नवरात्र के कलश में क्या-क्या डालें — धातु, रंग, प्रमाण, सामग्री और विसर्जन
नवरात्र के कलश में डाली जाने वाली वस्तुओं की सरल व्याख्या।
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नवरात्र के कलश में क्या-क्या डालना चाहिए
पूजन दुकान से जो कुछ मिल जाता है वही प्रायः कलश में डाल दिया जाता है और विसर्जन के समय उसी तरह बहा भी दिया जाता है, यह पूछे बिना कि उसमें क्या डालना चाहिए।
वक्ता कहते हैं कि एक प्रश्न बार-बार आता है कि नवरात्र में जब कलश स्थापना करते हैं तो कलश में क्या-क्या डालना चाहिए। सामान्य रूप से जो भी पूजन दुकान में दे दिया जाता है वह सब कलश में डाल दिया जाता है, और विसर्जन के समय वे सारी चीज़ें उसी तरीके से विसर्जित हो जाती हैं — इसीलिए वे यह विषय श्रोताओं के समक्ष रख रहे हैं।
मिट्टी, पीतल, तांबा और कांसा — लोहा कभी नहीं
नवरात्र का कलश किस धातु का होना चाहिए?
सामान्य रूप से मिट्टी का कलश रखा जाता है और वही ठीक होता है। धातु में पीतल, तांबा और कांसा का कलश रखा जाता है। लोहे का कलश कभी नहीं रखना चाहिए — वक्ता सावधान करते हैं कि बहुत बार लोहे के कलश के ऊपर पीला या लाल रंग चढ़ा करके बेच दिया जाता है, इसलिए ध्यान रखें कि लोहे का कलश कभी स्थापित न हो।
काला मिट्टी का कलश कभी नहीं — पीला, लाल या सादा
काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं किया जाता; रंगा हुआ हो तो पीला या लाल हो, अन्यथा सादे प्राकृतिक रंग का कलश ही उपयुक्त है।
काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं करना चाहिए। यदि कलश रंगा हुआ है तो उसका रंग सदैव पीला या लाल हो, तभी उसे स्थापित करें; अन्यथा जो सामान्य सादा रंग होता है, उसी प्रकार का कलश स्थापित करें।
वक्ता कहते हैं कि काले रंग का मिट्टी का कलश कभी स्थापित नहीं करना चाहिए। कलश का रंग सदैव पीला हो या लाल हो — यदि वह रंगा हुआ है तो तभी उसे स्थापित करें। अन्यथा जो सामान्य सादा रंग होता है, उस तरीके के कलश की स्थापना करें।
नौ दुर्गा के नाम से नौ बार मौली
कलश के गले में धागा किस प्रकार लपेटा जाता है?
कलश के गले में धागा नौ बार लपेटना चाहिए। वह मौली धागा होता है, और उसे नौ दुर्गा के नाम से नौ बार लपेटना चाहिए।
घर के मुखिया की आठ से बारह उंगली
नवरात्र का कलश कितना बड़ा होना चाहिए?
कलश का प्रमाण यानी लंबाई घर के मुखिया की उंगली से मानी जाती है — आठ से बारह उंगली, नीचे से लेकर कलश के मुख तक। वह बारह से ज़्यादा बड़ा और आठ उंगल से छोटा नहीं होना चाहिए। सजावट, इसके विपरीत, जितनी चाहें उतनी की जा सकती है।
कलश का जो प्रमाण है — यानी उसकी लंबाई कितनी होती है — वह घर के जो मुखिया हैं, प्रमुख मुखिया हैं, उनकी उंगली से मानी जाती है: आठ से बारह उंगली। वक्ता कहते हैं कि आठ उंगली से लेकर बारह उंगल तक, नीचे से लेकर पूरे ऊपर तक की लंबाई, गले से ऊपर पूरे कलश के मुख तक की लंबाई बारह मानी गई है। उससे ज़्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए और आठ उंगल से छोटा नहीं होना चाहिए। यही कलश की लंबाई होती है; इतना ही लंबा कलश रखना चाहिए। वे जोड़ते हैं कि कलश को आप जितना चाहें उतना सजाएँ।
जौ मिट्टी में मिलाकर, बराबर करके उस पर अष्टदल कमल
स्थापना से पहले कलश का आसन किस प्रकार तैयार किया जाता है?
