नवरात्र के कलश में क्या-क्या डालें — धातु, रंग, प्रमाण, सामग्री और विसर्जन

नवरात्र के कलश में डाली जाने वाली वस्तुओं की सरल व्याख्या।

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The notes
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01

नवरात्र का कलश किन धातुओं का हो सकता है

मिट्टी, पीतल, तांबा या कांसा; लोहा कभी नहीं, रंगा हुआ भी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:39–01:10

वक्ता कहते हैं कि सामान्य रूप से मिट्टी का कलश रखा जाता है और वही ठीक है; धातु में पीतल, तांबा और कांसा का कलश रखा जाता है। लोहे का कलश कभी नहीं रखना चाहिए। वे सावधान करते हैं कि बहुत बार लोहे के कलश पर पीला या लाल रंग चढ़ाकर बेच दिया जाता है, इसलिए ध्यान रखें कि लोहे का कलश कभी स्थापित न हो।

02

मिट्टी के नवरात्र कलश का रंग

काला कभी नहीं; पीला, लाल या सादा प्राकृतिक रंग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:11–01:25

वक्ता कहते हैं कि काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं करना चाहिए। यदि कलश रंगा हुआ है तो उसका रंग सदैव पीला या लाल हो, तभी उसे स्थापित करें; अन्यथा सामान्य सादे रंग का कलश स्थापित करें।

वक्ता कहते हैं कि काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं करना चाहिए। मिट्टी के कलश का रंग सदैव पीला हो या लाल हो; यदि वह रंगा हुआ है तो तभी उसे स्थापित करें। अन्यथा, वे कहते हैं, जो सामान्य सादा रंग होता है, उस तरह के कलश की स्थापना करें।

03

कलश के गले में नौ बार लपेटी जाने वाली मौली

नौ दुर्गा में से हर एक के नाम का एक फेरा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:26–01:32

वक्ता कहते हैं कि कलश के गले में धागा नौ बार लपेटना चाहिए। मौली धागा नौ दुर्गा के नाम से नौ बार लपेटा जाता है।

वक्ता कहते हैं कि कलश के गले में धागा नौ बार लपेटना चाहिए। यह मौलीकलाई अथवा कलश पर बाँधा जाने वाला लाल-पीला सूत। धागा होता है और उसे नौ दुर्गा के नाम से नौ बार लपेटा जाता है।

04

नवरात्र के कलश का प्रमाण

घर के मुखिया की आठ से बारह उंगल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:33–02:03

वक्ता कहते हैं कि कलश का प्रमाण यानी लंबाई घर के मुखिया की उंगली से नापी जाती है: आठ से बारह उंगल, नीचे से लेकर कलश के मुख तक। यह बारह उंगल से बड़ा न हो और आठ उंगल से छोटा न हो। कलश को जितना चाहें उतना सजाया जा सकता है।

05

कलश के नीचे जौ की मिट्टी और अष्टदल कमल की तैयारी

बिना विधि-विधान और मंत्र की गृहस्थ विधि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:04–02:33

वक्ता कहते हैं कि वे घटस्थापना सामान्य रूप से बता रहे हैं, बिना विधि-विधान और मंत्रों के, ताकि घर में सामान्य व्यक्ति भक्ति-भाव से कर सके। सबसे पहले जो जौ बोया जाता है, यानी जवारे, उसे आराम से मिट्टी में मिला लें; मिट्टी को बराबर करके उस पर गुलाल, हल्दी आदि से अष्टदल कमल जैसी आकृति बना दें। उसके ऊपर कलश स्थापित किया जाता है।

06

नवरात्र के कलश में डाली जाने वाली वस्तुओं का क्रम

संकल्प और जल से लेकर मधु और दूब तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:34–03:23

वक्ता कलश में डाली जाने वाली वस्तुओं का क्रम बताते हैं। यदि संकल्प आता है तो वह सबसे पहले: सुपारी, थोड़ा बिना टूटा चावल (अक्षत) और कुछ सिक्के लेकर संकल्प किया जाता है और उन्हें कलश में डाल दिया जाता है। फिर कलश को जल से भर दें, फिर असली चंदन का छोटा टुकड़ा, लाल या पीला। उसके बाद हरीतकी, सुपारी, तीन धातुओं के सिक्के, पंचरत्न, अच्छी गुणवत्ता का सर्वौषधि, मधु अवश्य, और थोड़ी सी अच्छी तरह धोई हुई दूर्वा घास। ये सभी आरंभिक वस्तुएं डालने के बाद ऊपर पल्लव रखे जाते हैं।

