तंत्रोक्त बजरंग बाण की सिद्धि एवं प्रयोग विधि (भाग-2)

तंत्रोक्त बजरंग बाण को सिद्ध करने की 11 दिन की विधि, और सिद्ध हो जाने के बाद रक्षण हेतु उसका प्रयोग।

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The notes
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01

महिलाएं बजरंग बाण सिद्धि कर सकती हैं: हनुमान जी देवता हैं, डरने लायक इंसान नहीं

भ्रम: महिलाएं हनुमान जी की पूजा न करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:13–00:41

वक्ता कहते हैं कि हनुमान जी की पूजा से bajrang-baan सिद्ध करना महिला बिल्कुल कर सकती है — कोई भी स्त्री, कोई दिक्कत नहीं — इसलिए निश्चिंत रहिए और भ्रम में पड़े बिना कीजिए। हनुमान जी, वे कहते हैं, देवता हैं, सिद्ध देवता हैं, रुद्र के अवतार हैं, महारुद्र हैं; वे इंसान नहीं हैं जिनसे लोग इतना डरते हैं। इसलिए आराम से, निश्चिंत होकर सिद्ध कीजिए।

02

ग्यारह दिन की बजरंग बाण सिद्धि का संकल्प और आरंभिक पूजन

हाथ में तुलसी, ग्यारह रुपये और नारियल; हनुमान जी से पहले राम दरबार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:42–03:04

वक्ता कहते हैं कि पहले दिन की पूजा मंदिर में होती है — पीपल के पत्ते पर, या कम से कम पांच तुलसी पत्रों पर "राम" लिखकर वहां समर्पित — फिर घर आकर लाल वस्त्र पहनें, लाल कंबल के आसन पर बैठें और सामान्य आचमन व पवित्रीकरण करें। फिर हाथ में तुलसी पत्र, ₹11 और घर में रखा नारियल लेकर सामान्य हिंदी में (संस्कृत आती हो तो संस्कृत में) नाम, गोत्र, स्थान के उच्चारण से संकल्प लें: हनुमान जी की कृपा-प्राप्ति, bajrang-baan की सिद्धि और जब भी प्रयोग करूं उसके पूर्ण प्रभाव हेतु, आज से 11 दिन तक प्रतिदिन 11 पाठ करके इसे जागृत करने का — कम से कम 11, या सामर्थ्य हो तो 21 या 27, क्योंकि संपूर्ण बजरंग बाण थोड़ा बड़ा है। हाथ का सब सामान हनुमान जी के पास रख दें, नारियल फोड़ना नहीं है, वहीं रहेगा। संकल्प से पहले कर्मसाक्षी दीपक अवश्य जल रहा हो (सुबह से जल रहा हो तो भी ठीक)। फिर गुरु और गणेश पूजन, कुलदेवी स्मरण, और सबसे पहले राम दरबार का पूजन — श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न सब पर जल छिड़ककर तिलक, श्री विग्रह हो तो उस पर, नहीं तो फोटो पर।

03

बजरंग बाण सिद्धि में हनुमान जी के विग्रह की दैनिक पूजा: आवाहन, अभिषेक, सिंदूर लेपन, जनेऊ और तिलक

पान के पत्ते पर चमेली तेल और नारंगी सिंदूर, नीचे से ऊपर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:05–04:19

वक्ता कहते हैं कि हनुमान जी का आवाहन उनके श्री विग्रह में करें यदि हो; केवल फोटो हो तो एक फूल में आवाहन करके उसे फोटो के सामने प्लेट में रखें और उसी पर पूजा करें। विग्रह हो तो पञ्चामृत से अभिषेक, गंगाजल से और अगर से स्नान, अच्छे से पोंछकर रखें, फिर सिंदूर लेपन: पान के पत्ते पर चमेली का तेल और नारंगी सिंदूर मिलाकर पूरे विग्रह पर नीचे से ऊपर की ओर लेपन। पूरा लेपन हो जाने पर हनुमान जी को यज्ञोपवीत अवश्य पहनाएं, आप स्वयं पहनते हों या नहीं। विग्रह बड़ा हो तो नया वस्त्र पहना सकते हैं; नहीं तो कलावा ही वस्त्र के रूप में पहनाएं। अंत में अष्टगंध का तिलक और सुंदर शृंगार।

04

बजरंग बाण सिद्धि में दैनिक भोग, पंचधान्य आटे का दीपक और तुलसी पत्रों के साथ ग्यारह पाठ

आधा घंटा जलने लायक दीपक, हर पाठ पर एक पत्ता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:20–06:21

