दीपावली पर कुल देवी और महाशक्तियों हेतु तंत्रोक्त दीप दान विधि

कुल देवी और प्रमुख महाशक्तियों हेतु दीपावली की तंत्रोक्त दीप दान विधि।

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The notes
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01

दीपावली की रात कुल देवी और प्रमुख महाशक्तियों का दीप दान: कब करें और क्या फल मिलता है

हर वर्ष नारियल में 108 बाती का दीप दान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–00:41

वक्ता कहते हैं कि कार्तिक के शुभ महीने में, विशेष रूप से दीपावली के महानिशा काल में या फिर शाम के (प्रदोष) समय में, प्रमुख देवी-देवताओं का अपनी कुलदेवी, कुल देवताओं और कुल शक्ति के साथ नारियल के दीपक में 108 बाती के साथ दीपदान करना चाहिए। वे कहते हैं कि इससे अनेक पुण्य मिलते हैं, बहुत से अनिष्टों का नाश होता है, अकाल मृत्यु से रक्षा होती है और घर-परिवार के अनेक कष्टों तथा दुख-दारिद्र्य से छुटकारा मिलता है। वे कहते हैं कि इससे कुल की शक्तियाँ पुष्ट और संतुष्ट होती हैं और हर प्रकार से कल्याण करती हैं, और वे कहते हैं कि यह विधि हर वर्ष दीपावली की शाम या रात में अवश्य करें।

02

दीपावली दीप दान के लिए कर्म साक्षी दीप और नारियल के दीपक की तैयारी

पहले साक्षी दीप, फिर पाँच पत्ते और आधा कटा नारियल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:42–01:28

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले एक दीप कर्म साक्षी दीप के रूप में प्रज्वलित करना है, जो पुष्प के ऊपर रखा जाता है। फिर पाँच पत्ते पुष्पों से सजाकर रखे जाते हैं और उन्हीं पर नारियल का दीपक रखा जाता है। दीपक के लिए सूखी गरी को अच्छे चाकू से सावधानी से बीच से काटा जाता है ताकि हाथ न कटे; वे कहते हैं कि यह काम घर का पुरुष करे तो अत्युत्तम है, क्योंकि पुरुष द्वारा काटा नारियल ज़्यादा बढ़िया माना जाता है।

03

नारियल के दीप दान दीपक के लिए कलावे से 108 बाती वाली बाती बनाना

अठारह लपेट, दोहरा करके गूँथना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:29–01:58

वक्ता कहते हैं कि बाती कलावा (मौली) से बनती है, जिसमें तीन सूत्र होते हैं, इसलिए 36 धागे लेने पर 108 बाती पूरी हो जाती है। वे धागे को थोड़ा लंबा रखते हुए 18 बार लपेटते हैं, बंडल को बीच से मोड़कर 36 कर देते हैं, और पूरे को आपस में गूँथकर एक लंबी बाती बनाते हैं जो 108 बाती के बराबर होती है। उस गुँथी बाती को बीच से काटकर किनारे बराबर कर लेने पर 108 बाती की दो बातियाँ बनती हैं, यानी दो दीपकों के लिए; हर बाती अपने नारियल के दीपक में रख दी जाती है और ऐसे पाँच दीपक तैयार किए जाते हैं।

04

सावधानी: दीप दान की बाती का धागा सूती ही हो, रेशमी कभी नहीं

कौन-सा मौली बंडल खरीदें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:59–02:13

वक्ता कहते हैं कि बाती के लिए जो कलावा (मौली) धागा लाएँ वह हमेशा सूती वाला ही हो, और रेशम का धागा कभी न लाएँ। वे कहते हैं कि अच्छी क्वालिटी की सूती मौली का बड़ा बंडल लाएँ, क्योंकि दीपावली दीप दान की पाँच बातियाँ बनाने में अच्छा-खासा धागा लग जाता है।

05

दीपावली दीप दान में दीपक के रूप में नारियल की खोल क्यों, और उसमें कौन-सा तेल जलाएँ

सूखा मेवा द्रव्य के साथ जलकर सकारात्मक ऊर्जा देता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:52–03:32

वक्ता कहते हैं कि नारियल की खोल का दीपक इसलिए है क्योंकि यह दीपावली है, और सूखा मेवा जब किसी द्रव्य के साथ जलता है तो वातावरण में विशेष प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करता है। वे कहते हैं कि दीपक के रूप में नारियल की खोल का ही प्रयोग करने से श्री तत्व की वृद्धि होती है, घर के देवी-देवता पुष्ट और संतुष्ट होते हैं, और यह अनेक प्रकार के अभिचार तंत्र और नकारात्मक शक्तियों को रोकने में सक्षम होता है। उन्होंने दीपकों में तिल का तेल प्रयोग किया है और कहते हैं कि शुद्ध घी भी प्रयोग किया जा सकता है।

06

कुल देवी और कुल देवताओं के दीपावली दीप दान का संकल्प

संस्कृत या हिंदी में, हाथ में पुष्प और जल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:33–03:48

वक्ता कहते हैं कि दीपक तैयार कर लेने के बाद अगला चरण संकल्प है। हाथ में पुष्प और जल लिया जाता है और जो भी विधि आती हो उसी में संकल्प बोला जाता है — संस्कृत आती हो तो संस्कृत में, हिंदी आती हो तो हिंदी में — कि हम अपने कुल के देवी-देवताओं सहित सभी की प्रसन्नता हेतु इस दीपदान का संकल्प ले रहे हैं।

07

दीपावली दीप दान के पाँच दीपक किनके नाम से, और पुष्प तथा धूप अर्पण का क्रम

लक्ष्मी-गणेश से शिव परिवार तक, हर एक को अलग पुष्प और धूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:49–04:30

वक्ता कहते हैं कि जिस देवी-देवता के नाम से दीपक जलाना है, उसके नाम का पुष्प उस दीपक के पास अर्पित करते हैं: पहला दीपक लक्ष्मी-गणेश के नाम से, दूसरा लक्ष्मी-नारायण के नाम से, तीसरा कुलदेवी और कुल भैरव के नाम से, चौथा घर के सबसे पास जो भी शक्ति पीठ हो उसके नाम से, और अंतिम शिव परिवार के नाम से। वे कहते हैं कि फिर पाँचों के नाम से उसी क्रम में अलग-अलग धूप दिखाई जाती है।

08

दीपावली दीप दान के पाँचों दीपक कर्म साक्षी दीप से प्रज्वलित करना

नियत क्रम में, नाम, मंत्र या सूक्तम बोलते हुए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:31–05:17

वक्ता कहते हैं कि सभी दीप कर्म साक्षी दीपक से ही प्रज्वलित किए जाते हैं। हर दीपक जलाते समय, वे कहते हैं, उस देवता का नाम लेते रह सकते हैं, या दीप प्रज्वलन का मंत्र पढ़ सकते हैं, या सूक्तम — तांत्रोक्त देवीसूक्तम् — का पाठ कर सकते हैं, या उस देवी-देवता का कोई शुभ सूक्त या स्तुति गा सकते हैं, और जिसका दीप जला रहे हों उसका ध्यान-स्मरण करते हुए ही जलाएँ। पाँचों दीपक एक-एक करके उसी नियत क्रम में जलाए जाते हैं: लक्ष्मी-गणेश, लक्ष्मी-नारायण, कुल के देवी-देवता और कुल के भैरव, नज़दीक का शक्ति पीठ, और शिव परिवार।

09

प्रत्येक प्रज्वलित दीपावली दीप दान दीपक को पुष्पांजलि और तीन बार जल अर्पण

समापन अर्पण, मंत्र से या सामान्य हिंदी में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:18–05:46

वक्ता कहते हैं कि सभी दीप जल जाने के बाद हर दीप के पीछे पुष्पांजलि दी जाती है — ज़रा-सा पुष्प चढ़ाया जाता है — और आचमनी से तीन बार जल दिया जाता है। यह हर दीपक के साथ करना है, सभी का नाम-मंत्र लेते हुए, जैसे "कुल देवी नमः, कुल देवताय नमः, पुष्पांजलि समर्पयामि, तदुपरांत आचमनीयं जलं समर्पयामि"; या, वे कहते हैं, सामान्य हिंदी में बोलते हुए भी सभी को पुष्प और तीन बार आचमनी से जल दे सकते हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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