तंत्र काट की सरल विधि — शिव मंदिर में रोज शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ जो शरीर पर किए अभिचार को नष्ट करे

वक्ता का रोज का सरल तंत्र काट प्रयोग: प्राण-प्रतिष्ठित शिव मंदिर में मुट्ठियों में लौंग-कपूर लेकर शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ, साथ में पूर्णिमा-अमावस्या के अतिरिक्त कार्य, ताकि शरीर पर किया गया अभिचार नष्ट हो।

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The notes
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01

बार-बार अभिचार करते शत्रु के सामने दूसरों से करवाई तंत्र काट क्यों विफल होती है

स्थायी मुक्ति की तीन शर्तें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:07–01:21

वक्ता कहते हैं कि जब घर-परिवार के किसी व्यक्ति या पूरे घर पर तंत्र का प्रयोग हो जाता है तो लोग अनेक तांत्रिकों और दरबारों में दौड़ते हैं, फिर भी बहुत बार जड़ से काट नहीं हो पाती, क्योंकि शत्रु पक्ष प्रबल है और एक बार करके छोड़ने के बजाय बार-बार अभिचार और कृत्या प्रयोग करता रहता है। जब तक तीन काम न हो जाएँ — हम स्वयं को सक्षम बनाएँ, अपने आभामंडल को इतना मजबूत करें कि दूसरों का अभिचार असर न करे और जो किया गया है वह कमजोर पड़े, और पूरी तरह सुरक्षित हो जाएँ — तब तक, वे कहते हैं, अभिचार का प्रभाव हमारे साथ बना रहता है। इसलिए, वे कहते हैं, यह कार्य ध्यानपूर्वक स्वयं करना चाहिए।

02

तंत्र-ग्रस्त घर के भीतर किया काट प्रयोग क्यों विफल होता है, और शरीर की रक्षा पहले क्यों

बंधन-रहित घर से शत्रु तक जानकारी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:47–03:04

वक्ता कहते हैं कि जब घर तंत्र के कारण सुरक्षित नहीं है — रात को सोते समय कोई गला दबाता है, बुरे सपने आते हैं, घर की लड़कियों और छोटे बच्चों को तकलीफ होती है — तो उस घर के अंदर उस समस्या को ठीक करने का प्रयोग करने से बहुत सफलता नहीं मिलती, बल्कि बहुत बार समस्या और बढ़ जाती है। दो बातें ध्यान रखनी हैं: घर पर तंत्र का प्रभाव है और घर का बंधन नहीं किया गया है, इसलिए श्मशानिक शक्तियों के कारण शत्रु पक्ष को पता चलता रहता है कि आप क्या कर रहे हैं; और अभिचार किसी एक व्यक्ति के शरीर पर भी होता है और परिवार में एक-एक करके फैलता है, इसलिए शरीर की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण बन जाती है — और वही घर में नहीं हो पाती। तब, वे कहते हैं, यह प्रयोग करना चाहिए।

03

उच्चाटन: पुराना अभिचार स्वयं काटने की शुरुआत करते ही मन विद्रोह करता है

पहली बाधा ही पुष्टि है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:05–04:06

वक्ता कहते हैं कि कितना भी प्रबल तंत्र प्रयोग हो, नया होने पर बहुत दिक्कत नहीं होती, पर जब अभिचार पुराना हो जाता है — साल-दो साल बीत जाते हैं — तब दिक्कतें बढ़ जाती हैं। जब आप इसकी काट स्वयं करेंगे तो सबसे पहले आपका मन व्यथित होगा और बहुत उच्चाटन होगा: सारी सामग्री जुटा लेने पर मन में आएगा कि यह सब फालतू है, कुछ नहीं होता, इतनी दूर जाकर मंदिर में क्यों बैठें। वे कहते हैं कि अगर ऐसा होने लगे तो दिमाग शांत करके समझ लीजिए कि आप पर अभिचार अच्छी तरह प्रभावी है, और बचना है तो मन की बात न सुनकर उसे डाइवर्ट करके सबल बनना पड़ेगा।

