नवरात्र के कलश में क्या-क्या डालें — धातु, रंग, प्रमाण, सामग्री और विसर्जन

नवरात्र के कलश में डाली जाने वाली वस्तुओं की सरल व्याख्या।

16 concepts, in the order they are taught. Jump to any one.

11 also answer a common question

Questions this answers

11 of the notes below are questions in their own right. Scroll for more.

The notes
EN हिंदी
01

नवरात्र के कलश में क्या-क्या डालना चाहिए

पूजन दुकान से जो कुछ मिल जाता है वही प्रायः कलश में डाल दिया जाता है और विसर्जन के समय उसी तरह बहा भी दिया जाता है, यह पूछे बिना कि उसमें क्या डालना चाहिए।

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:38

वक्ता कहते हैं कि एक प्रश्न बार-बार आता है कि नवरात्र में जब कलश स्थापना करते हैं तो कलश में क्या-क्या डालना चाहिए। सामान्य रूप से जो भी पूजन दुकान में दे दिया जाता है वह सब कलश में डाल दिया जाता है, और विसर्जन के समय वे सारी चीज़ें उसी तरीके से विसर्जित हो जाती हैं — इसीलिए वे यह विषय श्रोताओं के समक्ष रख रहे हैं।

02

मिट्टी, पीतल, तांबा और कांसा — लोहा कभी नहीं

नवरात्र का कलश किस धातु का होना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:39–01:10 · Also a question

सामान्य रूप से मिट्टी का कलश रखा जाता है और वही ठीक होता है। धातु में पीतल, तांबा और कांसा का कलश रखा जाता है। लोहे का कलश कभी नहीं रखना चाहिए — वक्ता सावधान करते हैं कि बहुत बार लोहे के कलश के ऊपर पीला या लाल रंग चढ़ा करके बेच दिया जाता है, इसलिए ध्यान रखें कि लोहे का कलश कभी स्थापित न हो।

03

काला मिट्टी का कलश कभी नहीं — पीला, लाल या सादा

काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं किया जाता; रंगा हुआ हो तो पीला या लाल हो, अन्यथा सादे प्राकृतिक रंग का कलश ही उपयुक्त है।

· Reviewed Sep 2026 · 01:11–01:25

काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं करना चाहिए। यदि कलश रंगा हुआ है तो उसका रंग सदैव पीला या लाल हो, तभी उसे स्थापित करें; अन्यथा जो सामान्य सादा रंग होता है, उसी प्रकार का कलश स्थापित करें।

वक्ता कहते हैं कि काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं करना चाहिए। कलश का रंग सदैव पीला हो या लाल हो — यदि वह रंगा हुआ है तो तभी उसे स्थापित करें। अन्यथा जो सामान्य सादा रंग होता है, उस तरीके के कलश की स्थापना करें।

04

नौ दुर्गा के नाम से नौ बार मौली

कलश के गले में धागा किस प्रकार लपेटा जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:26–01:32 · Also a question

कलश के गले में धागा नौ बार लपेटना चाहिए। वह मौली धागा होता है, और उसे नौ दुर्गा के नाम से नौ बार लपेटना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि कलश के गले में धागा नौ बार लपेटना चाहिए। वह कलावालाल-पीला पवित्र धागा (जिसे मौली भी कहते हैं), जो कलाई पर बाँधा जाता है अथवा दीपक की बत्ती बनाने में प्रयुक्त होता है; यह लच्छों में आता है जिन्हें गिनकर लपेटा जाता है। धागा है — मौली — और उसे नवदुर्गा के नाम से नौ बार लपेटना चाहिए।

05

घर के मुखिया की आठ से बारह उंगली

नवरात्र का कलश कितना बड़ा होना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 01:33–02:00 · Also a question

कलश का प्रमाण यानी लंबाई घर के मुखिया की उंगली से मानी जाती है — आठ से बारह उंगली, नीचे से लेकर कलश के मुख तक। वह बारह से ज़्यादा बड़ा और आठ उंगल से छोटा नहीं होना चाहिए। सजावट, इसके विपरीत, जितनी चाहें उतनी की जा सकती है।

06

जौ मिट्टी में मिलाकर, बराबर करके उस पर अष्टदल कमल

स्थापना से पहले कलश का आसन किस प्रकार तैयार किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:01–02:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे सामान्य रूप से बता रहे हैं, कोई विधि-विधान या मंत्र नहीं, जिससे घर में सामान्य व्यक्ति भक्ति भाव से कर सके। पहले जो जौ बोया जाता है उस बीज को आराम से मिट्टी में मिला लें; फिर उसे बराबर करके उस पर गुलाल, हल्दी इत्यादि से अष्टदल कमल इत्यादि बना दें। उसी के ऊपर कलश स्थापित किया जाता है।

07

सुपारी, अक्षत और सिक्कों से संकल्प; फिर जल; फिर चंदन की लकड़ी

कलश में सबसे पहले क्या जाता है — संकल्प, जल या चंदन?

