तंत्र काट की सरल विधि — शिव मंदिर में रोज शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ जो शरीर पर किए अभिचार को नष्ट करे
वक्ता का रोज का सरल तंत्र काट प्रयोग: प्राण-प्रतिष्ठित शिव मंदिर में मुट्ठियों में लौंग-कपूर लेकर शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ, साथ में पूर्णिमा-अमावस्या के अतिरिक्त कार्य, ताकि शरीर पर किया गया अभिचार नष्ट हो।
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बार-बार अभिचार करते शत्रु के सामने दूसरों से करवाई तंत्र काट क्यों विफल होती है
स्थायी मुक्ति की तीन शर्तें
वक्ता कहते हैं कि जब घर-परिवार के किसी व्यक्ति या पूरे घर पर तंत्र का प्रयोग हो जाता है तो लोग अनेक तांत्रिकों और दरबारों में दौड़ते हैं, फिर भी बहुत बार जड़ से काट नहीं हो पाती, क्योंकि शत्रु पक्ष प्रबल है और एक बार करके छोड़ने के बजाय बार-बार अभिचार और कृत्या प्रयोग करता रहता है। जब तक तीन काम न हो जाएँ — हम स्वयं को सक्षम बनाएँ, अपने आभामंडल को इतना मजबूत करें कि दूसरों का अभिचार असर न करे और जो किया गया है वह कमजोर पड़े, और पूरी तरह सुरक्षित हो जाएँ — तब तक, वे कहते हैं, अभिचार का प्रभाव हमारे साथ बना रहता है। इसलिए, वे कहते हैं, यह कार्य ध्यानपूर्वक स्वयं करना चाहिए।
वक्ता आरंभ में कहते हैं कि जब घर-परिवार के किसी व्यक्ति पर या पूरे घर पर तंत्र का प्रयोग हो जाता है तो समस्या बहुत विकट हो जाती है। जब पता चलता है तो हम प्रयास शुरू करते हैं — अलग-अलग जगहों पर जाते हैं, अलग-अलग तांत्रिकों के पास जाते हैं, बहुत सारे दरबारों में जाते हैं। पर बहुत बार, वे कहते हैं, जड़ से काट नहीं हो पाती। इसका कारण वे यह बताते हैं कि शत्रु पक्ष प्रबल है और वह बार-बार अभिचार कर्म कर रहा होता है — कृत्या प्रयोग वगैरह। ऐसा नहीं है कि उसने एक बार प्रयोग करके छोड़ दिया। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, तीन काम होने चाहिए: हम स्वयं को सक्षम बनाएँ; अपने आभामंडल को इतना मजबूत बनाएँ कि दूसरों के अभिचारिक प्रयोगों का हम पर असर न पड़े और जो किया गया है वह कमजोर पड़ जाए; और हम पूरी तरह सुरक्षित हो जाएँ। जब तक ये तीन काम नहीं होंगे, अभिचार का प्रभाव हमारे साथ बना रहेगा। इसलिए, वे कहते हैं, हमें ध्यानपूर्वक यह कार्य स्वयं करना चाहिए।
तंत्र-ग्रस्त घर के भीतर किया काट प्रयोग क्यों विफल होता है, और शरीर की रक्षा पहले क्यों
बंधन-रहित घर से शत्रु तक जानकारी
