होलिका की रात्रि में मंत्र जाप कैसे करें कि मंत्र सिद्ध हो

होलिका की रात्रि में साबर मंत्र का जाप कैसे करें कि मंत्र सिद्ध हो जाए, इस पर टिप्पणियाँ।

8 notes, in the order they are taught. Jump to any one.

The notes
EN हिंदी
01

होलिका की रात्रि में साबर मंत्र सिद्ध करने की पूर्व-शर्त: मंत्र पहले से जाप में हो

होलिका की रात्रि में पहली बार का मंत्र नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:11–01:13

वक्ता कहते हैं कि होलिका की रात्रि में जिस सबर मंत्र को जागृत करना हो, वह कभी ऐसा मंत्र न हो जिसका जाप उसी रात पहली बार किया जा रहा हो — उसका कोई विशेष लाभ नहीं मिलता। मंत्र पहले से कंठस्थ हो और नियमित जाप में हो। गुरुमुख से प्राप्त साबर मंत्र पहले से सर्वसमर्थ सिद्ध होता है और होलिका की रात्रि में उसका पुनः पुरश्चरण उसे अमोघ बना देता है; स्वयं इंटरनेट, YouTube, Facebook या किसी ग्रंथ से लिया हुआ मंत्र होलिका से कम से कम चार-पाँच दिन पहले, या एकादशी से, एक निर्धारित समय पर प्रतिदिन एक माला जाप के साथ शुरू कर देना चाहिए।

02

होलिका से पहले के दिनों के जाप की व्यवस्था: देवता के अनुसार वस्त्र, आसन, दिशा, ज्योत, माला और दैनिक संख्या

विधि देवता के सूक्ष्म स्वरूप के अनुसार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:14–02:14

वक्ता कहते हैं कि जाप की विधि मंत्र के देवता के अनुसार हो: भगवती काली जैसे उग्र देव हों तो लाल वस्त्र, हनुमान जी हों तो लाल या पीला, पीताम्बरा हों तो पीला, भैरव जी हों तो पीला या लाल। आसन कंबल या कुश आसन का हो, दिशा सदैव पूर्व या उत्तर, और जब तक जाप चले एक ज्योत प्रज्वलित रहे; रुद्राक्ष की माला सर्वोत्तम है। भगवती साबरी — जो दुर्गा का एक स्वरूप हैं, शिव के किरातेश्वर अवतार और पार्वती के समय का स्वरूप — तथा अपने कुलदेवी-देवताओं का स्मरण करके प्रतिदिन कम से कम एक माला (108) जाप करें, ताकि तीन-चार दिनों में मंत्र कंठस्थ हो जाए और जाप पहले से चलने लगे।

03

घर में सूतक-पातक के बाद कपूर की अग्नि से माला की शुद्धि

अग्नि जिसे छू ले वह शुद्ध

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:15–02:49

वक्ता कहते हैं कि अग्नि देव को वरदान है कि वे जिसे स्पर्श कर दें वह शुद्ध हो जाता है। इसलिए घर में सूतक-पातक पड़ने के बाद जब साधक साधना पुनः आरंभ करता है, तो धागे में पिरोई माला की शुचिता लौटाने के लिए उसे अग्नि स्पर्श कराने का प्रावधान है: कपूर की अग्नि प्रज्वलित करें, अग्नि देव का ध्यान करें और माला को उसमें हल्का सा स्पर्श कराते हुए पार करें — उस स्पर्श मात्र से माला शुद्ध हो जाती है।

04

होलिका की रात्रि के जाप का समय: मध्यरात्रि और स्थानीय होलिका दहन दोनों जाप के भीतर आएँ

अग्नि के पास बैठें, माला न गिनें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:50–04:10

वक्ता होलिका की रात्रि के जप के विषय में दो बातें कहते हैं: जब भी शुरू करें, मध्यरात्रि उस बैठक के भीतर अवश्य आ जाए — दहन चाहे 7, 9, 12 या 2 बजे हो — और अपने क्षेत्र में जिस समय वास्तव में होलिका दहन हो रहा हो उस समय भी जाप चलता रहे। दहन 9 बजे हो तो 8:30 से बैठें और 9:30 या 10 बजे तक जाप करें। सर्वोत्तम यह है कि दहन के पास ही थोड़ा किनारे, जहाँ लोग देख न सकें, बैठकर जब तक अग्नि जलती रहे तब तक जाप करते रहें; तब माला की गिनती का कोई महत्व नहीं — एक हो, दस हो या सौ — मंत्र की क्षमता में अतिशय वृद्धि होती है और वह अमोघ हो जाता है।

05

घर के बने भोजन को होलिका अग्नि में अर्पित करना: मंत्र पौष्टिक होता है और उग्र मंत्रों की हानि रुकती है

रात्रि का सबसे महत्वपूर्ण चरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:11–05:00

