देहरी रक्षा की सत्य घटना — नवविवाहिता पर अभिचार, कुल शक्ति का हथियार बनना, और काल भैरव एकाक्षरी से सप्तश्लोकी संपुट विधान

भगतवाल से पलटी गई नवविवाहिता पर अभिचार की सत्य घटना, और उसके बाद वक्ता का दहलीज रक्षा विधान: सप्तश्लोकी, काल भैरव एकाक्षरी, ताँबे के लोटे पर संपुट पाठ, साबर मंत्र, और द्वेष से प्रयोग न करने की चेतावनी।

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01

गाँव के घर में अभिचार कैसे रखा जाता है

अभिमंत्रित वस्तु घर में लाकर चौखट, ब्रह्म भाग या बिस्तर में रख दी जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:21–00:49

वक्ता कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में जब किसी को किसी का घर तंत्र से बर्बाद करना होता है तो वहाँ की प्रक्रिया बड़ी अलग होती है: जिस भी चीज़ के माध्यम से अभिचार करना हो, उसे लेकर वे अवश्य घर के भीतर जाएँगे और चौखट पर, घर के भीतर ब्रह्म भाग में, या जिस पुरुष या स्त्री को परेशान करना हो उसके बिस्तर में रखकर चले आते हैं। स्त्रियाँ, वे कहते हैं, यह काम आराम से कर देती हैं। यह घटना, वे कहते हैं, ठीक ऐसे ही की गई थी।

02

नवविवाहिता के पहले तीन महीने क्रूशियल पीरियड क्यों होते हैं

दहेज और सुंदरता की ईर्ष्या, और वे पुराने नियम जो इस अवधि की रक्षा करते थे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:50–01:59

वक्ता कहते हैं कि विवाह करके जब कोई कन्या घर आती है तो उसके पहले तीन महीने बहुत क्रूशियल पीरियड होते हैं जिनमें उस पर अभिचार हो सकता है। इसीलिए कहा जाता है कि उस समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, और बहुत से नियम होते हैं: सिंदूर भरने का नियम, पूजन-पाठ का नियम, तीन महीने के बाद ही कहीं जाने का नियम; आज, वे कहते हैं, इतने नियम कोई मानता नहीं। उनकी सुनाई घटना में उनके गृह तंत्र परिवार के एक साधक का विवाह हुआ था और दहेज अच्छा-खासा मिला था, जिस पर गाँव में ईर्ष्या होती है कि किसके बेटे को ज़्यादा मिला और इतनी सुंदर पत्नी मिली; और क्योंकि नई बहू से आस-पड़ोस के लोग आते-जाते और हँसी-मज़ाक करते हैं, द्वेष रखने वाले एक परिवार ने इसी का फायदा उठाकर उस बच्ची पर तंत्र कर दिया।

03

नवविवाहिता पर अभिचार के लक्षण, जिन्हें विवाह के बाद की मनोवैज्ञानिक समस्या समझ लिया गया

अनिद्रा, सिरदर्द, दस-बारह दिन में पीरियड, फिर चिड़चिड़ापन और क्रोध

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:00–03:37

वक्ता कहते हैं कि अभिचार विवाह के लगभग पंद्रह-सोलह दिन बाद दिखने लगा: बहू रात को सो नहीं पाती, सुबह ठीक से उठ नहीं पाती, दिन भर सिर में दर्द रहता, मासिक पीरियड अनियमित हो गए, और सबसे बड़ी बात कि दस-बारह दिन बीतते ही फिर पीरियड आ जाता। लोग सामान्यतः कहते हैं कि विवाह के बाद ऐसी समस्या होती है, थोड़ा साइकोलॉजिकल इश्यू भी होता है, तो उसे गायनो को दिखाकर दवाई दिलाई गई और सारा विषय सामान्य समझा गया। तीन-चार महीने बाद समस्या और बढ़ी और वह काफी चिड़चिड़ी होने लगी, जो वे कहते हैं कि बीमारी का सामान्य प्रभाव है; पर सौम्य ससुराल वालों ने, जिनके घर में यह पहला विवाह था, उसके क्रोध को नई जगह और गाँव की बंदिशों की फ्रस्ट्रेशन समझा, एक मुहूर्त रखा, और उसे मायके भेज दिया।

04

पहली होली ससुराल में नहीं मनाई जाती, और होलिका अष्टक वह समय जब आवेश तीव्र होता है

होली के आसपास आवेश पूर्ण हो गया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:38–04:16