वक्ता कहते हैं कि जब घर तंत्र के कारण सुरक्षित नहीं है — रात को सोते समय कोई गला दबाता है, बुरे सपने आते हैं, घर की लड़कियों और छोटे बच्चों को तकलीफ होती है — तो उस घर के अंदर उस समस्या को ठीक करने का प्रयोग करने से बहुत सफलता नहीं मिलती, बल्कि बहुत बार समस्या और बढ़ जाती है। दो बातें ध्यान रखनी हैं: घर पर तंत्र का प्रभाव है और घर का बंधन नहीं किया गया है, इसलिए श्मशानिक शक्तियों के कारण शत्रु पक्ष को पता चलता रहता है कि आप क्या कर रहे हैं; और अभिचार किसी एक व्यक्ति के शरीर पर भी होता है और परिवार में एक-एक करके फैलता है, इसलिए शरीर की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण बन जाती है — और वही घर में नहीं हो पाती। तब, वे कहते हैं, यह प्रयोग करना चाहिए।
वक्ता उस स्थिति का वर्णन करते हैं जब घर में अभिचारिक प्रयोग है और तंत्र के कारण घर सुरक्षित नहीं है: रात को सो रहे हैं और कोई गला दबा रहा है; खराब-खराब सपने आ रहे हैं; घर में लड़कियाँ हैं तो उन्हें तकलीफ हो रही है; छोटे बच्चे हैं तो उन्हें परेशानी हो रही है। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, उस विषय को ठीक करने के लिए घर में जब भी आप प्रयोग करेंगे तो आपको बहुत आशातीत सफलता नहीं मिलेगी — बल्कि बहुत बार समस्या और बढ़ने लगती है। वे कहते हैं कि यहाँ दो बातें ध्यान रखनी हैं। पहली, चूँकि घर पर तंत्र का प्रभाव है और घर का पूरी तरह बंधन नहीं किया गया है, वह असुरक्षित है; इसलिए वहाँ आप जो भी करेंगे, श्मशानिक शक्तियों के प्रभाव से शत्रु पक्ष को कहीं न कहीं जानकारी मिलती रहेगी कि आप क्या कर रहे हैं और क्या नहीं। दूसरी, अभिचार किसी न किसी व्यक्ति के शरीर पर भी होता है। प्रभाव किसी एक से शुरू होता है; पूरा परिवार एक बार में उसकी चपेट में नहीं आता, और आता भी है तो धीरे-धीरे — एक दिन किसी को कुछ हुआ, दूसरे दिन किसी और को। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, हमारे शरीर की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय बन जाती है, और वही घर में नहीं हो पा रही है। तब हमें यह प्रयोग करना चाहिए।
उच्चाटन: पुराना अभिचार स्वयं काटने की शुरुआत करते ही मन विद्रोह करता है
पहली बाधा ही पुष्टि है
वक्ता कहते हैं कि कितना भी प्रबल तंत्र प्रयोग हो, नया होने पर बहुत दिक्कत नहीं होती, पर जब अभिचार पुराना हो जाता है — साल-दो साल बीत जाते हैं — तब दिक्कतें बढ़ जाती हैं। जब आप इसकी काट स्वयं करेंगे तो सबसे पहले आपका मन व्यथित होगा और बहुत उच्चाटन होगा: सारी सामग्री जुटा लेने पर मन में आएगा कि यह सब फालतू है, कुछ नहीं होता, इतनी दूर जाकर मंदिर में क्यों बैठें। वे कहते हैं कि अगर ऐसा होने लगे तो दिमाग शांत करके समझ लीजिए कि आप पर अभिचार अच्छी तरह प्रभावी है, और बचना है तो मन की बात न सुनकर उसे डाइवर्ट करके सबल बनना पड़ेगा।
