यूट्यूब से ली गई 41 दिन की नवार्ण मंत्र साधना — सत्य घटना, अपनाया गया विधान, और वक्ता द्वारा गिनाई गई हर गलती

बिना दीक्षा के एक गृहस्थ की यूट्यूब से ली गई 41 दिन की नवार्ण मंत्र साधना की सत्य घटना, उसका विधान, 2022 में आई परेशानियाँ, और मंत्र, माला, न्यास तथा छूटे हुए बलि, भैरव और क्षेत्रपाल पूजन की गलतियों की वक्ता की सूची।

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01

केस: यूट्यूब से लिया गया बिना दीक्षा का 41 दिन का नवार्ण मंत्र अनुष्ठान

रात्रि जप, अखंड ज्योत, 108 माला, शांत समापन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:44–02:42

वक्ता कोरोना काल की एक सत्य घटना रखते हैं: एक व्यक्ति, जिसे किसी प्रकार की दीक्षा नहीं थी और जो शुरू से भगवती की सेवा करता आया था, एक बहुत प्रसिद्ध चैनल के नवार्ण मंत्र के सारे वीडियो छानकर, वहाँ बताए अनुभवों से प्रेरित होकर रात्रिकालीन साधना शुरू करता है। लाल वस्त्र और लाल आसन पर वह रात लगभग 10:30 से 2:30 तक 108 माला पूरी करने का प्रयास करता; 41 दिन अखंड ज्योति जलाए रखी, एकांत कमरे में भगवती को नैवेद्य लगाकर चालीसा, अष्टोत्तरशतनाम, नवार्ण जप और गणपति की एक माला करता, और कुछ नहीं। साधना बिना भय, बिना आवेश, बिना किसी आगमन के शांत रूप से पूरी हुई; उसके बाद वह रोज़ नौ माला करता रहा और स्वप्न में सुंदर अनुभव हुए, जिसे वक्ता किसी भी साधक के लिए उचित, सकारात्मक प्रतिक्रिया कहते हैं। यह 2021 की बात थी।

02

पंचगव्य स्नान और पंचाक्षरी की एक माला से माला प्रतिष्ठित नहीं होती

कम से कम ईशान मंत्र होता तो माना जाता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:43–03:20

वक्ता कहते हैं कि नवार्ण वाले केस में प्रयोग की गई माला पुरानी लाल चंदन की माला थी जो उनके अनुसार किसी प्रकार से प्रतिष्ठित नहीं थी। उस व्यक्ति ने उस पर न माला की प्रतिष्ठा की थी, न कोई वैसी विधि-विधान; केवल उसे पंचगव्य और पञ्चामृत से स्नान कराया था और चैनल देखकर प्रणव सहित पंचाक्षरी मंत्र की एक माला उस पर कर दी थी, जिसके बारे में चैनल पर कहा गया था कि इससे माला प्रतिष्ठित हो जाएगी। वक्ता कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता; कम से कम ईशान मंत्र भी किया होता तो माना जाता कि कुछ हुआ, लेकिन यह तो कुछ और ही था।

03

गलत तरीके से की गई नवार्ण साधना के बाद के लक्षण: भय, आवेश, चक्कर और बीमारी

भय हरने वाला मंत्र अपने ही समय में भय देता हुआ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:22–06:56

वक्ता बताते हैं कि नवार्ण वाले केस में 2022 में क्या हुआ: पहले जप के लिए बैठते ही, खासकर शाम को, खाने की नली में खिंचाव और उल्टी जैसा लगना, जिसमें मेडिकल जाँच में कुछ नहीं निकला; फिर लगातार घबराहट और भय। चैनल वाले साधक ने नवरात्रि के नौ दिन साधना दोहराने को कहा, और उसके बाद हमेशा आसपास किसी का आभास, सोते ही झकझोरकर उठाए जाने जैसा लगना, गिरने का आभास और फिर तेज़ चक्कर व लो प्रेशर, बिना खान-पान की गड़बड़ी के पेट और लीवर का कमज़ोर होना, शाम को निश्चित आवेश (शरीर और कंधे भारी, झूमने की इच्छा, दाँत किटकिटाना, क्रोध बढ़ना, फिर गिर जाना), और अपने पुराने जप-समय 11:30 से 2:30 में तीव्र भय कि कोई सिरहाने या खिड़की पर खड़ा है। वक्ता उलटफेर की ओर इशारा करते हैं: जिस मंत्र की साधना से भय दूर होता है, वही मंत्र भय पैदा कर रहा था।

