नवदुर्गा, नवग्रह और नवग्रह माताओं का नौ दिन का नवरात्रि जप विधान

नवरात्रि में दुर्गाओं और ग्रहों का संयुक्त जप विधान।

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नवरात्रि में नवदुर्गा, नवग्रह और ग्रह-माताओं का संयुक्त जप: उद्देश्य और किसके लिए

जिन्हें अपनी कुंडली न पता हो, उनके लिए नौ दिन का उपाय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:09–01:45

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में यदि नौ ग्रहों, नौ ग्रहों की माताओं और नौ दुर्गाओं की पूजा एक साथ की जाए तो जन्म कुंडली में उपस्थित बहुत सारे ग्रह दोष और योग, जिनसे जीवन प्रभावित होता है, शांत हो जाते हैं। संसार का छोटे से छोटा कण भी नवग्रह की उपस्थिति का कारक माना जाता है, इसलिए ग्रहों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए; इष्ट देवता की सेवा-पूजा के साथ समय-समय पर उनकी पूजा भी करनी चाहिए। नौ ग्रहों की अलग-अलग पूजा लंबी और क्लिष्ट होती है, हर एक का अपना वस्त्र और विधान, इसलिए वे केवल नवरात्रि के लिए नौ दिन का एक सरल विधान देते हैं जो कोई भी साधक-साधिका कर सकता है, विशेषकर वे जिन्हें अपनी जन्म कुंडली का ज्ञान नहीं: इसे करने मात्र से नौ दिन में जो भी सूक्ष्म ग्रह दोष है वह शांत होता है और ग्रहों की कृपा मिलती है। वे कहते हैं, पूर्ण रूप से करने पर जगदम्बा बड़े से बड़ा कष्ट दूर करती हैं, और जो कष्ट-विपत्ति दूर नहीं हो रहे थे वे इस सम्यक, सामूहिक पूजन से दूर होते हैं।

03

नवरात्रि नवग्रह जप का आरंभ: प्रतिपदा, कलश वैकल्पिक, सुबह सर्वोत्तम, गुरु-गणपति पूजन और भगवती पाठ के बाद

नौकरी के अनुसार समय, पर जप पाठ के बाद

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:20–03:23

वक्ता कहते हैं कि जप और पूजन नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना, अखंड ज्योति आदि के बाद आरंभ होता है; लेकिन जो अखंड दीप या कलश स्थापना नहीं करते, सिर्फ पूजा-पाठ करते हैं, वे भी यह साधना अवश्य कर सकते हैं। व्यवसाय या नौकरी के अनुसार सुबह या शाम कर सकते हैं, पर सुबह अति उत्तम है। हर दिन का क्रम: पहले (प्रतिपदा को) कलश स्थापना और आरंभिक पूजन, फिर गुरु-गणेश पूजन, फिर भगवती का जो पाठ करते हैं वह, और उसके बाद ही यह जप। वे कहते हैं सभी मंत्र (नौ ग्रहों, उनकी माताओं और भगवती के) स्क्रीन पर एक पेज में हैं और डिस्क्रिप्शन या पीडीएफ में लिखने के लिए दिए जाएँगे।

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नवरात्रि नवग्रह जप में नौ दिन एक ही वस्त्र, रंग कोई भी हो

दिन के रंग का वस्त्र उपयोगी पर बहुत महँगा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:24–03:43

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि में चाहे लाल, पीला या श्वेत वस्त्र पहनें, प्रत्येक दिन रंग के अनुसार वस्त्र बदलना आवश्यक नहीं है। ऐसा करना उपयोगी तो है, लेकिन बहुत महँगा पड़ेगा, इसलिए जो एक वस्त्र पहनते हैं वही हर दिन पहनें; रंग से कोई दिक्कत नहीं है।

05

नवग्रह और नवदुर्गा जप के लिए माला और यज्ञोपवीत के नियम

केवल रुद्राक्ष, रत्न की माला कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:44–04:16

वक्ता कहते हैं कि जो यज्ञोपवीत धारण करते हैं वे प्रतिपदा के दिन उसे पहन लें; जो नहीं करते, कोई बात नहीं। हर साधक-साधिका को कम से कम एक रुद्राक्ष माला अवश्य धारण करनी चाहिए। जप के लिए पंचमुखी या नवमुखी रुद्राक्ष की माला अति श्रेष्ठ है, विशेषकर नवमुखी, क्योंकि उससे नौ ग्रह और नौ दुर्गा के मंत्र आसानी से जपे जा सकेंगे। इस जप में किसी भी रत्न की माला का प्रयोग नहीं करना है; सिर्फ और सिर्फ नवमुखी या पंचमुखी रुद्राक्ष की माला।