वक्ता कहते हैं कि कितना भी बड़ा और प्रबल तंत्र प्रयोग किया गया हो, दिक्कत इसलिए होती है क्योंकि अभिचार आप पर प्रभावी हो चुका है। साल भर बीत गया है, दो साल बीत गए हैं। नया होने पर बहुत दिक्कत नहीं होती, पर जब अभिचार पुराना हो जाता है तब दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इसलिए जब भी आप इसकी काट का प्रयोग खुद करेंगे, वे कहते हैं — दूसरे करेंगे तो जो दिक्कत होगी वह वे खुद समझ सकते हैं — तो सबसे पहली चीज यह होगी कि आपका मन व्यथित और उच्चाटित होगा। बहुत उच्चाटन होगा। जब आप करने के लिए सारी सामग्री की व्यवस्था कर लेंगे तो मन में आएगा: यह फालतू है, कुछ नहीं होता, छोड़ो, नहीं होने वाला, क्या यह सब बकवास है, नहीं करते, कितनी दूर जाना पड़ेगा, मंदिर में बैठना पड़ेगा, ऐसा करना होगा। उच्चाटन, वे कहते हैं, सबसे पहले आपके साथ शुरू हो जाएगा। अगर यह प्रयोग करने जाते समय ऐसा होने लगे तो, वे कहते हैं, दिमाग को शांत करके सोच लीजिए और देख लीजिए कि जरूर आप पर अभिचार प्रयोग अच्छी तरह प्रभावी है। बचना है तो कहीं न कहीं अपने मन को डाइवर्ट करके, मन की बात न सुनकर, सबल बनना पड़ेगा।
शिव रक्षा स्तोत्र तंत्र काट: शिव मंदिर का चयन और साथ ले जाने की सामग्री
सवा साल पुराना, प्राण-प्रतिष्ठित, और झोले में क्या
इस प्रयोग के लिए क्या चाहिए, इस पर वक्ता पहले स्थान बताते हैं: घर के पास कम से कम सवा साल पुराना शिव मंदिर — यानी वहाँ दो शिवरात्रि का पूजन हो चुका हो — जहाँ प्राण-प्रतिष्ठित शिवलिंग हो, कहीं रखकर पूजा किया जाने वाला नहीं, और जहाँ शिव परिवार विराजमान हो। स्त्रियाँ ताँबे का लोटा नहीं लेंगी; स्त्रियाँ पीतल, पुरुष ताँबा, पीतल या काँसा ले सकते हैं। फिर सुबह स्नान और घर के धूप-दीप के बाद ले जाने की सामग्री: लोटे का जल जिसमें थोड़ा अक्षत और काला तिल (कच्चा दूध चाहें तो), ढेले वाले पत्थर कपूर के तोड़े हुए दो टुकड़े (सिंथेटिक गोली नहीं), अलग से रखे चार लौंग, कम से कम पाँच छोटे सरसों तेल के दीपक दोहरी बाती के, माचिस, धूप, बेलपत्र या कनेर या शिव जी को चढ़ने वाला कोई फूल, और भोग के लिए गुड़, बतासा, इलायची दाना या किशमिश। सबसे प्रमुख, वे कहते हैं, शिव रक्षा कवच का प्रिंटआउट (पीडीएफ डिस्क्रिप्शन में)। वस्त्र कोई भी।
इस प्रयोग के लिए किन चीजों की जरूरत होगी, इस पर वक्ता सबसे पहले स्थान की बात करते हैं। घर के नजदीक ऐसा शिव मंदिर देखिए जो कम से कम सवा साल पुराना हो। सवा साल का मतलब, वे समझाते हैं, कि वहाँ कम से कम दो शिवरात्रिप्रत्येक मास आने वाली शिव की चतुर्दशी रात्रि, जो वार्षिक महाशिवरात्रि से भिन्न है। पूर्ण हो चुकी हों; जिस शिव मंदिर में दो शिवरात्रि का पूजन हो चुका हो वहीं यह प्रयोग करना है, या कम से कम जिसे बने सवा साल हो गया हो। शिवलिंगघर व मंदिरों में पूजित शिव जी का अमूर्त (निराकार) रूप। प्राण-प्रतिष्ठित हो — ऐसा नहीं कि कहीं रख दिया गया है और पूजा हो रही है — और जहाँ शिव परिवार विराजमान हो, वहीं प्रयोग करना है। पात्र के बारे में: स्त्री को इसमें ताँबे का लोटा प्रयोग नहीं करना है। स्त्रियाँ पीतल का लोटा लेंगी; पुरुष ताँबा, पीतल या काँसा