स्वप्न में देवी-देवता दर्शन दें तब साधक क्या करे
स्वप्न में देवता से मिले संदेश को ग्रहण करने, समझने और उस पर आचरण करने का मार्गदर्शन।
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साधक तक पहुँचने का देवता का माध्यम — स्वप्न
वचन सिद्धि न होने पर बचा एकमात्र माध्यम
वक्ता कहते हैं कि स्वप्न (स्वप्न) एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा कोई भी शक्ति अपने साधक के निकट पहुँचती है, और स्वप्न शास्त्र, स्वप्न विद्या, स्वप्न तंत्र अपने आप में तंत्र के भीतर एक विशेष स्थान रखते हैं। जिस साधक को वचन सिद्धि प्राप्त नहीं है — जिसने किसी शक्ति को इतना जागृत नहीं किया कि वह उससे सीधे वार्तालाप करे — उसके लिए स्वप्न ही उस शक्ति के पहुँचने का एकमात्र तरीका बन जाता है। वे कहते हैं कि जब साधक बार-बार अपने इष्ट देव को स्वप्न में अपने से बात करते देखे, तो क्या करना है, क्या नहीं करना है और कौन सा निर्णय किस समय लेना है, इस पर बहुत सावधानी आवश्यक हो जाती है।
वक्ता उस साधक की स्थिति से आरंभ करते हैं जो स्वप्न में अपने इष्ट देव को बार-बार अपने से बात करते देखता है, या अनुभव करता है कि उसके देवता इसी प्रकार उससे बात कर रहे हैं। वे कहते हैं कि ऐसी स्थिति में यह जानना बहुत आवश्यक हो जाता है कि क्या सावधानी रखनी है, क्या करना है, क्या नहीं करना है और कौन सा निर्णय किस समय लेना है। कारण, वे कहते हैं, यह है कि स्वप्न (स्वप्न) एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा कोई भी शक्ति अपने साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। के निकट पहुँचती है — वही एक ऐसा माध्यम है। वे जोड़ते हैं कि स्वप्न शास्त्र, स्वप्न विद्या, स्वप्न तंत्र अपने आप में एक अलग ही प्रकार का बहुत विशेष तंत्र है और तंत्र के स्थान में महत्व रखता है। दूसरी बात वे उस साधक के बारे में कहते हैं जिसे कोई विशेष वचन सिद्धि प्राप्त नहीं है — जिसने किसी शक्ति को इतना जागृत नहीं किया कि वह उससे वार्तालाप करे, उसे वचन में ले। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, शक्तियों के लिए अपने भक्तों और साधकों तक पहुँचने का एकमात्र तरीका, एकमात्र माध्यम स्वप्न ही बन जाता है।
देवता के स्वप्न-संदेश को याद रखना, जो बहुत कम ही ज्यों-का-त्यों बताया जाता है
स्वप्न-वार्तालाप का पहला नियम
वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली बात यह है कि स्वप्न (स्वप्न) में जब भी देवता से कोई वार्तालाप हो, उसे याद रखना अति आवश्यक है — जो बताया जा रहा है उसे सही तरीके से याद रखें। वे जोड़ते हैं कि यह भी ध्यान रखना है कि बात ज्यों-की-त्यों नहीं बताई जाएगी: बहुत कम बार ऐसा होता है कि देवता होने वाली घटना या बात को हूबहू बताएँ।