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नवरात्रि नवग्रह विधान का दैनिक जप क्रम: उस दिन की दुर्गा, ग्रह की नौ माला, उसकी माता की एक

ग्रह मंत्र दुर्गा और माता के बीच संपुटित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:17–06:21

वक्ता दैनिक क्रम बताते हैं: आरंभिक पूजन के बाद गुरु मंत्र की एक माला और गणेश मंत्र की एक (यदि अन्य मंत्र भी जपते हों), फिर उस दिन की दुर्गा की एक माला, फिर उस दिन के ग्रह की नौ माला, फिर ग्रह की माता की एक माला; इस प्रकार ग्रह मंत्र माँ दुर्गा और माता के द्वारा संपुट हो जाता है, जिससे वे कहते हैं वह तीव्र प्रभाव देता है। फिर समस्त जप भगवती जगदम्बा दुर्गा के बाएँ हाथ में समर्पित कर देते हैं। पहला दिन (प्रतिपदा): शैलपुत्री एक माला, सूर्य नारायण नौ, माता अदिति एक। दूसरा दिन: brahmacharini, चंद्र ग्रह, उनकी माता अनसूया। तीसरा दिन: चंद्रघंटा, मंगल ग्रह, माता भूमि (पृथ्वी माता)। हर दिन इसी क्रम में चलता है, जप उसी प्रकार समर्पित होता है।

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नवरात्रि नवग्रह विधान की पूर्णता: हवन आहुति संख्या, नवमी को कन्या पूजन, दशमी को पारण

गुरु-गणपति को पाँच-पाँच, बाकी हर मंत्र से नौ-नौ आहुति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:22–07:15

वक्ता कहते हैं कि नौ दिन का जप पूर्ण होने पर अंतिम दिन, नवमी तिथि को हवन किया जाता है; आरंभिक हवन की विधि उनके चैनल पर बताई गई है। गुरु और गणेश को पाँच-पाँच आहुति; जपे गए नौ दुर्गाओं के अलग-अलग मंत्रों से नौ-नौ आहुति; नौ ग्रहों के प्रत्येक मंत्र से नौ-नौ; और नौ ग्रहों की माताओं के नाम से भी नौ-नौ आहुति। नवमी को कन्या पूजन इत्यादि भी करते हैं, और फिर दशमी तिथि को पारण।

08

नवरात्रि नवग्रह जप के साथ सदाशिव, भैरव और हनुमान की पूजा अनिवार्य

हर दिन एक दीपक या एक पाठ, सुबह या शाम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:16–07:38

वक्ता कहते हैं कि इन सभी पूजन में भगवान सदाशिव और भैरव-हनुमान जी की पूजा अनिवार्य है। चाहे उनके नाम से एक दीपक जलाएँ, या हनुमान चालीसा, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, रुद्राष्टकम् या भैरव जी के नामों का पाठ करें, पर यह अवश्य करना है। सुबह न कर सकें तो शाम को कर लें; इन देवताओं को छोड़ना नहीं है।

09

विधान देने वाले के प्रति ऋण दोष न रहे, इसके लिए तुलसी के पास प्रतिदिन घी का दीपक

सिर्फ इतना, और प्रभाव अकाट्य

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:05–08:25

ऋण दोष से मुक्ति के लिए वक्ता कहते हैं कि प्रत्येक दिन एक घी का दीपक भगवती तुलसी के पास अवश्य जलाएँ, ताकि जिनसे यह विधि-विधान लिया गया है उनके और सुनने वाले के बीच कोई ऋण दोष न रहे। सिर्फ इतना अवश्य कर लें, वे कहते हैं, ताकि ऋण दोष न रहे और साधना का प्रभाव अकाट्य रूप से प्राप्त हो।

अंत में वक्ता कहते हैं: ऋण दोष से मुक्ति हेतु प्रत्येक दिन एक घी का दीपकपूजन के लिए जलाया जाने वाला दीपक, जो विधि के अनुसार घी अथवा तेल का होता है। भगवती तुलसी के पास अवश्य जलाएँ, ताकि जिनसे यह विधि-विधान लिया है उनके और हमारे बीच कोई ऋण दोष न रहे। सिर्फ इतना ही, वे कहते हैं, अवश्य कर लें, ताकि ऋण दोष न रहे और इस साधना का प्रभाव अकाट्य रूप से प्राप्त हो।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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