सप्तशती उत्कीलन की दूसरी विधि, और इसे सब क्यों नहीं कर सकते

मारीच कल्प शाप विमोचन और सप्तशती उत्कीलन का अधिकार।

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01

मारीच कल्प के अनुसार दुर्गा सप्तशती का शाप विमोचन मंत्र

देवी कवच से पहले एक माला, केवल आरंभ में

· 00:05–00:46

वक्ता दुर्गा सप्तशती के उत्कीलन (खोलने) की दूसरी विधि बताते हैं: मारीच कल्प के अनुसार शाप विमोचन मंत्र, जो स्क्रीन पर लिखा दिखाया गया है, जिसका एक माला यानी 108 बार जप देवी कवच से पहले करना है, और केवल पाठ के आरंभ में, अंत में फिर कभी नहीं। वे यह भी कहते हैं कि प्रथम अध्याय से पहले होने वाले नवार्ण जप के बाद उत्कीलन का प्रयोग नहीं करना है। यह विधि वे केवल उन शाक्त दीक्षित साधकों के लिए बताते हैं जिन्हें गुरु की आज्ञा मिली हो।

02

दुर्गा सप्तशती का उत्कीलन कौन कर सकता है, और अदीक्षित के लिए खतरा

उत्कीलित कुल शक्ति को संतुष्ट करना आवश्यक

· 00:47–03:19

वक्ता कहते हैं कि दुर्गा सप्तशती के उत्कीलन मंत्र — मारीच कल्प की शाप विमोचन विधि भी और पहले बताई तीन मंत्रों वाली विधि (मृत संजीवनी उत्कीलन, शाप अनुग्रह मंत्र आदि) भी — केवल शाक्त दीक्षित साधक गुरु की आज्ञा से करें, या वे पुरुष जो यज्ञोपवीत धारण करते हैं और दीक्षित हैं; स्त्री केवल अपने पति के साथ, या यदि उन्हें गुरु कृपा प्राप्त हो चुकी हो। उत्कीलन से कुल परंपरा में पूजित देवी या योगिनी भी उत्कीलित होती हैं, जो पाठ का फल पाती हैं और उसे भगवती तक पहुँचाती हैं। अदीक्षित या स्त्रियाँ अपने से करें तो संभावना है — 100% नहीं — कि यह उत्कीलित कुल शक्ति उन्हें परेशान करे, उच्चाटन जैसी बेचैनी हो, क्योंकि जो खोलता है उसे अर्चन-तर्पण से संतुष्ट करने की विधि आनी चाहिए, जो गुरु परंपरा से ही मिलती है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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