04

शिव रक्षा स्तोत्र तंत्र काट: शिव मंदिर का चयन और साथ ले जाने की सामग्री

सवा साल पुराना, प्राण-प्रतिष्ठित, और झोले में क्या

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:07–06:40

इस प्रयोग के लिए क्या चाहिए, इस पर वक्ता पहले स्थान बताते हैं: घर के पास कम से कम सवा साल पुराना शिव मंदिर — यानी वहाँ दो शिवरात्रि का पूजन हो चुका हो — जहाँ प्राण-प्रतिष्ठित शिवलिंग हो, कहीं रखकर पूजा किया जाने वाला नहीं, और जहाँ शिव परिवार विराजमान हो। स्त्रियाँ ताँबे का लोटा नहीं लेंगी; स्त्रियाँ पीतल, पुरुष ताँबा, पीतल या काँसा ले सकते हैं। फिर सुबह स्नान और घर के धूप-दीप के बाद ले जाने की सामग्री: लोटे का जल जिसमें थोड़ा अक्षत और काला तिल (कच्चा दूध चाहें तो), ढेले वाले पत्थर कपूर के तोड़े हुए दो टुकड़े (सिंथेटिक गोली नहीं), अलग से रखे चार लौंग, कम से कम पाँच छोटे सरसों तेल के दीपक दोहरी बाती के, माचिस, धूप, बेलपत्र या कनेर या शिव जी को चढ़ने वाला कोई फूल, और भोग के लिए गुड़, बतासा, इलायची दाना या किशमिश। सबसे प्रमुख, वे कहते हैं, शिव रक्षा कवच का प्रिंटआउट (पीडीएफ डिस्क्रिप्शन में)। वस्त्र कोई भी।

05

शिव रक्षा तंत्र काट कब शुरू करें: कोई भी तिथि या महीना, दिन सोमवार या शुक्रवार

सिर्फ वार तय है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:59–07:15

वक्ता कहते हैं कि घर से सारी सामग्री लेकर यह प्रयोग प्रतिदिन, लंबे समय तक करना है। इसे कभी भी शुरू किया जा सकता है — किसी भी पक्ष, किसी भी तिथि, किसी भी महीने से — बस एक बात ध्यान रखनी है: दिन सोमवार या शुक्रवार हो।

घर से ये सभी चीजें लेकर, वक्ता कहते हैं, आपको प्रतिदिन, लंबे समय तक यह प्रयोग करना है। जब चाहें शुरू कीजिए — किसी भी पक्ष, किसी भी तिथि, किसी भी महीने से। बस इतना ध्यान रखना है, वे कहते हैं, कि दिन सोमवार या शुक्रवार हो; इतना ही।

06

मंदिर में शिव रक्षा स्तोत्र तंत्र काट विधान: पाँच दीपक, अभिषेक, विनियोग, आठ श्लोकों का पाठ, लौंग-कपूर

पहले दीपक से समापन प्रार्थना तक का नित्य क्रम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:16–10:38

वक्ता का नित्य क्रम: शिव मंदिर में सबसे पहले पंचानन शिव के पाँच मुखों के नाम से पाँचों सरसों तेल के दीपक जलाएँ (वे वामदेव, ईशान, अघोर का नाम लेते हैं और कहते हैं पाँचों नाम लिख देंगे), घर से लाए जल से अभिषेक करें, फूल, बेलपत्र और भोग चढ़ाएँ, फिर प्रांगण में कहीं भी घर से लाए आसन पर बैठें, मंदिर के आसन पर कभी नहीं। हाथ में जल लेकर मन में महादेव से कहें कि यह प्रयोग अपने ऊपर किए समस्त अभिचार कर्म को ध्वस्त करने और आपके रक्षण की प्राप्ति के लिए कर रहा हूँ, फिर विनियोग का मंत्र पढ़ें। कंठस्थ होने तक प्रिंटआउट नीचे रखें, दोनों मुट्ठियों में एक-एक कपूर और दो-दो लौंग पकड़ें, और शिव रक्षा स्तोत्र के पहले आठ श्लोक — "चरितम देव देवस्य महादेवस्य पावने" से आठवें "सर्वांगिनी सदाशिवः" तक — 5, 7 या 27 बार दोहराएँ (27 सर्वोत्तम), केवल अंतिम बार "एताम शिव वलोपेताम रक्षा में सुकृति पठेत" से अंत तक पढ़ें। फिर लौंग-कपूर शिव जी से थोड़ी दूर, चाहें तो मिट्टी के पात्र में, जला दें, हाथ जोड़कर प्रार्थना करें "इन सभी चीजों से मुझे मुक्त कीजिए, मेरी रक्षा कीजिए", और घर आ जाएँ। यह पहला काम है, रोज करना है; वे इसे बहुत आसान कहते हैं।

07

विशेष स्थिति: शिव रक्षा तंत्र काट सुबह की जगह शाम को करना

दक्षिण भारतीय शैली के मंदिर में नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:39–11:09