वक्ता कहते हैं कि 11 दिन का दैनिक भोग है दो लड्डू और ऊपर एक तुलसी पत्र — फ्रिज में रखे स्टॉक से रोज ताजा लाना बेहतर, और घर के बने बेसन के लड्डू सर्वोत्तम। फिर पहले बनाया पांच तरह का आटा हल्के पानी से थोड़ा टाइट सानें, उसमें थोड़ा घी मिलाएं, और एक बढ़िया एकमुखी दीपक बनाएं — मिट्टी के बड़े दीपक में या प्लेट पर रखें ताकि तेल न रिसे — जिसकी बाती अपने शरीर से नापा कलावा हो; उसमें रोज 11 लौंग, पांच काली मिर्च, थोड़ा पीला सरसों और एक बढ़िया कपूर का गोटा डालें। इसे हनुमान जी के नाम से विग्रहों और कपड़ों से थोड़ा दूर जलाएं, क्योंकि सूखा आटा स्वयं जल जाएगा; दीपक इतना बड़ा हो कि कम से कम आधा घंटा जले ताकि पाठ पूरा हो सके। फिर राम जी का नाम लेकर, हनुमान जी का ध्यान करके पाठ: "राम" लिखे 11 तुलसी पत्रों में से एक हाथ में लें, एक बार पूरा bajrang-baan पढ़ें, पत्ता हनुमान जी पर चढ़ा दें, ऐसे 11 बार।

05

बजरंग बाण का दैनिक हवन: हर चौपाई पर आहुति, साबुत नींबू, आरती और पुण्य-समर्पण

साबर पद्धति से घी-गुग्गुल; पुण्य हनुमान जी के दाहिने हाथ में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:22–08:26

वक्ता कहते हैं कि पाठ के बाद रोज छोटा सा हवन हो तो बहुत बढ़िया, क्योंकि bajrang-baan एक सबर मंत्र है, अचूक और जागृत, इसलिए उसका विधान साबर पद्धति से होगा (वे साबर हवन पर अपने अलग वीडियो का हवाला देते हैं); नहीं तो गाय के गोबर के कंडे या थोड़ी आम की लकड़ी मिट्टी या किसी पात्र में जलाएं। घी और गुग्गुल एक में मिलाकर उसी से हर आहुति दी जाती है, स्त्री हो या पुरुष: एक-एक आहुति गुरु जी, गणेश जी, कुलदेवी-देवता के नाम से, और नवग्रह के लिए एक बार "ॐ नवग्रहेभ्यो स्वाहा"; फिर बजरंग बाण की हर चौपाई पर पहली से अंतिम तक एक-एक आहुति, हर एक के अंत में "स्वाहा"। वे जोड़ते हैं कि राम जी के नाम से भी रोज कम से कम पांच आहुति दें — "सीतारामचंद्राय स्वाहा", "नमः" नहीं। आहुति पूरी होने पर एक नींबू (एक जरूर रखें; वे कहते हैं बताना भूल गए) काटकर बिना निचोड़े साबुत हवन में ही डालें, फिर प्रणाम। फिर हनुमान जी की आरती, या एक कपूर पर दो लौंग रखकर पांच बार आरती; फिर क्षमा प्रार्थना, और हाथ में जल लेकर आज का पूरा जप और उसका पुण्य हनुमान जी को समर्पित — "जय श्री राम" या जिसमें श्रद्धा हो वह बोलते हुए — उनके दाहिने हाथ में छोड़ दें। जो रोज हवन न कर सके वह 11वें दिन 11 पाठ के बाद करे।

06

बजरंग बाण सिद्धि-काल में ब्रह्मचर्य, समय और भोजन के नियम

सुबह आठ से पहले; नियम केवल सिद्धि के दिनों में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:27–09:08

वक्ता कहते हैं कि स्त्री हो या पुरुष, विवाहित या अविवाहित, इन 11 दिनों में सही तरीके से ब्रह्मचर्य का पालन करना है — विशेष ध्यान कि मानसिक रूप से भी ब्रह्मचर्य खंडित न हो। यह काम सुबह 8 बजे या उससे पहले करें; रात में करेंगे तो उपवास नहीं रख पाएंगे, इसलिए सुबह-सुबह करना ही उचित है। रात में भी कर सकते हैं, पर तब एक बात का ध्यान: दिन भर लहसुन-प्याज नहीं खाना। पूरा सात्विक भोजन करते हों तो चलेगा; बाहर खाना पड़ता हो तो मत करिए। यह सब केवल सिद्धि-काल तक है; बाद में प्रयोग-काल में कभी भी कर लें, कोई दिक्कत नहीं।

07

बजरंग बाण सिद्धि का ग्यारहवां दिन: अंतिम हवन, गरी-नारियल की पूर्णाहुति, मंदिर पूजा और प्रसाद