वक्ता कहते हैं कि वे सामान्य रूप से बता रहे हैं, कोई विधि-विधान या मंत्र नहीं, जिससे घर में सामान्य व्यक्ति भक्ति भाव से कर सके। पहले जो जौ बोया जाता है उस बीज को आराम से मिट्टी में मिला लें; फिर उसे बराबर करके उस पर गुलाल, हल्दी इत्यादि से अष्टदल कमल इत्यादि बना दें। उसी के ऊपर कलश स्थापित किया जाता है।
वक्ता कहते हैं कि कलश स्थापना सामान्य रूप से बता रहे हैं — कोई विधि-विधान, मंत्र इत्यादि नहीं — जिससे घर में सामान्य व्यक्ति इसे कर सके, भक्ति भाव से, वहाँ जो सेवा-पूजा हो सके उस अनुसार। घटस्थापना करने के लिए सबसे पहले जो बीज रोपते हैं, जो जवारे बोते हैं, उसे आराम से मिट्टी में मिला लीजिए। उसके पश्चात उसे बराबर करके वहाँ गुलाल, हल्दी इत्यादि से अष्टदल कमल इत्यादि बना दीजिए। उसी के ऊपर कलश को स्थापित करते हैं।
सुपारी, अक्षत और सिक्कों से संकल्प; फिर जल; फिर चंदन की लकड़ी
कलश में सबसे पहले क्या जाता है — संकल्प, जल या चंदन?
सबसे पहले चंदन की लकड़ी डाली जाती है। पर उससे भी पहले, यदि आपको संकल्प करना आता है, तो सुपारी, थोड़ा सा चावल, अक्षत — बिना टूटा हुआ चावल — और कुछ सिक्के लेकर संकल्प किया जाता है और उन्हें कलश में डाल देना चाहिए। उसके पश्चात उसे जल से भर देना चाहिए, और तभी चंदन की लकड़ी डालनी चाहिए: छोटा सा टुकड़ा, लाल या पीला चंदन, पर असली चंदन होना चाहिए।
हरतिकी, सुपारी और तीन धातुओं के सिक्के
चंदन के बाद हरतिकी, फिर सुपारी, फिर तीन धातुओं के सिक्के — सोना या चांदी, चांदी, और तांबा या प्रचलित सिक्का।
चंदन के बाद जिसे हरतिकी कहते हैं वह डाला जाता है, फिर सुपारी, फिर जो भी सामर्थ्य हो उस अनुसार सोने या चांदी का सिक्का। तीन धातु का सिक्का डालना चाहिए — सोना, चांदी, तांबा, पीतल, या फिर जो सामान्य प्रचलित सिक्का होता है; उनमें से एक डालें, चांदी का डालें और तांबा का डालें। तीन तरीके का सिक्का कलश में डालना चाहिए।
वक्ता कहते हैं कि चंदन के बाद उसमें जिसे हरतिकी बोलते हैं उसे डाला जाता है। सुपारी डाली जाती है। सोना या चांदी का सिक्का, जो भी सामर्थ्य हो वह। तीन धातु का सिक्का डालना चाहिए: सोना, चांदी, तांबा, पीतल, या फिर सामान्य जो सिक्का होता है — उसे डालें, चांदी का डालें और तांबा का डालें। तीन तरीके का सिक्का कलश में डालना चाहिए।
इसके बदले जौहरी से सवा-सवा रत्ती का उपरत्न बनवाना
पूजन दुकानों में मिलने वाला पंचरत्न भरोसे लायक है?
पंचरत्न यानी पांच तरीके का रत्न डाला जाता है। वक्ता कहते हैं कि पूजन दुकान में जो दस-पंद्रह रुपए या पांच रुपए में मिलता है वह पंचरत्न होता है कि नहीं, यह बड़ी शंका का विषय हो जाता है। चूंकि हर साल नवरात्र पूजन करना है, वे सलाह देते हैं कि जौहरी की दुकान से सवा-सवा रत्ती का उपरत्न बनवा लीजिए: आराम से पचास-सौ रुपए में बन जाएगा, यानी पांच-छह सौ रुपए में जीवन भर के लिए पंचरत्न हो गया।
वक्ता कहते हैं कि पंचरत्न यानी पांच तरीके का रत्न डाला जाता है। पर देखिए, वे कहते हैं: पूजन स्थान में, पूजन दुकान में जो दस-पंद्रह रुपए का, पांच रुपए का मिलता है, वह पंचरत्न होता है कि नहीं होता है — यह वहाँ बड़ी शंका का विषय हो जाता है। चूंकि आपको हर साल नवरात्रि पूजन करना है, तो सवा-सवा रत्ती का उपरत्न जौहरी की दुकान से बनवा लीजिए। आराम से पचास-सौ रुपए में बन जाएगा — यानी पांच-छह सौ रुपए में पंचरत्न हमेशा के लिए, आजीवन जिंदगी भर के लिए हो गया। वे कहते हैं कि उसे बनवा लीजिए; सवा-सवा रत्ती का बड़ा भी रहेगा, देखने में सुंदर भी लगेगा, और आपके मन में बहुत संतोष रहेगा कि आप इतना अच्छा पूजन कर रहे हैं। उसे कलश में डाला करें; पंचरत्नों को डालना चाहिए।
सर्वोषधि भीतर; सप्त मृत्तिका पर क्षेत्रीय भेद
सर्वोषधि और सप्त मृत्तिका कलश के भीतर डालनी चाहिए?
