कार्तिकेय जन्म कथा: शिव महापुराण कुमार खंड

भगवान कार्तिकेय के जन्म की कथा पर प्रवचन।

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Questions this answers

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01

शिव महापुराण सुनने से पाप नष्ट क्यों होते हैं, और वह प्रभावी किससे बनता है?

शिव महापुराण श्रवण से पाप नाश क्यों

· 01:00–04:56 · Also a question

शिव महापुराण के माहात्म्य के अनुसार उसका पाठ, वाचन अथवा श्रवण शिवलोक में निवास दिलाता है और पूर्व पापों का नाश करता है — किंतु यह फल तभी मिलता है जब श्रवण से सच्चा आत्मचिंतन और आचरण सुधार हो, केवल निष्क्रिय सुन लेने से नहीं।

02

नवविवाहित दंपत्ति के एकांत में विघ्न डालने वाले के लिए शास्त्रों में क्या दंड बताया गया है?

दंपति के एकांत में विघ्न का दंड

· 04:57–10:30 · Also a question

शिव महापुराण में भगवान विष्णु के उपदेश के अनुसार, नवविवाहित दंपत्ति के एकांत में जान-बूझकर विघ्न डालना — शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से अथवा तंत्र-मंत्र द्वारा — अपने ही जीवनसाथी और संतान से वियोग, विद्या तथा यश का नाश, दरिद्रता, और कालसूत्र नरक में एक लाख वर्ष का वास कराता है।

03

दुर्वासा, कामदेव, गौतम, हरिश्चंद्र और विश्वामित्र सभी को इस अपराध से पत्नी, संतान या राज्य का वियोग भोगना पड़ा, और मुक्ति केवल शिव की उपासना से मिली

इसके भोगी पौराणिक पात्र और उनकी मुक्ति

· 10:31–12:55

महर्षि दुर्वासा, कामदेव और बृहस्पति, महर्षि गौतम तथा चंद्र, और राजा हरिश्चंद्र एवं महर्षि विश्वामित्र — सभी को इस अपराध के कारण पत्नी, संतान अथवा राज्य से वियोग भोगना पड़ा, और इनमें से प्रत्येक को मुक्ति केवल भगवान शिव की भक्तिपूर्ण उपासना से ही मिली।

04

शिव ने अपना तेज पृथ्वी पर छोड़ दिया कि जो धारण कर सके वह करे, और केवल अग्निदेव कपोत रूप धारण कर उसे ग्रहण कर सके

शिव ने तेज क्यों छोड़ा, धारण किसने किया

· 12:56–16:24

देवताओं के तारकासुर को लेकर किए गए विलाप और प्रार्थनाओं ने अंततः भगवान शिव का पार्वती के साथ एकांत भंग कर दिया; क्रुद्ध होकर उन्होंने अपना दिव्य तेज पृथ्वी पर छोड़ दिया और कहा कि जो इसे धारण कर सके, वह करे — और केवल अग्निदेव ही कपोत का रूप धारण कर उसे ग्रहण कर सके।

05

पार्वती ने देवताओं की पत्नियों को बंध्या होने का और अग्नि को सर्वभक्षी होकर सदैव दाह भोगने का शाप दिया

पार्वती ने देवों और अग्नि को शाप क्यों दिया

· 16:25–17:59

इस बात से क्रुद्ध होकर कि शिव का तेज उनके गर्भ में जाने के बजाय पृथ्वी पर गिर गया, पार्वती ने देवताओं की पत्नियों को बंध्या होने का शाप दिया, और अग्नि को शाप दिया कि वे सर्वभक्षी हो जाएँगे तथा अज्ञानवश उस तेज को ग्रहण करने के कारण सदैव दाहजनित पीड़ा भोगेंगे।

06

अग्नि ने दाहक तेज सप्तऋषियों की छह पत्नियों में स्थापित किया, और वह हिमालय तथा गंगा से होता हुआ सरकंडे के वन में बालक स्कंद के रूप में प्रकट हुआ

तेज की यात्रा शर वन तक

· 18:00–24:36

दाह सहन न कर पाने पर अग्नि ने वह तेज माघ मास में स्नान करती सप्तऋषियों की छह पत्नियों में स्थापित कर दिया; गर्भवती होने पर पतियों द्वारा त्याग दिए जाने पर उन छहों ने वह गर्भ हिमालय पर छोड़ दिया, हिमालय ने उसे गंगा को सौंपा, और गंगा ने अंततः उसे सरकंडे के वन में रख दिया — जहाँ वह बालक स्कंद (कार्तिकेय) के रूप में प्रकट हुआ।

07

भगवान कार्तिकेय का जन्म किस तिथि को हुआ, और जन्म के समय क्या हुआ?

