रिश्तेदार की पुतला क्रिया के विरुद्ध 36 दिन का बगलामुखी अनुष्ठान — तांत्रिक की वाणी स्तंभित और उपसंहार की सीख

साधक परिवार पर हुई पुतला क्रिया को 36 दिन के बगलामुखी अनुष्ठान से पलटने की सत्य घटना, और घर के बंधन, उपसंहार विधि तथा शरणागत शत्रु की रक्षा पर वक्ता की सीख।

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01

धर्मनिष्ठ परिवार की उन्नति से ईर्ष्या — अभिचार क्रिया की जड़

मित्र या रिश्तेदार ईर्ष्या करता है, और जगदम्बा अपने उपासक की रक्षा करती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–01:54

वक्ता कहते हैं कि जब कोई परिवार धर्म के मार्ग पर आजीविका कमाता है और पूजा-पाठ में समर्पित रहता है, तो भगवती की कृपा से पूरा घर आध्यात्मिक, आर्थिक और व्यावहारिक रूप से उन्नति करता है — और यही देखकर आसपास के लोग, विशेषकर कोई मित्र या रिश्तेदार, ईर्ष्या करने लगते हैं; यह होता ही होता है। आधे लोग इसलिए दुखी हैं कि अगला आदमी सुखी कैसे है। वे जो अनुभव सुनाते हैं वह दिखाता है कि ईर्ष्या में व्यक्ति किस स्तर तक गिर सकता है, और जगदम्बा अपने परम सेवक साधकों की कैसे रक्षा करती हैं।

02

सत्य घटना: देवास के साधक परिवार पर रिश्तेदार की क्रिया — शरीर फूलना और रक्त विकार

शरीर फुलाने वाली क्रिया; दवा का असर थोड़ी देर ही

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:09–05:07

वक्ता मध्य प्रदेश के देवास ज़िले के एक मित्र साधक की घटना सुनाते हैं — बहुत पुराने साधक, सुखी और धर्मनिष्ठ परिवार। एक रिश्तेदार ने ईर्ष्यावश किसी बहुत अच्छे तांत्रिक से घर पर और साधक की माताजी पर ऐसी क्रिया करवा दी जिसमें शरीर फूलने लगता है। मेडिकल रिपोर्ट में रक्त-संबंधी विकार आया; शरीर बार-बार फूलता, दवा का थोड़ा असर होता, फिर वैसा ही हो जाता, और दिक्कतें बढ़ती गईं।

03

साधक को अपने घर पर हुई क्रिया का पता कैसे चलता है?

घर का हल्कापन जाना, अनायास क्लेश, और स्वप्न से इष्ट की चेतावनी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:08–06:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिस घर में देवी-देवताओं की कृपा रहती है उसका हल्कापन और सकारात्मकता महसूस की जा सकती है; क्रिया के बाद घर में अनायास क्लेश होने लगे, और साधक होने से परिवार को भाँपते देर न लगी कि कुछ गलत हुआ है। जब साधना करते हैं, वे कहते हैं, तो इष्ट शक्ति किसी न किसी माध्यम से जानकारी दे ही देती है, और सबसे विशेष माध्यम स्वप्न है। स्वप्न में इन्हें पातालक क्रिया दिखाई गई — किसी के नाम से तंत्रोक्त विधि से अभिमंत्रित पुतला खराब जगह गाड़ा गया — और यह भी कि रिश्तेदार घर आकर बैठे और तांत्रिक वस्तुएँ रख गए ताकि नकारात्मक शक्तियाँ घर पहुँचें।

04

गृह-बंधन की सीमा: अभिमंत्रित तांत्रिक वस्तुएँ लेकर घुसा आगंतुक

भक्त के लिए अतिथि ईश्वर है, और आक्रमणकारी उसी का लाभ उठाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:22–07:28

वक्ता कहते हैं कि घर कितना भी सुरक्षित कर लें, यदि कोई व्यक्ति ऐसी क्रियाएँ करवाकर किसी चीज़ को लेकर घर में घुस जाता है तो बंधन उस तरह काम नहीं करता जैसा करना चाहिए, और दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इस घटना में रिश्तेदार तांत्रिक को "मित्र" कहकर साथ लाए, आने का कोई बहाना बताया, सामान्य मेहमान की तरह चाय-पानी किया — और भक्ति-मार्गी घर के लिए हर अतिथि ईश्वर समान है, तो कोई शक न हुआ — और घर में अपनी राक्षस प्रवृत्ति दिखाकर चले गए।

