तंत्रोक्त बजरंग बाण की सिद्धि एवं प्रयोग विधि (भाग-2)

तंत्रोक्त बजरंग बाण को सिद्ध करने की 11 दिन की विधि, और सिद्ध हो जाने के बाद रक्षण हेतु उसका प्रयोग।

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01

बजरंग बाण सिद्धि से पहले पहले दिन का मंदिर में पत्र समर्पण

पहले दिन की पूजा में मंदिर में "राम" लिखा पीपल का पत्ता, या कम से कम पाँच तुलसी पत्र, समर्पित करना

· Reviewed Sep 2026 · 00:00–00:41

वक्ता कहते हैं कि साधक पीपल के पत्ते पर "राम" लिखकर, और यदि पीपल का पत्ता न मिले तो कम से कम पाँच तुलसी पत्रों पर "राम" लिखकर, पहले दिन की पूजा के रूप में मंदिर में समर्पित करे, और फिर घर लौटकर लाल वस्त्र धारण करके साधना आगे बढ़ाए — यह साधना स्त्रियाँ भी पुरुषों की तरह पूरी तरह कर सकती हैं।

02

बजरंग बाण के संकल्प से पहले घर पर की जाने वाली तैयारी

लाल वस्त्र और लाल कंबल का आसन, फिर आचमन तथा आरंभिक पवित्रीकरण

· Reviewed Sep 2026 · 00:42–01:00

घर लौटकर लाल वस्त्र धारण करने के बाद साधक लाल कंबल के आसन पर बैठता है और आगे बढ़ने से पहले आरंभिक क्रियाएँ — आचमन तथा अन्य पवित्रीकरण — पूर्ण करता है।

घर आने के बाद साधक सबसे पहले लाल वस्त्र धारण करता है, फिर ऐसे आसन पर बैठता है जो स्वयं लाल हो — लाल कंबल का आसन। आसन पर विराजमान होने के बाद सर्वप्रथम आरंभिक क्रियाएँ — आचमन तथा जो भी पवित्रीकरण किया जाता है — पूर्ण की जाती हैं और आगे बढ़ने से पहले शरीर शुद्ध कर लिया जाता है।

03

11 दिन की बजरंग बाण सिद्धि का संकल्प

ग्यारह तुलसी पत्र, ग्यारह रुपये और नारियल हाथ में लेकर 11 दिन तक प्रतिदिन 11, 21 या 27 पाठ का संकल्प

· Reviewed Sep 2026 · 01:01–02:22

ग्यारह तुलसी पत्र, ग्यारह रुपये और एक नारियल हाथ में लेकर साधक अपना नाम, गोत्र और स्थान बोलते हुए संकल्प लेता है कि हनुमान जी की कृपा प्राप्ति हेतु, बजरंग बाण को जागृत करने हेतु और आगे प्रयोग करने पर उसका पूर्ण प्रभाव मिलने हेतु वह 11 दिन तक प्रतिदिन निश्चित संख्या में पाठ करेगा।

04

राम दरबार पूजन से पहले गुरु-गणपति पूजन और दीप प्रज्वलन

राम दरबार के पूजन से पहले गुरु-गणपति पूजन, कुलदेवी का स्मरण और पहले से प्रज्वलित कर्म-साक्षी दीपक

· Reviewed Sep 2026 · 02:23–03:04

संकल्प के बाद साधक आरंभिक गुरु और गणपति पूजन करता है, कुलदेवी का स्मरण करता है, साक्षी के रूप में "कर्म साक्षी" दीपक प्रज्वलित रखता है, और तभी राम दरबार का पूजन करता है — श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का — चाहे श्री विग्रह हो या फोटो, और उसके बाद हनुमान जी की ओर बढ़ता है।

05

प्रतिदिन के अभिषेक से पहले हनुमान जी का आवाहन

श्री विग्रह में सीधे आवाहन, या फूल में आवाहन करके उसे फोटो के सामने प्लेट में रखना

· Reviewed Sep 2026 · 03:05–03:18

वक्ता कहते हैं कि यदि श्री विग्रह उपलब्ध हो तो हनुमान जी का आवाहन उसी में करें; यदि केवल फोटो हो तो एक फूल लेकर उसमें आवाहन करें और उस फूल को फोटो के सामने एक प्लेट में रख दें — उसी पर उस दिन का पूजन होगा।