मंदिर में सवा किलो लड्डू; पहले दिन का नारियल सबका प्रसाद

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:09–11:19

वक्ता कहते हैं कि 11वें दिन, चाहे कोई भी दिन पड़े, 11 पाठ और हवन (रोज वाला, या जो रोज न कर सके उसका अंतिम दिन का हवन) के बाद पूर्णाहुति, सबके लिए समान: नींबू की निंबू बलि के बाद एक छोटी गरी का नारियल — जिससे गरी का तेल बनता है — जिस ओर से वह पेड़ से लगा रहता है उधर से काटकर उसमें खीर या गुड़ भरें, लाल कपड़े में लपेटें, पान के पत्ते पर रखें, पूर्णाहुति का मंत्र बोलकर अंत में रख दें। गरी छोटी रखें, क्योंकि हवन पात्र छोटा होगा, ताकि जल्दी जल जाए और बचे नहीं। समर्पण-आरती के बाद उस दिन मंदिर जाएं, वहां हनुमान जी की पूरी पूजा करें और यथाशक्ति कम से कम सवा किलो लड्डू चढ़ाएं — कुछ ही घर लाएं, बाकी पंडित जी से बंटवा दें या स्वयं वहां आए सबमें बांट दें। पहले दिन रखा नारियल पूर्णाहुति के बाद घर में फोड़ लें या मंदिर में चढ़ाएं, और प्रसाद रूप में सब खाएं — स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं। इस तरह करने पर, वे कहते हैं, bajrang-baan साधक के लिए जागृत, सिद्ध और चैतन्य हो जाता है।

08

सिद्ध बजरंग बाण का प्रयोग: नजर लगे बच्चे के लिए सरसों या भस्म

सरसों जागृत करें, बच्चे पर से उतारें, बाहर जलाएं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:20–12:12

वक्ता कहते हैं कि bajrang-baan सिद्ध हो जाने पर उसका विभिन्न तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है — जैसे घर में छोटा बच्चा बहुत रो रहा हो और लगे कि नज़र इत्यादि लग गई है। हाथ में पीला सरसों लेकर पहले पूरा निवेदन बोलें: राम जी का नाम जरूर लेना है — "हे राम जी, कृपा करें, सीताराम, सीताराम" — फिर "हे हनुमान जी, मैं आपके बजरंग बाण का पाठ कर रहा हूं; इसे जागृत करें, इस पूरे सरसों को अभिमंत्रण करें, पूर्ण चैतन्य करें; (बच्चे का नाम) के रक्षण हेतु, उस पर जो भी बाधा है उसे दूर करने हेतु मैं इसका प्रयोग कर रहा हूं — इसे जागृत करें और मेरे कार्य को सिद्ध करें।" फिर एक बार बजरंग बाण का पाठ करें, सरसों बच्चे के ऊपर से उल्टा तीन बार, सात बार, जितनी इच्छा हो उतारें, और घर से बाहर ले जाकर जला दें। भस्म को भी इसी तरह अभिमंत्रित करके स्वयं लगा सकते हैं, हमेशा रक्षण होगा, या घर-परिवार में किसी को दे सकते हैं।

09

सिद्ध बजरंग बाण का प्रयोग: गांठ लगा लाल रक्षा-धागा

आठ से अठारह गांठ, हर गांठ पर एक पाठ, मंगलवार को

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:13–13:11

वक्ता कहते हैं कि धागे को आठ गांठ लगाकर अभिमंत्रित किया जाता है — हनुमान जी अष्ट सिद्धि, नौ निधि के दाता हैं — और आठ से अठारह गांठ तक लगाई जाती हैं, जितनी गांठ उतने पाठ। घर-परिवार में किसी को कष्ट हो, कोई बच्चा बाहर पढ़ाई कर रहा हो और परेशानी हो रही हो, या कोई बच्चा रात में डरता हो: मंगलवार के दिन लाल धागा पहले कच्चे दूध से, फिर गोमूत्र से, फिर पञ्चामृत से या नहीं तो गंगाजल से धोएं; आठ गांठ लगाएं, और हर गांठ को पकड़कर राम जी का नाम लेते हुए हर गांठ पर एक bajrang-baan का पाठ — कुल आठ पाठ। फिर हनुमान जी के पास रखकर धूप-दीप दिखाएं, एक कपूर पर दो लौंग जलाएं, हनुमान जी से प्रार्थना करें, और जिसे बांधना है उसे बांध दें; उसका पूर्ण रूप से रक्षण हो जाएगा।

10

सिद्ध बजरंग बाण के और प्रयोग: बाधित घर के लिए अभिमंत्रित जल, शत्रु-स्तंभन अभी नहीं बताया

अनंत प्रयोग, पर मनोबल चाहिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:12–13:45

वक्ता कहते हैं कि bajrang-baan सिद्ध हो जाने पर उसे अनंत तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है। घर में बाधा हो तो शाम के समय बजरंग बाण का पाठ करते हुए जल अभिमंत्रित करें, उसमें थोड़ा गोमूत्र और गंगाजल डालें और पूरे घर में छिड़कें। यदि पता हो कि कौन सा शत्रु अभिचार कर्म कर रहा है, तो उसकी अलग विधि है — केवल बजरंग बाण के द्वारा शत्रु को कैसे स्तंभित किया जा सकता है, उसकी विद्या बांधी जा सकती है — जो वे लोगों के सिद्ध कर लेने के बाद मांगने पर बताएंगे; यहां नहीं बताते। हर विद्या के बहुत सारे प्रयोग हैं, वे कहते हैं, और चाहें तो आराम से कर पाएंगे, पर मजबूत होना होगा, मनोबल उतना सक्षम बनाना होगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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