भी ले सकते हैं। सामग्री: सुबह-सुबह नहा-धोकर सबसे पहले घर से एक लोटा जल लेना है। घर का जो पूजन करना चाहते हैं — धूपपूजन में अर्पित की जाने वाली धूप; उपचारों के क्रम में इसका धूम्र स्वयं एक अर्पण माना जाता है। और दीपकपूजन के लिए जलाया जाने वाला दीपक, जो विधि के अनुसार घी अथवा तेल का होता है। जलाना — कर लीजिए। फिर लोटे में थोड़ा-सा अक्षतअखंडित कच्चे चावल के दाने, संकल्प लेते समय जल व पुष्प के साथ हाथ में लिए जाते हैं। और थोड़ा-सा काला तिलतिल, विशेषतः काला तिल, जो पितृ कर्म और अनेक आहुतियों का मुख्य द्रव्य है। डाल लीजिए; चाहें तो उसी जल में, जो शिव जी को स्नान कराने के लिए है, थोड़ा कच्चा दूध मिला दीजिए। कम से कम दो कपूर लीजिए — आजकल की सिंथेटिक कपूर की गोली नहीं, बल्कि ढेला कपूर, पत्थर कपूर: ज्यादा मात्रा में खरीदकर रखिए, तोड़कर दो टुकड़े रखिए। चार लौंगलौंग, जो अर्पण तथा छोटे प्रयोगों में प्रयुक्त होती है। अलग से रखिए। दीपक सरसों तेल के — प्रतिदिन कम से कम पाँच। छोटे दीपक चलेंगे, पर बाती दोहरी करके। दीपक, बाती और तेल ले जाकर वहाँ बना सकते हैं; माचिस रखिए; धूप ले जाइए। बेलपत्रबिल्व का त्रिदल पत्र, जो शिव को अर्पित किया जाने वाला मुख्य द्रव्य है। हो तो ले जाइए, कनेर का फूल या कोई भी फूल जो शिव जी को चढ़ता हो। भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य। के लिए गुड़, या बतासे, या इलायची दाना या किशमिश — जो ले जाने में सक्षम हों। सबसे प्रमुख चीज, वे कहते हैं, शिव रक्षा कवच है: इसका पीडीएफ लिंक वीडियो के डिस्क्रिप्शन में है — डाउनलोड करके प्रिंटआउट निकलवाकर साथ ले जाना है। वस्त्र कोई भी पहनिए; वस्त्र से कोई दिक्कत नहीं।
शिव रक्षा तंत्र काट कब शुरू करें: कोई भी तिथि या महीना, दिन सोमवार या शुक्रवार
सिर्फ वार तय है
वक्ता कहते हैं कि घर से सारी सामग्री लेकर यह प्रयोग प्रतिदिन, लंबे समय तक करना है। इसे कभी भी शुरू किया जा सकता है — किसी भी पक्ष, किसी भी तिथि, किसी भी महीने से — बस एक बात ध्यान रखनी है: दिन सोमवार या शुक्रवार हो।
घर से ये सभी चीजें लेकर, वक्ता कहते हैं, आपको प्रतिदिन, लंबे समय तक यह प्रयोग करना है। जब चाहें शुरू कीजिए — किसी भी पक्ष, किसी भी तिथि, किसी भी महीने से। बस इतना ध्यान रखना है, वे कहते हैं, कि दिन सोमवार या शुक्रवार हो; इतना ही।
मंदिर में शिव रक्षा स्तोत्र तंत्र काट विधान: पाँच दीपक, अभिषेक, विनियोग, आठ श्लोकों का पाठ, लौंग-कपूर
पहले दीपक से समापन प्रार्थना तक का नित्य क्रम
वक्ता का नित्य क्रम: शिव मंदिर में सबसे पहले पंचानन शिव के पाँच मुखों के नाम से पाँचों सरसों तेल के दीपक जलाएँ (वे वामदेव, ईशान, अघोर का नाम लेते हैं और कहते हैं पाँचों नाम लिख देंगे), घर से लाए जल से अभिषेक करें, फूल, बेलपत्र और भोग चढ़ाएँ, फिर प्रांगण में कहीं भी घर से लाए आसन पर बैठें, मंदिर के आसन पर कभी नहीं। हाथ में जल लेकर मन में महादेव से कहें कि यह प्रयोग अपने ऊपर किए समस्त अभिचार कर्म को ध्वस्त करने और आपके रक्षण की प्राप्ति के लिए कर रहा हूँ, फिर विनियोग का मंत्र पढ़ें। कंठस्थ होने तक प्रिंटआउट नीचे रखें, दोनों मुट्ठियों में एक-एक कपूर और दो-दो लौंग पकड़ें, और शिव रक्षा स्तोत्र के पहले आठ श्लोक — "चरितम देव देवस्य महादेवस्य पावने" से आठवें "सर्वांगिनी सदाशिवः" तक — 5, 7 या 27 बार दोहराएँ (27 सर्वोत्तम), केवल अंतिम बार "एताम शिव वलोपेताम रक्षा में सुकृति पठेत" से अंत तक पढ़ें। फिर लौंग-कपूर शिव जी से थोड़ी दूर, चाहें तो मिट्टी के पात्र में, जला दें, हाथ जोड़कर प्रार्थना करें "इन सभी चीजों से मुझे मुक्त कीजिए, मेरी रक्षा कीजिए", और घर आ जाएँ। यह पहला काम है, रोज करना है; वे इसे बहुत आसान कहते हैं।
वक्ता बताते हैं कि शिव मंदिर में जाकर क्या करना है। सर्वप्रथम पाँचों दीपक जलाएँ। पंचानन शिव के रूप में शिव जी के पाँच मुख होते हैं, और पाँचों मुखों के नाम से दीपक जलाए जाते हैं — वामदेवपंचानन शिव का उत्तराभिमुख मुख, जो स्थिति से संबद्ध है।, ईशानपंचानन शिव का ऊर्ध्वमुख पंचम मुख, जो अनुग्रह से संबद्ध है। वास्तु की ईशान दिशा से भिन्न।, अघोर, और बाकी; जिन्हें नाम नहीं आते उनके लिए वे लिख देने को कहते हैं। तत्पश्चात घर से लाए जल से शिव जी का अभिषेकजल और अन्य निर्धारित द्रव्यों से देवता की प्रतिमा या प्रतीक का विधिवत स्नान कराना। करें, फिर फूल, बेलपत्रबिल्व का त्रिदल पत्र, जो शिव को अर्पित किया जाने वाला मुख्य द्रव्य है। इत्यादि चढ़ाएँ, और जो भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य। लगाना है लगाएँ। फिर मंदिर के प्रांगण में कहीं भी बैठें — घर से लाए आसन पर। मंदिर के आसन पर न बैठें, भले ही बहुत जगह मंदिर आसन देता हो। लोटे में थोड़ा जल विनियोग के लिए रख लें। हाथ में जल लेकर, विनियोग से पहले, मन में महादेव से यह कहें: "हे प्रभु, मैं अपने ऊपर किए गए समस्त अभिचार कर्म को ध्वस्त करने हेतु तथा आपके रक्षण की प्राप्ति हेतु इस प्रयोग को कर रहा हूं"। यह बोलना है। फिर हाथ में जल लेकर विनियोग का मंत्र पढ़कर विनियोग कर दें। पढ़ने से पहले: जब तक स्तोत्र कंठस्थ न हो, कागज सामने नीचे रखें; और दोनों हाथों में एक-एक कपूर लें, दोनों मुट्ठियों में दो-दो लौंगलौंग, जो अर्पण तथा छोटे प्रयोगों में प्रयुक्त होती है। पकड़े रहें। उसके बाद ही पाठ करें। शिव रक्षा स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। "चरितम देव देवस्य महादेवस्य पावने" से शुरू होता है; यहाँ से आठवें श्लोक तक, जो "चरणों करुणा सिंधु सर्वांगिनी सदाशिवः" पर समाप्त होता है, यही आठ श्लोक दोहराने हैं — कम से कम पाँच बार, या सात, या 27, जितना सक्षम हों; 27, वे