05

पुतला क्रिया के लिए वक्ता का बताया उपाय: 36 दिन का बगलामुखी अनुष्ठान, साथ में भैरव मूल मंत्र

शत्रु-नाशक संकल्प, दो साधनाएँ साथ, कुछ दिनों में राहत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:29–09:28

चूँकि यह परिवार भगवती दुर्गा के साथ भगवती बगला की भी नियमित उपासना करता था, वक्ता ने इन्हें 36 दिन का बगलामुखी महानुष्ठान उठाने को कहा, जिसके संकल्प में पूरा उच्चारण करना था "परमंत्र परयंत्र परतंत्र शदनार्थे मम परिवारस्य सर्व शत्रु कृत्य प्रयोग इत्यादि विनाशार्थे" (जैसा प्रतिलेख में है), और फिर जो साधना करनी है उसका संकल्प। साथ में भैरव मूल मंत्र — भैरव अष्टमी के लिए प्रकाशित महाभैरव मंत्र — का प्रयोग विधान करना था, जिसे वे पहले ही सिद्ध कर चुके थे; वे कहते हैं कि हर गृहस्थ को वह मंत्र करके रखना चाहिए, परिवार की रक्षा में उसका विशेष प्रभाव है। तीन-चार दिन में माताजी का स्वास्थ्य सुधरने लगा, दस-ग्यारह दिन में सब नियंत्रण में आ गया, और साधक ने फिर भी 36 दिन का संकल्प पूरा किया।

06

बगलामुखी अनुष्ठान से दोनों अपराधियों की वाणी क्यों स्तंभित हुई

प्रतिकार-क्रिया को नकारात्मक मसान विद्या से पलटना ध्यान-श्लोक की तरह उलटा पड़ता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:29–12:42

वक्ता कहते हैं कि बात परिवार के ठीक होने पर रुकी नहीं: जिसने घर में घुसकर कृत्य किया और जिसने करवाया, दोनों की वाणी स्तंभित हो गई — गला फूल गया, नस दब गई, वोकल कॉर्ड में सूजन — ठीक वैसे जैसे भगवती बगला का ध्यान कहता है कि वे बाएँ हाथ से शत्रु की जीभ पकड़कर दाहिने हाथ के मुद्गर से प्रताड़ित करती हैं। वे कारण बताते हैं: परिवार जब रोज़ बलि विधान से क्रिया काट रहा था, तो तांत्रिक को पता चलता और वह अपनी विद्या से पलटता — भगतवाल की चीज़ें, उनकी जानकारी में ज्वालापंथी, जिस बड़े मसान को लोग "बादशाह" कहते हैं उस प्रकार की, जिसका नाम वे नहीं लेना चाहते — नकारात्मक में; कितनी भी बड़ी हो, चीज़ नकारात्मक है और गलत में प्रयोग हो रही है, और बार-बार पलटते रहने से इधर भगवती ने नियंत्रण किया और उधर उसकी जीभ न हिली। दोनों को एक जैसी परेशानी होने से बाद में पक्का हुआ कि ऑफिस के मित्र ने जिस "जानकार" से मिलवाया था, वही तांत्रिक था।

07

किसी भी प्रयोग से पहले उपसंहार विधि जानें: अश्वत्थामा की चेतावनी

जो अस्त्र लौटाना न आए, वह चलाने वाले पर ही पड़ता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:43–13:29

वक्ता कहते हैं कि तंत्र मार्ग पर कोई भी अनुष्ठान, साधना या प्रयोग करें, सबसे बड़ी बात यह है कि उसे शांत करने की विधि भी आपको आनी चाहिए। विशेषकर यदि किसी अस्त्र का प्रयोग कर रहे हैं, या सीधे किसी शत्रु के नाम से संकल्प लेकर प्रयोग कर रहे हैं, तो उपसंहार की विधि पता होनी चाहिए — नहीं तो अश्वत्थामा जैसी स्थिति हो जाती है, आपकी विद्या आपके लिए ही घातक सिद्ध हो सकती है, जैसे अश्वत्थामा को ब्रह्मास्त्र छोड़ना आता था पर वापस लौटाने की विधि का ज्ञान नहीं था।

