नवदुर्गा, नवग्रह और नवग्रह माताओं का नौ दिन का नवरात्रि जप विधान

नवरात्रि में दुर्गाओं और ग्रहों का संयुक्त जप विधान।

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01

नवदुर्गा, नवग्रह और ग्रहों की माताओं की एक साथ पूजा

नवरात्रि में नवदुर्गा के साथ-साथ नौ ग्रहों की पूजा क्यों की जाए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:09–00:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में यदि नौ ग्रहों के साथ-साथ नौ ग्रहों की माताओं और नौ दुर्गाओं की पूजा एक साथ की जाए, तो जन्म कुंडली में उपस्थित बहुत सारे ग्रह दोषों और योगों का शमन हो जाता है — वही दोष-योग, जिनके कारण हमारा जीवन प्रभावित होता है।

02

हर कण नौ ग्रहों की उपस्थिति का कारक

छोटे से छोटा कण भी नौ ग्रहों की उपस्थिति का कारक माना जाता है

· Reviewed Sep 2026 · 00:23–00:44

क्योंकि समस्त संसार में छोटे से छोटा पिंड-कण भी नौ ग्रहों की उपस्थिति का कारक माना जाता है — अर्थात् उन पर नौ ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, और उसका अच्छा-बुरा फल जीवन में प्रदर्शित होता है। इसलिए नौ ग्रहों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए: केवल अपने इष्ट की सेवा-पूजा के साथ-साथ नौ ग्रहों से संबंधित पूजा-पाठ भी समय-समय पर अवश्य करना चाहिए।

03

अपनी जन्म कुंडली न जानने वालों के लिए विधान

यह विधान विशेष रूप से उनके लिए है जिन्हें अपनी जन्म कुंडली का ज्ञान नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 00:45–01:08

वक्ता इसे विशेष रूप से उन लोगों को संबोधित करते हैं जिन्हें अपनी जन्म कुंडली का ज्ञान नहीं है। वे कहते हैं कि उनके लिए यह पूजन विधान — जो केवल नवरात्रि के समय के लिए बताया जा रहा है — अत्यंत आवश्यक और उपयोगी सिद्ध होगा: केवल इसे करने मात्र से नौ दिन में ही जीवन में जो भी दोष होगा उसका शमन हो जाएगा और ग्रहों की कृपा प्राप्त होगी।

04

लंबे अलग-अलग विधान के स्थान पर नौ दिन का सरल विधान

अलग-अलग पूजा में हर ग्रह का अपना वस्त्र और अपना लंबा विधि-विधान होता है

· Reviewed Sep 2026 · 01:09–01:45

क्योंकि यदि आप नौ ग्रहों की अलग से सेवा-पूजा करने जाएँगे तो प्रत्येक का अलग वस्त्र होता है और उसका पूरा विधि-विधान काफी क्लिष्ट और लंबा होता है। वक्ता जो विधान श्रोताओं के समक्ष रख रहे हैं वह केवल नौ दिन के हेतु है, अत्यंत सरल विधान है, और कोई भी साधक या साधिका इसे कर सकते हैं।

06

बीज और नाम से युक्त मंत्र, जिन्हें कोई भी जप सकता है

केवल बीज और नाम से युक्त मंत्र, जिनका जप कोई भी स्त्री या पुरुष कर सकता है

· Reviewed Sep 2026 · 02:05–02:19

वीडियो में केवल वैसे ही मंत्र रखे गए हैं जिनका जप हर कोई कर सकता है: बीज और नाम से युक्त मंत्र। वक्ता कहते हैं कि स्त्री हों या पुरुष, योगोपवीत धारण करते हों या न करते हों, सभी इनका जप बिना किसी शक-संशय के कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि इसी कारण इस वीडियो में श्रोताओं के समक्ष जितने भी मंत्र रखे गए हैं वे वैसे मंत्र हैं जिनका जप हर कोई कर सकता है। ये बीज और नाम से युक्त मंत्र हैं। वे कहते हैं कि इनका जप स्त्री-पुरुष, यज्ञोपवीतवैदिक कर्मों में दीक्षा का प्रतीक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार — पीढ़ियों तक न होने पर, इसे पुनः आरंभ करने से पहले हर ज्ञात पीढ़ी के लिए प्रायश्चित आवश्यक है। धारण करने वाले और न करने वाले — सभी बिना किसी शक-संशय के कर सकते हैं।

07

प्रतिपदा से आरंभ, कलश और अखंड ज्योत के साथ या बिना

इस जप के लिए कलश स्थापना और अखंड दीप अनिवार्य नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 02:20–02:43

वक्ता कहते हैं कि जप और पूजन नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना, अखंड दीप प्रज्वलन इत्यादि करने के पश्चात आरंभ होते हैं। परंतु यदि आप अखंड दीप या कलश स्थापना नहीं करते और सिर्फ पूजा-पाठ करते हैं, तब भी यह साधना अवश्य कर सकते हैं। अपने व्यवसाय या नौकरी के अनुसार सुबह या शाम समय निकालकर करें।