04

गलत ढंग से की गई प्रचंड साधना पूरे जीवन को छूती है: नौकरी, संतान, धन

सही मंत्र फर्श से अर्श तक पहुँचा देता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:57–09:09

वक्ता कहते हैं कि मार्च 2022 के आसपास नवार्ण वाले केस के व्यक्ति की वर्क-फ्रॉम-होम नौकरी भी चली गई, शायद बीमारी के कारण ऑफिस जॉइन न कर पाने से; वह स्वयं इसे मंत्र का कारण बताता है, पर वक्ता इसे उतना नहीं मानते। लेकिन चूँकि साधना बहुत प्रचंडता से चली थी, वे कहते हैं, जीवन पर असर तो कहीं न कहीं पड़ना ही था: मंत्र जब सही फल देता है तो कितनी भी विपरीत परिस्थिति में व्यक्ति को फर्श से अर्श तक पहुँचा देता है, और गलत साधना करने पर दिक्कतें आती हैं। आगे वे दर्ज करते हैं: सितंबर 2022 में जुड़वा बच्चों से गर्भवती पत्नी का एक बच्चा मिसकैरेज में गया; दिसंबर 2022 में मिर्गी वाले बेटे का जन्म हुआ, जो दवा से 2023 की शुरुआत तक ठीक हो गया; पूरी तरह पक्ष में पड़ा पुराना केस अंतिम फैसले में पलट गया, जिससे भारी आर्थिक हानि हुई और सारा शेयर बाज़ार निवेश हटाना पड़ा; शरीर को क्षति, मानसिक अशांति और घर में अनबन। चैनल वाले से सीधे संपर्क में रहने पर भी कोई उचित समाधान नहीं निकला।

06

क्या नवार्ण मंत्र के आगे ॐ और पीछे नमः लगाना चाहिए?

मूल नवार्ण में दोनों नहीं; जोड़ने से मंत्र बदल जाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:44–11:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उस व्यक्ति को दिए गए नवार्ण में आगे प्रणव और "विच्चे" के बाद "नमः" लगा था, जबकि मूल नवार्ण मंत्र में, जैसा किसी भी गुरु परंपरा में रहने वाला जानता है, इनमें से कुछ नहीं होता। यूट्यूब के लगभग 90% वीडियो कहते हैं कि ॐ ज़रूर लगाना चाहिए, इससे मंत्र की ऊर्जा संतुलित होती है, पर वे कहते हैं कि तांत्रिक मंत्र का अपना नियम है, इसीलिए इन मंत्रों के लिए गुरु आवश्यक है; किसे लगाना चाहिए, किसे नहीं, यह अलग विषय है। नमः लगाना उससे भी बड़ी गलती है: मंत्र स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आदि भेद से माने गए हैं, और नमः लगाने से मंत्र की क्या गति होती है यह जाने बिना स्वयं से लगा दिया गया। नवार्ण, वे कहते हैं, खिलवाड़ नहीं है; उस व्यक्ति ने यह गलत मंत्र इतने दिन जपा और उससे पुरश्चरण भी किया।

08

नवार्ण के साथ प्रणव लगेगा या नहीं, यह केवल दीक्षा गुरु तय करते हैं

हर दीक्षित के लिए अलग, कभी सामान्य नियम नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:27–11:40

वक्ता कहते हैं कि नवार्ण वाले केस के व्यक्ति ने प्रणव लगाकर जप किया, जिसका वह अधिकारी था ही नहीं। नवार्ण मंत्र में प्रणव लगता है या नहीं, यह बिल्कुल अलग विषय है: यह केवल उनके लिए है जो दीक्षित हैं (दीक्षा), और उन्हें गुरु जो उपदेश देंगे वह हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है। यह कभी सामान्य विषय नहीं है, वे कहते हैं; सदैव याद रखें।