वक्ता इसे सबसे महत्वपूर्ण बात कहते हैं: उस संध्या घर में रात के भोजन के लिए जो भी अन्न बना हो, उसे होलिका की अग्नि में नैवेद्य रूप में अर्पित करना ही चाहिए — जाप से पहले या बाद में, जैसा दहन का समय पड़े — और जाप करने वाला साधक उसे अपने हाथ से ले जाकर अर्पित करे। फिर दहन के समय बैठकर जाप करने पर मंत्र पौष्टिक और पुष्टता बढ़ाने वाला हो जाता है। वे जोड़ते हैं कि इससे उग्रात्मक मंत्रों के जाप से पड़ने वाला तिर्यक् प्रभाव भी नहीं पड़ता: अन्न-संबंधी कष्ट नहीं होगा, धन की उतनी हानि नहीं होगी, श्रीविहीनता और विपन्नता नहीं आएगी — क्योंकि साधक एक पावक अग्नि को, जो नारायणी स्वरूपिणी और श्री बढ़ाने वाली है, संतुष्ट कर रहा है और उसके समक्ष बैठकर जाप कर रहा है।

06

बिना उचित विधि श्मशानिक साबर मंत्र सिद्ध करने का जोखिम: रुग्णता और श्री की हानि

मंत्र की दुहाई अलक्ष्मी शक्तियों का आवाहन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:01–06:24

वक्ता कहते हैं कि श्मशान से संबंधित उग्र शक्तियों के साबर मंत्र — श्मशान काली का मंत्र, रक्षा काली के श्मशानिक स्वरूपों के मंत्र, श्मशान चण्डिका का मंत्र, अघोर काली का मंत्र — जिन्हें लोग शत्रु को परास्त करने के लिए उग्रता में सिद्ध करते हैं, बिना सही विधि-विधान के सिद्ध करने पर शरीर में रुग्णता लाते हैं, और कहा गया है कि शरीर से श्री तत्व का ह्रास होता है। गृहस्थ के लिए कारण यह है कि ऐसे मंत्र में दुहाई लगती है — किसी को कुछ बोला जा रहा है — इसलिए उसमें अलक्ष्मी स्वरूप वाली महाशक्तियों और योगिनी की शक्तियाँ विराजमान रहती हैं, और बहुत बार श्री की हानि होती है। वे कहते हैं कि जो इन्हें प्रैक्टिकली करते हैं वही समझेंगे; जिनके लिए यह केवल सुनने का विषय है वे कुछ भी बोल सकते हैं, पर यह सत्य है।

07

जलती हुई होलिका अग्नि की भस्म लगाना ताकि मंत्र सूक्ष्म शरीर में प्रतिष्ठित हो

मस्तक, हृदय, छाती, नाभि — अग्नि रहते-रहते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:01–07:46

वक्ता कहते हैं कि जब होलिका दहन पूर्ण हो चुका हो पर अग्नि अभी हल्की-फुल्की जल रही हो और पूरी तरह राख न हुई हो — अंतिम अग्नि जो अब बुझे तब बुझे — तब साधक उसे अपनी आँखों के समक्ष देखता रहे। जब तक अग्नि शेष है, उसी समय निकाली हुई भस्म भगवान का स्मरण करते हुए या उसी मंत्र का जाप करते हुए मस्तक, हृदय, दोनों छाती, नाभि और पूरे शरीर पर लगाएँ। इससे, वे कहते हैं, मंत्र पूर्ण शक्ति के साथ साधक के सूक्ष्म शरीर में प्रतिष्ठित हो जाता है।

08

सावधानी: होलिका की अग्नि बुझ जाने के बाद उसकी भस्म नहीं

ज्वाला के साथ दिव्यता जाती है; बाद में उतारे और टोटके

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:47–09:05

वक्ता कहते हैं कि होलिका में दिव्यता तभी तक है जब तक अग्नि उपस्थित है। अग्नि समाप्त होने पर लोग अपने घर के उतारा वहाँ डालते हैं — जो डालना भी है — और वहाँ अनेक टोटके, विद्वेषण क्रियाएँ, उतारे और घर की अलाई-बलाई भी छोड़ी जाती हैं; कुछ लोग शराब भी ढार देते हैं। यदि साधक देख नहीं रहा था और शांत हुई अग्नि की भस्म निकाले जिस पर किसी ने कुछ रख दिया हो, तो वह उसके शरीर में लग जाती है और लेने के देने पड़ जाते हैं। भस्म केवल प्रज्वलित अग्नि से ली जाती है, जैसे हवन के अंत में अग्नि कोण से थोड़ी सी निकालकर हुंकार आदि मंत्रों से मस्तक पर लगाई जाती है। यदि माला पूरी होने से पहले अग्नि बुझ गई हो और किसी ने वहाँ कुछ कर दिया हो, तो वे कहते हैं, यह काम बिल्कुल न करें; शुद्धता से हो तो अवश्य लाभ मिलता है।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic