नींबू की सात्त्विक बलि कैसे दें: पूरी विधि
घर पर नींबू की सात्त्विक बलि (नींबू बलि) देने की चरणबद्ध विधि — नींबू को पकड़ने और काटने का सही तरीका (खड़ा रखकर लंबवत, सलाद की तरह आड़ा कभी नहीं), देवी के लिए त्रिकोण मंडल और भगवान भैरव के लिए उल्टा त्रिकोण कैसे बनाया जाता है, बलि के प्रयोजन के अनुसार कटे नींबू को कब निचोड़ना है और कब वैसे ही छोड़ देना है, तथा काटने वाले शस्त्र का पूजन और अनुष्ठान का समापन कैसे किया जाता है।
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नींबू को पकड़ना और काटना
सात्त्विक बलि के लिए नींबू को कैसे पकड़ें और कैसे काटें?
नींबू का जो भाग डंठल से जुड़ा होता है उसे नीचे की ओर रखा जाता है, और उसे ऊपर से एक ही तेज प्रहार में खड़ा रखकर लंबवत काटा जाता है — सलाद की तरह आड़ा कभी नहीं काटा जाता, वह विधि गलत है।
नींबू का जो भाग पेड़ पर डंठल से जुड़ा रहता है, बलि के समय उसे नीचे की ओर रखा जाता है और नींबू को ऊपर के भाग से काटा जाता है। बलि का नींबू सलाद काटने की तरह आड़ा कभी नहीं काटा जाता — बलि देने की वह विधि गलत है। बलि के लिए नींबू सदैव खड़ा रखकर, नीचे से पकड़कर, लंबवत काटा जाता है। पूरा प्रयास करें कि वह एक ही तेज प्रहार में सफाई से कट जाए — इसका अर्थ यह भी है कि जिस शस्त्र से आप बलि दे रहे हैं वह भी तेज धार का होना चाहिए।
देवी हेतु मंडल की रचना
देवी को दी जाने वाली नींबू की बलि के लिए मंडल कैसे बनाया जाता है?
रोली और अष्टगंध मिलाकर सीधा त्रिकोण बनाएँ — बलि इसी मंडल के भीतर दी जाती है, और उसे बनाते समय अपने इष्ट मंत्र या उस देवता के मंत्र का जप किया जा सकता है; पुष्प से देवी का आवाहन करने के बाद नींबू रखकर सीधा नीचे की ओर काटा जाता है।
सबसे पहले चौक (मंडल) बनाने की विधि देखें। यदि आप घर पर भगवती के किसी भी स्वरूप को सात्त्विक रूप में नींबू की बलि दे रहे हैं, तो पहले यह रचना तैयार करें: रोलीबलि में अर्पित नींबू जैसी अनुष्ठान सामग्री पर लगाया जाने वाला लाल रोली चूर्ण, जिसके पश्चात जल से परिक्रमा कर अर्पण किया जाता है। और अष्टगंधआठ सुगंधित द्रव्यों से बना लेप, उपाय व पूजा विधियों में सिंदूर से पूर्व तिलक के रूप में लगाया जाता है। मिलाकर एक त्रिकोण बनाएँ। त्रिकोण बनाते समय आप अपने इष्ट मंत्र का, अथवा जिस देवता को बलि दे रहे हैं उनसे संबंधित मंत्र का जप कर सकते हैं। मंडल तैयार करने के बाद उसी के भीतर पुष्प आदि से पूजन करें और देवता का मंडल में आवाहन करें। जैसे, यदि माँ काली को बलि दे रहे हैं, तो थाली पर यह मंडल बनाकर एक पुष्प लें और कहें: 'हे जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम।! आप यहाँ विराजिए और मेरे द्वारा दी जा रही यह सात्त्विक बलि स्वीकार कीजिए।' यह कहकर पुष्प रखें, नींबू को यथास्थान रखें और सीधा नीचे की ओर काट दें।
भैरव हेतु मंडल में अंतर
भगवान भैरव को नींबू की बलि देते समय मंडल में क्या अंतर होता है?