· Reviewed Sep 2026 · 02:34–03:03 · Also a question

सबसे पहले चंदन की लकड़ी डाली जाती है। पर उससे भी पहले, यदि आपको संकल्प करना आता है, तो सुपारी, थोड़ा सा चावल, अक्षत — बिना टूटा हुआ चावल — और कुछ सिक्के लेकर संकल्प किया जाता है और उन्हें कलश में डाल देना चाहिए। उसके पश्चात उसे जल से भर देना चाहिए, और तभी चंदन की लकड़ी डालनी चाहिए: छोटा सा टुकड़ा, लाल या पीला चंदन, पर असली चंदन होना चाहिए।

08

हरतिकी, सुपारी और तीन धातुओं के सिक्के

चंदन के बाद हरतिकी, फिर सुपारी, फिर तीन धातुओं के सिक्के — सोना या चांदी, चांदी, और तांबा या प्रचलित सिक्का।

· Reviewed Sep 2026 · 03:04–03:23

चंदन के बाद जिसे हरतिकी कहते हैं वह डाला जाता है, फिर सुपारी, फिर जो भी सामर्थ्य हो उस अनुसार सोने या चांदी का सिक्का। तीन धातु का सिक्का डालना चाहिए — सोना, चांदी, तांबा, पीतल, या फिर जो सामान्य प्रचलित सिक्का होता है; उनमें से एक डालें, चांदी का डालें और तांबा का डालें। तीन तरीके का सिक्का कलश में डालना चाहिए।

09

इसके बदले जौहरी से सवा-सवा रत्ती का उपरत्न बनवाना

पूजन दुकानों में मिलने वाला पंचरत्न भरोसे लायक है?

· Reviewed Sep 2026 · 03:24–04:00 · Also a question

पंचरत्न यानी पांच तरीके का रत्न डाला जाता है। वक्ता कहते हैं कि पूजन दुकान में जो दस-पंद्रह रुपए या पांच रुपए में मिलता है वह पंचरत्न होता है कि नहीं, यह बड़ी शंका का विषय हो जाता है। चूंकि हर साल नवरात्र पूजन करना है, वे सलाह देते हैं कि जौहरी की दुकान से सवा-सवा रत्ती का उपरत्न बनवा लीजिए: आराम से पचास-सौ रुपए में बन जाएगा, यानी पांच-छह सौ रुपए में जीवन भर के लिए पंचरत्न हो गया।

10

सर्वोषधि भीतर; सप्त मृत्तिका पर क्षेत्रीय भेद

सर्वोषधि और सप्त मृत्तिका कलश के भीतर डालनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 04:01–04:32 · Also a question

सर्वोषधि डालनी चाहिए और वह अच्छी क्वालिटी की हो; वह दुकान में मिल जाएगी। सप्त मृत्तिका बहुत बार कलश के भीतर डाल दी जाती है, पर वक्ता कहते हैं कि यह क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग है — बहुत सारी जगह कहा जाता है कि कलश के अंदर डालनी है, और बहुत सारी जगहों में पढ़ने, सुनने और देखने को मिलता है कि जहाँ जौ बोते हैं वहाँ डाल देते हैं। अपने अनुसार करें; उनके अपने मत में बाहर डालना अधिक उपयुक्त है।

11

मधु अवश्य, और थोड़ी सी धुली हुई दूब घास

क्या कलश में मधु और दूब घास डाली जाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:33–04:42 · Also a question

उसके बाद कलश के भीतर मधु डालना चाहिए — वक्ता कहते हैं कि मधु अवश्य डालें। फिर थोड़ी सी दूब घास, अच्छे से धोई हुई, जरा सी मात्रा में डालनी चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि उसके बाद कलश के भीतर मधु डालना चाहिए। मधु अवश्य डालें। फिर दूर्वादेवताओं — विशेषकर गणेश जी — को अर्पित की जाने वाली पवित्र घास, नए स्थान पर जाने से पूर्व देवता को औपचारिक निमंत्रण देने की सामग्री में सम्मिलित होती है। — अच्छा धोया हुआ दूब घास, थोड़ा सा, जरा सा दूब घास डालना चाहिए।