राम दरबार के पूजन के पश्चात हनुमान जी का आवाहन किया जाता है। यदि हनुमान जी का श्री विग्रह है तो आवाहन उसी में किया जाता है। यदि केवल फोटो है तो एक फूल लेकर उससे आवाहन किया जाता है और वह फूल फोटो के सामने एक प्लेट में रख दिया जाता है — फिर उसी फूल के सामने पूजन किया जाता है।

06

हनुमान जी का अभिषेक, सिंदूर लेपन और जनेऊ अर्पण

बजरंग बाण के पूजन में हनुमान जी के श्री विग्रह का अभिषेक, सिंदूर लेपन और जनेऊ धारण कैसे किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 03:19–04:01 · Also a question

हनुमान जी के श्री विग्रह का पञ्चामृत, गंगाजल और अगरू से अभिषेक किया जाता है, फिर अच्छे से पोंछकर पान के पत्ते पर चमेली तेल में मिलाया हुआ सिंदूर नीचे से ऊपर की ओर लेपन किया जाता है; पूरा लेपन हो जाने पर हनुमान जी को जनेऊ (यज्ञोपवीत) अवश्य पहनाया जाता है, चाहे पूजा करने वाला स्वयं जनेऊ पहनता हो या नहीं।

07

हनुमान जी को वस्त्र या कलावा पहनाना और अष्टगंध तिलक लगाना

बड़े श्री विग्रह पर नया वस्त्र, अन्यथा वस्त्र के रूप में कलावा, फिर अष्टगंध का तिलक

· Reviewed Sep 2026 · 04:02–04:19

यदि श्री विग्रह बड़ा हो तो नया वस्त्र पहनाया जा सकता है; अन्यथा कलावा ही वस्त्र के रूप में पहना दिया जाता है, इसके बाद अष्टगंध का तिलक लगाकर हनुमान जी को सुंदर रूप से सजाया जाता है।

यदि श्री विग्रह बड़ा है और साधक चाहे तो नया वस्त्र पहनाया जा सकता है; यदि नहीं, तो कलावालाल-पीला पवित्र धागा (जिसे मौली भी कहते हैं), जो कलाई पर बाँधा जाता है अथवा दीपक की बत्ती बनाने में प्रयुक्त होता है; यह लच्छों में आता है जिन्हें गिनकर लपेटा जाता है। ही वस्त्र के रूप में हनुमान जी को पहना दिया जाता है। इसके बाद अष्टगंधआठ सुगंधित द्रव्यों से बना लेप, उपाय व पूजा विधियों में सिंदूर से पूर्व तिलक के रूप में लगाया जाता है। से तिलक लगाकर उन्हें सुंदर रूप से सजाया जाता है।

08

प्रतिदिन का लड्डू भोग और दीपक का आटा तैयार करना

प्रतिदिन दो लड्डू और उन पर एक तुलसी पत्र, फिर दीपक के लिए पाँच अनाजों का आटा घी मिलाकर कड़ा सानना

· Reviewed Sep 2026 · 04:20–05:04

11 दिनों में प्रतिदिन दो लड्डू, उन पर एक तुलसी पत्र रखकर, हनुमान जी को भोग लगाए जाते हैं — रोज ताजे लड्डू लाना अधिक अच्छा है और घर पर बना बेसन का लड्डू सबसे उत्तम — इसके बाद पहले से तैयार आटे को थोड़े पानी और घी के साथ कुछ कड़ा सानकर उस दिन का दीपक बनाया जाता है।

09

प्रतिदिन का एक मुखी दीपक बनाना और उसमें सामग्री डालना

शरीर से नापे कलावे की बाती वाला एक मुखी आटे का दीपक, जिसमें तेल, ग्यारह लौंग, पाँच काली मिर्च, सरसों और कपूर डाले जाते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 05:05–05:50

साने हुए आटे से एक मुखी दीपक बनाया जाता है, जिसकी बाती साधक के अपने शरीर से नापे गए कलावा से बनती है, और उसमें प्रतिदिन तेल, ग्यारह लौंग, पाँच काली मिर्च, थोड़ी पीली सरसों और कपूर का एक गोटा डाला जाता है; दीपक इतना बड़ा बनाया जाता है कि कम से कम आधा घंटा जल सके।

10

ग्यारह तुलसी पत्रों से प्रतिदिन पाठ करने की विधि

प्रत्येक पूरे पाठ के लिए "राम" लिखा एक तुलसी पत्र हाथ में लेकर बाद में चढ़ाना, इस प्रकार ग्यारह बार

