सप्तशती के चार स्तोत्र जिनके लिए दीक्षा आवश्यक नहीं

दुर्गा सप्तशती के चार स्तोत्रों के प्रयोग पर नोट्स।

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The notes
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01

पूर्ण पाठ के विकल्प के रूप में दुर्गा सप्तशती के भीतर की चार स्तुतियाँ

नए और समय-कम लोगों के लिए, पूर्ण पाठ करने वालों के लिए नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:03–02:11

वक्ता बिल्कुल नए साधक-साधिकाओं से बात करते हैं जो दुर्गा सप्तशती की ओर आकर्षित हैं और इस नवरात्रि में पाठ करना चाहते हैं पर समय की कमी या संस्कृत उच्चारण न आने से पूर्ण पाठ नहीं कर पा रहे। वे कहते हैं कि सप्तशती के भीतर की चार स्तुतियों में नवदुर्गा, दसों महाविद्या, अष्टमातृका और 64 योगिनी की उपस्थिति बन जाती है, इसलिए वे 700 मंत्रों का अर्क, निचोड़ हैं, और इनका पाठ करने से भगवती की विशेष कृपा और सप्तशती पाठ का फल मिल जाता है। वे स्पष्ट हैं कि यह नए लोगों और समय न रखने वालों के लिए है — नवरात्रि खाली नहीं जानी चाहिए, और पढ़ना जानने वाले स्कूली बच्चों से भी यह करवाना चाहिए — जो पूर्ण पाठ करते हैं वे इसे छोड़कर यह न करें।

02

तंत्रोक्त रात्रि सूक्तम: सप्तशती की सबसे छोटी स्तुति और उसका फल

पंद्रह श्लोक, रोज़ पाँच-दस मिनट

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:12–03:17

वक्ता जिन चार स्तुतियों को बताते हैं उनमें पहली है तंत्रोक्त रात्रि सूक्तम्: 15 श्लोक, दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय (प्रथम चरित्र) के 73 से 87 तक के श्लोक, जो ब्रह्मा जी द्वारा भगवती योगनिद्रा की स्तुति है, जो मधु-कैटभ के वध के लिए विष्णु जी के नेत्रों से प्रकट हुईं। वे कहते हैं कि इन 15 श्लोकों में सभी शक्तियाँ उपस्थित हैं, इसलिए भगवती की प्रचंडतम कृपा होती है; इन्हें पढ़ने में 5 से 10 मिनट लगते हैं, 15 भी नहीं। यह चारों में सबसे छोटी है, इसलिए नवरात्रि में घर के बच्चे-बूढ़े जो और कुछ नहीं कर सकते, रोज़ एक धूप-दीप जलाकर इसका पाठ कर लें। वे कहते हैं कि बल की कमी, धन की कमी, रोग, धन की समस्या — सबमें भगवती कृपा करती हैं, और जो भी आपका शत्रु बने उस पर इनका प्रहार होता है।

03

शक्रादि स्तुति: धन की समस्या के लिए सप्तशती की स्तुति

ऐश्वर्य छिन जाने पर देवताओं की स्तुति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:18–04:13

वक्ता की दूसरी स्तुति है शक्रादि स्तुति, दुर्गा सप्तशती के चौथे अध्याय के पहले से 27वें श्लोक तक, जो इंद्र आदि देवताओं द्वारा भगवती की स्तुति है। वे कहते हैं कि इन 27 श्लोकों का पाठ करने पर लक्ष्मी से जुड़ी बड़ी से बड़ी समस्या भगवती दूर कर देती हैं, क्योंकि यह मध्यम चरित्र की स्तुति है, ऐश्वर्यशाली देवताओं ने ऐश्वर्य की पुनः प्राप्ति के लिए की थी जब महिषासुर ने सब छीन लिया था — इसलिए इन श्लोकों से महालक्ष्मी विशेष कृपा करती हैं। वे जोड़ते हैं कि हर श्लोक का स्वतंत्र प्रयोग भी है जिसमें सभी महाविद्याओं की उपस्थिति है, पर उसे गुप्ततम विषय बताकर कहते हैं कि धीरे-धीरे उजागर कर रहे हैं; अभी जिनके पास समय नहीं है वे 27 श्लोक पढ़ें।

04

सप्तशती के हृदय के रूप में तंत्रोक्त देवी सूक्तम

इसके बिना घटस्थापना अधूरी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:14–05:15

तीसरी स्तुति है तांत्रोक्त देवीसूक्तम्, दुर्गा सप्तशती के पंचम अध्याय के 9वें से 82वें श्लोक तक, जिसे वक्ता देवी भक्तों का और सप्तशती का हृदय कहते हैं — कुछ न करें तो भी यह करें, और नवरात्रि करते हैं तो यह अति अनिवार्य है: घटस्थापना के बाद जब तक इसका पाठ नहीं होता, माना जाता है कि भगवती का आगमन हुआ ही नहीं। वे कहते हैं कि किसी भी यंत्र, विग्रह या अस्त्र की प्रतिष्ठा और पीठ की स्थापना के समय अथर्वशीर्ष के साथ इसका पाठ अवश्य होता है, क्योंकि इसके पाठ मात्र से भगवती का सान्निध्य मिल जाता है। यह सप्तशती में स्वतंत्र रूप से भी उपस्थित है, इसलिए अकेले भी इसका पाठ किया जा सकता है।

05

देवी सूक्तम में 82 श्लोक क्यों गिने जाते हैं: हर नमस्तस्यै अपने आप में मंत्र

हवन करने वालों के लिए गिनती का नियम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:16–07:23

यह पूछे जाने पर कि तांत्रोक्त देवीसूक्तम् में 81–82 श्लोक कैसे हो जाते हैं जबकि दिखने में उतने नहीं हैं, वक्ता कहते हैं कि हवन करने वालों को विशेष ध्यान रखना चाहिए कि देवी सूक्तम का हवन सीधे पूरे मंत्र से नहीं होता: हर \"नमस्तस्यै\" को भी एक पूरा श्लोक माना गया है। \"या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः\" में पहले नमस्तस्यै तक एक श्लोक, अगला नमस्तस्यै दूसरा श्लोक, और \"नमस्तस्यै नमो नमः\" तीसरा श्लोक। इनमें से हर एक, वे कहते हैं, स्वतंत्र मंत्र है जिसके अपने देवता, ऋषि, छन्दस्, कीलक और शक्ति हैं, इसी कारण संख्या बढ़ जाती है। वे प्रसंगवश बताते हैं कि ऐसे नमस्कार मंत्र अपने आप में अलग विषय हैं — नमस्कार अस्त्र, जिनसे किसी का वध किया जाता है, जिनका वर्णन पाशुपतास्त्र पाठ में गुरु-उपदिष्ट लोगों को मिला होगा — और वहीं छोड़ देते हैं।

06

घी, कच्चे दूध और देवी सूक्तम से घर पर धातु के विग्रह की प्रतिष्ठा

ठोस धातु, मिट्टी नहीं, कभी न बदलें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:24–08:43

वक्ता किसी भी देवता के विग्रह — हनुमान जी, शिव जी, भगवती दुर्गा, काली, देवी-देवताओं का कोई भी स्वरूप — की प्रतिष्ठा की एक सरल घरेलू विधि देते हैं, उन घरों के लिए जो पंडित जी नहीं बुलाएँगे। उनके नियम: लक्ष्मी-गणेश पूजा में मिट्टी के विग्रह मत लाइए; ठोस धातु के स्थापित कीजिए, छोटे हों या बड़े, और उन्हें कभी मत बदलिए। केवल धोकर रख देना नहीं: जब विग्रह को स्थान पर बैठाएँ, पूरे विग्रह पर गाय के घी का लेपन करें, और उन पर कच्चे दूध की धार छोड़ते हुए तांत्रोक्त देवीसूक्तम् का पाठ करें। वे कहते हैं कि गणेश तत्व और लक्ष्मी तत्व की शुद्ध सत्व शक्तियाँ उसमें प्रविष्ट हो जाती हैं और प्रतिष्ठा हो जाती है; संस्कार आदि, अग्न्युत्तारण विधि सहित, संक्षेप में इसी में मान लिए जाते हैं। वे बताते हैं कि मूर्ति प्रतिष्ठा की सरलतम हिंदी विधि और पीडीएफ उनके चैनल पर है, पर यह भी एक सरलतम विषय है।

07

सावधानी: देवी सूक्तम का प्रयोग छोटी बात पर नहीं; जीवन में 40,000 पाठ

अदीक्षित के लिए योगिनियों और क्षेत्रपालों की कृपा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:44–09:18

वक्ता सावधान करते हैं कि तांत्रोक्त देवीसूक्तम् का प्रयोग अकारण नहीं करना चाहिए — पाठ कीजिए और भगवती की कृपा प्राप्त कीजिए, पर कहीं फँसने पर छोटी-सी बात पर इसका प्रयोग न करें। फिर वे कहते हैं कि अगर आपने अपने जीवन में इन पूरे मंत्रों का 40,000 पाठ कर लिया है, तो भगवती की योगिनी, उनकी शक्तियाँ, उनकी परिचारिका और क्षेत्रपाल सभी आप पर कृपालु हो जाते हैं और कोई आपका अहित नहीं कर सकता; ललिता सहस्रनाम में जो फलश्रुति दी गई है उसका प्रभाव इससे मिल जाता है। वे इसे उनके लिए मार्ग बताते हैं जो उतना नहीं कर सकते और दीक्षा नहीं लिए हैं।

08

जय दुर्गा स्तुति: किसी भी कामना की सप्तशती स्तुति और 700 श्लोकों के हवन का विकल्प

ग्यारहवें अध्याय के पैंतीस श्लोक; शक्ति हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:19–10:17

चौथी स्तुति है भगवती जय दुर्गा स्तुति, दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय के पहले से 35वें श्लोक तक। वक्ता कहते हैं कि 700 श्लोकों में उपस्थित सभी प्रचंडतम शक्तियों का अर्क इन 35 में है, इसलिए किसी भी कामना के लिए — धन, बल, रोग नाश, शत्रु नाश, अभिचार तंत्र नाश — इसका पाठ किया जा सकता है, और नित्य भी। जो लोग नवरात्रि के नौ दिन सप्तशती का पाठ करते हैं पर 700 श्लोकों के हवन का सामर्थ्य नहीं रखते, उनके लिए वे कहते हैं: इसका शक्ति हवन कर लें, खीर, घी, गुग्गुल-घी और तिल से आहुति देते हुए — अपने गुरु से जानकर कि कौन-से अंश छोड़ने हैं, क्योंकि उवाच की और अस्त्र मंत्रों की आहुति नहीं दी जाती।

09

इष्ट के अनुसार सप्तशती की चार स्तुतियों में से कौन-सी अपनाएँ

जीवन भर के लिए एक स्तुति, गुरु मिलने पर काम आएगी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:18–11:18

वक्ता कहते हैं कि इन चारों स्तुतियों में से कोई एक अपने जीवन में उतार लेनी चाहिए, और उन्हें भक्त से मिलाते हैं: महाकाली के भक्त रात्रि सूक्तम् करें; भगवती महासरस्वती के भक्त ग्यारहवें अध्याय की जय दुर्गा स्तुति; महालक्ष्मी के अनन्य उपासक शक्रादि स्तुति, चौथे अध्याय के 27 श्लोक; और जो भगवती के किसी भी स्वरूप के भक्त हैं, सभी स्वरूपों की कृपा चाहते हैं और हर शक्ति में अपनी माता, अपनी दुर्गा, अपनी काली देखते हैं — प्रचंडतम उपासक — वे तांत्रोक्त देवीसूक्तम् कभी न छोड़ें। वे कहते हैं कि ये चारों जीवन बदलने का सामर्थ्य रखती हैं, सबका स्वतंत्र प्रयोग है, और आज इन्हें कर रखने से जब देवी कृपा से जीवन में ऐसे विद्वान गुरु प्रकट हों जो ये सब करवाते हैं, तब ये बहुत काम आएँगी।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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