कहते हैं, सर्वोत्तम है। अंतिम बार "एताम शिव वलोपेताम रक्षा में सुकृति पठेत" से अंत तक पढ़ें। पाठ के बाद लौंग-कपूर को शिव जी से थोड़ी दूर — चाहें तो मिट्टी के पात्र में — रखकर जला दें। फिर हाथ जोड़कर प्रार्थना करें: "इन सभी चीजों से मुझे मुक्त कीजिए, मेरी रक्षा कीजिए"। यह बोलकर घर आ जाएँ। यह, वे कहते हैं, पहला काम है और रोज करना है। बहुत आसान है; वे कहते हैं कि विस्तार से इसलिए बताया ताकि समझ में आ जाए।
विशेष स्थिति: शिव रक्षा तंत्र काट सुबह की जगह शाम को करना
दक्षिण भारतीय शैली के मंदिर में नहीं
वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ व्यक्ति इस प्रयोग को करते हुए सामान्य जीवन जी सकता है; इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं है। यह काम सुबह नहा-धोकर करना है। अगर सुबह न कर पाएँ और शाम को जाएँ तो ध्यान रखें कि वह शिव मंदिर दक्षिण भारतीय शैली का न हो, क्योंकि वहाँ शाम को जल नहीं चढ़ाने देते; अगर नॉर्थ साइड का मंदिर हो और वहाँ शाम को जल चढ़ाने की अनुमति हो तो यह काम शाम को भी किया जा सकता है।
वक्ता कहते हैं कि गृहस्थगृहस्थ आश्रमी, जो साधना के साथ परिवार का भार भी वहन करता है — इन प्रवचनों का मुख्य श्रोता। व्यक्ति यह करते हुए सामान्य जीवन जी सकता है — कोई दिक्कत नहीं है। आराम से प्रयोग करते हुए गृहस्थ जीवन जी सकते हैं; उसमें किसी प्रकार का कोई दोष नहीं है। यह काम नहा-धोकर सुबह के समय ही करना है। अगर सुबह नहीं कर पाते और शाम को करने जा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि जिस शिव मंदिर में आप जल चढ़ाने जा रहे हैं वह दक्षिण तरफ का मंदिर न हो। दक्षिण भारतीय मंदिर में, वे कहते हैं, शाम के समय जल नहीं चढ़ाने देते। तो आपको देखना होगा कि नॉर्थ साइड का मंदिर हो और वहाँ शाम को जल चढ़ाने की अनुमति हो; तब आप यह काम शाम को भी कर सकते हैं।
शिव रक्षा तंत्र काट में बालों का नियम: दीपक-अभिषेक में बँधे, संकल्प से लौंग-कपूर जलने तक खुले
शिखा और जूड़ा, महादेव के नाम पर खोलना-बाँधना
वक्ता स्त्रियों को, और शिखा रखने वाले पुरुषों को, बालों के नियम पर ध्यान देने को कहते हैं, क्योंकि यह तंत्र काट का प्रयोग है। दीपक जलाते और अभिषेक करते समय शिखा बँधी रहे और महिलाएँ जूड़ा बनाकर रहें। आसन पर बैठकर, विनियोग से पहले मन में संकल्प लेते समय — कि हमारे ऊपर जो भी तंत्र प्रयोग है उसके नाश और भगवान सदाशिव की कृपा व रक्षण के लिए हम आज शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करने का संकल्प लेते हैं — बाल खोल देने हैं; हाथ में लौंग-कपूर लेकर पाठ भर खुले रहें। लौंग-कपूर जल जाने के बाद वहीं शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ते हुए या महादेव के किसी भी नाम का उच्चारण करते हुए बाल फिर बाँध लें, फिर घर आएँ।