· Reviewed Sep 2026 · 05:51–06:21

दीप प्रज्वलित होने के बाद साधक पहले राम जी का नाम उच्चारण करता है और हनुमान जी का ध्यान करता है, फिर "राम" लिखे ग्यारह तुलसी पत्रों में से एक पत्ता हाथ में लेकर पूरा बजरंग बाण एक बार पढ़ता है और वह पत्ता हनुमान जी पर चढ़ा देता है — ऐसा ग्यारह बार करने पर उस दिन का पाठ पूर्ण होता है।

11

बजरंग बाण का हवन विधान और चौपाई-वार आहुति

गुरु, गणपति, कुलदेवी और नवग्रह के नाम से घी-गुगल की साबर पद्धति की आहुतियाँ, फिर क्रमशः प्रत्येक चौपाई पर एक आहुति

· Reviewed Sep 2026 · 06:22–07:30

चूँकि बजरंग बाण सबर मंत्र पद्धति का है, इसलिए उसका हवन साबर पद्धति से होता है: घी और गुग्गुल को मिलाकर पहले गुरु जी, गणपति जी, कुलदेवी और नवग्रह के नाम से आहुति दी जाती है, और उसके बाद बजरंग बाण की प्रत्येक चौपाई पर क्रमशः एक-एक आहुति दी जाती है, उसी चौपाई को मंत्र की तरह बोलते हुए।

12

प्रतिदिन के हवन में नींबू बलि और समापन आरती

बिना निचोड़ा साबुत नींबू हवन में नींबू-बलि के रूप में डालना, फिर प्रणाम और कपूर से पाँच बार आरती

· Reviewed Sep 2026 · 07:31–07:59

सारी चौपाई आहुतियाँ पूर्ण हो जाने पर एक साबुत नींबू — बिना निचोड़े — हवन में निंबू बलि के रूप में डाला जाता है, यह कार्य स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं; इसके बाद प्रणाम किया जाता है और चाहें तो कपूर पर दो लौंग रखकर पाँच बार आरती दिखाई जाती है।

13

जल के साथ उस दिन का पुण्य फल हनुमान जी को समर्पित करना

क्षमा प्रार्थना के लिए हाथ में जल लेकर उस दिन के पूरे जप का फल हनुमान जी को समर्पित करना और जल उनके दाहिने हाथ में छोड़ना

· Reviewed Sep 2026 · 08:00–08:26

एक हाथ में जल लेकर साधक क्षमा प्रार्थना करता है और उस दिन के पूरे जप का पुण्य फल हनुमान जी को समर्पित करता है, राम जी का नाम लेते हुए — या केवल "जय श्री राम" बोलते हुए — और वह जल हनुमान जी के दाहिने हाथ में छोड़ देता है।

14

सिद्धि काल में ब्रह्मचर्य और समय के नियम

11 दिन की बजरंग बाण सिद्धि में ब्रह्मचर्य और समय का कौन सा नियम पालन करना होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 08:27–09:00 · Also a question

स्त्री हो या पुरुष, विवाहित हो या अविवाहित, पूरे 11 दिन कड़ाई से ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है — मानसिक रूप से भी — और यह पूजा सुबह 8 बजे से पहले करनी चाहिए; यदि रात में करें तो उस दिन लहसुन-प्याज नहीं खाना होगा और भोजन पूर्ण रूप से सात्विक होना चाहिए।

15

नियम केवल सिद्धि काल में लागू, बाद के प्रयोग में नहीं

ये नियम केवल सिद्धि काल तक बाँधते हैं, और हवन के साथ राम जी के नाम से भी आहुति दी जाती है

· Reviewed Sep 2026 · 09:01–09:35

ये नियम केवल सिद्धि काल में ही लागू होते हैं; सिद्धि पूर्ण हो जाने के बाद बजरंग बाण का प्रयोग कभी भी बिना इन नियमों के किया जा सकता है। हवन (हवन) के साथ राम जी के नाम से भी कम से कम पाँच आहुति "सीताराम चंद्राय स्वाहा" बोलते हुए देनी चाहिए — वक्ता कहते हैं कि "नमः" नहीं, "स्वाहा" बोलना है।

