पूजा घर में पितरों का फोटो: पितृ दोष कैसे लगता है

पूजा स्थान में मृतकों की फोटो वर्जित होने पर एक शिक्षा।

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The notes
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01

क्या मृत परिजन का फोटो पूजा घर में रखा जा सकता है?

एक फोटो से पितृ दोष और देव दोष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–00:40 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या घर के मृतक का फोटो पूजन स्थान पर लगाकर वहीं उसकी पूजा की जा सकती है, वक्ता कहते हैं नहीं। उनके अनुसार जो लोग मोह और जानकारी के अभाव में ऐसा फोटो देवताओं के बीच लगा देते हैं, वे घर में बड़े विनाश को निमंत्रण देते हैं: बड़ा पितृ दोष बनता है, deva-dosha भी बनता है, और परिवार को देव शाप तथा पितृ श्राप दोनों मिल जाते हैं। एकमात्र अपवाद वे जानबूझकर की गई तांत्रिक स्थापना का मानते हैं, जिसे वे अलग प्रसंग के रूप में लेते हैं।

02

विशेष स्थिति: तांत्रिक द्वारा जानबूझकर घर में बैठाया गया मृतक

जानकार साधक का कार्य उसका अपना विषय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:41–00:57

वक्ता पूजा घर में पितृ चित्र न रखने के सामान्य नियम से एक स्थिति को अलग रखते हैं। यदि अकाल मृत्यु के बाद किसी साधक या तांत्रिक ने अपनी जानकारी में उसी व्यक्ति को घर में बैठा दिया हो, और परिवार उसी आधार पर उसे देवताओं के साथ पूज रहा हो, तो वे कहते हैं कि यह उनका व्यक्तिगत मामला है और वे कर सकते हैं। निषेध, उनके अनुसार, उन सामान्य लोगों के लिए है जो बिना किसी ऐसी जानकारी के ऐसा करते हैं।

03

ईशान कोण: घर में देवताओं का स्थान

ईशान में इष्ट का नित्य पूजन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:19–01:52

वक्ता कहते हैं कि वास्तु के हिसाब से ईशान कोण, यानी पूर्व और उत्तर के बीच का कोण, देवताओं का स्थान माना गया है; वहाँ देवता वास करते हैं, उसे देवभूमि और देवस्थान कहा गया है। उनके अनुसार उस स्थान पर सदैव अपने कुल से संबंधित देव शक्तियों की स्थापना करनी चाहिए, अपने इष्ट देवता के श्री विग्रह या फोटो से उसे सजाना चाहिए और नित्य वहाँ धूप, दीप, गंध, अक्षत से पूजन-पाठ करना चाहिए। वह स्थान, वे कहते हैं, सदैव शुभ्र होता है।

04

पूजा घर में बैठाए गए पितर को देव मंत्र क्यों कष्ट देते हैं

पितर उपदेव हैं, कुछ प्रेत योनि में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:53–02:29

वक्ता कहते हैं कि पितृ उपदेव की श्रेणी में आते हैं; वे एक प्रकार के नहीं होते, उनके अनेक प्रकार बताए गए हैं, और उनमें कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी गति नहीं हो पाती और जो प्रेत योनि से संबंधित होते हैं। ऐसे पितरों को पूजन स्थान में बैठा दिया जाए तो, उनके अनुसार, जिन मंत्रों से देवताओं का पूजन हो रहा है उन्हीं मंत्रों से पितरों को कष्ट पहुँचने लगता है। उदाहरण वे हनुमान चालीसा और bajrang-baan का देते हैं: वहाँ अधिकार क्षेत्र ही गलत है, इसलिए उस पाठ से उत्पन्न ऊर्जा से पितरों के शरीर को कष्ट पहुँचता है।

05

घर में पितरों के तीन स्थान

चौखट, तुलसी और देवता के श्रीचरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:30–03:31

वक्ता घर में पितरों के तीन माने गए स्थान बताते हैं। पहला, उनका आधिकारिक स्थान घर के मुख्य द्वार की चौखट है, आज बनने वाला त्रिकूट नहीं। दूसरा, तुलसी, जहाँ अलग-अलग प्रकार के पितृ का सूक्ष्म अंश माना गया है, इसलिए तुलसी या सूर्य नारायण को दिया गया जल उन तक पहुँचता है और वे तृप्त होते हैं। तीसरा, सांकेतिक और सूक्ष्म रूप से, घर के इष्ट या कुल देवता के श्रीचरण जिनका प्रमुख विग्रह पूजन स्थान में है; पर वे कहते हैं कि इसका अर्थ कभी यह नहीं कि अपने मृतकों का फोटो उन चरणों के पास रख दिया जाए; ऐसा करने से दोष बनता है।

06

रसोई का पेयजल स्थान: पितरों का एक स्थान

वहाँ शाम का दीपक क्यों जलता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:32–04:30