12

पंच पल्लव या आम के पांच से ग्यारह पत्ते, सिंदूर से टीके हुए

सारी वस्तुएँ डालने के बाद ऊपर पंच पल्लव रखे जाते हैं — पांच अलग-अलग वृक्षों के पल्लव, या सिंदूर से टीके हुए पांच से ग्यारह आम के पत्ते।

· Reviewed Sep 2026 · 04:43–05:11

ये सभी आरंभिक वस्तुएँ डालने के पश्चात कलश के ऊपर पंच पल्लव रखिए, या आम पत्र डालिए। पंच पल्लव का अर्थ है पांच अलग-अलग तरह के वृक्षों के पल्लव; या फिर आम के वृक्ष के पल्लव, जिसमें कम से कम पांच पत्ते हों और अधिक से अधिक ग्यारह, उन्हें सिंदूर से अच्छे से सजाकर — जिसे सिंदूर से टीकना बोलते हैं — तब रखें।

13

नारियल की विधि अलग वीडियो पर टाली गई

कलश के ऊपर नारियल रखने की विधि अलग वीडियो के लिए रखी गई है; यह चर्चा केवल कलश की सामग्री और प्रमाण तक सीमित रही।

· Reviewed Sep 2026 · 05:12–05:36

वक्ता कहते हैं कि कलश के ऊपर नारियल कैसे रखा जाता है, इसके लिए वे अलग से एक वीडियो बना देंगे। इतना ही केवल इस विषय तक था कि कलश स्थापना में कलश में क्या-क्या डालना है, और कलश को कैसे तथा कहाँ तक रखना है; इसके आगे की विधि, और सेवा-पूजा कैसे करनी चाहिए, वे दूसरे वीडियो में बताएँगे।

14

सामान्य तरीका; और यदि कोई मंत्र न आता हो तो क्या पाठ करें

कलश में वस्तुएँ डालते समय क्या पाठ करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 05:37–05:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मंत्रों के साथ डालना एक अलग विषय है; वे यहाँ सामान्य तरीका बता रहे हैं जिससे कोई भी सुनकर आराम से भक्ति पूर्वक कर सके। यदि कोई मंत्र नहीं आता है तो जगदंबा का नाम लेकर, या या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता का पाठ करते हुए, या सर्व मंगल मांगल्य मंत्र का पाठ करते हुए प्रत्येक वस्तु डालें। जगदंबा अवश्य उसे स्वीकार करेंगी।

15

मुख दबाकर चंदन, तीनों सिक्के और पंचरत्न निकाल लेना

विसर्जन से पहले कलश में से क्या-क्या निकाल लेना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 05:57–06:32 · Also a question

जब नदी में कलश का विसर्जन करते हैं तो कलश के मुख को दबाकर रखें — उसके ऊपर जो नारियल रहेगा उसका विसर्जन पहले हो जाएगा, इसलिए उसे पकड़ करके रखें। उसके पश्चात भीतर का पंचरत्न, जितने भी सिक्के हैं, चंदन की लकड़ी इत्यादि निकाल लेनी चाहिए। चंदन की लकड़ी, तीनों सिक्के और पंचरत्न निकाल लीजिए; बाकी सभी चीज़ें उसी में छोड़ देनी चाहिए, और कलश का विसर्जन हो जाएगा।

16

लाल वस्त्र में बांधकर पूजन स्थान में रखें और पुनः प्रयोग करें

कलश से निकाली गई वस्तुएँ अगले वर्ष फिर प्रयोग की जा सकती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 06:33–06:57 · Also a question

हाँ। इन सभी चीज़ों को लाल वस्त्र में बांध करके रख दें; अगली बार पुनः इन्हीं चीज़ों का प्रयोग कलश में बिल्कुल कर सकते हैं — इसी चंदन की लकड़ी का, इन्हीं सभी चीज़ों का। घर में अच्छे स्थान पर रखें, पूजन के स्थान में रखें, पूजा करें, और पुनः इनका प्रयोग करें। इसमें कोई दोष नहीं है और बार-बार इनका प्रयोग किया जा सकता है। चाहें तो चंदन की लकड़ी बदल लें, पर यदि आप सोने का सिक्का और सही वाला पंचरत्न प्रयोग कर रहे हैं तो दोबारा उनका प्रयोग अवश्य कर सकते हैं।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic