का विधान

शत्रु द्वारा बार-बार प्रयोग दोहराए जाने पर घर पर स्वयं तंत्र काटने का वक्ता का चार-चरण विधान — निकटतम शक्तिपीठ, वहाँ से लाया नारियल, नित्य पाठ, भैरव के द्वार-दीपक, धूना और नित्य कपूर-लौंग उतारा।

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01

परिवार पर तंत्र का पहला लक्षण कलह है

कलह जिसे देर होने तक अनदेखा किया जाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:40–01:58

वक्ता कहते हैं कि जब भी किसी व्यक्ति या परिवार पर तंत्र का प्रयोग होता है, तो सबसे पहला काम यह होता है कि उस परिवार में कलह शुरू हो जाती है। कलह सबसे बड़ा कारण बनती है, और लोग उसे काफी समय तक अनदेखा करते हैं — जब तक बात समझ में आती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

जब भी किसी व्यक्ति या परिवार पर तंत्र का प्रयोग होता है, वक्ता कहते हैं, तो सबसे पहला काम यह होता है कि उस परिवार में कलह शुरू हो जाती है। कलह सबसे बड़ा कारण बनती है, और हम उसे काफी समय तक अनदेखा करते हैं; जब तक बात समझ में आती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

02

बाहर से करवाया गया तंत्र काट कुछ ही दिनों की राहत क्यों देता है

सीमित समय का पहरा, छूटे हुए नियम, और बार-बार अभिचार करवाने वाला सक्रिय शत्रु

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:59–03:40

वक्ता उस आम अनुभव पर बात करते हैं कि बाहर तंत्र काट करवाया, कुछ दिन राहत रही, फिर सब कुछ पहले जैसा होने लगा — जबकि हर किसी के पास इतना पैसा नहीं होता कि बार-बार किसी साधक या तांत्रिक को पैसे देता रहे। वे दो कारण बताते हैं। पहला, सच्चा सिद्ध व्यक्ति अपने इष्ट का कोई दूत, वीर या गण आपके घर के रक्षण के लिए भेजता है, लेकिन सीमित समय के लिए, हमेशा के लिए नहीं, और उसके निमित्त कुछ काम बताता है — भोग, उस शक्ति के नाम का दीपक — जिन्हें लोग अक्सर निभाते नहीं। दूसरा, शत्रु दो तरह का होता है: एक बार अभिचार करके भूल जाने वाला, जिसके लिए एक काट से मामला खत्म हो जाता है; और सक्रिय शत्रु जो जैसे ही आप काट करवाते हैं फिर करवा देता है। सक्रिय शत्रु के विरुद्ध, वे कहते हैं, गाँठ बाँध लीजिए: जब तक आप स्वयं सब कुछ करना शुरू नहीं करेंगे, कोई बाहरी व्यक्ति लंबे समय तक आपकी सहायता नहीं कर सकता।

03

क्या किसी गुरु की शरण में जाने से तंत्र से रक्षा की गारंटी मिल जाती है?

100 में 80 को रक्षण, 20 को नहीं; कर्म और प्रारब्ध तय करते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:41–04:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तंत्र क्षेत्र में आने पर सभी लोग गुरु प्राप्त करने के लिए परेशान रहते हैं, यह मानकर कि गुरु मिल जाएँगे या किसी गुरु परंपरा में जाएँगे तो रक्षण मिल जाएगा। वे खुलकर कहते हैं कि यह अपवाद है, नियम नहीं: 100 लोग किसी गुरु की शरण में जाते हैं तो हो सकता है 80 को सुरक्षा मिले और 20 ऐसे निकलते ही हैं जिन्हें रक्षण नहीं मिलता, और किसी भी परंपरा में ऐसी सटीकता नहीं है कि जो गया उसका भला ही हो गया। वहाँ भी, वे कहते हैं, आपका अपना कर्म और प्रारब्ध काम करता है; गुरु बस वही पूरा कर देते हैं जो अंतिम रूप से पूरा होने वाला होता है, और यह सबके लिए एक समान नहीं होता।

04

घर पर तंत्र काट के लिए किस शक्तिपीठ की शरण लें?

51 प्रकट पीठों में सबसे नज़दीकी, या कोई भी जागृत पीठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:37–05:54 · Also a question

जब शत्रु सक्रिय है और आप बार-बार पैसे लगाकर भी ठीक नहीं हो रहे, तो वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले अपने घर की शक्ति के विषय में पता कर लें कि कौन हैं। यदि पता नहीं चलता, तो एक ही सबसे ज़रूरी काम है कि भगवती के 51 प्रकट शक्ति पीठ में से कौन-सा पीठ आपके रहने की जगह से सबसे नज़दीक है — या वह भी नहीं तो कौन-सा जाग्रत पीठ है, चाहे वह 100 या 200 साल पहले का ही हो, भगवती का हो, महादेव का हो या किसी भी देवी-देवता का। उस पीठ के शरणागत हो जाइए, वहाँ जाइए, उस देवता की प्रतिमा या फोटो लाइए और उनके नाम से अपने पूजन स्थान पर स्थापित कीजिए।

05

घर पर तंत्र काट का पहला काम: चावल और श्रीफल के साथ शक्तिपीठ की यात्रा

शाम का चावल-संकल्प, हर सिर से उतारा चावल, प्रमुख विग्रह पर अर्पण, और घर लाया नारियल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:55–09:55

वक्ता का पहला काम घर से पीठ तक और वापस चलता है। यात्रा से एक शाम पहले घर का मुखिया नहा-धोकर एक अंजुली बासमती चावल में थोड़ी हल्दी और ₹11 मिलाकर उसे स्पर्श करता है और पीठ की भगवती से कहता है कि कल घर की हर आभिचारिक या दैविक समस्या के लिए आपके पास आऊँगा, मार्गदर्शन और सहायता माँगता है, फिर उस देवता के नाम से घी या सरसों तेल का दीपक जलाता है। अगली सुबह मुखिया एक-एक मुट्ठी चावल हर पीड़ित व्यक्ति के सिर से, अपने सहित, तीन बार सीधा (क्लॉकवाइज़) घुमाकर सबका एक ही थैली में रखता है, शाम वाले चावल से अलग, और दोनों को फूल-प्रसादी के साथ पीठ ले जाता है। वहाँ एक ही ज़रूरी काम है कि वह चावल पुजारी या सेवक के माध्यम से प्रमुख विग्रह पर भगवती के चरणों तक पहुँचे, भले बाद में पक्षियों को डाल दिया जाए। लौटते समय पीठ से ही एक पानी वाला नारियल खरीदें, बिना छिला या जटा सहित, लाल चुनरी में लपेटकर प्रमुख विग्रह से स्पर्श करवाएँ, रोली-मौली से बाँधें, और घर में साफ किए पूजन-स्थान पर देवता की प्रतिमा या फोटो के पास रखें, जहाँ सुबह-शाम धूप-दीपक जले। पीठ नज़दीक हो तो महीने में एक बार, नहीं तो तीन महीने में एक बार हाज़िरी दें, हर बार चावल का काम दोहराते हुए।

06

घर पर तंत्र काट का दूसरा काम: हर सदस्य का नित्य पाठ

अर्गला, 32 या 108 नाम, कवच, या कम से कम दुर्गा चालीसा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:56–10:29

दूसरा काम, वक्ता कहते हैं, नित्य पाठ है। पीठ भगवती के जिस भी स्वरूप का है — उदाहरण में जयंती माता, जो दुर्गा जी का स्वरूप हैं — उससे संबंधित कुछ पढ़ें: अर्गला का पाठ, उनकी 32 नामावली, 108 नाम या कवच का पाठ। इनमें से कोई भी एक पाठ घर का प्रत्येक व्यक्ति सुबह-शाम करे; और कुछ नहीं तो दुर्गा चालीसा तो सबको आती होगी, वही करें — पर प्रत्येक व्यक्ति करे, और पाठ के समय दीपक जलता रहे।

07

घर के भीतर तंत्र काटने के लिए शक्तिपीठ का श्रीफल क्यों ज़रूरी है

भीतर बैठी नकारात्मक शक्तियों के विरुद्ध एक सात्विक शक्ति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:30–11:04

वक्ता कहते हैं कि प्रश्न यह था कि घर में क्यों और कैसे करें, और उत्तर यह है कि घर में कम से कम एक शक्ति, एक सकारात्मक ऊर्जा होनी चाहिए: यदि घर पर तंत्र हो गया है और नकारात्मक शक्तियाँ घर में घुसी बैठी हैं, तो आप कितना भी करें, खुद से नहीं होगा। इसलिए एक सात्विक, पवित्र शक्ति — एक ऐसी ऊर्जा जो उस जगह से आई है, श्री नारियल यानी श्रीफल के रूप में, जिसे जगदम्बा से स्पर्श कराया गया है और जिसे उनका साक्षात स्वरूप माना जाता है — आकर वहाँ स्थापित हो, और उसी के सामने आपकी सारी पूजा-पाठ और समर्पण हो।

08

घर पर तंत्र काट का तीसरा काम: शनिवार और मंगलवार को मुख्य द्वार पर भैरव का दीपक

पीठ के रक्षक के लिए द्वार के दोनों ओर सरसों तेल के चौमुख दीपक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:05–11:37

तीसरा काम, वक्ता कहते हैं, दो दिन — शनिवार और मंगलवार — शाम के समय है। पीठ भगवती का स्वरूप है तो उनके कोई भैरव होंगे; कोई और देवता हैं तो उनके भी कोई न कोई रक्षक होंगे (श्री राम जी का स्थान है तो हनुमान जी)। भैरव तो हर जगह होते ही हैं, पता कर लीजिए — न भी पता चले तो कोई बात नहीं। शनिवार और मंगलवार की शाम को भैरव जी के नाम से दीपक आपके मुख्य द्वार पर दोनों ओर जलने चाहिए: द्वार के दोनों ओर सरसों तेल का एक-एक चौमुख दीपक, और भगवती के सामने तो जलाएँगे ही।

09

घर पर तंत्र काट के लिए सरसों, अपामार्ग और गूगल का धूना

चुने पाठ से 11 या 27 बार अभिमंत्रित सरसों, पूरे घर में धुआँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:38–12:38

द्वार के दीपकों के बाद, वक्ता कहते हैं, सरसों और कपूर मिलाकर अपामार्ग की लकड़ी पर जलाना है, उसी नामावली या पाठ का पाठ करते हुए जो आप कर रहे हैं — शिव जी का हो तो शिव कवच का अनुष्ठान, या शिव रक्षा स्तोत्र वाला, जो वे कहते हैं कि आगे देंगे। पहले सरसों को अभिमंत्रित करें: एक कटोरी में रखकर उसे स्पर्श करते हुए अपने पाठ का मंत्र (मान लीजिए दुर्गा जी की 32 नामावली की साधना) कम से कम 11 या 27 बार पढ़ें। फिर धूना देने वाले बर्तन में पहले अपामार्ग की लकड़ी जलाएँ, ऊपर थोड़ी सरसों डालें, और जब वह आधी जल जाए तो थोड़ा गूगल और घी डालकर पूरे घर में धुआँ कर दें।

10

घर पर तंत्र काट का चौथा काम: मिट्टी के खप्पर में रोज़ कपूर-लौंग का उतारा

बृहस्पतिवार छोड़कर हर दिन, सवा महीने से तीन महीने तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:39–13:41

चौथा काम उस व्यक्ति को करना है जिस पर तंत्र या विचार का प्रयोग है, प्रतिदिन शाम को, केवल बृहस्पतिवार छोड़कर — बृहस्पतिवार को नहीं करना है। लड़का हो या लड़की, और लड़की जब भी यह क्रिया करे उसके बाल खुले होने चाहिए। छोटे-छोटे मिट्टी के पात्र (खप्पर) लाकर रख लें; प्रतिदिन एक कपूर और दो लौंग उस व्यक्ति के सिर से उल्टा तीन बार घुमाएँ, उसी पीठ की शक्ति का स्मरण करते हुए, फिर घर के बाहर या तुलसी जी के पास ले जाकर उस मिट्टी के पात्र में रखकर जला दें। हर दिन नया पात्र; पुराने पात्र एक जगह इकट्ठा करते जाएँ और जब भी नदी किनारे जाएँ, वहाँ विसर्जित कर दें। सवा महीने — तीन-चार पक्ष, दो-तीन महीने — तक लगातार करने पर यह बड़े से बड़े तंत्र प्रयोग पर काम करता है।

11

घर के तंत्र काट विधान में खुले विकल्प: भोग, पाठ, महिलाएँ और आरती के दिन

मंदिर नहीं, घर के लिए बना; हर देवता का एक निश्चित आरती-दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:42–14:53

वक्ता कहते हैं कि प्रश्न घर में करने का था, और वे जान-बूझकर मंदिर जाने को नहीं कह रहे, क्योंकि मंदिर में बहुत देर तक कुछ नहीं कर पाएँगे। घर के विधान में कई चीज़ें खुली हैं: अपनी इच्छा से कोई भी मीठा भोग लगाइए और सबको खिलाइए; पीठ के देवता के अनुसार पाठ चुनिए — हनुमान जी का है तो बजरंग बाण; स्त्रियाँ बिना डरे करें, उनके चार-पाँच दिन छूटें तो उतने दिन कोई और करे, फिर वे पुनः शुरू करें। सभी सुबह-शाम 15 मिनट से आधा घंटा दें और मिलकर कपूर-लौंग से आरती करें; रोज़ न हो सके तो एक दिन तय रखें — हनुमान जी का मंगलवार, दुर्गा जी का शुक्रवार या सोमवार, शिव जी का सोमवार, और काली जी का शनिवार की शाम।

12

घर का तंत्र काट विधान क्या करता है, और उसकी सीमा

तीन महीने में फर्क, स्वप्न में मार्गदर्शन, प्रयोग पंगु, जड़ से नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:54–15:57

वक्ता कहते हैं कि इतना करेंगे तो तीन महीने में फर्क नज़र आने लगेगा। कितने भी बड़े तंत्र प्रयोग हों, जब आप निरंतरता बना लेंगे तो शक्तिपीठ की शक्ति उन्हें छिन्न-भिन्न कर देगी और ऐसा मार्ग बना देगी कि आपको स्वप्न में मार्गदर्शन मिलने लगेगा — स्वयं चीज़ें दिखेंगी, पता चलेगा कि आगे क्या करना है। वे यह नहीं कहते कि जड़ से खत्म हो जाएगा, पर वह इस लायक भी नहीं रहेगा कि आप पर प्रभाव डाल सके — शक्ति उसे पंगु बनाकर छोड़ देगी। यदि आपका प्रारब्ध अच्छा हो और आप जीव सेवा करते हों, पशु-पक्षियों की सेवा, लोगों की सहायता करते हों, हृदय से अच्छे हों, तो बहुत सहायता मिलती है और सारी परेशानियाँ जड़ से खत्म हो जाती हैं। इसमें आपको स्वयं मेहनत करनी होगी, वे कहते हैं: जादू नहीं होगा, चमत्कार नहीं होगा, पर मेहनत करेंगे तो लाभ अवश्य होगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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