इस स्थिति में साधक को क्या करना चाहिए, इस पर वक्ता कहते हैं कि पहली और सबसे विशेष बात यह है कि इसका विशेष ध्यान रखें कि स्वप्न (स्वप्न) में जब भी देवता से कोई भी वार्तालाप हो, उसे याद रखना अति आवश्यक है। स्वप्न में जो बात बताई जा रही है, उसे सही तरीके से याद रखें। इसके साथ वे संदेश के मिलने के ढंग पर एक सावधानी बताते हैं: यह ध्यान रखना है कि बात ज्यों-की-त्यों नहीं बताई जाएगी। वे कहते हैं कि बहुत कम बार ऐसा होता है कि जो घटना घटित होने वाली हो या जो भी बात हो, देवता उसे हूबहू बताएँ।
स्वप्न में देवता ने जो कहा, वह किसी को न बताना
न नमक-मिर्च, न हल्ला — गुप्त रखें
वक्ता कहते हैं कि दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वप्न (स्वप्न) में देवता से की गई वार्तालाप कभी भी किसी को भी नहीं बतानी चाहिए। वे उन लोगों को टोकते हैं जो नमक-मिर्च-मसाला लगाकर, चटकारे ले-लेकर बताते हैं कि स्वप्न में उन्हें कितना कुछ बताया गया। बात के अंत में वे दोहराते हैं कि इन सभी चीज़ों को गुप्त रखें और हल्ला न करें।
वक्ता कहते हैं कि दूसरी सबसे विशेष बात यह है कि स्वप्न (स्वप्न) में देवता से की गई वार्तालाप कभी भी, किसी को भी नहीं बतानी चाहिए। वे टिप्पणी करते हैं कि लोग बताते समय कितना नमक-मिर्च-मसाला लगाते हैं। यदि देवता ने केवल इतना कहा हो कि ये काम ऐसे हैं, तो लोग पूरे चटकारे ले-लेकर बताते हैं कि स्वप्न में तो उन्हें इतना कुछ बताया गया, ये सारी चीज़ें बताई गईं। बात के अंत में वे इस पर फिर लौटते हैं: ऐसा मार्गदर्शन मिलने पर इन सभी चीज़ों को गुप्त रखें, हल्ला न करें।
स्वप्न में देवता किस-किस प्रकार का मार्गदर्शन देते हैं
अध्ययन के ग्रंथ से लेकर शत्रु के प्रयोग की चेतावनी तक
वक्ता गिनाते हैं कि स्वप्न (स्वप्न) में देवता क्या-क्या बता सकते हैं: कोई विशेष ग्रंथ जिसका अध्ययन करना है; किसी विशेष देवी-देवता का स्वरूप जिनका नाम लेना, पूजा करनी या जिनसे संबंधित ज्ञान अर्जित करना है; कोई विशेष पाठ इतने दिन तक करने का निर्देश; किसी देवता के नाम से किसी विशेष तरीके से दीप जलाना; भोग, प्रसाद और पूजा से जुड़ी बातें; पूजन की कोई चीज़ जो साधक भूल रहा है; या यह चेतावनी कि कोई शत्रु उस पर अभिचारिक (अभिचार) प्रयोग या षड्यंत्र कर रहा है। वे कहते हैं कि यह चेतावनी साधक तक उसकी इष्ट शक्ति के माध्यम से पहुँचती है, और पूजन स्थान पर नियमित आने-जाने वाली अंग शक्ति उन्हीं के आदेश और कृपा से यह जानकारी दे जाती हैं।
वक्ता पूछते हैं कि स्वप्न (स्वप्न) में साधक को क्या-क्या चीज़ें बताई जा सकती हैं, और सूची देते हैं। कोई विशेष ग्रंथ दिखाया जा सकता है कि इसका अध्ययन करो। किसी विशेष देवी-देवता का स्वरूप दिखाया जा सकता है कि इनका नाम लो, इनकी पूजा करो या इनसे संबंधित ज्ञान अर्जित करो। कोई विशेष पाठ इतने दिन तक करने का दिशा-निर्देश मिल सकता है। दीप जलाने को कहा जा सकता है — इस देवता के नाम से, इस तरीके से जलाओ, इस प्रकार के काम करो। भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य।