सर्वोषधि डालनी चाहिए और वह अच्छी क्वालिटी की हो; वह दुकान में मिल जाएगी। सप्त मृत्तिका बहुत बार कलश के भीतर डाल दी जाती है, पर वक्ता कहते हैं कि यह क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग है — बहुत सारी जगह कहा जाता है कि कलश के अंदर डालनी है, और बहुत सारी जगहों में पढ़ने, सुनने और देखने को मिलता है कि जहाँ जौ बोते हैं वहाँ डाल देते हैं। अपने अनुसार करें; उनके अपने मत में बाहर डालना अधिक उपयुक्त है।
वक्ता कहते हैं कि सर्वोषधि जो होती है उसे डालना चाहिए; वह आपको दुकान में मिल जाएगी, और अच्छी क्वालिटी वाली सर्वोषधि डालनी चाहिए। सप्त मृत्तिका जो सामग्री के साथ आती है, उसे बहुत बार कलश के भीतर डाल देते हैं। पर वे कहते हैं कि इसे क्षेत्रीय अनुसार अलग-अलग देखें, क्योंकि यह भिन्न होता है। बहुत सारी जगह यह कहा जाता है कि कलश के अंदर डालना है, और बहुत सारी जगहों में यह पढ़ने को, सुनने और देखने को भी मिलता है कि जहाँ जौ बोते हैं वहाँ डाल देते हैं। तो अपने अनुसार चाहे अंदर डालें या बाहर डालें। वे कहते हैं कि उनके अनुसार उसे बाहर ही डालना चाहिए — वह अधिक उपयुक्त होता है।
मधु अवश्य, और थोड़ी सी धुली हुई दूब घास
क्या कलश में मधु और दूब घास डाली जाती है?
उसके बाद कलश के भीतर मधु डालना चाहिए — वक्ता कहते हैं कि मधु अवश्य डालें। फिर थोड़ी सी दूब घास, अच्छे से धोई हुई, जरा सी मात्रा में डालनी चाहिए।
वक्ता कहते हैं कि उसके बाद कलश के भीतर मधु डालना चाहिए। मधु अवश्य डालें। फिर दूर्वादेवताओं — विशेषकर गणेश जी — को अर्पित की जाने वाली पवित्र घास, नए स्थान पर जाने से पूर्व देवता को औपचारिक निमंत्रण देने की सामग्री में सम्मिलित होती है। — अच्छा धोया हुआ दूब घास, थोड़ा सा, जरा सा दूब घास डालना चाहिए।
पंच पल्लव या आम के पांच से ग्यारह पत्ते, सिंदूर से टीके हुए
सारी वस्तुएँ डालने के बाद ऊपर पंच पल्लव रखे जाते हैं — पांच अलग-अलग वृक्षों के पल्लव, या सिंदूर से टीके हुए पांच से ग्यारह आम के पत्ते।
ये सभी आरंभिक वस्तुएँ डालने के पश्चात कलश के ऊपर पंच पल्लव रखिए, या आम पत्र डालिए। पंच पल्लव का अर्थ है पांच अलग-अलग तरह के वृक्षों के पल्लव; या फिर आम के वृक्ष के पल्लव, जिसमें कम से कम पांच पत्ते हों और अधिक से अधिक ग्यारह, उन्हें सिंदूर से अच्छे से सजाकर — जिसे सिंदूर से टीकना बोलते हैं — तब रखें।
नारियल की विधि अलग वीडियो पर टाली गई
कलश के ऊपर नारियल रखने की विधि अलग वीडियो के लिए रखी गई है; यह चर्चा केवल कलश की सामग्री और प्रमाण तक सीमित रही।
वक्ता कहते हैं कि कलश के ऊपर नारियल कैसे रखा जाता है, इसके लिए वे अलग से एक वीडियो बना देंगे। इतना ही केवल इस विषय तक था कि कलश स्थापना में कलश में क्या-क्या डालना है, और कलश को कैसे तथा कहाँ तक रखना है; इसके आगे की विधि, और सेवा-पूजा कैसे करनी चाहिए, वे दूसरे वीडियो में बताएँगे।
वक्ता कहते हैं कि अब इसके पश्चात कलश के ऊपर नारियल रखने की विधि आती है। नारियल कलश के ऊपर कैसे रखा जाता है, इसके लिए वे अलग से एक वीडियो बना देंगे। वे कहते हैं कि इतना ही इस विषय तक था कि कलश स्थापना में कलश में क्या-क्या डालना है, और कलश को कैसे तथा कहाँ तक रखना है। इसके आगे की विधि वे दूसरे वीडियो में बताएँगे — नारियल की विधि-विधान कैसी होती है, और सेवा-पूजा कैसे करनी चाहिए।
सामान्य तरीका; और यदि कोई मंत्र न आता हो तो क्या पाठ करें
कलश में वस्तुएँ डालते समय क्या पाठ करना चाहिए?
वक्ता कहते हैं कि मंत्रों के साथ डालना एक अलग विषय है; वे यहाँ सामान्य तरीका बता रहे हैं जिससे कोई भी सुनकर आराम से भक्ति पूर्वक कर सके। यदि कोई मंत्र नहीं आता है तो जगदंबा का नाम लेकर, या या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता का पाठ करते हुए, या सर्व मंगल मांगल्य मंत्र का पाठ करते हुए प्रत्येक वस्तु डालें। जगदंबा अवश्य उसे स्वीकार करेंगी।
मुख दबाकर चंदन, तीनों सिक्के और पंचरत्न निकाल लेना
विसर्जन से पहले कलश में से क्या-क्या निकाल लेना चाहिए?
जब नदी में कलश का विसर्जन करते हैं तो कलश के मुख को दबाकर रखें — उसके ऊपर जो नारियल रहेगा उसका विसर्जन पहले हो जाएगा, इसलिए उसे पकड़ करके रखें। उसके पश्चात भीतर का पंचरत्न, जितने भी सिक्के हैं, चंदन की लकड़ी इत्यादि निकाल लेनी चाहिए। चंदन की लकड़ी, तीनों सिक्के और पंचरत्न निकाल लीजिए; बाकी सभी चीज़ें उसी में छोड़ देनी चाहिए, और कलश का विसर्जन हो जाएगा।
वक्ता कहते हैं कि कलश से संबंधित एक दूसरा विषय विसर्जन का है। जब आप कलश विसर्जन करेंगे और विसर्जन करने के लिए उसे हिलाएंगे, तो यह ध्यान रखिए। जब नदी में आप कलश को विसर्जन करते हैं तो कलश के मुख को दबा करके रखें। यानी उसके ऊपर जो नारियल रहेगा उसका विसर्जन पहले हो जाएगा, इसलिए उसे पकड़ करके रखें। उसके पश्चात उसके भीतर का पंचरत्न, जितने भी सिक्के हैं, जो चंदन की लकड़ी इत्यादि है — उन सभी चीज़ों को निकाल लेना चाहिए। चंदन की लकड़ी, तीनों सिक्का, पंचरत्न — इन सभी चीज़ों को निकाल लीजिए। बाकी सभी चीज़ें उसी में छोड़ देनी चाहिए, और कलश का विसर्जन हो जाएगा।
लाल वस्त्र में बांधकर पूजन स्थान में रखें और पुनः प्रयोग करें
कलश से निकाली गई वस्तुएँ अगले वर्ष फिर प्रयोग की जा सकती हैं?
हाँ। इन सभी चीज़ों को लाल वस्त्र में बांध करके रख दें; अगली बार पुनः इन्हीं चीज़ों का प्रयोग कलश में बिल्कुल कर सकते हैं — इसी चंदन की लकड़ी का, इन्हीं सभी चीज़ों का। घर में अच्छे स्थान पर रखें, पूजन के स्थान में रखें, पूजा करें, और पुनः इनका प्रयोग करें। इसमें कोई दोष नहीं है और बार-बार इनका प्रयोग किया जा सकता है। चाहें तो चंदन की लकड़ी बदल लें, पर यदि आप सोने का सिक्का और सही वाला पंचरत्न प्रयोग कर रहे हैं तो दोबारा उनका प्रयोग अवश्य कर सकते हैं।
वक्ता कहते हैं कि इन सभी चीज़ों को लाल वस्त्र में बांध करके रख दें। अगली बार पुनः इसी चीज़ का प्रयोग कलश में आप दोबारा बिल्कुल कर सकते हैं — इसी चंदन की लकड़ी का, इन्हीं सभी चीज़ों का। घर में अच्छे स्थान पर रखें, पूजन के स्थान में रखें, पूजा करें, और पुनः इसका प्रयोग कर सकते हैं। इसमें कोई दोष नहीं है। बार-बार इसका प्रयोग आप कर सकते हैं। चाहें तो चंदन की लकड़ी बदल लीजिए; लेकिन सिक्के के विषय में, यदि आप सोने का सिक्का प्रयोग कर रहे हैं और सही वाला पंचरत्न प्रयोग कर रहे हैं, तो दोबारा इसका प्रयोग आप अवश्य कर सकते हैं।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।