कुल पितृ, कुलदेवी और अभिचार-ग्रस्त घर के लिए चौखट के तांत्रिक प्रयोग

वक्ता के तीन चौखट प्रयोग — रुष्ट कुल पितरों के लिए कृष्ण पक्ष की सेवा, कुलदेवी और कुल शक्ति के लिए दीपकों और धूनी वाली शुक्ल पक्ष की सेवा, और अभिचार से पीड़ित घर के लिए आर्द्रा नक्षत्र का शिव जल व रोज़ का निर्माल्य — साथ में कौन कर सकता है और बिना चौखट के घर का कोई विकल्प क्यों नहीं।

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01

चौखट पर किए प्रयोग क्यों काम करते हैं: नरसिंह का आसन और कुल की शक्तियाँ

देहरी पर कुल पितृ और रक्षात्मक शक्तियाँ; गोधूलि बेला प्रयोग को तीव्र करती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:03–01:14

वक्ता कहते हैं कि मुख्य द्वार की देहरी, यानी चौखट, भगवान नरसिंह का स्थान और आसन मानी गई है, और वहाँ कुल के पितृ और कुल की रक्षात्मक शक्तियाँ सदैव उपस्थित रहती हैं। गोधूलि बेला में — दिन और रात के बीच की संध्या, जो भगवान नरसिंह का समय है — उस स्थान पर उनके तत्व अवश्य उपस्थित रहते हैं, इसलिए उस समय वहाँ किया गया हर प्रयोग अत्यंत विशेष प्रभाव देता है। वे कहते हैं कि चौखट के माध्यम से घर की सुरक्षा और कुल देवताओं, कुल पितरों की तृप्ति अवश्य हो सकती है।

02

जिस घर में चौखट नहीं है, क्या वहाँ चौखट के प्रयोग किए जा सकते हैं?

चौखट नहीं तो प्रयोग नहीं — किराए के घर में भी लगवा लें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:15–01:41 · Also a question

नहीं — वक्ता स्पष्ट कहते हैं कि जिनके घर में देहरी या चौखट नहीं है, वे ये प्रयोग नहीं कर सकते और उनका कोई विकल्प नहीं है; "बिना चौखट के" करने से कोई लाभ नहीं है। उनका उत्तर है कि चौखट लगवा लीजिए: अपने घर में तो अवश्य, और किराए के घर में भी, क्योंकि आप उसका पैसा दे रहे हैं — यदि वह घर अभी छोड़ना नहीं है तो वहाँ चौखट लगवाने में कोई दोष नहीं है।

03

कुल पितरों के लिए चौखट का प्रयोग कब करना चाहिए

रुष्ट पितृ, कुंडली में पितृ दोष या श्राप, ऊपरी शक्तियाँ और वायव्य बाधा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:42–02:14

वक्ता कहते हैं कि पहला प्रयोग तब है जब यह स्पष्ट हो जाए कि घर के कुल पितृ आपसे रुष्ट और असंतुष्ट हैं, या कुंडली या जीवन में कहीं न कहीं पितृ दोष या श्राप की उपस्थिति है। विशेष रूप से जो ऊपरी शक्तियों या वायव्य बाधाओं से पीड़ित हैं, और उसमें भी यदि पितृ दोष है, उनके लिए यह पहला प्रयोग है। पितृ दोष कैसे और कितनी जल्दी लगता है, वे कहते हैं, इसकी चर्चा पहले हो चुकी है — दुष्प्रभाव बहुत जल्दी पड़ा लगता है, पर उसके पीछे अनेक कारण होते हैं।

04

कुलवधू द्वारा चौखट की दैनिक न्यूनतम सेवा

चौखट वाले हर घर में रोज़ धोना, सुगंधित करना, धूप-दीप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:15–02:27

सामान्य नियम के रूप में, वक्ता कहते हैं, जिनके भी घर में चौखट है, वहाँ कुलवधू को रोज़ अपने घर की उस चौखट को स्नान कराना, धोना और सुगंधित करना चाहिए, और वहाँ धूप-दीप दिखा देना चाहिए। इतना, वे कहते हैं, हर घर में अवश्य होना चाहिए — किसी विशेष प्रयोग से अलग, नित्य।

05

कुल पितरों के लिए चौखट का प्रयोग कौन कर सकता है

घर का कोई पुरुष या विवाहिता; कुँवारी बेटी कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:28–02:57

वक्ता कहते हैं कि कुल पितृ प्रयोग में सुबह और शाम दो भाग हैं। सुबह का प्रयोग घर का कोई भी पुरुष या कोई भी कुलवधू कर सकते हैं — घर के लड़के, बहू, जो भी विवाहिता वहाँ हैं। लेकिन घर की कुँवारी बेटी यह प्रयोग नहीं करेगी; इसका ध्यान रखने को वे कहते हैं।

06

कुल पितरों के लिए सुबह की चौखट सेवा

स्नान, कर्म-साक्षी दीपक, धोना, इत्र, कुशा आसन, सूर्योदय के एक घंटे में दो घी के दीपक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:58–04:22

वक्ता कहते हैं कि सुबह का प्रयोग स्वयं स्नान करने के बाद करना है (झाड़ू-पोछा पहले कर लें, पर स्नान प्रयोग से पहले हो), और नित्य पूजा से पहले करें तो अधिक श्रेष्ठ है: पूजन स्थान की पूरी तैयारी कर लें पर पूजन के लिए बैठें नहीं — केवल वहाँ का कर्म-साक्षी दीपक प्रज्वलित करके चौखट के पास आ जाएँ। चौखट को ऊपर-नीचे अच्छे से धोएँ, चंदन का इत्र लगाएँ (एलर्जी हो तो गुलाब जल और अगरु), अच्छे वस्त्र से पोंछें, दोनों ओर दो-दो कुशा के छोटे आसन रखें, उन पर मिट्टी या पीतल का एक-एक मुखी घी का दीपक रखें, और यह बोलते हुए प्रज्वलित करें कि हमारे कुल के पितृ प्रसन्न हों, कृपा करें, घर की सुरक्षा करें, और हमसे जो ज्ञात-अज्ञात दोष या अपराध हुआ हो उसे क्षमा करें। यह सूर्योदय के एक घंटे के भीतर कर लेना है।

07

सावधानी: स्त्रियाँ कुल पितरों का अर्घ ताम्र पात्र से न दें

स्त्रियों के लिए पीतल, स्टील या पत्ते का दोना; ताँबा केवल पुरुषों के लिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:23–04:43

चौखट पर कुल पितरों के अर्घ के लिए, वक्ता कहते हैं, कोई भी पात्र ले सकते हैं, पर स्त्रियों के मामले में ताम्र पात्र छोड़कर: स्त्रियाँ ताम्र पात्र से नहीं करेंगी, पुरुष कर सकते हैं। स्त्री पीतल से, या स्टील के पात्र से भी करे तो कोई दोष नहीं; नहीं तो पत्ते का बना छोटा दोना भी चल सकता है।

08

चौखट पर कुल पितरों को अर्घ

काले तिल वाला ताल मिश्री का जल दोनों ओर; बिना प्रणव "कुल पितृभ्यो नमः"

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:44–05:22

वक्ता कहते हैं कि ताल मिश्री पानी में मिलाकर मीठा जल बनाएँ, उसमें पाँच-दस दाने या चुटकी भर काला तिल डालें, और कुल पितरों के निमित्त चौखट के दोनों ओर, जहाँ दीपक रखे हैं, थोड़ा-थोड़ा अर्घ दें। इसमें कोई विशेष मंत्र नहीं है — यह भाव-प्रधान विधान है जो भाव से प्रभाव देता है — पर चाहें तो "कुल पितृभ्यो नमः" बोलकर अर्घ दे सकते हैं, उसमें प्रणव आदि नहीं लगाना है।

