होलिका की रात्रि में मंत्र जाप कैसे करें कि मंत्र सिद्ध हो

होलिका की रात्रि में साबर मंत्र का जाप कैसे करें कि मंत्र सिद्ध हो जाए, इस पर टिप्पणियाँ।

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01

होलिका की रात्रि में साबर मंत्र जागृत करने की पूर्व-शर्तें

होलिका की रात्रि में किसी मंत्र को सिद्ध करने से पहले उस मंत्र के विषय में क्या पहले से सत्य होना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:11–01:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबर मंत्र वही होना चाहिए जो साधक को पहले से कंठस्थ हो और जिसका वह पहले से जाप करता आ रहा हो — होलिका की रात्रि में पहली बार किसी मंत्र को जागृत करने का प्रयास न करें, उसका कोई विशेष लाभ नहीं मिलता।

02

होलिका की रात्रि के जाप की तैयारी: वस्त्र, दिशा और माला

वस्त्र देवता के अनुसार — उग्र स्वरूपों के लिए लाल, पीतांबरा के लिए पीला, हनुमान जी और भैरव जी के लिए दोनों में से कोई भी — कंबल या कुशा के आसन पर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख, और अखंड ज्योत प्रज्वलित।

· Reviewed Sep 2026 · 01:14–02:17

वक्ता कहते हैं कि जाप की विधि उस देवता की सूक्ष्मता और स्वरूप के अनुसार हो — उग्र देवताओं के लिए लाल वस्त्र, हनुमान जी के लिए लाल या पीला, पीताम्बरा के लिए पीला, और भैरव जी के लिए पीला या लाल — आसन कंबल या कुशा का हो, दिशा पूर्व या उत्तर, और एक ज्योत निरंतर प्रज्वलित रहे।

03

सूतक-पातक के बाद कपूर की अग्नि से माला की शुद्धि

घर में सूतक-पातक के बाद माला को अग्नि से किस प्रकार शुद्ध किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:18–02:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अग्नि देव को यह वरदान है कि वे जिस वस्तु को स्पर्श कर दें वह शुद्ध हो जाती है, इसलिए घर में सूतक-पातक पड़ जाने के बाद जब साधक अपनी साधना पुनः आरंभ करता है, तो माला को कपूर की प्रज्वलित अग्नि में हल्का सा स्पर्श कराकर उसकी शुचिता लौटाई जा सकती है।

04

स्थानीय होलिका दहन के अनुसार साबर मंत्र जाप का समय

अपने क्षेत्र के होलिका दहन के समय के अनुसार जाप का समय किस प्रकार निर्धारित करें?

· Reviewed Sep 2026 · 02:50–04:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जप का समय ऐसा रखें कि मध्यरात्रि उसी के भीतर आ जाए, और साथ ही अपने क्षेत्र में जिस समय होलिका दहन हो रहा हो उस समय भी जाप चलता रहे — कितनी माला हुई, इसकी गिनती की आवश्यकता नहीं।

05

होलिका की अग्नि में घर के बने नैवेद्य का अर्पण

उस संध्या घर में जो भी अन्न बना हो, उसे साधक स्वयं ले जाकर जाप से पहले या बाद में होलिका की अग्नि को अर्पित करे, जिससे मंत्र पौष्टिक हो जाता है।

· Reviewed Sep 2026 · 04:11–05:00

वक्ता कहते हैं कि उस संध्या घर में जो भी भोजन बना हो, उसे साधक अपने हाथ से ले जाकर होलिका की अग्नि को नैवेद्य के रूप में अर्पित करे — जाप से पहले या बाद में — जिससे मंत्र पौष्टिक और पुष्टता को बढ़ाने वाला हो जाता है।

06

बिना विधि-विधान उग्र श्मशानिक साबर मंत्र सिद्ध करने के जोखिम

उग्र श्मशानिक साबर मंत्रों को बिना सही विधि-विधान के जागृत करने में क्या जोखिम है?

· Reviewed Sep 2026 · 05:01–06:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्मशान से संबंधित उग्र सबर मंत्र — जैसे श्मशान कालिका (श्मशान काली) या श्मशान चण्डिका के मंत्र — बिना सही विधि के सिद्ध करने पर शरीर में रुग्णता आती है और शरीर से श्री तत्व का ह्रास होता है, क्योंकि ऐसे मंत्रों में अलक्ष्मी स्वरूप वाली महाशक्तियों और योगिनी की शक्तियाँ दुहाई के रूप में विराजमान रहती हैं।

07

उग्र मंत्र जाप के प्रतिकार में होलिका अग्नि का नैवेद्य

उग्र मंत्र के जाप से पहले होलिका की अग्नि में घर का बना अन्न अर्पित करने से उस जाप का तिर्यक प्रभाव नहीं पड़ता, ऐसा वक्ता कहते हैं।

· Reviewed Sep 2026 · 06:25–07:00

वक्ता कहते हैं कि उग्र मंत्र का जाप करने से पहले होलिका की अग्नि में घर का बना अन्न अर्पित करने पर वह अन्न-संबंधी कष्ट, धन हानि और श्री तत्व की हानि नहीं होती जो ऐसे जाप से अन्यथा हो सकती है।

08

अग्नि के प्रज्वलित रहते ही होलिका की भस्म लगाना

अभी जल रही होलिका की अग्नि की राख शरीर पर किस प्रकार लगानी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 07:01–07:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब तक होलिका की अग्नि प्रज्वलित है — पूर्ण रूप से राख होने से पहले — उसी समय की भस्म मस्तक, हृदय, दोनों छाती और नाभि पर भगवान का स्मरण करते हुए अथवा अपने मंत्र का जाप करते हुए लगानी चाहिए, जिससे मंत्र पूर्ण शक्ति के साथ सूक्ष्म शरीर में प्रतिष्ठित हो जाता है।

09

अग्नि बुझ जाने के बाद भस्म लेने की मनाही

होलिका की अग्नि बुझ जाने के बाद उसकी राख क्यों नहीं लेनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 07:47–09:13 · Also a question

वक्ता चेतावनी देते हैं कि दिव्यता तभी तक है जब तक होलिका की अग्नि प्रज्वलित है; अग्नि शांत हो जाने के बाद — जब लोग अपने घर का उतारा वहाँ डाल चुके हों या वहाँ अशुभ क्रियाएँ हो चुकी हों — ली गई भस्म उनकी बाधा साधक के शरीर में लगा सकती है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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