, प्रसादअर्पण के पश्चात् देवता से लौटा हुआ अंश, जिसे त्यागा नहीं अपितु ग्रहण किया जाता है। और पूजा के विषय में बताया जा सकता है, या पूजन की कोई चीज़ जो साधक भूल रहा है, उसके बारे में बताया जा सकता है। वे एक और प्रकार जोड़ते हैं: यदि साधक पर कोई अभिचारिक (अभिचार) प्रयोग किया जा रहा हो, या कोई शत्रु उसके विरुद्ध कोई षड्यंत्र कर रहा हो, तो वह जानकारी भी स्वप्न में उसके देवता के द्वारा, उसकी इष्ट शक्ति के माध्यम से उसे मिल जाती है। वे समझाते हैं कि पूजन स्थान पर नियमित आने-जाने वाली अंग शक्तिदेवी की अपनी अंग-शक्तियाँ — इसीलिए मंडल शक्ति जैसी उनके साथ आने वाली अन्य शक्तियों की पूजा के बिना देवी की पूजा अधूरी मानी जाती है। उन देवता के आदेश और कृपा से यह जानकारी दे जाती हैं।
स्वप्न के निर्देश को पालन से पहले अपनी स्थिति से जोड़ना
देवता आदेश देते हैं, कारण नहीं
वक्ता कहते हैं कि यह सब जानकर पहली और अंतिम बात यह ध्यान रखनी है कि ऐसी परिस्थितियों में बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना होता है। जब स्वप्न के निर्देश का पालन करने जाएँ — किसी मंत्र का जप, किसी देवता का दीपदान, कहीं भोग-प्रसाद चढ़ाना — तो पहले यह तय करना है कि उस समय अपनी अवस्था क्या है, क्योंकि स्वप्न में आदेश का कारण नहीं बताया जाएगा। उनका उदाहरण: कोर्ट-कचहरी में केस चल रहा है और स्वप्न में निर्देश मिलता है कि हनुमान जी के मंदिर में पाँच मंगलवार धूप-दीप जलाना है; साधक को दोनों को जोड़ना है, दीप जलाते समय झूठे मुकदमे का ज़िक्र कर मुक्ति माँगनी है, और संभव हो तो वहाँ बैठकर यथाशक्ति हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ अच्छे से करना है, जल्दी-जल्दी नहीं। तब देवता की कृपा से वह चीज़ सिद्ध होती है।
देवता क्या-क्या बता सकते हैं, यह गिनाने के बाद वक्ता कहते हैं कि पहली और अंतिम बात यह ध्यान रखनी है कि इन परिस्थितियों में बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना होता है। अगला सबसे महत्वपूर्ण बिंदु, वे कहते हैं, तब आता है जब साधक बताई गई बात का पालन करने जाता है — कि अब इस मंत्र का जप करना है, इस देवता का दीपदान करना है, यहाँ भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य।, पूजा, प्रसादअर्पण के पश्चात् देवता से लौटा हुआ अंश, जिसे त्यागा नहीं अपितु ग्रहण किया जाता है। चढ़ाना है, जो भी करना हो। उस समय उसे सही तरीके से यह निर्णय ले लेना चाहिए कि यह काम करते समय उसकी अवस्थासाधक की वह अवस्था अथवा स्थिति, जिस पर निर्भर करता है कि वह क्या ग्रहण करने योग्य है और देवता उसे क्या प्रकट करेंगे। क्या है। अवस्था को वे एक उदाहरण से समझाते हैं। मान लीजिए कोर्ट-कचहरी में आपका कोई केस चल रहा है। स्वप्न में आपको कहीं से यह दिशा-निर्देश मिलता है कि हनुमान जी के मंदिर में पाँच मंगलवार जा-जाकर धूपपूजन में अर्पित की जाने वाली धूप; उपचारों के क्रम में इसका धूम्र स्वयं एक अर्पण माना जाता है।-दीप जलाना है। यह आपकी अवस्था है और यह आपको आदेश मिला है। यह काम करते समय यह ध्यान रखना है कि स्वप्न में आपको यह नहीं बताया जाएगा कि जो केस चल रहा है उस कारण से जलाना है। यह आपको स्वयं जोड़ना है कि हमें हनुमान जी के मंदिर में जाकर दीप जलाने को क्यों कहा गया। तो दीप प्रज्वलन के समय, वे कहते हैं, आपको इस बात का ज़िक्र करना है — हे हनुमान जी, यह जो झूठा मुकदमा चल रहा है, इससे हमें मुक्त करें, कृपया साथ दें। और संभव हो तो वहाँ बैठकर हनुमान चालीसा इत्यादि का पाठ, सुंदरकांड का पाठ यथाशक्ति करना चाहिए; सिर्फ एक बार करके जल्दी-जल्दी भागना नहीं चाहिए, अच्छे से करना चाहिए। तब कहीं-न-कहीं देवता की कृपा से वह चीज़ सिद्ध होती है।
देवता अपने साधक को स्वप्न के द्वारा दूसरे देवता के पास क्यों भेजते हैं
गणों के द्वारा पहले से लगाई गई अर्जी
वक्ता एक दृष्टांत से समझाते हैं: अंग्रेज़ी के शिक्षक का प्रिय छात्र फिजिक्स में अटका है पर खड़ूस फिजिक्स शिक्षक से कहने की हिम्मत नहीं करता, तो अंग्रेज़ी के शिक्षक उसकी ओर से अपने मित्र-शिक्षक से बात कर देते हैं, और छात्र को विशेष व्यवहार मिलता है, काम हो जाता है और उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। वे कहते हैं कि यही बात अपने इष्ट देवता या इष्ट शक्ति के साथ होती है: जब उन्हें लगता है कि यह क्षेत्र हनुमान जी से संबंधित है, तो वे अपने गण और सेवक-सेविकाओं के द्वारा स्वप्न में संदेश दिलवाते हैं, और हनुमान जी के पास अर्जी पहले से लगा दी जाती है, जिससे साधक जाकर वह काम करे तो काम जल्दी बनें।
बात को और अच्छे से समझाने के लिए वक्ता एक दृष्टांत देते हैं। मान लीजिए आप किसी स्कूल में अंग्रेज़ी के शिक्षक हैं और आपके बहुत से प्रिय छात्र हैं। उनमें से एक आपसे कहता है कि उसे फिजिक्स में समस्या है, पर वह उस विषय के शिक्षक से बात नहीं कर पा रहा, क्योंकि वे थोड़े खड़ूस हैं और उसमें कहने की हिम्मत नहीं है। तब आप क्या करेंगे? आप उसकी ओर से बात करेंगे — इस छात्र को ज़रा देख लीजिए, बहुत ब्राइट है, आपसे बोलने में डर रहा था। आप दोनों के बीच तो कोई दिक्कत नहीं, आप तो दोस्त हैं। फिर आप उसे कहते हैं कि जा, अब जाकर प्रश्न पूछ ले, हमने बोल दिया है, कोई दिक्कत नहीं होगी। उस बच्चे को विशेष व्यवहार मिलता है, वह खुश हो जाता है, उसका काम भी हो जाता है और उसका आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है। यही चीज़, वे सरल शब्दों में कहते हैं, यहाँ भी होती है। आप जिन इष्ट देवता या इष्ट शक्ति की सेवा कर रहे हैं — जब उन्हें लगता है कि यह क्षेत्र हनुमान जी से संबंधित है, इसलिए इसे वहाँ सेवा करनी चाहिए — तो स्वप्न में उनके गण के द्वारा, उनके जो भी सेवक-सेविकाएँ हों, उनके द्वारा यह संदेश आपको दिया जाता है कि आप ऐसे करो। और हनुमान जी के पास अर्जी पहले से लगा दी जाती है। तब आप जाकर वह चीज़ करते हैं तो आपके काम जल्दी बनते हैं।
अपने इष्ट से भिन्न देवता की पूजा के स्वप्न-निर्देश पर आपत्ति करना
ओवर-स्मार्ट भक्त की गलती