08

सुबह अति उत्तम; पहले गुरु-गणपति पूजन और भगवती का पाठ

सुबह का समय अति उत्तम; गुरु-गणपति पूजन और भगवती का पाठ जप से पहले

· Reviewed Sep 2026 · 02:44–03:07

वक्ता कहते हैं कि यह साधना सुबह के समय करना अति उत्तम होता है। सर्वप्रथम प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना इत्यादि, फिर गुरु-गणपति पूजन इत्यादि, फिर भगवती का जो पाठ आप करते हैं — उसके पश्चात यह जप करना है। सभी मंत्र स्क्रीन पर एक ही पेज में एक साथ डाल दिए गए हैं।

09

डिस्क्रिप्शन और पीडीएफ में मंत्र

मंत्र वीडियो के डिस्क्रिप्शन में और पीडीएफ में, लिख लेने के लिए

· Reviewed Sep 2026 · 03:08–03:23

वक्ता कहते हैं कि वे इन मंत्रों को वीडियो के डिस्क्रिप्शन में भी रख देंगे ताकि श्रोता देखकर आराम से इन्हें लिख लें, या फिर एक पीडीएफ फाइल का लिंक दे देंगे जिससे डाउनलोड कर लें, जिसमें सभी मंत्र एक ही जगह संकलित कर दिए जाएँगे।

वक्ता कहते हैं कि वे इन मंत्रों को वीडियो के डिस्क्रिप्शन में भी रख देंगे, ताकि आप देखकर आराम से इन्हें लिख लें। या फिर वे एक पीडीएफ फाइल का लिंक दे देंगे जिससे आप डाउनलोड कर लें; उसमें सभी मंत्रों को एक जगह संकलित कर दिया जाएगा।

10

नौ दिन एक ही वस्त्र

क्या नवरात्रि के प्रत्येक दिन रंग के अनुसार वस्त्र बदलने पड़ते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 03:24–03:43 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि में आप चाहे लाल वस्त्र पहनें, पीला पहनें या श्वेत — यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक दिन के रंग के अनुसार वस्त्र बदलें। हालाँकि यह उपयोगी होता है, पर बहुत महँगा पड़ जाएगा, इसलिए आप जो एक वस्त्र पहनते हैं उसी को प्रत्येक दिन पहनें — रंग से कोई दिक्कत नहीं है।

11

पंचमुखी या नवमुखी रुद्राक्ष, और किसी भी रत्न की माला नहीं

नवग्रह और नवदुर्गा के जप में कौन सी माला प्रयोग करें, और कौन सी माला वर्जित है?

· Reviewed Sep 2026 · 03:44–04:16 · Also a question

यदि आप योगोपवीत धारण करते हैं तो प्रतिपदा के दिन उसे पहन लें; नहीं धारण करते तो कोई बात नहीं। कम से कम एक रुद्राक्ष माला साधक या साधिका को अवश्य धारण करनी चाहिए। जप के लिए पंचमुखी या नवमुखी रुद्राक्ष की माला अत्यंत श्रेष्ठ है — विशेषकर नवमुखी। वक्ता कहते हैं कि इस जप में किसी भी रत्न की माला का प्रयोग नहीं करना है।

12

सूर्य नारायण नौ माला, माता अदिति एक माला, शैलपुत्री एक माला

सूर्य नारायण की नौ माला, माता अदिति की एक, शैलपुत्री की एक

· Reviewed Sep 2026 · 04:17–04:53

प्रतिपदा तिथि को सुबह के समय आरंभिक पूजन के पश्चात उस दिन सूर्य नारायण की पूजा की जाती है। पीडीएफ फाइल में दिए गए सूर्य भगवान के मूल मंत्र का नौ माला जप, उनकी माता के मंत्र का एक माला जप, तथा प्रथम दुर्गा माता शैलपुत्री का एक माला जप — यानी सूर्य नारायण का नौ माला, माता अदिति का एक माला और भगवती शैलपुत्री का एक माला।

13

गुरु, गणपति, दिन की दुर्गा, ग्रह, फिर ग्रह की माता — एक संपुट

गुरु, गणपति, उस दिन की दुर्गा, ग्रह, फिर ग्रह की माता — जिससे संपुट बनता है

· Reviewed Sep 2026 · 04:54–05:41

यदि आप अन्य मंत्रों का भी जप करते हैं तो सर्वप्रथम गुरु मंत्र का एक माला और गणपति मंत्र का एक माला जप करें। फिर प्रथम दुर्गा माता शैलपुत्री का एक माला; फिर प्रतिपदा को सूर्य ग्रह का नौ माला; फिर उनकी माता अदिति का एक माला। वक्ता कहते हैं कि इससे ग्रह मंत्र माँ दुर्गा और माता अदिति के द्वारा संपुट हो जाता है, जिससे वह तीव्र प्रभाव देने वाला होता है। फिर समस्त जप भगवती जगदंबा दुर्गा के बाएँ हाथ में समर्पित कर दिया जाता है।

