नींबू की सात्त्विक बलि कैसे दें: पूरी विधि
घर पर नींबू बलि की चरणबद्ध विधि
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बलि के लिए नींबू कैसे पकड़ा और काटा जाता है
डंठल वाला भाग नीचे, एक ही खड़ा प्रहार
वक्ता कहते हैं कि निंबू बलि में सबसे जरूरी बात यह है कि नींबू को पकड़ा कैसे जाता है। जो भाग पेड़ पर डंठल से जुड़ा रहता है उसे नीचे की ओर रखा जाता है, और नींबू को खड़ा रखकर ऊपर से एक ही साफ प्रहार में काटा जाता है। इसे सलाद की तरह आड़ा काटकर दो टुकड़े कभी नहीं किए जाते; वे इसे बलि देने का गलत तरीका बताते हैं। शस्त्र इतना धारदार होना चाहिए कि नींबू एक ही बार में कट जाए।
घर पर पूजा के बाद नींबू की सात्त्विक बलि कैसे दी जाती है, यह समझाते हुए वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि नींबू को पकड़ा कैसे जाता है। नींबू का जो भाग पेड़ पर डंठल से जुड़ा रहता है, उसे कभी ऊपर की ओर नहीं रखा जाता। बलि देते समय वह भाग नीचे की ओर रहता है और कटाव दूसरी ओर से, यानी ऊपर वाले भाग से किया जाता है। वे कहते हैं कि बलि का नींबू उस तरह कभी नहीं काटा जाता जैसे सलाद के लिए नींबू काटा जाता है। कुछ लोग इसे बगल से आड़ा काटकर दो टुकड़े कर देते हैं; इसे वे बलि देने का गलत तरीका बताते हैं और कहते हैं कि ऐसा नहीं करना है। बलि के लिए नींबू सदैव खड़ा रखकर, नीचे से पकड़कर, सीधा काटा जाता है। वे यह भी कहते हैं कि कटाव एक ही तेज झटके में हो, पूरा प्रयास हो कि वह एक ही बार में सफाई से कट जाए। इसका अर्थ है कि जिस शस्त्र से बलि दी जा रही है वह भी धारदार होना चाहिए।
देवी को सात्त्विक नींबू बलि हेतु मंडल
सीधा त्रिकोण, फिर पुष्प से आवाहन
घर पर भगवती के किसी भी स्वरूप को सात्त्विक नींबू बलि देने के लिए वक्ता कहते हैं कि पहले चौक (मंडल) बनाया जाता है: रोली और अष्टगंध मिलाकर एक सीधा त्रिकोण। बलि इसी मंडल के भीतर दी जाती है। इसे बनाते समय इष्ट मंत्र, या जिस देवता के लिए बलि है उनके मंत्र का जप किया जा सकता है। मंडल बन जाने के बाद उसमें पुष्प आदि से पूजन होता है, एक पुष्प लेकर देवी का आवाहन किया जाता है और उनसे विराजमान होकर बलि स्वीकार करने की प्रार्थना की जाती है, और तभी नींबू उसमें रखकर सीधा काटा जाता है।
वक्ता कहते हैं कि जब घर पर भगवती के किसी भी स्वरूप को सात्त्विक रूप में नींबू की बलि दी जाती है, तो सबसे पहले चौक, यानी मंडल, बनाया जाता है। रोलीबलि में अर्पित नींबू जैसी अनुष्ठान सामग्री पर लगाया जाने वाला लाल रोली चूर्ण, जिसके पश्चात जल से परिक्रमा कर अर्पण किया जाता है। और अष्टगंधआठ सुगंधित द्रव्यों से बना लेप, उपाय व पूजा विधियों में सिंदूर से पूर्व तिलक के रूप में लगाया जाता है। को मिलाकर उनसे एक त्रिकोण बनाया जाता है, जिसकी नोक ऊपर की ओर रहती है। बलि फिर उसी मंडल के भीतर दी जाती है। त्रिकोण बनाते समय अपने इष्ट मंत्र का, या जिस देवता को बलि दी जा रही है उनसे संबंधित मंत्र का जप किया जा सकता है। मंडल बन जाने के बाद उसमें पुष्प आदि से पूजन किया जाता है और देवता का, भगवती का, मंडल में आवाहन किया जाता है। वे काली का अपना उदाहरण देते हैं: थाली में मंडल बनाने के बाद वे एक फूल लेकर भगवती से कहते हैं, "हे जगदंबा, आप यहाँ विराजमान हों और मेरे द्वारा सात्त्विक रूप से अर्पित की जा रही इस बलि को स्वीकार करें।" यह कहकर वे फूल मंडल में रख देते हैं, उस पर नींबू रखते हैं और उसे सीधा काट देते हैं। यह, वे कहते हैं, एक तरीका हुआ।
भैरव को नींबू बलि हेतु मंडल: त्रिकोण उल्टा होता है
नीचे की ओर नोक वाला त्रिकोण, सिंदूर से भी
जब नींबू की बलि भैरव के लिए हो, तो वक्ता कहते हैं कि मंडल का त्रिकोण देवी की तरह सीधा नहीं बल्कि उल्टा, नीचे की ओर नोक वाला बनाया जाता है। भैरव के लिए इसे सिंदूर से भी बनाया जा सकता है। फिर नींबू उल्टे त्रिकोण में रखकर उसी प्रकार बलि दी जाती है।