कार्तिकेय का जन्म दिवस और उसके प्रभाव

· 24:37–25:24 · Also a question

भगवान स्कंद (कार्तिकेय) मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को प्रकट हुए, जिससे तीनों लोकों में मंगल छा गया और असुरों के लोकों में उथल-पुथल मच गई।

भगवान स्कंद (कार्तिकेय) मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पृथ्वी पर प्रकट हुए। उनके जन्म से तीनों लोकों में मंगल का संचार हुआ और विशेष रूप से असुरों के लोकों में उथल-पुथल उत्पन्न हो गई।

08

क्षत्रिय कुल में जन्मे होने पर भी महर्षि विश्वामित्र भगवान कार्तिकेय के पुरोहित कैसे बने?

विश्वामित्र कार्तिकेय के पुरोहित क्यों बने

· 25:25–27:35 · Also a question

जब नवजात स्कंद (कार्तिकेय) ने राजा गाधि के पुत्र, जन्म से क्षत्रिय विश्वामित्र से अपने वैदिक संस्कार कराने और पुरोहित बनने को कहा, तब कार्तिकेय ने दिव्य आदेश से उन्हें ब्रह्मर्षि घोषित किया, और बाद में दिव्य ज्ञान देकर उन्हें श्रेष्ठ ब्राह्मणों में प्रतिष्ठित कर दिया।

09

शाखा, विशाखा, नैगम और स्कंद नामक चार वीर कैसे प्रकट हुए, और उनके नामों का नित्य स्मरण क्यों किया जाता है?

चार वीर और उनके नामों का नित्य स्मरण

· 27:36–30:13 · Also a question

जब स्कंद (कार्तिकेय) ने अकेले ही आक्रमण करती असुर सेना का नाश कर दिया, तो चकित इंद्र ने उन पर वज्र का प्रहार किया — दाहिने भाग, बाएँ भाग और वक्ष पर हुए प्रहारों से क्रमशः शाखा, विशाखा और नैगम नामक वीर प्रकट हुए; इन चारों नामों का नित्य स्मरण पूर्ण रक्षा देने वाला कहा गया है।

10

भगवान कार्तिकेय के छह मुख क्यों हैं?

कार्तिकेय के छह मुख क्यों

· 30:14–36:34 · Also a question

जब छह दिव्य कन्याओं, कृत्तिका, में से प्रत्येक ने उस नवजात बालक को अपना पुत्र मानकर स्तनपान कराने की इच्छा की, तो स्कंद (कार्तिकेय) ने छह मुख प्रकट कर लिए ताकि वे एक साथ छहों का दुग्धपान कर सकें — यही उनके षडानन नाम का कारण है।

11

कैलाश पर्वत पर हुए राज्याभिषेक में देवताओं ने कार्तिकेय को कौन से अस्त्र और शक्तियाँ प्रदान कीं?

राज्याभिषेक पर प्राप्त अस्त्र

· 36:35–48:57 · Also a question

कैलाश पर्वत पर हुए विधिवत राज्याभिषेक में देवताओं ने स्कंद (कार्तिकेय) को अपने सर्वश्रेष्ठ अस्त्र और शक्तियाँ अर्पित कीं — विष्णु का सुदर्शन चक्र, शिव का त्रिशूल और पाशुपतास्त्र, ब्रह्मा के वेद और ब्रह्मास्त्र, तथा इंद्र का ऐरावत और वज्र — और उसके बाद विष्णु ने उन्हें विधिवत ब्रह्मांड का आधिपत्य सौंपा।

12

वह अज संपूर्ण ब्रह्मांड का भार लेकर एक ही क्षण में समस्त लोकों की परिक्रमा कर आया, और कार्तिकेय ने उसका वध वर्जित कर अपनी कृपा से यज्ञ की पूर्णता का आश्वासन दिया

पवित्र अज की कथा

· 52:50–57:56

जब अजमेध यज्ञ के लिए रखा गया एक ब्राह्मण का अज भागकर वैकुंठ में उत्पात मचाता हुआ मिला, तब स्कंद (कार्तिकेय) उस पर सवार हुए और वह अज संपूर्ण ब्रह्मांड का भार लेकर एक ही क्षण में समस्त लोकों की परिक्रमा कर आया — तब कार्तिकेय ने कहा कि इस पशु का वध न किया जाए, और अपनी कृपा से यज्ञ की पूर्णता का आश्वासन दिया।

13

भगवान कार्तिकेय की उपासना और उनके जन्म प्रसंग के श्रवण से क्या लाभ होते हैं?

कार्तिकेय उपासना का फल

· 57:57–1:01:30 · Also a question

स्कंद (कार्तिकेय) की उपासना और उनके जन्म प्रसंग का श्रवण साधना के विघ्नों को दूर करता है, मंगल दोष को शांत करता है, संतानहीन दंपत्तियों को श्रेष्ठ संतान देता है, और उनकी शक्ति देवसेना (षष्ठी देवी) के द्वारा 13 वर्ष तक के बालकों की रक्षा करता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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