09

कुल पितरों के अर्घ के बाद सूर्यनारायण को अर्घ

सादा जल, सूर्य मंत्र, बारह नाम, अधिकार हो तो गायत्री, या अपनी संध्या विधि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:23–05:44

कुल पितरों के अर्घ के बाद, वक्ता कहते हैं, भगवान सूर्यनारायण को सादे जल से अर्घ देना है — उसमें कुछ मिलाना नहीं है — सूर्य के मंत्रों का जाप, या उनके बारह नामों की नामावली, या अधिकार हो तो गायत्री का जप करते हुए। जो संध्या उपासना करते हैं और जिनकी अपनी संध्या विधि है, वे संध्या के अनुसार ही उन्हें अर्घ देंगे।

10

तुलसी जी को किन दिनों में अर्घ नहीं देना चाहिए?

एकादशी और रविवार को कभी नहीं; मंगलवार और द्वादशी अपनी परंपरा के अनुसार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:45–06:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि रोज़ सुबह सूर्य अर्घ के बाद भगवती तुलसी जी को अर्घ देना है, लेकिन एकादशी के दिन और रविवार के दिन नहीं। यदि आपके यहाँ मंगलवार को भी न देने का प्रचलन है, या द्वादशी को देने का विधान नहीं है, तो वैसा ही करें; अपनी परंपरा के अनुसार देखें। बाकी सब दिनों में देना है।

11

कुल पितरों के लिए शाम की चौखट सेवा

सुगंधित सफेद कपड़ा, सफेद के ऊपर पीला चंदन, कुशा पर सरसों के तेल के आटे के चौमुख दीपक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:12–07:10

शाम के समय, वक्ता कहते हैं, या तो चौखट को फिर से धोएँ या एक साफ़ सफेद कपड़े को गुलाब जल या इत्र में भिगोकर उससे पूरी चौखट को सुगंधित करें। फिर दोनों कोनों पर चंदन लगाएँ — पहले नीचे सफेद चंदन, फिर उसके ऊपर पीला चंदन (सुबह भी चंदन लेपन करेंगे)। गेहूँ के आटे के बिल्कुल छोटे-छोटे चौमुख दीपक बनाएँ, सुबह की तरह दोनों ओर दो-दो कुशा के आसन लगाएँ, एक-एक आटे का दीपक दोनों ओर रखें, उनमें सरसों का तेल भरें और कुल पितरों के निमित्त यह कहते हुए प्रज्वलित करें कि आप हम पर प्रसन्न हों और हमसे जो अपराध हुआ हो उसे क्षमा करें।

12

कुल पितृ चौखट प्रयोग की अवधि: एक कृष्ण पक्ष

कम से कम एक पक्ष, प्रतिपदा से अमावस्या तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:11–07:15

वक्ता कहते हैं कि कुल पितृ चौखट प्रयोग कम से कम एक पक्ष करना है: कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पर्यंत। आगे वे जोड़ते हैं कि यह पंद्रह दिन का है, और उसके बाद शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तक पंद्रह दिन का कुलदेवी प्रयोग आता है; दोनों भी कर सकते हैं या कोई एक भी।

13

कुल पितृ प्रयोग के दौरान अन्न ग्रहण से पहले किसी जीव को भोजन

गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी या मनुष्य — एक बिस्किट या रोटी भी — अपने मुँह में अन्न से पहले

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:16–07:41

प्रयोग के हर दिन, वक्ता कहते हैं, जब चौखट पर दीप प्रज्वलित हो गया, सूर्यनारायण को अर्घ हो गया और अपना नित्य पूजन हो गया, तब गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों, किसी मनुष्य, या इन पाँचों में से किसी को भी — अपनी सामर्थ्य और इच्छा के अनुसार, चाहे एक बिस्किट या एक रोटी — भोजन कराएँ, और तभी अपने मुँह में अन्न जाए।

14

कुल पितरों के लिए गीता का सप्तम अध्याय और कुशा वाला जल

दोपहर या सुबह पाठ, जल घर और चौखट पर छिड़कना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:42–08:04

कुल पितृ प्रयोग के दौरान दोपहर में समय मिल जाए तो, वक्ता कहते हैं, श्रीमद्भगवद्गीता के सप्तम अध्याय का पाठ करें — हिंदी में ही सही — सामने कुशा डालकर लोटे में जल रखें और वह जल घर में और चौखट पर अवश्य छिड़कें। यह दोपहर में करें या सुबह अपने पूजन-पाठ में भी कर सकते हैं। चौखट सेवा के साथ, वे कहते हैं, यह कुल पितरों की प्रसन्नता, शांति और उनके कोप से मुक्ति का अत्यंत दिव्य प्रयोग हो जाता है।

15

क्या चौखट का प्रयोग पितृ दोष को स्थायी रूप से दूर कर देता है?

केवल अस्थायी शांति; गति के लिए नारायण बलि, त्रिपिंडी या भागवत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:05–08:38 · Also a question

नहीं — वक्ता ज़ोर देकर कहते हैं कि यह टेंपरेरी है, इसका यह परमानेंट उपाय नहीं है। यदि पितरों का प्रकोप पूरे प्रबलतम रूप से आप पर पड़ा है तो वे तुरंत शांत हो जाएँगे, उनका प्रकोप शांत होगा और स्वप्न में या सामान्य जीवन में दिक्कत देना बंद कर देंगे। लेकिन पूरा समाधान यह है कि जब वे पूरी तरह मान जाएँ, तब उनकी गति के लिए नारायण बलि, त्रिपिंडी आदि और भागवत जी कराकर उन्हें पूर्ण रूप से गति करा दी जाए — रोककर नहीं रखना है। नारायण बलि कब होती है, यह वे अलग से बताने की बात कहते हैं।

16

कुलदेवी का चौखट प्रयोग कब किया जाता है और कौन कर सकता है

रुष्ट या विरुद्ध चलाई गई कुल शक्ति; शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से पूर्णिमा या नवरात्र; कुलदेवी अज्ञात हो तो भी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:39–09:40

दूसरा विषय, वक्ता कहते हैं, यह है कि आपको पता चले कि कुल पितरों के साथ-साथ कुल की शक्तियाँ भी रुष्ट हैं, या आपकी कुल शक्ति को आपके विरुद्ध चला दिया गया है — तंत्र सूक्ष्म विषय है, उसमें बहुत हेरफेर है, और यह पहचानना है कि आपके साथ कौन सा विषय है। जिसकी कुल शक्ति रुष्ट है वह यह कर सकता है, और जिसे अपनी कुलदेवी का पता नहीं पर किसी प्रकार की साधना कर रहा है, वह भी। कुलदेवी और कुल शक्ति की प्रसन्नता चौखट की सेवा से अवश्य होती है, क्योंकि वहाँ रक्षात्मक शक्तियाँ रहती हैं। यह शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से पूर्णिमा तक, या नवरात्र जैसे पर्व काल में किया जाता है।

17

कुलदेवी के लिए चौखट की तैयारी: पोंछना और चंदन-रोली के तिलक

पूरी चौखट ऊपर-नीचे; त्रिकूट बनाम चारों ओर की; हर छोर पर पीला-सफेद चंदन और रोली

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:41–10:18

कुलदेवी प्रयोग के लिए, वक्ता कहते हैं, पूरी चौखट को अच्छे से धोएँ या इत्र लगे वस्त्र से ऊपर-नीचे पोंछें। त्रिकूट चौखट में ऊपर और अगल-बगल होती है, नीचे नहीं — कोई बात नहीं; जहाँ चारों ओर चौखट है, वहाँ चारों दिशा में — नीचे, ऊपर, दाएँ-बाएँ — पोंछें। फिर ऊपर-नीचे, दोनों छोरों पर, सब ओर पीले चंदन, सफेद चंदन और रोली से तिलक करें।

18

कुलदेवी के लिए चौखट पर चमेली के तेल में सिंदूर के तिलक

ऊपर बकरा सिंदूर के पाँच तिलक, नीचे पीले चंदन के पाँच; कुलदेवी अज्ञात हो तो दुर्गा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:19–10:48

चंदन और रोली के बाद, वक्ता कहते हैं, नारंगी वाला सिंदूर — "बकरा सिंदूर", जो गाँव-देहात में और विवाह के समय अधिक प्रयोग होता है और जो हनुमान जी पर भी चढ़ता है — उसे चमेली के तेल में मिलाएँ। अपनी कुलदेवी का स्मरण करते हुए, या कुलदेवी का नाम न पता हो तो भगवती दुर्गा का स्मरण करते हुए, ऊपर की चौखट पर उसके पाँच तिलक लगाएँ। नीचे की चौखट पर पीले चंदन के पाँच तिलक लगाएँ।

19

क्या चौखट पर पैर रखना दोष है?

बहुत बड़ा दोष — घर में सबको बार-बार समझाना है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:49–11:08 · Also a question

हाँ — वक्ता कहते हैं कि घर में सबको स्पष्ट कर दें कि आते-जाते कोई चौखट के ऊपर पैर रखकर न आए-जाए। चौखट पर पैर नहीं रखना चाहिए: दोष लगता है, बहुत बड़ा दोष लगता है। यह बात घर में सबको बार-बार समझानी है; यह गलती मत कीजिए।

20

चौखट पर कुलदेवी के लिए दाहिनी ओर सरसों के तेल का चौमुख दीपक

पीतल का बार-बार या मिट्टी का रोज़ नया; फूल या उड़द की ढेरी पर; पाँच लौंग और एक इलायची

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:09–12:05

चौखट का शृंगार हो जाने पर, वक्ता कहते हैं, एक छोटा चार मुँह वाला दीपक लें — पीतल का हो तो रोज़ वही चलेगा; मिट्टी का हो तो रोज़ नया लगेगा। घर से बाहर निकलते समय जो आपकी दाहिनी ओर हो, वहाँ फूल या साबुत उड़द की ढेरी पर सरसों के तेल का एक चौमुख दीपक प्रज्वलित करें। वहाँ एक ही दीपक लगेगा, और उसमें पाँच लौंग और एक इलायची अवश्य डली हो।

21

चौखट पर कुलदेवी के लिए बाईं ओर तिरंगे चावल पर घी का दीपक

दो इलायची, कपूर, दो लौंग; साबुत चावल दो-तीन रंग के, काला-नीला कभी नहीं, पक्षियों के लिए फूड कलर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:06–12:39

बाहर निकलते समय आपकी बाईं ओर, वक्ता कहते हैं, एक मुँह वाला घी का दीपक रखें जिसमें दो इलायची, कपूर और दो लौंग हों, फूलों की ढेरी पर या रंग-बिरंगे चावल पर। चावल एक रंग का नहीं होना चाहिए — पीला, लाल, सफेद, दो या तीन रंग, काले को छोड़कर कोई भी रंग; काला और नीला नहीं होना चाहिए। लाल, पीला, सफेद चावल मिलाएँ, साबुत, टूटे नहीं, फूड कलर से रंगे ताकि बाद में पक्षी दाने खा सकें। उसके ऊपर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।

22

कुलदेवी के दीपक के नीचे के चावल: पूर्णिमा को खीर

रोज़ दाने एकत्र करें, पंद्रह दिन बाद थोड़ा बचाएँ, बाकी पक्षियों को

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:40–12:59

वक्ता कहते हैं कि जब-जब दीपक पूरा जल जाए, चावल के दानों को एक जगह और उड़द के दानों को दूसरी जगह एकत्रित करते जाएँ। पंद्रह दिन बाद चावल का थोड़ा दाना बचाकर रखें; बाकी पक्षियों को डाल सकते हैं। पूर्णिमा के दिन जब पूजन हो, तब दोपहर में बचाए चावल में और चावल मिलाकर खीर बना लें।

23

कुलदेवी के चौमुख के नीचे के उड़द: लाल कपड़े की रक्षा और पशुओं के लिए भात

बचाया उड़द चौखट के ऊपर बाँधना; बाकी चावल और थोड़े घी के साथ भात, बाहर खिलाना या चौराहे पर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:00–13:34

थोड़ा-थोड़ा करके बचाए गए उड़द के दानों को, वक्ता कहते हैं, लाल कपड़े में लपेटकर, बाँधकर मुख्य चौखट के ऊपर — या अंदर की ओर कहीं — सुरक्षा के लिए बाँध दें। बाकी उड़द में चावल मिलाकर उड़द-चावल का भात बनाएँ; उसमें थोड़ा सा ही घी डालें, ज़्यादा नहीं, और घर के बाहर किसी भी पशु को खिला दें, या चौराहे पर रख दें। वे पूरे प्रयोग को बहुत दिव्यतम बताते हैं।

24

कुलदेवी के लिए गोबर के उपलों की धूनी और दो मंत्रों की 21-21 आहुति

हवन अग्नि नहीं, ताँबे-लोहे का कुंड नहीं; कुलदेवी को केवल गूगल, जयंती मंगला काली को इलायची-घी के साथ गूगल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:35–14:35

कुलदेवी प्रयोग का दूसरा भाग, वक्ता कहते हैं, पूजन स्थान पर किसी बड़े मिट्टी के पात्र में या ऐसे हवन कुंड में करना है जो ताँबे या लोहे का न हो। हवन अग्नि नहीं बुलानी है: गाय के गोबर के सामान्य उपलों को घी या कपूर से जलाकर, दो मंत्रों से 21-21 आहुति देनी हैं — कुलदेवी के निमित्त और अर्गला स्तोत्र के प्रथम मंत्र "जयंती मंगला काली" से। आरंभ में गुरु-गणपति के निमित्त भी आहुति दे सकते हैं। कुलदेवी की आहुति में केवल गूगल, कुछ और नहीं; जयंती मंगला की आहुति में गूगल के साथ चार-पाँच इलायची फाड़कर उसके दाने और थोड़ा सा घी। स्वाहा न भी बोलें तो कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि यह धूनी है।

25

कुलदेवी की धूनी का धुआँ पूरे घर में दिखाकर चौखट तक ले जाना

रंगीन चावल पर रखे घी के दीपक के पास रखना; सुबह-शाम, न हो सके तो एक समय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:36–15:08

धूनी से जो पूरा धुआँ उठेगा, वक्ता कहते हैं, उसे पूरे घर में दिखाना है — धूनी पूजन स्थान पर ही जलानी है — और फिर पात्र को चौखट पर लाकर उसी ओर रख देना है जहाँ रंग-बिरंगे चावल की ढेरी पर कुलदेवी का घी का दीपक रखा है। यह सुबह किया और शाम को भी दोहराना है; किसी कारण से एक ही समय कर सकें तो भी कोई दिक्कत नहीं।

26

अभिचार-ग्रस्त घर के लिए आर्द्रा नक्षत्र में शिव अभिषेक का जल चौखट पर

पुराना शिव मंदिर, किसी भी पक्ष में गंगाजल से अभिषेक, अर्घी के पास का जल रोज़

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:09–15:52

तीसरा प्रयोग, वक्ता कहते हैं, उस घर के लिए है जिस पर बहुत अभिचारिक समस्या हो — रात में कुछ घुस जाता है, गला दबाता है, उत्पात मचाता है, कोई सो नहीं पाता। कोई ऐसा शिव मंदिर खोजें जो कम से कम 12 वर्ष पुराना हो, और 50-100 वर्ष पुराना मिल जाए तो अति उत्तम। जब भी आर्द्रा नक्षत्र पड़े, शुक्ल या कृष्ण कोई भी पक्ष हो, वहाँ शुद्ध गंगाजल लेकर जाएँ, भगवान शिव का अभिषेक करें और अर्घी के पास से जल ले लें। वह जल पूरे घर में छिड़कें, और बचाकर रखें ताकि रोज़ चौखट को पहले की तरह सुगंधित करके वही जल पूरी चौखट पर — ऊपर, नीचे, सब ओर — लगाया जाए।

27

अभिचार के विरुद्ध रोज़ मंदिर का निर्माल्य चौखट के ऊपर टाँगना

पुराने भैरव, हनुमान, काली, दुर्गा या योगिनी मंदिर का सुबह का पहला निर्माल्य, 108 दिन से एक वर्ष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:53–16:29

शिव जल के साथ, वक्ता कहते हैं, प्रत्येक दिन उसी मंदिर से या किसी भी बहुत पुराने मंदिर से निर्माल्य लाएँ — विशेष रूप से भैरव जी, हनुमान जी, भगवती काली, दुर्गा जी, या योगिनियों से संबंधित किसी मंदिर का। वह सुबह का पहला निर्माल्य होना चाहिए: रात को शृंगार करके जो थोड़ा छोड़ा जाता है और सुबह वही मिले। उसे रोज़ घर के मुख्य दरवाज़े की चौखट पर ऊपर की ओर टाँग दें; अगले दिन सुबह फिर नया निर्माल्य लाएँ, पुराने का विसर्जन करें, नया चढ़ाएँ। इसे कम से कम 108 दिन, छह महीने, साल भर तक जारी रखें — घर के ऊपर चलने वाला आधे से अधिक तंत्र, वे कहते हैं, इसी से रुक जाता है।

28

चौखट के ऊपर का निर्माल्य तांत्रिक शक्तियों को क्यों रोकता है?

निर्माल्य लाँघने से गंधर्वराज पुष्पदंत की शक्तियाँ कुंठित; ऊपर, नीचे नहीं, क्योंकि नीचे सब लाँघेंगे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:30–17:13 · Also a question

वक्ता याद दिलाते हैं कि पुष्पदंत — चित्ररथ गंधर्व, गंधर्वराज, जिन्होंने शिव महिम्न स्तोत्र की रचना की — की शक्तियाँ केवल निर्माल्य का उल्लंघन करने से कुंठित हो गई थीं; जब उनके साथ ऐसा हुआ तो सामान्य भूत-प्रेत-पिशाच की क्या बिसात। इसलिए शक्तियाँ चौखट के ऊपरी भाग पर रुक जाती हैं — निर्माल्य नीचे नहीं टाँगा जाता, क्योंकि नीचे सब लाँघेंगे — और उसके नीचे से कोई शक्ति प्रवेश नहीं कर पाती। कितना प्रभाव देगा यह अन्य बातों पर निर्भर है: घर के भीतर कोई कर रहा हो, या वह घर के भीतर घुसता हो, तब विषय अलग है; पर फिर भी शक्तियाँ कुंठित होंगी, विचार रुकेगा, और घर बहुत हद तक सुरक्षा में आ जाएगा।

29

चौखट की सेवा नित्य क्रम है, एक बार का प्रयोग नहीं

नरसिंह के स्थान की जितनी सेवा, घर उतना सुरक्षित और मन उतना शांत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:14–17:38

वक्ता समापन में आग्रह करते हैं कि चौखट की सेवा-पूजा अवश्य करें, क्योंकि वहाँ भगवान नरसिंह का स्थान है: उनकी जितनी सेवा होगी, घर उतना ही सुरक्षित और मस्तिष्क उतना ही शांत रहेगा — जिनके घर में बहुत उत्पात, झगड़ा और बिना मतलब की कच-कच होती रहती है, वे यह करें। यह प्रयोग नहीं, वे कहते हैं, नित्य क्रम का विषय है; चौखट की सेवा से घर की बहुत सी अशुद्धियाँ और नकारात्मक चीज़ें दूर हो जाती हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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