14

द्वितीया में चंद्र और अनुसूइया; तृतीया में मंगल और भूमि माता

द्वितीया को चंद्र और अनुसूइया; तृतीया को मंगल और भूमि माता

· Reviewed Sep 2026 · 05:42–06:21

द्वितीया तिथि को आरंभिक पूजन तथा गुरु मंत्र और गणपति मंत्र के जप के पश्चात भगवती ब्रह्मचारिणी का एक माला जप, फिर चंद्र ग्रह के मंत्र का नौ माला जप, फिर उनकी माता अनुसूइया का एक माला जप करते हैं। तृतीया को गुरु-गणपति पूजन के पश्चात माता चंद्रघंटा का एक माला, मंगल ग्रह के मंत्र का नौ माला, और उसके पश्चात माता भूमि — यानी पृथ्वी माता — के नाम से एक माला जप।

15

गुरु-गणपति को पाँच आहुति, दुर्गाओं, ग्रहों और माताओं को नौ-नौ आहुति

गुरु और गणपति को पाँच-पाँच आहुति, दुर्गाओं, ग्रहों और उनकी माताओं को नौ-नौ

· Reviewed Sep 2026 · 06:22–06:54

नौ दिन का जप पूर्ण हो जाने पर अंतिम दिन हवन किया जाता है। आरंभिक हवन का विधि-विधान चैनल पर बताया जा चुका है। गुरु और गणपति को पाँच-पाँच आहुति देनी है; जिन नौ दुर्गाओं के अलग-अलग मंत्रों का जप किया है उन सभी से नौ-नौ आहुति; नौ ग्रहों के प्रत्येक मंत्र से नौ-नौ आहुति; और नौ ग्रहों की माताओं के नाम से भी नौ-नौ आहुति।

17

सदाशिव, भैरव और हनुमान जी की पूजा अनिवार्य

सदाशिव, भैरव और हनुमान जी की पूजा साथ में अनिवार्य है, वैकल्पिक नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 07:16–07:38

वक्ता कहते हैं कि इन सभी पूजन में भगवान सदाशिव तथा भैरव और हनुमान जी की पूजा अनिवार्य है। चाहे आप उनके नाम से एक दीपक जलाएँ, अथवा हनुमान चालीसा इत्यादि का पाठ करें, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, रुद्राष्टक, या भैरव जी के नामों का पाठ करें — यह भी अवश्य करना चाहिए। यदि सुबह न कर सकें तो शाम के समय कर लें; इन देवताओं को छोड़ें नहीं।

18

जो कष्ट अन्यथा दूर नहीं होते, उनका निवारण

जो कष्ट और विपत्तियाँ आ रही हैं, उनका दूर होना इस पूजन का फल बताया गया है

· Reviewed Sep 2026 · 07:39–08:04

वक्ता कहते हैं कि यदि आप इस प्रकार से पूजन करते हैं, तो आपके जीवन में जितने भी कष्ट-विपत्ति आ रहे होंगे जो दूर नहीं हो रहे होंगे, इस सम्यक पूजन से — इस पूरे सामूहिक पूजन से — वे सभी अवश्य दूर होंगे, और आपका कार्य तथा मनोकामना पूर्ण होगी।

19

भगवती तुलसी के पास प्रतिदिन घी का दीपक

प्रतिदिन भगवती तुलसी के पास घी का दीपक, ताकि इस विधि का कोई ऋण दोष न रहे

· Reviewed Sep 2026 · 08:05–08:25

ऋण दोष से मुक्ति हेतु वक्ता निवेदन करते हैं कि प्रत्येक दिन एक घी का दीपक भगवती तुलसी के पास अवश्य जलाएँ, ताकि जिनसे यह विधि-विधान लिया गया है उनके और आपके बीच कोई ऋण दोष न रहे। वे कहते हैं कि सिर्फ इतना ही अवश्य कर लें, ताकि ऋण दोष न रहे और इस साधना का प्रभाव आपको अकाट्य रूप से प्राप्त हो।

वक्ता कहते हैं कि ऋण दोष से मुक्ति हेतु प्रत्येक दिन एक घी का दीपक भगवती तुलसी के पास अवश्य जलाएँ — ताकि जिनसे यह विधि-विधान लिया गया है उनके और हमारे बीच में कोई ऋण दोष न रहे। वे कहते हैं कि सिर्फ इतना ही आप अवश्य कर लें, ताकि ऋण दोष न रहे और इस साधना का प्रभाव आपको अकाट्य रूप से प्राप्त हो।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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