सामग्री बताते हुए वक्ता स्त्रियों से कहते हैं कि ध्यान से सुनें कि किस समय बाल खोलकर करना है और किस समय बँधे रहने चाहिए, और शिखासिर के मध्य रखी जाने वाली केश-शिखा, जिसे कुछ कर्मों से पूर्व बाँधा जाता है। रखने वाले पुरुष ध्यान दें कि शिखा किस समय खुली हो — क्योंकि, वे कहते हैं, यह स्वयं तंत्र काट का प्रयोग है, तंत्र की काट। नियम: जब आप दीपक जलाएँगे और अभिषेक करेंगे, तब शिखा बंधन में रहेगी — शिखा बाँधकर करना है — और महिलाएँ जूड़ा बनाकर करेंगी। जब प्रयोग के लिए आसन पर बैठेंगे तो विनियोग से पहले, संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। लेने के समय ही, बँधे बाल खोल देने हैं। विनियोग से पहले मन में लिया जाने वाला संकल्प, वे कहते हैं, यह है: कि हमारे ऊपर जो भी तंत्र प्रयोग है उसके नाश के लिए, और भगवान सदाशिव की कृपा और रक्षण की प्राप्ति के लिए, हम आज शिव रक्षा स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। का पाठ करने का संकल्प ले रहे हैं। यह मन में बोलने से पहले बाल खुल जाने चाहिए। बाल खोलकर हाथ में लौंगलौंग, जो अर्पण तथा छोटे प्रयोगों में प्रयुक्त होती है। और कपूर लें — दोनों हाथों में दो-दो लौंग और एक-एक कपूर — और बताई विधि से पाठ करें। जब वहाँ लौंग-कपूर जला दिए जाएँ, उसके बाद बाल बाँधने हैं — शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करते हुए, या महादेव के किसी भी नाम का उच्चारण करते हुए, वहीं बाल बाँध लेने हैं; इस बात का ध्यान रखें। तत्पश्चात घर आ जाइए। यह काम प्रतिदिन, लंबे समय तक करना है।
शिव रक्षा तंत्र काट में दिन की गिनती नहीं, और इसका बताया गया फल
भक्ति, शिव परिवार की कृपा, सर्वांगीण विकास
वक्ता कहते हैं कि दिन मत गिनिए — कि 41 दिन हो गए या तीन महीने हो गए — बस करते जाइए। वे कहते हैं कि आपको महादेव की भक्ति मिल जाएगी, उनकी कृपा और पूरे शिव परिवार की कृपा मिलेगी; इसमें न सिर्फ अभिचार और परकृत्य प्रयोग का नाश होगा, बल्कि महादेव की कृपा से आपका हर तरह से सर्वांगीण विकास होगा।
वक्ता कहते हैं कि यह काम प्रतिदिन, लंबे समय तक करना है। दिन मत गिनिए — कि 41 दिन हो गए, तीन महीने हो गए। करते जाइए। एक तो, वे कहते हैं, आपको महादेव की भक्ति प्राप्त हो जाएगी; उनकी कृपा मिलेगी, और पूरे शिव परिवार की कृपा मिलेगी। इसमें न सिर्फ अभिचार का नाश होगा और परकृत्य प्रयोग का नाश होगा, बल्कि आपका सर्वांगीण विकास होगा — हर तरीके से आपका विकास होने वाला है, महादेव की कृपा से।
तंत्र काट में पूर्णिमा और अमावस्या के अतिरिक्त कार्य: दही-बेसन उबटन और महादेव का दही व सरसों तेल से अभिषेक
जल, दही, तेल, फिर जल