वक्ता 'ओवर स्मार्ट' लोगों की आलोचना करते हैं जो ऐसा स्वप्न-निर्देश मिलने पर पहले दस जगह पूछते फिरते हैं: हम तो दुर्गा जी की पूजा करते हैं, हम तो काली जी की पूजा करते हैं, हमें हनुमान जी के बारे में क्यों बताया गया, हम उनकी पूजा क्यों करें जब वे स्वयं काली जी की सेवा करते हैं? वे इसे अनर्गल प्रलाप कहते हैं, और आजकल के कृष्ण जी के सेवकों को अलग ही मामला बताते हैं — भक्ति की परम पराकाष्ठा तक पहुँचकर वे कृष्ण जी के सिवा किसी को मानते ही नहीं। इस प्रकार की गलती करना, वे कहते हैं, साधक की अपनी दिक्कत है।
वक्ता उन लोगों की ओर मुड़ते हैं जिन्हें वे ओवर-स्मार्ट कहते हैं। जब उन्हें स्वप्न में यह जानकारी मिलती है कि इस तरीके से करना है, तो वे पहले दस जगह पूछते फिरते हैं। वे उनकी आपत्तियाँ दोहराते हैं: हम तो दुर्गा जी की पूजा करते हैं, हम तो काली जी की पूजा करते हैं, हमें हनुमान जी के बारे में क्यों बताया गया? हम हनुमान जी की पूजा क्यों करें, हनुमान जी तो स्वयं काली जी की सेवा करते हैं, फिर हम उनकी पूजा क्यों करें? इसे वे अनेक प्रकार का अनर्गल प्रलाप कहते हैं। विशेष रूप से वे आजकल के समय के कृष्ण जी के सेवकों का नाम लेते हैं, जिनकी बात, वे कहते हैं, ही अलग-निराली है: भक्ति में जाने के बाद वे भक्ति की परम पराकाष्ठा तक पहुँचे हुए हैं, और कृष्ण जी के सिवा किसी को कुछ मानते ही नहीं। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, जब आप इस प्रकार की गलती करते हैं तो दिक्कत आपकी है। वे कहते हैं कि उन्होंने यह विषय सबके सामने इसलिए रखा ताकि लोग इसे सही तरीके से समझें, मार्गदर्शन को अपनी अवस्थासाधक की वह अवस्था अथवा स्थिति, जिस पर निर्भर करता है कि वह क्या ग्रहण करने योग्य है और देवता उसे क्या प्रकट करेंगे। से जोड़ें, और फिर उसी के अनुसार अपना काम पूर्ण करें, ताकि उन्हें सफलता भी प्राप्त हो।
स्वप्न में मिले मार्गदर्शन के लिए देवता को धन्यवाद देना
एक बड़ी शक्ति की कृपा के लिए बार-बार कृतज्ञता
वक्ता कहते हैं कि जिन भी देवी-देवता की पूजा करते हों, जब भी उनसे स्वप्न (स्वप्न) में दिशा-निर्देश मिले, उसके लिए उन्हें बार-बार धन्यवाद देना चाहिए — प्रभु, आपने इतनी कृपा की; हे जननी माँ, आपने इतनी कृपा की कि मेरे लिए स्वप्न में माध्यम बनकर मुझे बताया कि यह ऐसा करना चाहिए। वे कहते हैं कि धन्यवाद इसलिए ज्ञापित करना चाहिए कि इतनी बड़ी शक्ति साधक पर कृपा कर रही है, और यह भी जोड़ते हैं कि यह सब गुप्त रखें, हल्ला न करें।
विषय समाप्त करते हुए वक्ता कहते हैं कि जब भी यह मार्गदर्शन मिले, उस समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जिन भी देवी-देवता की आप पूजा करते हैं, जब भी उनसे दिशा-निर्देश मिले, उसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए — बार-बार। वे शब्द भी बताते हैं: प्रभु, आपने इतनी कृपा की; हे जननी माँ, आपने इतनी कृपा की कि मेरे लिए स्वप्न (स्वप्न) में माध्यम बनकर आपने मुझे बताया कि यह चीज़ ऐसे करनी चाहिए। उनके लिए धन्यवाद ज्ञापित करें, वे कहते हैं, क्योंकि इतनी बड़ी शक्ति आप पर कृपा कर रही है। अंत में वे कहते हैं कि इन सभी चीज़ों को गुप्त रखें, हल्ला न करें, और आशा करते हैं कि सभी इस विषय से लाभान्वित हुए होंगे।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।