अन्नपूर्णा अनुष्ठान — गृहस्थ के लिए वह विधान जिससे भंडार कभी खाली न रहे

घर में अन्न-धन की समृद्धि हेतु अन्नपूर्णा अनुष्ठान की विधि।

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The notes
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01

गृहस्थ को अन्नपूर्णा की साधना क्यों करनी चाहिए

धन कमाते रहने पर भी अन्न का भंडार खाली रहना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:00–01:06

वक्ता कहते हैं कि बहुत बार ऐसा होता है कि परिवार धन तो कमा रहा होता है, फिर भी घर में अन्न का भंडार कभी भर के नहीं रहता: हर महीने अन्न लाया जाता है और भंडार फिर भी कम पड़ जाता है। कलियुग में जहाँ अन्न, धन और वस्त्र की कमी हो रही हो, वहाँ वे भगवती पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप का अनुष्ठान और साधना जीवन में अवश्य करने को कहते हैं। इसे अपनी कुलदेवी की उपासना के साथ-साथ करना चाहिए ताकि कुल-वंश में अन्न-धन की कभी कमी न हो; और यदि अन्नपूर्णा स्वयं कुल देवी हों तो उनकी साधना निरंतर करते रहना चाहिए। वे उन्हें पृथ्वी की एकमात्र ऐसी महाशक्ति कहते हैं जो भौतिक कामनाओं की पूर्ति के साथ संतोष भी देती हैं, और गृहस्थ के लिए उनकी साधना को अत्यंत आवश्यक बताते हैं।

02

पार्वती काशी में अन्नपूर्णा कैसे बनीं

महाश्मशान का अकाल, और विश्वनाथ के बगल में आसन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:07–01:59

वक्ता कहते हैं कि काशी क्षेत्र में भगवान विश्वनाथ के मंदिर के ठीक बगल में भगवती अन्नपूर्णा विराजमान हैं। कहते हैं कि विवाह के बाद पार्वती कैलाश गईं और कुछ समय अभिमुक्तेश्वर क्षेत्र यानी काशी में रहने की इच्छा जताई; जब वे आईं तो वह स्थान महाश्मशान (मणिकर्णिका घाट) था और वहाँ अकाल फैला हुआ था, इसलिए जगदम्बा ने अन्नपूर्णा का स्वरूप धारण किया और सदा के लिए महादेव काशी विश्वनाथ के साथ वहीं स्थित हो गईं। उनका क्षेत्र, वे कहते हैं, पूरे ब्रह्मांड में एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कोई कभी भूखा नहीं सोता।

03

अन्नपूर्णा अनुष्ठान कब किया जाता है

नवरात्र की प्रतिपदा से अष्टमी, या पूर्णिमा से आठ दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:00–02:23

वक्ता कहते हैं कि अन्नपूर्णा की साधना नवरात्रि में प्रतिपदा से अष्टमी तिथि तक की जाती है। किसी अन्य महीने में इसे पूर्णिमा तिथि से आरंभ किया जा सकता है; यह प्रश्न उठाकर कि तब कितने दिन करना है, वे कहते हैं आठ ही दिन, यानी साधना सप्तमी को पूर्ण होगी और अष्टमी को हवन किया जाएगा।

04

अन्नपूर्णा साधना के नियम: ब्रह्मचर्य, दिशा, रंग और माला

पूर्व या उत्तर, पीला या लाल, आठमुखी रुद्राक्ष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:24–03:05

वक्ता कहते हैं कि अन्नपूर्णा साधना में हर साधक के लिए सर्वप्रथम ब्रह्मचर्य का पालन अत्यंत आवश्यक है। दिशा सदैव पूर्व या उत्तर रहेगी, पश्चिम या दक्षिण नहीं; वस्त्र और आसन पीले या लाल रहेंगे। जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला आठमुखी रुद्राक्ष की है; वह न हो तो पंचमुखी रुद्राक्ष की माला चलेगी, क्योंकि पंचमुखी से हर मंत्र का जप किया जा सकता है।

05

अन्नपूर्णा मंत्र जप के लिए दिन के समय

भोर या संध्या के बाद, मध्याह्न में कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:06–03:52

वक्ता कहते हैं कि अन्नपूर्णा मंत्र का जप सायंकाल से महानिशीथ काल के बीच करने पर अनंत पुण्य देता है, और सूर्योदय या ब्रह्म मुहूर्त में पाठ भी अनंत पुण्य देता है; मध्याह्न में इसका जप नहीं करना चाहिए। कारण एक भक्त का भाव है: ब्रह्म मुहूर्त पूरा होने से सायंकाल तक भगवती अपने भक्तों के घर जाकर उनकी अन्न-धन की समस्याएँ दूर करती हैं। घड़ी के हिसाब से जप सुबह भोर में लगभग 7:00 बजे तक, या शाम 6:00 बजे के बाद से निशा काल तक करना है; दोनों समय भी कर सकते हैं।

06

अन्नपूर्णा साधना में दीक्षा और सिद्धि बनाम गृहस्थ का सरल मार्ग

योगिनी सिद्धि और कभी खाली न होने वाला झोला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:53–04:49

वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र के लिए दीक्षा उन्हीं को चाहिए जो अन्नपूर्णा की साधना क्रम विधान से करके विशेष सिद्धियाँ पाना चाहते हैं; ऐसे लोग शाक्त में दीक्षित होकर क्रम विद्या से साधना करते हैं। जगदंबा की तो केवल कृपा ही पाई जा सकती है, पर उनकी योगिनियाँ सिद्ध होती हैं, और तभी किसी साधु या सिद्ध योगी को ऐसा झोला या पात्र मिलता है जिसमें अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती, जिससे वह अपना जीवन-यापन और जनकल्याण करता है। एक सामान्य गृहस्थ साधक, वे कहते हैं, इस सबके बिना सामान्य तरीके से यह साधना कर सकता है।

07

अन्नपूर्णा अनुष्ठान की प्रतिपदा पर पूजन का क्रम

गौरी-गणपति, गुरु, नवग्रह, फिर ध्यान और विनियोग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:50–05:05

वक्ता कहते हैं कि प्रतिपदा तिथि को पहले गौरी-गणेश पूजन, फिर गुरु पूजन, फिर नवग्रह पूजन, फिर ध्यान, और फिर स्वयं भगवती अन्नपूर्णा का षोडशोपचार पूजन, या कम से कम स्नान-भोग सहित पंचोपचार पूजन किया जाता है। पूजन के बाद जगदंबा का ध्यान मंत्र पढ़कर विनियोग किया जाता है; पूरा मंत्र विधान (ध्यान मंत्र, विनियोग, करन्यास, अंगन्यास और जप मंत्र) वे वीडियो में नहीं बोलते, बल्कि डिस्क्रिप्शन में पीडीएफ के लिंक से देते हैं।

08

घर के अनुष्ठान के लिए अन्नपूर्णा का विग्रह या फोटो

छह इंच की सीमा, खोखला नहीं, और पुष्प में आवाहन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:06–05:37

वक्ता कहते हैं कि घर में भगवती अन्नपूर्णा का श्री विग्रह रखा जा सकता है, बस एक सावधानी: वह 6 इंच से बड़ा न हो और अंदर से खोखला न हो। अन्यथा फोटो रखा जाता है। स्नान इत्यादि षोडशोपचार के उपचार विग्रह पर हो सकते हैं पर फोटो पर नहीं, इसलिए फोटो के सामने एक पुष्प रखकर उसमें आवाहन मंत्र पढ़ा जाता है और फिर उसी पुष्प पर भगवती के नाम से पूजन किया जाता है।

09

अन्नपूर्णा अनुष्ठान की जप संख्या

आठ दिन में 32000, या आठ का छोटा गुणांक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:53–07:12

वक्ता कहते हैं कि मंत्र का जप आठ दिन में कम से कम 32000 करना है, जो प्रतिपदा से अष्टमी के बीच पूरा हो; यानी प्रतिदिन 4000। यदि 32000 न कर सकें तो कम से कम 3200 करें, और हर हाल में आठ के गुणांक में रखें: 8000, 16000, 24000 या 32000, जिनमें मंत्र की सिद्धि और भगवती की परम कृपा एक बार में पाने के लिए 32000 सर्वश्रेष्ठ है।

10

अन्नपूर्णा अनुष्ठान में काशी विश्वनाथ का दशांश जप

संख्या का दसवाँ भाग, ओम केवल यज्ञोपवीतधारी के लिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:13–07:45

वक्ता कहते हैं कि अन्नपूर्णा का जितना जप करें, उसका दशांश (दसवाँ भाग) भगवान काशी विश्वनाथ का जप करेंगे, सामान्य मंत्र से: काशी विश्वनाथाय नमः, या विश्वनाथाय नमः। जो यज्ञोपवीत धारण करता है वह ओम लगा सकता है; जो नहीं करता उसे नहीं लगाना है। तो अन्नपूर्णा के 1000 जप पर 100 जप, यानी एक माला, काशी विश्वनाथ का होगा।

11

अन्नपूर्णा पुरश्चरण को पूर्ण करने वाले हवन, तर्पण, मार्जन और कन्या भोज

नवमी को पंचमेवा खीर की आहुतियाँ, फिर दशांश का दशांश

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:46–08:35

वक्ता कहते हैं कि अष्टमी तक जप पूर्ण होने पर नवमी को मंत्र का दशांश हवन किया जाता है: 8000 जप पर 800 आहुति, यानी आठ माला। आहुति के लिए पंचमेवा युक्त खीर बनाकर उसमें शुद्ध गौघृत मिलाया जाता है; आरंभिक आहुतियों के बाद जप मंत्र की आठ माला आहुति दी जाती है। फिर उसका दशांश, कम से कम एक माला, तर्पण, 11 मार्जन, और कम से कम एक कुँवारी कन्या का भोज और उपहार (नव कन्या भोजन सर्वोत्तम)। इसके साथ, वे कहते हैं, पुरश्चरण का एक अनुष्ठान पूरा हुआ।

12

पुरश्चरण के बाद अन्नपूर्णा का नित्य जप

प्रतिदिन आठ माला, या एक माला के भी आठ अटूट वर्ष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:36–09:28

वक्ता कहते हैं कि एक बार अनुष्ठान कर लेने के बाद प्रतिदिन सुबह-शाम भगवती के सम्मुख बैठकर यथाशक्ति मंत्र जप किया जा सकता है; प्रतिदिन आठ माला सर्वश्रेष्ठ है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति एक दिन भी बीच में छोड़े बिना आठ साल तक जप कर ले, चाहे एक ही माला, उस पर भगवती अत्यंत विशेष स्नेह और कृपा करती हैं, जिसका वे कहते हैं वर्णन नहीं किया जा सकता; करके देखिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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