रोज के प्रयोग के साथ वक्ता पूर्णिमा और अमावस्या के लिए दो काम और बताते हैं। अगर आप अभिचार-ग्रसित हैं तो इन दिनों घर में स्नान करते समय दही में बेसन मिलाकर उबटन बनाएँ, नहाने के बाद पूरे शरीर पर उसका लेप लगाएँ — स्त्री और पुरुष दोनों — और फिर उसे अच्छे से धो लें। और उस दिन मंदिर में महादेव का गाय के दूध से बने दही और सरसों तेल से अभिषेक करें: पहले पाँचों मुख के नाम से दीपक, फिर जल से अभिषेक, फिर दही, फिर सरसों तेल, फिर पुनः जल।
इस रोज के काम के साथ-साथ, वक्ता कहते हैं, दो काम और करेंगे। पूर्णिमा के दिन और अमावस्या के दिन — इन दो दिनों — अगर आप अभिचार-ग्रसित हैं तो सबसे पहले घर में स्नान करते समय दही में बेसन मिलाकर उबटन बनाएँ और नहाने के बाद पूरे शरीर पर उसका लेप लगाएँ। यह स्त्री और पुरुष दोनों के लिए है। फिर उसे अच्छे से धो लें — यानी अच्छे से नहा लें। और उस दिन मंदिर में जब महादेव के पास जाएँ तो उनका भी दही से और सरसों के तेल से अभिषेकजल और अन्य निर्धारित द्रव्यों से देवता की प्रतिमा या प्रतीक का विधिवत स्नान कराना। करें। यह अमावस्या और पूर्णिमा दोनों दिन करना है। ध्यान रखें कि दही अच्छा हो और गाय के दूध का बना हो। क्रम, वे कहते हैं, यह है: पहले की तरह पाँचों मुख के नाम से दीपक जलाएँ; फिर जल से अभिषेक करें; उसके बाद दही से; फिर सरसों तेल से; फिर पुनः जल से अभिषेक करें। बस इतना ही अमावस्या और पूर्णिमा के दिन करना है।
जीवन भर की शिव रक्षा साधना: पंचमुंडी तांत्रिक से भी रक्षा, साथ में जीव सेवा और अन्न-दान
सही रहें, जीवों की सेवा करें, कमाई बाँटें
वक्ता कहते हैं कि अगर आप इस काम को निरंतर अपने जीवन में उतार लें तो कितना भी बड़ा तांत्रिक हो — पञ्चमुण्डी आसन पर बैठा तांत्रिक भी — महादेव उसे त्रिशूल पर उठाकर रख देंगे और वह आपका कुछ नहीं कर पाएगा; आपको बस सही होना चाहिए और इन चीजों को ठीक तरीके से करना चाहिए। साथ में जीव सेवा जरूर करनी है — पशु-पक्षियों की सेवा — और आपकी कमाई के हिस्से का अन्न दूसरों के पेट में जाना चाहिए, तभी आशीर्वाद मिलेगा। ये सब लंबे समय तक करके देखिए, वे कहते हैं, अवश्य लाभ होगा और महादेव की कृपा से तंत्र प्रयोग का नाश होगा।
वक्ता समापन में कहते हैं कि अगर आप इस काम को निरंतर अपने जीवन में उतार लें तो कितना भी बड़ा तांत्रिक हो — पञ्चमुण्डी आसन पर बैठा हुआ तांत्रिक भी — महादेव उसे त्रिशूलशिव और देवी का त्रिशूल, जो शक्ति स्थल पर भी स्थापित किया जाता है। में उठाकर ऊपर रख देंगे; वह आपका कुछ नहीं कर पाएगा। आपको बस सही होना चाहिए, और इन चीजों को ठीक तरीके से करना चाहिए। साथ में, वे कहते हैं, जीव सेवा जरूर करनी है — यानी पशु-पक्षियों की सेवा। और आपकी कमाई के हिस्से का अन्न दूसरों के पेट में जाना चाहिए; तब आशीर्वाद प्राप्त होगा। इन सभी कामों को करके देखिए, वे कहते हैं: लंबे समय तक करने पर आपको अवश्य लाभ मिलेगा, और महादेव की कृपा से तंत्र प्रयोग का नाश होगा।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।