अन्नपूर्णा अनुष्ठान — गृहस्थ के लिए वह विधान जिससे भंडार कभी खाली न रहे

घर में अन्न-धन की समृद्धि हेतु अन्नपूर्णा अनुष्ठान की विधि।

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01

धन कमाते रहने पर भी अन्न का भंडार भरा न रहना

गृहस्थ को अन्नपूर्णा का अनुष्ठान क्यों करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:00–00:29 · Also a question

क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि धन तो कमाया जा रहा होता है, फिर भी घर में अन्न का भंडार कभी भर के नहीं रहता — हर महीने अन्न लाया जाता है और तब भी भंडार कम पड़ जाता है। वक्ता कहते हैं कि कलिकाल में जहाँ अन्न, धन और वस्त्र की कमी हो रही हो, वहाँ भगवती पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप का अनुष्ठान और साधना जीवन में अवश्य करनी चाहिए।

02

कुल देवी के साथ अन्नपूर्णा की उपासना, और जब वे स्वयं कुल देवी हों

क्या अन्नपूर्णा की उपासना अपनी कुल देवी के साथ भी करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:30–00:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अपने कुल और वंश में अन्न-धन की कभी कमी न हो, इस हेतु अपनी कुलदेवी के साथ-साथ भगवती अन्नपूर्णा की उपासना और साधना भी अवश्य करनी चाहिए। और जिनकी कुल देवी स्वयं भगवती अन्नपूर्णा हैं, उन्हें उनकी उपासना, साधना और अनुष्ठान समय-समय पर निरंतर करते ही रहना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि हमारे कुल और वंश में अन्न-धन की कभी कमी न हो, इस हेतु अपनी कुल की देवी के साथ-साथ भगवती अन्नपूर्णा की उपासना और साधना भी अवश्य करनी चाहिए। और यदि किसी की कुलदेवी स्वयं भगवती अन्नपूर्णा ही हैं, तो उन्हें उनकी उपासना, साधना और अनुष्ठान समय-समय पर निरंतर करते रहना चाहिए।

03

भोग के साथ संतोष देने वाली एकमात्र महाशक्ति के रूप में अन्नपूर्णा

भौतिक कामनाओं की पूर्ति के साथ संतोष देने वाली इस पूरी पृथ्वी की एकमात्र महाशक्ति अन्नपूर्णा स्वरूप में स्थित हैं

· Reviewed Sep 2026 · 00:54–01:06

वक्ता कहते हैं कि भौतिक कामनाओं की पूर्ति के साथ-साथ संतोष और संतुष्टि प्रदान करने वाली यदि कोई एकमात्र महाशक्ति इस पूरी पृथ्वी पर उपस्थित है, तो वे भगवती अन्नपूर्णा के स्वरूप में स्थित हैं।

वक्ता कहते हैं कि भौतिक कामनाओं की पूर्ति के साथ-साथ संतोष प्रदान करने वाली, संतुष्टि प्रदान करने वाली शक्ति हैं। यदि इस पूरी पृथ्वी पर ऐसी कोई एकमात्र महाशक्ति उपस्थित है, तो वे भगवती के अन्नपूर्णा स्वरूप के रूप में स्थित हैं।

04

भगवान विश्वनाथ के मंदिर के बगल में अन्नपूर्णा

काशी में भगवती अन्नपूर्णा कहाँ विराजमान हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 01:07–01:13 · Also a question

काशी क्षेत्र में भगवान विश्वनाथ के मंदिर के ठीक बगल में भगवती अन्नपूर्णा अपने स्वरूप में विराजमान रहती हैं।

वक्ता कहते हैं कि काशी क्षेत्र में भगवान विश्वनाथ के मंदिर के ठीक बगल में भगवती अन्नपूर्णा उपस्थित हैं और अपने स्वरूप में विराजमान रहती हैं।

05

महा श्मशान में पार्वती, अकाल, और अन्नपूर्णा स्वरूप का धारण

काशी में भगवती ने अन्नपूर्णा का स्वरूप कैसे धारण किया?

· Reviewed Sep 2026 · 01:14–01:59 · Also a question

कहते हैं कि विवाह के पश्चात जब भगवती पार्वती कैलाश पर्वत पर गईं, तब उन्होंने यह इच्छा जताई कि वे कुछ समय के लिए अभिमुक्तेश्वर क्षेत्र यानी काशी क्षेत्र में जाकर रहना चाहती हैं। वहाँ की स्थिति महा श्मशान की थी — मणिकर्णिका घाट — और पूरे स्थान पर अकाल फैला हुआ था, तो जगदंबा ने अन्नपूर्णा का स्वरूप धारण किया और सदैव के लिए वहाँ महादेव काशी विश्वनाथ के साथ स्थित हो गईं।

06

नवरात्र में प्रतिपदा से अष्टमी तक, अन्य महीनों में पूर्णिमा से

अन्नपूर्णा साधना कब करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 02:00–02:23 · Also a question

वक्ता गृहस्थ के लिए अन्नपूर्णा साधना को अत्यंत आवश्यक साधना कहते हैं। नवरात्रि में इसे प्रतिपदा से लेकर अष्टमी तिथि तक करना चाहिए; और यदि आप इस साधना को किसी अन्य महीने में करना चाहते हैं, तो इसे पूर्णिमा की तिथि से आरंभ कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ व्यक्ति के लिए अन्नपूर्णा की साधना अत्यंत आवश्यक साधना होती है। नवरात्रि में उनकी साधना प्रतिपदा से लेकर अष्टमी तिथि तक करनी चाहिए। और अन्य महीने में यदि आप इस साधना को करना चाहते हैं, तो इसे पूर्णिमा की तिथि से आरंभ कर सकते हैं।