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ व्यक्ति इस प्रयोग को करते हुए सामान्य जीवन जी सकता है; इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं है। यह काम सुबह नहा-धोकर करना है। अगर सुबह न कर पाएँ और शाम को जाएँ तो ध्यान रखें कि वह शिव मंदिर दक्षिण भारतीय शैली का न हो, क्योंकि वहाँ शाम को जल नहीं चढ़ाने देते; अगर नॉर्थ साइड का मंदिर हो और वहाँ शाम को जल चढ़ाने की अनुमति हो तो यह काम शाम को भी किया जा सकता है।

08

शिव रक्षा तंत्र काट में बालों का नियम: दीपक-अभिषेक में बँधे, संकल्प से लौंग-कपूर जलने तक खुले

शिखा और जूड़ा, महादेव के नाम पर खोलना-बाँधना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:10–12:20

वक्ता स्त्रियों को, और शिखा रखने वाले पुरुषों को, बालों के नियम पर ध्यान देने को कहते हैं, क्योंकि यह तंत्र काट का प्रयोग है। दीपक जलाते और अभिषेक करते समय शिखा बँधी रहे और महिलाएँ जूड़ा बनाकर रहें। आसन पर बैठकर, विनियोग से पहले मन में संकल्प लेते समय — कि हमारे ऊपर जो भी तंत्र प्रयोग है उसके नाश और भगवान सदाशिव की कृपा व रक्षण के लिए हम आज शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करने का संकल्प लेते हैं — बाल खोल देने हैं; हाथ में लौंग-कपूर लेकर पाठ भर खुले रहें। लौंग-कपूर जल जाने के बाद वहीं शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ते हुए या महादेव के किसी भी नाम का उच्चारण करते हुए बाल फिर बाँध लें, फिर घर आएँ।

09

शिव रक्षा तंत्र काट में दिन की गिनती नहीं, और इसका बताया गया फल

भक्ति, शिव परिवार की कृपा, सर्वांगीण विकास

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:21–12:48

वक्ता कहते हैं कि दिन मत गिनिए — कि 41 दिन हो गए या तीन महीने हो गए — बस करते जाइए। वे कहते हैं कि आपको महादेव की भक्ति मिल जाएगी, उनकी कृपा और पूरे शिव परिवार की कृपा मिलेगी; इसमें न सिर्फ अभिचार और परकृत्य प्रयोग का नाश होगा, बल्कि महादेव की कृपा से आपका हर तरह से सर्वांगीण विकास होगा।

10

तंत्र काट में पूर्णिमा और अमावस्या के अतिरिक्त कार्य: दही-बेसन उबटन और महादेव का दही व सरसों तेल से अभिषेक

जल, दही, तेल, फिर जल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:49–13:44

रोज के प्रयोग के साथ वक्ता पूर्णिमा और अमावस्या के लिए दो काम और बताते हैं। अगर आप अभिचार-ग्रसित हैं तो इन दिनों घर में स्नान करते समय दही में बेसन मिलाकर उबटन बनाएँ, नहाने के बाद पूरे शरीर पर उसका लेप लगाएँ — स्त्री और पुरुष दोनों — और फिर उसे अच्छे से धो लें। और उस दिन मंदिर में महादेव का गाय के दूध से बने दही और सरसों तेल से अभिषेक करें: पहले पाँचों मुख के नाम से दीपक, फिर जल से अभिषेक, फिर दही, फिर सरसों तेल, फिर पुनः जल।

11

जीवन भर की शिव रक्षा साधना: पंचमुंडी तांत्रिक से भी रक्षा, साथ में जीव सेवा और अन्न-दान

सही रहें, जीवों की सेवा करें, कमाई बाँटें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:45–14:19

वक्ता कहते हैं कि अगर आप इस काम को निरंतर अपने जीवन में उतार लें तो कितना भी बड़ा तांत्रिक हो — पञ्चमुण्डी आसन पर बैठा तांत्रिक भी — महादेव उसे त्रिशूल पर उठाकर रख देंगे और वह आपका कुछ नहीं कर पाएगा; आपको बस सही होना चाहिए और इन चीजों को ठीक तरीके से करना चाहिए। साथ में जीव सेवा जरूर करनी है — पशु-पक्षियों की सेवा — और आपकी कमाई के हिस्से का अन्न दूसरों के पेट में जाना चाहिए, तभी आशीर्वाद मिलेगा। ये सब लंबे समय तक करके देखिए, वे कहते हैं, अवश्य लाभ होगा और महादेव की कृपा से तंत्र प्रयोग का नाश होगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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