वक्ता कहते हैं कि रसोई कक्ष, जहाँ खाना पकता है, घर के आग्नेय कोण में माना गया है, और उस रसोई के भीतर पानी रखने की जगह, चाहे वह कक्ष के ईशान कोण में बनी हो, नैऋत्य कोण में, या पश्चिम की ओर, वह स्थान है जहाँ पितरों का अधिकार माना गया है; वे वहाँ उपस्थित होते हैं। इसीलिए, उनके अनुसार, पुराने क्षेत्रों और गाँवों के लोग जो अब भी पुरानी मान्यताएँ मानते हैं, पानी पीने के स्थान पर रोज़ शाम दीप अवश्य जलाते हैं, और पितृ की कृपा मिलती है। वे जोड़ते हैं कि वहीं भगवती नैऋत्य लक्ष्मी भी विराजमान होती हैं।

07

आसुरी लक्ष्मी और आसुरी दुर्गा पूजा: दीप का नियत आरंभ स्थान

ग्रंथों में लिखी वह बात जो पूजक नहीं जानते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:31–05:07

वक्ता कहते हैं कि जो लोग आसुरी लक्ष्मी और आसुरी दुर्गा की पूजा करते हैं, उन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि उनकी पूजा वास्तव में किस जगह से कैसे शुरू करनी चाहिए, या दीप कहाँ से प्रज्वलित होकर जाएगा। वे कहते हैं कि यह मनगढ़ंत नहीं बल्कि लिखित बात है: तंत्र के ग्रंथों में जहाँ आसुरी दुर्गा, दीपन दुर्गा या आसुरी लक्ष्मी दी गई हैं, वहाँ इसकी चर्चा मिलती है कि किस स्थान से उनके हेतु दीप प्रज्वलित करके अपने पूजन स्थान पर रखकर पूजन करना है, और ऐसा क्यों किया जाता है इसका सविस्तार वर्णन भी। यह बात वे रसोई के पेयजल स्थान के ठीक बाद उठाते हैं और यह कहकर समाप्त करते हैं कि वह स्थान पितरों का है; विधि वे नहीं बताते।

08

घर में पितरों के फोटो कहाँ लगाने चाहिए?

दक्षिण दीवार या नैऋत्य कोण, यम का द्वार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:08–05:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि घर में पितरों का सामान्य स्थान नैऋत्य कोण, यानी दक्षिण-पश्चिम, या उससे लगा हुआ दक्षिण का दल है, ठीक दक्षिण दिशा नहीं; लोग "दक्षिण" इसलिए बोल देते हैं क्योंकि वह यम का द्वार है, यमराज उस दिशा के स्वामी हैं और पितृ उनके अधीन होते हैं, और यह भी, वे कहते हैं, सही और शास्त्रोक्त है। अतः पितरों का फोटो दक्षिण दीवार पर, या नैऋत्य कोण से सटाकर पश्चिम की ओर लगाना चाहिए और वहीं उन्हें स्थान देना चाहिए; घर के पूजन स्थान में, वे कहते हैं, कभी नहीं।

09

पूजा घर में भावना से की गई पितृ पूजा हानिकारक क्यों बन जाती है

पितर परिवार की भावना से नहीं, नियम से चलते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:00–06:48

वक्ता कहते हैं कि यदि मृत परिजन को पूजन स्थान में जगह दी गई तो कभी न कभी, जब आपके पुण्य क्षय होंगे, वह दिक्कत देगा। आज आप अपने मनगढ़ंत तरीके से वहाँ पूजन कर सकते हैं, रोज़ बड़ा दिया जला सकते हैं, रोज़ भोग लगा सकते हैं, यह आपका भाव है और अपनी जगह उचित भी लग सकता है, पर कालांतर में वह दिक्कत देने वाला होगा क्योंकि पितर को कष्ट पहुँचेगा। उनका स्वरूप अब अलग हो चुका है, वे कहते हैं; वे आपके नियम से नहीं, बने हुए नियम से चलेंगे, और उनका कष्ट या प्रसन्नता उसी के अनुसार होगी। पिताजी के फोटो को भगवान मानकर देवताओं के साथ पूजना एक भाव है, पर वास्तविकता में, वे कहते हैं, उस स्थान पर जगह देकर आप उन्हें कष्ट ही पहुँचा रहे हैं।

10

उचित स्थान देने के बाद पितरों की सेवा-पूजा कैसे करें

दीप, पुष्प, भोग और गीता पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:49–07:22

वक्ता कहते हैं कि पितरों को जो उनका यथोचित स्थान और दिशा है वहाँ विराजमान कराने के बाद उनके समक्ष धूप-दीप जलाना चाहिए, पुष्प चढ़ाना चाहिए, भोग लगाना चाहिए और यथाशक्ति श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना चाहिए। उससे, वे कहते हैं, वे अवश्य तृप्त होंगे और सही तरीके से आशीर्वाद देंगे; अगर सच में उनकी गति नहीं हुई और वे हैं, तो भविष्य में कभी कोई कष्ट नहीं आने देंगे, और अगर गति हो भी गई है तो भी वह पुण्य आपको अवश्य मिलेगा। गलत जगह गलत तरीके से की गई सेवा-पूजा, उनके अनुसार, कष्ट ही बढ़ाती है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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