07

कलश का पंचरत्न: जौहरी से असली उपरत्न बनवाना

सवा-सवा रत्ती का सेट जो जीवन भर चले

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:24–04:08

वक्ता कहते हैं कि पूजन दुकान में 5 रुपये या 10-15 रुपये में जो पंचरत्न मिलता है, वह पंचरत्न है भी या नहीं, यह बड़ी शंका का विषय है। चूंकि हर साल नवरात्रि पूजन करना है, वे जौहरी की दुकान से सवा-सवा रत्ती के उपरत्न बनवा लेने की सलाह देते हैं। एक रत्न 50-100 रुपये में, कुल 5-600 रुपये में बन जाता है और फिर जीवन भर के लिए पंचरत्न हो जाता है; देखने में बड़ा और सुंदर भी लगता है और मन में बहुत संतोष रहता है कि इतना अच्छा पूजन कर रहे हैं।

08

सप्त मृत्तिका: कलश के भीतर या जौ की मिट्टी में

क्षेत्रीय भेद; वक्ता बाहर डालना बेहतर मानते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:09–04:32

वक्ता कहते हैं कि सप्त मृत्तिका को बहुत बार कलश के भीतर डाल दिया जाता है, पर यह क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग है: बहुत जगह कहा जाता है कि कलश के अंदर डालना है, और बहुत जगह पढ़ने, सुनने और देखने को मिलता है कि जहां जौ (जवारे) बोते हैं वहां डालते हैं। अपने अनुसार चाहे अंदर डालें या बाहर; उनके अनुसार बाहर डालना ही अधिक उपयुक्त है।

09

कलश के ऊपर पंच पल्लव या आम के पत्ते

पांच वृक्ष, या सिंदूर से टीके पांच से ग्यारह आम के पत्ते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:43–05:11

वक्ता कहते हैं कि सभी आरंभिक वस्तुएं कलश में डालने के बाद ऊपर पंच पल्लव या आम के पत्ते रखे जाते हैं। पंच पल्लव का अर्थ है पांच अलग-अलग वृक्षों के पत्ते; या फिर आम की ऐसी डाली जिसमें कम से कम पांच और अधिक से अधिक ग्यारह पत्ते हों। पत्तों को सिंदूर से अच्छी तरह सजाकर, सिंदूर का टीका लगाकर, फिर रखा जाता है।

10

मंत्र न आता हो तो कलश में वस्तुएं डालते समय क्या पढ़ें

हर वस्तु के साथ जगदंबा का नाम या सप्तशती का श्लोक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:37–05:56

वक्ता कहते हैं कि मंत्रों के साथ वस्तुएं डालना एक अलग विषय है; वे सामान्य तरीका बता रहे हैं जिसे कोई भी भक्तिपूर्वक कर सके। यदि कोई मंत्र न आता हो तो जगदंबा का नाम लेते हुए, या "या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता" अथवा "सर्व मंगल मांगल्ये" का पाठ करते हुए प्रत्येक वस्तु कलश में डालें। वे कहते हैं, जगदंबा अवश्य उसे स्वीकार करेंगी।

11

विसर्जन के समय कलश की वस्तुएं निकालना और पुनः उपयोग

चंदन, तीनों सिक्के और पंचरत्न लाल वस्त्र में रखें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:57–06:57

वक्ता कहते हैं कि नदी में विसर्जन करते समय कलश के मुख को दबाकर रखें (ऊपर का नारियल पहले विसर्जित हो जाएगा) और चंदन की लकड़ी, तीनों सिक्के और पंचरत्न निकाल लें; बाकी सब कलश में ही छोड़कर उसके साथ विसर्जित कर दें। इन वस्तुओं को लाल वस्त्र में बांधकर पूजन स्थान में अच्छी जगह रखें, पूजा करें, और अगले साल कलश में पुनः, बार-बार प्रयोग कर सकते हैं; इसमें कोई दोष नहीं है। चाहें तो चंदन बदल लें, पर सोने का सिक्का और सही पंचरत्न अवश्य दोबारा प्रयोग किया जा सकता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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