दीपावली पर कुल देवी और महाशक्तियों हेतु तंत्रोक्त दीप दान विधि

कुल देवी और प्रमुख महाशक्तियों हेतु दीपावली की तंत्रोक्त दीप दान विधि।

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01

कार्तिक के महानिशा काल में कुल देवी और प्रमुख महाशक्तियों का दीप दान

दीपावली के महानिशा काल में कुल देवी और प्रमुख महाशक्तियों के लिए दीप दान क्यों किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कार्तिक के शुभ महीने में, विशेष करके दीपावली के महानिशा काल (महानिशा काल) में या फिर स्वदोष के समय में (यानी शाम के समय में), प्रमुख देवी-देवताओं का अपने कुलदेवी और कुल की शक्तियों के साथ नारियल के दीपक में 108 बाती के साथ दीपदान करना चाहिए।

02

कर्म साक्षी दीप और नारियल के दीपक की तैयारी

सर्वप्रथम कर्म साक्षी दीप प्रज्वलित होता है, पुष्पों से सजे पाँच पत्ते रखे जाते हैं, और सूखी गड़ी को बीच से काटा जाता है — यह कार्य घर का पुरुष करे तो अत्युत्तम।

· Reviewed Sep 2026 · 00:42–01:28

वक्ता कहते हैं कि सर्वप्रथम एक कर्म साक्षी दीप प्रज्वलित करें, पुष्पों से सजाकर पाँच पत्ते रखें, और उन्हीं में नारियल का दीपक रखें; सूखी गड़ी को अच्छे चाकू से ध्यानपूर्वक बीच से काटें, और यह कार्य घर का पुरुष करे तो अत्युत्तम है।

03

नारियल के दीपक के लिए कलावा (मौली) से 108 बाती वाली बाती बनाना

तीन सूत्र वाला कलावा अठारह बार लपेटकर दोहरा करने पर छत्तीस, गूँथने पर एक बाती जो 108 बाती के बराबर, और बीच से काटने पर दो दीपकों के लिए।

· Reviewed Sep 2026 · 01:29–02:51

वक्ता दिखाते हैं कि तीन सूत्र वाले कलावा (कलावा, मौली) के सूती धागे को 18 बार लपेटकर फिर बीच से मोड़ देने पर 36 धागे हो जाते हैं, जिन्हें आपस में गूँथ देने पर एक ऐसी बाती बनती है जो 108 बाती के बराबर होती है; फिर उसे बीच से काट देने पर दो दीपकों के लिए बाती मिल जाती है।

04

दीपावली के दीप दान में नारियल की खोल को दीपक बनाने का कारण

दीपावली के दीप दान में दीपक के रूप में नारियल की खोल का प्रयोग क्यों किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:52–03:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दीपक के रूप में नारियल की खोल का प्रयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यह दीपावली है: सूखा मेवा जब द्रव्य के साथ जलता है तो वातावरण में विशेष प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है, जिससे श्री तत्व (श्री तत्व) की वृद्धि होती है, घर के देवी-देवता संतुष्ट होते हैं, और अनेक प्रकार के अभिचार तंत्र तथा नकारात्मक शक्तियाँ रुकती हैं; तिल तेल या शुद्ध घी, दोनों में से कोई भी प्रयोग किया जा सकता है।

05

दीप दान आरंभ करने से पूर्व संकल्प लेना

हाथ में पुष्प और जल लेकर संकल्प लिया जाता है — संस्कृत आती हो तो संस्कृत में, अन्यथा हिंदी में — अपने कुल के देवी-देवताओं की प्रसन्नता हेतु।

· Reviewed Sep 2026 · 03:33–03:48

वक्ता कहते हैं कि दीपक तैयार हो जाने के बाद हाथ में पुष्प और जल लेकर संकल्प लेना चाहिए — संस्कृत आती हो तो संस्कृत में, अन्यथा हिंदी में — कि अपने कुलदेवी और कुल के देवताओं सहित सभी की प्रसन्नता हेतु यह दीप दान किया जा रहा है।

06

दीपावली दीप दान के पाँच दीपक किन-किन के नाम से

पाँच दीपक इस क्रम में: लक्ष्मी-गणेश, लक्ष्मी-नारायण, कुल की देवी और कुल के भैरव, निकटतम शक्तिपीठ, और शिव परिवार।

· Reviewed Sep 2026 · 03:49–04:30

वक्ता कहते हैं कि पाँच दीपक इस क्रम में समर्पित किए जाते हैं: पहला लक्ष्मी-गणेश के नाम से, दूसरा लक्ष्मी-नारायण के नाम से, तीसरा अपनी कुलदेवी और कुल के भैरव के नाम से, चौथा घर के सबसे निकट के शक्ति पीठ के नाम से, और अंतिम शिव परिवार के नाम से — और इसी क्रम में प्रत्येक दीपक के नाम से पुष्प तथा फिर धूप (धूप) अर्पित की जाती है।

07

पाँचों दीपकों को क्रम से प्रज्वलित करना

पाँचों दीपक कर्म साक्षी दीपक से ही उसी नियत क्रम में प्रज्वलित किए जाते हैं, देवता का नाम, दीप प्रज्वलन मंत्र या तंत्रोक्त देवी सूक्तम का पाठ करते हुए।

· Reviewed Sep 2026 · 04:31–05:17

वक्ता कहते हैं कि पाँचों दीपक कर्म साक्षी दीपक से ही एक-एक करके उसी नियत क्रम में (लक्ष्मी-गणेश, लक्ष्मी-नारायण, कुल की देवी और कुल के भैरव, निकटतम शक्तिपीठ, शिव परिवार) प्रज्वलित किए जाते हैं, और साथ में उस देवी-देवता का नाम, दीप प्रज्वलन का मंत्र, या तांत्रोक्त देवीसूक्तम् का पाठ करते हुए उनका ध्यान-स्मरण किया जाता है।

08

प्रत्येक प्रज्वलित दीप को पुष्पांजलि और आचमनी से जल अर्पित करना

प्रत्येक प्रज्वलित दीप के पीछे थोड़ी पुष्पांजलि दी जाती है और आचमनी से तीन बार जल, उस देवता का नाम लेते हुए।

· Reviewed Sep 2026 · 05:18–05:46

वक्ता कहते हैं कि दीप प्रज्वलित करने के बाद प्रत्येक दीप के पीछे जरा सी पुष्पांजलि अर्पित की जाती है और आचमन (आचमनी) से तीन बार जल दिया जाता है, प्रत्येक देवता का नाम-मंत्र लेते हुए — "कुल देवी नमः कुल देवताय नमः पुष्पांजलि समर्पयामि तदुपरांत आचमन्यम जलम समर्पयामि" — अथवा सामान्य हिंदी में वही भाव बोलते हुए।

09

कुल देवी और कुल की शक्तियों हेतु दीपावली दीप दान का फल

इससे कुल की शक्तियाँ पुष्ट और संतुष्ट होती हैं, और घर-परिवार की अनेक प्रकार के अरिष्टों से रक्षा होती है।

· Reviewed Sep 2026 · 05:47–06:05

वक्ता कहते हैं कि दीपावली के अति विशिष्ट शुभ काल में प्रमुख देवी-देवताओं के साथ अपनी कुलदेवी के लिए इस प्रकार दीपदान करने से अनेक प्रकार के अरिष्टों और अनिष्टों से रक्षा होती है, तथा कुल की शक्तियाँ पुष्ट और संतुष्ट होकर हर प्रकार से कल्याण करती हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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