वक्ता इसे दूसरा तरीका कहते हैं। यदि नींबू की बलि भैरव को दी जा रही है, तो देवी के लिए मंडल में जो त्रिकोण बनता है वही पलट जाता है: वह उल्टा हो जाता है, नोक नीचे की ओर। भैरव के लिए त्रिकोण ऐसा ही होना चाहिए, वे कहते हैं। वे यह भी कहते हैं कि भैरव के लिए मंडल बनाते समय इसे सिंदूरसिंदूर चूर्ण, यहाँ भैरव को अर्पण हेतु उल्टे त्रिकोण मंडल को बनाने में प्रयुक्त, देवी हेतु बनाए जाने वाले रोली-अष्टगंध त्रिकोण के स्थान पर। से भी बनाया जा सकता है। तो उल्टा त्रिकोण बनेगा, उसमें पहले की ही तरह नींबू रखा जाएगा और बलि दे दी जाएगी।
कटा बलि का नींबू कब निचोड़ा जाता है और कब वैसे ही छोड़ा जाता है
निचोड़ना प्रयोजन पर निर्भर
वक्ता कहते हैं कि काटने के बाद नींबू निचोड़ा जाए या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि बलि किसलिए दी जा रही है। यदि सामान्य मंत्र जप के बाद केवल भगवती की प्रसन्नता के लिए दी जा रही है, तो नींबू काटकर वैसे ही छोड़ दिया जाता है। तीन स्थितियों में काटकर निचोड़ा जाता है: जब बलि किसी मनोकामना के लिए हो, जैसे कोई शत्रु बाधा या पीड़ा पहुँचा रहा हो; जब वह किसी रोग, जैसे बुखार, से छुटकारे के लिए हो; और जब नींबू की बलि घर की दहलीज या मुख्य द्वार पर दी जा रही हो।
इसके बाद वक्ता यह प्रश्न उठाते हैं कि नींबू काटने के बाद उसे कब निचोड़ा जाता है और कब वैसे ही छोड़ दिया जाता है। वे कहते हैं कि जब सामान्य रूप से मंत्र जप आदि के बाद नींबू केवल भगवती की प्रसन्नता के लिए चढ़ाया जा रहा हो, तो उसे सिर्फ काटकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन यदि बलि किसी मनोकामना के लिए दी जा रही हो, जैसे कोई शत्रु आपको बाधा या पीड़ा पहुँचा रहा हो और उस समय नींबू की बलि दी जा रही हो, तो उसे काटकर निचोड़ा जाता है। इसी प्रकार यदि कोई रोग हो, बुखार आदि लगा हो, और उससे छुटकारे के लिए बलि दी जा रही हो, तो नींबू काटने के बाद निचोड़ दिया जाता है। और यदि नींबू की बलि दहलीज पर, घर के दरवाजे पर, मुख्य द्वार पर दी जा रही हो, तब भी उसे काटकर निचोड़ा जाता है।
शस्त्र का पूजन और नींबू बलि के अंतिम चरण
शस्त्र पूजन से जल के तीन घेरे तक
वक्ता कहते हैं कि काटने से पहले शस्त्र पर रोली और कुंकुम लगाकर उसका पूजन किया जाता है। फिर इष्ट मंत्र, यानी बलि देने के लिए निर्धारित मंत्र, का जप करते हुए नींबू काटा जाता है। काटने के बाद दोनों कटे हिस्सों पर रोली लगाई जाती है, नींबू के चारों ओर जल से तीन बार घेरा लगाया जाता है और उसे वहीं छोड़ दिया जाता है। इसी से बलि पूर्ण होती है। वे कहते हैं कि किसी भी साधना में अपने देवता को सात्त्विक बलि देते समय इसी मंडल और इसी विधि का प्रयोग करना है।
कटाव पर आते हुए वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले शस्त्र का पूजन किया जाता है: शस्त्र पर रोलीबलि में अर्पित नींबू जैसी अनुष्ठान सामग्री पर लगाया जाने वाला लाल रोली चूर्ण, जिसके पश्चात जल से परिक्रमा कर अर्पण किया जाता है।, कुंकुमदेवी को अर्पित किया जाने वाला तथा तिलक हेतु प्रयुक्त सिंदूरी चूर्ण। आदि लगाकर उसका पूजन होता है। फिर इष्ट मंत्र का जप करते हुए नींबू काटा जाता है। वे कहते हैं कि बलि देते समय किस मंत्र का उच्चारण किया जाता है, यह वे वीडियो के विवरण में लिख देंगे; बातचीत में वे मंत्र नहीं बताते। नींबू कट जाने पर उसके दोनों कटे हिस्सों पर रोली लगाई जाती है। फिर जल से नींबू के चारों ओर तीन बार गोल घेरा लगाकर उसे छोड़ दिया जाता है। यही, वे कहते हैं, नींबू की बलि देने की पूरी विधि है। अंत में वे कहते हैं कि आप जो भी साधना करते हैं, उसमें जब भी अपने देवता को सात्त्विक रूप से बलि दें, तो इसी प्रकार मंडल बनाकर उसके बाद बलि निवेदित करें।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।