08

शरणागत शत्रु को छोड़ने का कर्तव्य: तर्पण और अभिषेक से उपसंहार

दंडित जोड़ी के पास दो रास्ते थे, और जगदम्बा ने मति स्वीकार की ओर मोड़ी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:30–15:21

वक्ता कहते हैं कि साधक ने हर विधि-विधान पूरा किया था — पाताल क्रियाएँ, साथ में यंत्र पर तर्पण आदि — तो पूरा तंत्र समूल नष्ट हुआ, भगवती ने दंड दिया, और सामने वाले को पता चल गया कि कहाँ से हो रहा है; उनकी स्थिति दिन-पर-दिन बिगड़ी और कोई तोड़ न रहा। रास्ते दो ही थे — अपने गुरु की शरण, या सीधे परिवार से बात — और कोई सामने आकर गलती माने यह बहुत कम होता है, पर जगदम्बा ने ऐसी मति फेरी कि दोनों ने स्वीकार किया और ठीक कर देने की विनती की, क्योंकि दोनों के घर डगमगाने लगे थे। शरणागत की रक्षा, वे कहते हैं, हर साधक का कर्तव्य है जब किसी पर प्रयोग किया हो — और भगवती बहुत कम, हज़ारों साधकों में किसी एक के साथ, ऐसा करती हैं कि दंडित दुष्ट शरणागत हो। तो उपसंहार विधि — तर्पण और अन्य क्रियाएँ, अभिषेक आदि — से भगवती की उग्रता शांत की गई, भैरव जी की चीज़ें उनके विधि-विधान से, और लगभग सप्ताह भर में दोनों की परेशानी हटी; उन्होंने वचन दिया कि ऐसा फिर कभी नहीं करेंगे।

09

साधक अपने परिवार की रक्षा करता है, पर आक्रमणकारी का नाश नहीं करता

पर-विद्या-ग्रसनी विद्या होते हुए भी, अपनी ऊर्जा का क्षय क्यों

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:22–15:46

वक्ता कहते हैं कि दीक्षित साधक होने से इनके पास पर-विद्या-ग्रसनी विद्या थी और चाहते तो दोनों को पूरी तरह समूल नष्ट कर सकते थे। पर साधक का काम यह नहीं कि दूसरे की चीज़ें खराब करे, बाँधे — अपनी अवनति क्यों करना, अपनी ऊर्जा का क्षय क्यों करना? यह उनका कार्य नहीं था और उन्होंने ऐसा कुछ किया भी नहीं; अपने परिवार की रक्षा और बचाव के लिए जो चाहिए था, वही किया।

10

साधना का लक्ष्य: दंड देने और शरण देने दोनों में सक्षम, शक्ति का दुरुपयोग कभी नहीं

सतत निष्काम साधना से जगदम्बा का शरणागत दूसरों को शरण देने योग्य बनता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:47–16:53

वक्ता कहते हैं कि सबको इस अनुभव से सीखना चाहिए कि इतने सक्षम हो जाएँ कि दूसरे को दंड दे सकें, फिर उसकी रक्षा भी कर सकें, और अपने परिवार की भी — शत्रु शरणागत हो तो उसे बचाने की विधि भी आपके पास हो। यह दो-चार-दस दिन की साधना से नहीं होता, बल्कि सतत निष्काम भाव से, या सकाम में भी उतनी ही भौतिक कामना से जितने से काम चल जाए; ऐसे जो जगदम्बा के शरणागत होते हैं वे दूसरों को शरण देने योग्य बन जाते हैं। केवल शक्ति पाकर उसका दुरुपयोग — प्रदर्शन, बात-बात पर किसी पर प्रयोग करके कष्ट देना और वर्चस्व जमाना — साधना का उद्देश्य कभी नहीं है, और जिसे वही चाहिए उसे इस मार्ग में नहीं आना चाहिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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