09

नवार्ण के साथ प्रणव सहित गणपति जप और भैरव पूजन का अभाव

एक बार काल भैरव अष्टक पढ़ना भैरव पूजन नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:41–11:58

वक्ता कहते हैं कि नवार्ण के साथ उस व्यक्ति ने जो सामान्य गणपति साधना की थी, वह भी प्रणव के साथ थी, तो वहाँ भी एक मंत्र दोष लगा। भैरव पूजन के बारे में पूछने पर कोई विशेष पूजन नहीं था: वह काल भैरव अष्टक एक बार पढ़ता था और बहुत प्रसन्न हुआ तो सोमवार-शुक्रवार को शिव चालीसा। वह, वक्ता कहते हैं, भैरव पूजन नहीं है।

10

नवार्ण जप में योगिनियों के लिए बलि-नैवेद्य और क्षेत्रपाल पूजन आवश्यक

"बंपर" गलती: योगिनियों को अन्न मिला ही नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:59–12:23

सारी गलतियों के बाद, वक्ता कहते हैं, नवार्ण वाले केस की "बंपर" गलती आई: उस व्यक्ति ने कभी किसी प्रकार की बलि, भोग या नैवेद्य नहीं दिया। नवार्ण मंत्र तांत्रिक मंत्र है, वे कहते हैं; उसके जप से योगिनीयाँ आती हैं, और उन्हें कोई बलि, नैवेद्य, अन्न मिला ही नहीं। क्षेत्रपाल का पूजन भी कभी नहीं हुआ। नवार्ण की बहुत महिमा है और उसके सारे नियम हैं; इन नियमों को पूरी तरह जाने बिना करोगे तो जो इस केस में हुआ, वह सब होगा।

11

गलत जप ने कौन सी शक्ति जगाई, यह अलग निदान है; कवच के बिना मूल मंत्र से परेशानी

मंत्र की गलतियाँ बनाम फिर लगा दोष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:24–12:58

वक्ता कहते हैं कि नवार्ण वाले केस में उन्होंने केवल मंत्र के प्रभाव-दुष्प्रभाव की चर्चा की है, यानी मंत्र कैसे गलत रूप से जपा गया। गलत जप के कारण उस व्यक्ति के घर की कौन सी शक्ति जागृत हुई, शरीर पर क्या आवेश हुआ, कोई रास्ते-घाट की शक्ति लगी, क्षेत्रपाल का दोष लगा या भैरव जी का दोष, किसके कारण क्या हुआ, यह पूरा अलग विषय है। वे जोड़ते हैं कि कई सहस्रनाम और कवच ग्रंथों में लिखा है कि बिना कवच के पाठ के मूल मंत्र का जप करने से ऐसी-ऐसी परेशानियाँ होती हैं, तो यह भी एक संबंधित विषय है।

12

तांत्रिक मंत्र शाक्त साधक से दीक्षा और उपदेश लेकर ही लें

आज सफलता, अधिकार के बिना अंधकारमय भविष्य

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:59–13:23

वक्ता कहते हैं कि इसीलिए वे सबसे कहते हैं कि नवार्ण मंत्र जैसे तांत्रिक मंत्र सही व्यक्ति, सही शाक्त साधक से लें: जानकारी लेकर, दीक्षा लेकर, उपदेश प्राप्त करके, शंका का निवारण करके, तब अनुष्ठान करें। आज आप हर प्रकार से सफल हो रहे होंगे, वे चेतावनी देते हैं, पर भविष्य अंधकारमय हो सकता है। सचेत रहें, सतर्क रहें, सही प्रकार से साधना करें। उनका उद्देश्य, वे कहते हैं, किसी की मंत्र या उसके देवता में श्रद्धा घटाना नहीं बल्कि भ्रम दूर करना है, ताकि कोई अधिकार के बिना ऐसा कर्म न कर डाले जिससे उसे और उसके परिवार को हानि हो; सनातन के एक भी साधक की हानि सबकी क्षति है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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