भगवान भैरव के लिए मंडल का त्रिकोण उल्टा (नीचे की ओर मुख वाला) बनाया जाता है, और उसे रोली-अष्टगंध के स्थान पर सिंदूर से भी बनाया जा सकता है — फिर नींबू उसी प्रकार रखकर काटा जाता है।
यदि आप भगवान भैरव को बलि दे रहे हैं, तो मंडल का त्रिकोण उल्टा (नीचे की ओर मुख वाला) होगा। भगवान भैरव के लिए आप इसे सिंदूरसिंदूर चूर्ण, यहाँ भैरव को अर्पण हेतु उल्टे त्रिकोण मंडल को बनाने में प्रयुक्त, देवी हेतु बनाए जाने वाले रोली-अष्टगंध त्रिकोण के स्थान पर। से भी बना सकते हैं। उल्टा त्रिकोण बनाया जाएगा, और उसी प्रकार आप नींबू रखकर बलि देंगे।
कटा नींबू निचोड़ें या नहीं
बलि के बाद कटे हुए नींबू को निचोड़ना चाहिए या वैसे ही छोड़ देना चाहिए?
सामान्य मंत्र जप के बाद केवल देवी की प्रसन्नता और कृपा के लिए बलि दे रहे हों तो उसे वैसे ही छोड़ दें; किसी विशेष कामना के लिए (जैसे बाधा डालने वाला शत्रु), रोग या ज्वर से मुक्ति के लिए, अथवा देहली या मुख्य द्वार पर बलि देते समय नींबू काटकर निचोड़ दें।
नींबू काटने के बाद उसे निचोड़ना है या वैसे ही छोड़ देना है, यह प्रयोजन पर निर्भर करता है: सामान्य मंत्र जप के बाद केवल देवी की प्रसन्नता और कृपा के लिए नींबू अर्पित कर रहे हों तो उसे केवल काटकर वैसे ही छोड़ दें। यदि किसी विशेष कामना से बलि दे रहे हैं — जैसे कोई शत्रु बाधा या कष्ट उत्पन्न कर रहा हो — तो नींबू काटकर निचोड़ दें। यदि रोग, ज्वर या व्याधि से मुक्ति के लिए बलि दे रहे हैं, तो नींबू काटकर निचोड़ दें। यदि घर की देहली या मुख्य द्वार पर नींबू की बलि दे रहे हैं, तो उसे काटकर निचोड़ दें।
पूर्व में शस्त्र की तैयारी
बलि देने से पहले काटने वाले शस्त्र को कैसे तैयार करना चाहिए?
पहले शस्त्र पर रोली और कुमकुम लगाकर उसका पूजन करें, फिर बलि के लिए निर्धारित मंत्र का जप करते हुए नींबू को लंबवत काटें।
बलि देने के लिए सबसे पहले शस्त्र पर रोलीबलि में अर्पित नींबू जैसी अनुष्ठान सामग्री पर लगाया जाने वाला लाल रोली चूर्ण, जिसके पश्चात जल से परिक्रमा कर अर्पण किया जाता है।, कुमकुम आदि लगाकर उसका पूजन करें। इसके बाद बलि देने के लिए निर्धारित मंत्र का जप करते हुए नींबू को लंबवत काटें।
काटने के बाद नींबू का क्या
नींबू कट जाने के बाद उसका क्या किया जाता है?
कटे हुए दोनों भागों पर रोली लगाएँ, फिर अर्पित नींबू के चारों ओर तीन बार जल घुमाकर उसे छोड़ दें — इसी के साथ सात्त्विक बलि की विधि पूर्ण होती है।
नींबू काटने के बाद उसके दोनों कटे भागों पर रोलीबलि में अर्पित नींबू जैसी अनुष्ठान सामग्री पर लगाया जाने वाला लाल रोली चूर्ण, जिसके पश्चात जल से परिक्रमा कर अर्पण किया जाता है। लगाएँ। फिर अर्पित नींबू के चारों ओर तीन बार जल घुमाकर उसे छोड़ दें। नींबू की बलि देने की यही विधि है — अपनी साधना के समय जब भी आप अपने इष्ट देव को सात्त्विक बलि अर्पित करें, इसी प्रकार मंडल बनाकर बलि प्रस्तुत करें।
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