16

11वें दिन मंदिर जाना और गड़ी नारियल से पूर्णाहुति

11वें दिन दूसरी बार मंदिर में पूजा, और खीर या गुड़ भरे तथा लाल कपड़े में लपेटे छोटे गड़ी नारियल की पूर्णाहुति

· Reviewed Sep 2026 · 09:36–10:39

11वें दिन, हवन और समर्पण-आरती के बाद, साधक फिर मंदिर जाकर हनुमान जी की पूरी पूजा करता है, और पूर्णाहुति करता है जिसमें "गड़ी" नारियल — काटकर, उसमें खीर या गुड़ भरकर, लाल कपड़े में लपेटकर पान के पत्ते पर रखकर — पूर्णाहुति मंत्र बोलते हुए अर्पित किया जाता है; गड़ी छोटी ही रखी जाती है क्योंकि हवन पात्र छोटा होता है।

17

पहले दिन का नारियल प्रसाद रूप में फोड़ना और समापन का लड्डू अर्पण

पहले दिन रखा नारियल प्रसाद के रूप में फोड़ना जिसे कोई भी खा सकता है, और अंत में मंदिर में कम से कम सवा किलो लड्डू चढ़ाना

· Reviewed Sep 2026 · 10:40–11:19

पहले दिन रखा हुआ नारियल अंतिम पूर्णाहुति के बाद फोड़ा जा सकता है और उसे प्रसाद के रूप में कोई भी खा सकता है, इसमें कोई रोक नहीं; और अंतिम दिन मंदिर में हनुमान जी को कम से कम सवा किलो लड्डू चढ़ाने चाहिए, जिनमें से कुछ घर लाए जाएँ और बाकी बाँट दिए जाएँ; इतना पूरा करने पर बजरंग बाण जागृत और सिद्ध हो जाता है।

18

बजरंग बाण से सरसों अभिमंत्रित करके बच्चे का रक्षण

सिद्ध बजरंग बाण से सरसों को अभिमंत्रित करके परेशान बच्चे का रक्षण कैसे किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 11:20–12:12 · Also a question

हाथ में पीली सरसों लेकर साधक राम जी और हनुमान जी का आवाहन करता है, पूरा बजरंग बाण पढ़ते हुए प्रार्थना करता है कि यह सरसों जागृत और अभिमंत्रित हो जाए तथा नाम लिए गए बच्चे का रक्षण हो, फिर उस सरसों को बच्चे के ऊपर से उल्टा तीन या सात बार उतारकर घर से बाहर ले जाकर जला दिया जाता है।

19

बजरंग बाण से गाँठ लगे लाल धागे को अभिमंत्रित करना

कष्ट में पड़े बच्चे के लिए बजरंग बाण से रक्षा-धागा कैसे अभिमंत्रित किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 12:13–13:07 · Also a question

लाल धागे में आठ से लेकर अठारह तक गाँठें लगाई जाती हैं — क्योंकि हनुमान जी अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता हैं — और जितनी गाँठें, उतनी बार बजरंग बाण का पाठ किया जाता है; कष्ट में पड़े बच्चे के लिए धागे को मंगलवार के दिन पहले कच्चे दूध, गोमूत्र और पञ्चामृत या गंगाजल से धोया जाता है, फिर आठ गाँठें लगाकर हर गाँठ पर राम जी का नाम लिया जाता है।

20

अभिमंत्रित धागा बाँधना और सिद्ध बजरंग बाण के आगे के प्रयोग

धागा बाँधने से पहले धूप, दीप और कपूर की आरती, तथा सिद्ध बजरंग बाण से खुलने वाले व्यापक प्रयोग

· Reviewed Sep 2026 · 13:08–13:54

पाठ पूर्ण होने के बाद हनुमान जी को धूप और कपूर-लौंग की आरती दिखाकर प्रार्थना की जाती है, फिर वह धागा उस व्यक्ति को बाँधा जाता है जिसका रक्षण करना है; वक्ता कहते हैं कि सिद्ध हो जाने पर बजरंग बाण के अनंत प्रयोग हैं, जिनमें गोमूत्र और गंगाजल मिले जल को अभिमंत्रित करके घर की बाधा दूर करना, और यहाँ तक कि अभिचार करने वाले शत्रु को स्तंभित करके उसकी विद्या बाँधना भी सम्मिलित है — यद्यपि ऐसे गहरे प्रयोगों के लिए साधक का मनोबल वास्तव में सक्षम होना चाहिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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