वक्ता वह नियम याद दिलाते हैं कि पत्नी को होली से पहले मायके भेजा जाता है, क्योंकि विवाह के बाद पहली होली ससुराल में नहीं मनानी चाहिए। घटना में बहू को होली के आसपास वैसे भी जाना था, पर समस्या बढ़ने से उसे एकाध महीने पहले ही भेज दिया गया। जब होलिका का आठ दिन का अष्टक लगा, वे कहते हैं, तो मायके में उसकी समस्या बढ़ने लगी, और होली के एकाध दिन के आसपास वह पूरी तरह आवेशित हो गई और खेलना शुरू कर दिया, यानी आवेश खुलकर प्रकट हो गया।

05

घटना: काउंसलिंग सत्र में प्रकट हुआ आवेश, और भेजी गई शक्ति की ओझाओं को ललकार

पढ़े-लिखे परिवार नकारते हैं; इंजेक्शन से भी शांत नहीं हुई

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:17–06:59

वक्ता कहते हैं कि बहू का परिवार पढ़ा-लिखा, मॉडर्न, संपन्न और रुतबे वाला था, और ऐसे परिवार, वे कहते हैं, अधिकतर इन चीज़ों को नकार देते हैं; उन्हें शंका हुई कि ससुराल में प्रताड़ना हुई है और वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो रही है, और उसे काउंसलिंग के लिए ले गए, और जब उसने कहा कि उसकी समस्या कुछ अलग है तो चुप करा दिया। डॉक्टर ने अपनी सामान्य विधि से मरीज़ को क्रोध दिलाया तो वह "मंजुलिका" बन गई, टेबल उठा ली, जिस पर सबसे ज़्यादा उछलने वाली भाभी सबसे पहले भागी; चिल्लाना बढ़ता गया, और इंजेक्शन का भी विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। वे कहते हैं कि काउंसलिंग बहुत मामलों में मदद करती है, हर किसी पर भूत-प्रेत की समस्या नहीं होती, पर यहाँ विषय असली था। पति को बुलाया गया, और जब ओझा और सोखा दिखाए-सुनाए गए तो शक्ति शरीर पर आकर ललकारती: तेरे में औकात है तो तू बता मैं कौन हूँ, और तू तो फलाने चीज़ की पूजा करता है, जो प्रायः सही निकलता; पर उस क्षमता का साधक जल्दी नहीं मिला।

06

कुल-पूजित शक्ति को अभिचार का हथियार कैसे बनाया जाता है

बलि बाबा, बुलाकी मसान जैसी शक्तियाँ, अक्षत के माध्यम से पीड़ित पर चलाई गईं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:00–08:35

वक्ता समझाते हैं कि भेजी गई चीज़ किसी के कुल में पूजित कोई पुरानी शक्ति थी, बलि बाबा या बुलाकी मसान जैसी। ऐसी शक्तियाँ, वे कहते हैं, एक स्तर पर ठीक हैं, पर जब इन्हें नकारात्मक तरीके से चलाने का विषय उत्पन्न हो जाता है तो बड़ी दिक्कत हो जाती है, वे अपनी अलग चाल चलती हैं और पचास झंझटें हो जाती हैं, जब तक कि केवल भगतवाल की पद्धति से न चलाई जाएँ। हमला करने वाले परिवार ने अपनी कुल-पूजित शक्ति को अक्षत आदि या ऐसे किसी माध्यम से बहू पर चला दिया था; वह तगड़ी चीज़ है, उनके घर में उसकी नित्य पूजा चल रही है और वह पीड़ित पर चढ़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बहुत आम है, वे कहते हैं: प्रेतत्व या उपदेव से संबंधित कोई शक्ति किसी के घर में कुल शक्ति के रूप में पूजित हो तो सबसे पहले प्रहार करने वाला व्यक्ति उसी को चला देता है। क्योंकि शक्ति बार-बार ऐसा बोल रही थी, गाँव के लोग समझ गए कि यह पूजित शक्ति है।

07

भेजी गई कुल शक्ति को पलटना: क्षेत्रपाल के माध्यम से पहचान, भगतवाल के हिसाब से भोग-भेंट, और वापस भेजना

अनुभवी ग्रामीण साधकों ने उसे पलटा और शरीर को बाँधा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:36–10:15

वक्ता कहते हैं कि बुज़ुर्ग, अनुभवी ग्रामीण साधकों ने वह प्रक्रिया अपनाई जिससे हल-सृष्टि के समय गुरु उपदेश के माध्यम से शिष्य को सब कुछ देता है, जो उन्होंने एक और वीडियो में समझाई है। हमला करने वालों का स्थान किस क्षेत्र में है यह पता था, तो क्षेत्रपाल आदि के माध्यम से उन्होंने केवल इतना निकाला कि यह कौन सी शक्ति है और किससे संबंधित है; पता चलते ही पहले शुद्ध भगतवाल के हिसाब से, यानी कितने में उतारना है, डबल में या चार में, सही भोग-भेंट से उसे मनाया। फिर, सारी जानकारी हो जाने पर, उसे उतारा, और जिनकी शक्ति थी उनके घर वापस भेजने से पहले अपनी कुछ चीज़ें लगाकर भेज दिया, पूरा तांत्रिक विद्या वाला पलटना विषय। शरीर को बाँधकर सुरक्षित किया, और समस्या लगभग नब्बे प्रतिशत हल हो गई, जबकि करने वालों के घर में उत्पात मचना शुरू हुआ और सूचना आने लगी, जिससे परिवार को भी पता चल गया कि किसके घर की बात थी। होली के बाद वह ससुराल लौट आई, शरीर में कोई विशेष समस्या नहीं थी, भगत जी का बताया वह करती रही।

08

केवल घर का बंधन दहलीज़ लाँघकर लाए गए प्रयोग को क्यों नहीं रोक सकता

दहलीज़ पर ही प्रचंड शक्ति का पूजन करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:16–11:15

वक्ता कहते हैं कि पहली घटना के बाद परिवार ने पूछा कि आगे ये लोग दोबारा न कर पाएँ इसके लिए क्या किया जाए, क्योंकि स्पष्ट था कि वे फिर आएँगे, और अपने भारत में कोई सीधे यह कहकर नहीं लड़ता कि तुमने किया; ऐसा हो तो सीधे मार होती है। उन्होंने कहा कि घर को कितने भी सिस्टम से बाँध लें, छान लें, जब हमला करने वाले पूरे अंदर घुसकर दहलीज़ लाँघ रहे हों तो संभावना थोड़ी कम हो सकती है, प्रयोग का प्रभाव थोड़ा कम हो सकता है, पर प्रभाव तो पड़ेगा ही। इसलिए उन्होंने कहा कि दहलीज़ पर ही प्रचंड शक्ति का पूजन करें, और एक विधान बताया जिसे वे सबसे पहला और बहुत सरल विधान कहते हैं, जिसे कोई भी कर सकता है और जिसका प्रभाव बहुत तीव्र और तीक्ष्ण होता है।

09

दहलीज़ रक्षा विधान: सप्तश्लोकी सिद्धि, काल भैरव एकाक्षरी जप, ताँबे के लोटे पर संपुट पाठ, और दहलीज़ पर जल

7000 जप, फिर 4 लाख जप, फिर संपुट पाठ; साबर मंत्र नहीं बताया गया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:16–13:42

वक्ता के बताए विधान के तीन भाग हैं। पहला, सप्तश्लोकी को 7000 जप से सिद्ध करना; साधक ने यह छह महीने में किया, शारदीय नवरात्र से चैत्र नवरात्र से थोड़ा पहले तक, हालाँकि तीन महीने में पूरा हो गया था। दूसरा, चैत्र नवरात्रि में भगवान काल भैरव का एकाक्षरी बीज, केवल बीज मात्र, लेकर सवा लाख जप, जो बढ़ाकर 4 लाख किया गया ताकि बीज प्रचंड हो जाए; साधक विवाह से ही यज्ञोपवीत धारण किए थे और अच्छे आचार्य के गायत्री उपदेश से ठीक संध्या करते थे। तीसरा, बगलामुखी जयंती से उस एकाक्षरी बीज से सप्तश्लोकी का संपुट पाठ, चैनल पर बताई संपुट विधि से, हाथ में ताँबे का लोटा लेकर जिसमें पानी, गुड़, थोड़े लाल या गुलाब के फूल और हल्का गुलाब का इत्र हो, प्रार्थना करते हुए कि घर का पूर्ण बंधन हो, देहरी पूरी बँध जाए, उस पर भैरव जी का पहरा लगे, और बाहर की जो शक्ति अहित के लिए उसका उल्लंघन करे वह स्वयं नष्ट हो और भैरव जी उसे दंड दें। फिर एक परंपरागत सबर मंत्र, जिसमें तांत्रिक प्रणव और बीज हैं और जिसे उन्होंने निजी रूप से दिया, यहाँ नहीं बताते, उस अभिमंत्रित जल को चलित करता है; उसे दहलीज़ पर दोनों तरफ डाला जाता है, साथ में नियमित देहरी पूजन और आटे का दीपक।

10

दहलीज़ रक्षा का फल: विशुद्ध रक्षात्मक, बिना नाम के संकल्प से 24 घंटे में हमलावरों को दंड

जिस स्तर पर प्रयोग हुआ, उसी स्तर पर जवाब मिला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:43–15:20

वक्ता कहते हैं कि प्रभाव प्रचंड पड़ा: जिस दिन हमलावरों ने दूसरी बार घात किया, उसी दिन 24 घंटे के भीतर उनके घर के दो लोगों का एक साथ एक्सीडेंट हुआ; अक्टूबर 2024 तक एक अभी तक होश में नहीं आया, एक तरह से कोमा में, ब्रेन में समस्या और शायद पैरालिसिस, और दूसरा समय लेकर ठीक हुआ पर स्थिति बहुत खराब है। वे यह नहीं कह रहे कि भैरव जी ने तुरंत उनका अहित कर दिया, पर जिस स्तर पर प्रयोग किया गया था उसी स्तर पर जवाब मिला। जब रक्षात्मक शक्तियों को तीव्रता से जागृत किया जाए, वे कहते हैं, और मन शुद्ध हो, भाव शुद्ध हो, क्रिया-विधि में समर्पण हो, मन में कोई द्वेष न हो, और शरणागत भाव से एक सद्गृहस्थ की भाँति परिवार की रक्षा के लिए किया गया हो, तो देवता दंड देते हैं। यहाँ संकल्प में किसी शत्रु का नाम नहीं लिया गया था; सीधा विषय था कि जो भी ज्ञात-अज्ञात शत्रु हैं, उनका जो भी प्रयोग हो, उसे नष्ट करें या उचित दंड दें, सामान्य रक्षात्मक संकल्प, और यही दंड उन्हें मिला।

11

देहरी और शरीर की रक्षा के लिए कौन सा एकाक्षरी बीज प्रयोग किया जा सकता है?

किसी भी देवता का एकाक्षरी, दीक्षा विधि से, 4 लाख जप और 7000 सप्तश्लोकी, जीवन पर्यंत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:21–16:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे यह आग्रह नहीं करते कि संपुट भैरव जी के एकाक्षरी से ही हो; किसी भी बीजाक्षर का संपुट किया जा सकता है, सौम्य देवताओं का भी, हालाँकि किस देवता के मंत्र का प्रयोग करें यह सामान्य विषय नहीं है। हनुमान जी के एकाक्षरी का, भगवान बटुक भैरव जी के, नरसिंह जी के, भगवती काली के या दुर्गा जी के एकाक्षरी का प्रयोग कर सकते हैं; जो भी हो, कम से कम देव दीक्षा विधि आदि से किसी दिव्य समय में उस मंत्र को ग्रहण करके 4 लाख जप कर लें और सप्तश्लोकी का 7000 जप कर लें, फिर जीवन पर्यंत प्रयोग करें। यह केवल देहरी रक्षण के लिए नहीं, किसी के शरीर के रक्षण और बंधन के लिए भी है, और श्रद्धा से, वे कहते हैं, घर-परिवार या किसी के शरीर की सुरक्षा के लिए कहीं भी बैठकर जीवन भर इसका प्रयोग किया जा सकता है। वे जोड़ते हैं कि इसका एक और पूरा विधान भविष्य में चैनल पर देंगे।

12

सावधानी: जिस पर प्रयोग है उसके प्रति द्वेष रखकर रक्षा प्रयोग कभी न करें; विधि अपने गुरु से फिर लें

द्वेष अपात्र बनाता है और दोष स्वयं पर पड़ता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:13–17:13

वक्ता कहते हैं कि अगर कोई इस प्रकार की किसी विधि का प्रयोग कर रहा है और जिस व्यक्ति के लिए प्रयोग है उसके प्रति मन में अति द्वेष है, बार-बार उस पर कटाक्ष कर रहा है, और मन में गुरु जैसा सम्मान नहीं है, तो वह प्रयोग न करे, न करे। अगर मन में द्वेष आ ही गया है, वे स्पष्ट कहते हैं, तो वह विधि अपने किसी गुरु से पुनः ले ले, ताकि अपना अकल्याण न हो। कोई उनका हित चाहे या बैठकर गाली दे, वह उसकी बात है, पर अपात्र या कुपात्र न बने: द्वेष करके वह विषय करने से अपना अहित होगा, और वे कभी नहीं चाहेंगे कि मंत्र और देवता के कारण किसी का अहित हो। अपने गुरु से उपदेश लेने पर, वे कहते हैं, गुरु समझ जाएँगे कि किस स्तर का विषय है और पूछेंगे; और ऐसे व्यक्ति से द्वेष करने का जो दोष लगे उसका विचार फिर उसके गुरु जी और आराध्य करेंगे, वक्ता को उसमें क्या करना।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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