07

ब्रह्मचर्य, पूर्व या उत्तर दिशा, और पीला या लाल वस्त्र व आसन

सर्वप्रथम ब्रह्मचर्य, दिशा पूर्व या उत्तर — पश्चिम या दक्षिण नहीं — और पीला या लाल वस्त्र व आसन

· Reviewed Sep 2026 · 02:24–02:47

वक्ता कहते हैं कि भगवती अन्नपूर्णा की साधना के लिए किसी भी साधक को सर्वप्रथम ब्रह्मचर्य का पालन अत्यंत आवश्यक होता है। दिशा सदैव पूर्व अथवा उत्तर की ओर ही रखनी है, पश्चिम या दक्षिण की ओर नहीं। वस्त्र पीला या रक्त यानी लाल रंग का रहेगा, और आसन भी पीला या लाल रहेगा।

08

आठ मुखी रुद्राक्ष की माला, और उसके अभाव में पंचमुखी

अन्नपूर्णा मंत्र के जप के लिए कौन सी माला प्रयोग होती है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:48–03:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मंत्र के जप के लिए सर्वश्रेष्ठ आठ मुखी रुद्राक्ष की माला होती है। यदि वह उपलब्ध न हो तो पंचमुखी रुद्राक्ष की माला चलेगी — और उस पंचमुखी से, वे कहते हैं, हर मंत्र का जप किया जा सकता है।

इसमें जप मंत्र के लिए — मंत्र के जप के लिए, वक्ता कहते हैं, इसमें सर्वश्रेष्ठ जो होता है वह आठ मुखी रुद्राक्षशिव पूजा के दौरान धारण की जाने वाली एक पवित्र बीज-माला । की माला है। वही सर्वश्रेष्ठ होता है। और यदि वह न हो, तब पंचमुखी रुद्राक्ष की माला चलेगी। उस पंचमुखी रुद्राक्ष से तो हर मंत्र का जप किया जा सकता है।

09

सायंकाल से महानिशा काल तक, सूर्योदय या ब्रह्म मुहूर्त में, और मध्यान काल में नहीं

अन्नपूर्णा मंत्र का जप किन समयों में किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 03:06–03:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि इस मंत्र का जप सायंकाल से लेकर महानिशीथ काल के बीच में किया जाए, तो वह अनंत पुण्य प्रदान करने वाला होता है। सूर्योदय के समय में या ब्रह्म मुहूर्त में इसका पाठ भी उसी प्रकार अनंत पुण्य प्रदान करने वाला होता है। मध्यान काल में इसका जप नहीं करना चाहिए — वे कहते हैं कि इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें।

10

ब्रह्म मुहूर्त से सायंकाल के बीच भगवती का भक्तों के घर जाना

ब्रह्म मुहूर्त पूर्ण होने के बाद से सायंकाल तक भगवती भक्तों के घर जाती हैं, इसलिए जप भोर में या सोदोष काल के बाद

· Reviewed Sep 2026 · 03:28–03:52

कहा जाता है कि सुबह के ब्रह्म मुहूर्त के पूर्ण होने के पश्चात से लेकर सायंकाल तक भगवती अपने भक्तों के घर पर जाती हैं और उनकी अन्न-धन संबंधी जो भी समस्या होती है उसका निराकरण करती हैं। वक्ता इसे एक भक्त का भाव कहते हैं, और एक बताया गया तरीका, जिस कारण से कहा गया है कि इस समय मंत्र का जप इत्यादि नहीं करना चाहिए — तो या तो भोर के समय करें, या सोदोष काल के बाद रात्रि काल इत्यादि में करें।

11

दीक्षा केवल क्रम विधान और विशेष सिद्धियों के लिए

अन्नपूर्णा मंत्र के लिए दीक्षा किसे चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 03:53–04:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र के जप के लिए दीक्षा इत्यादि की आवश्यकता उन व्यक्तियों को है जो इनकी साधना क्रम विधान से करना चाहते हैं और विशेष सिद्धियों की प्राप्ति करना चाहते हैं। सिद्धि कैसे प्राप्त होती है, इस पर वे कहते हैं कि कोई-कोई साधु, संत, महात्मा भगवती अन्नपूर्णा की योगिनियों की सिद्धि करते हैं।

12

वह झोला या पात्र जिसमें अन्न-धन की कमी नहीं होती

अन्नपूर्णा की योगिनियों को सिद्ध करने से क्या प्राप्त होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:12–04:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जगदंबा की तो कृपा और आशीर्वाद ही प्राप्त की जा सकती है — लेकिन उनकी योगिनियाँ जो होती हैं, वे सिद्ध होती हैं। उनके सिद्ध होने के पश्चात ही उस साधु, संत, महात्मा या सिद्ध योगी को कोई विशेष झोला या पात्र प्राप्त हो जाता है जिसमें कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती; और उसी के माध्यम से वे अपना जीवन यापन भी करते हैं और जन कल्याण का कार्य भी करते हैं।

13

सिद्धि के लिए शाक्त दीक्षा और क्रम विद्या; गृहस्थ के लिए सरल मार्ग

विशेष सिद्धि के लिए शाक्त दीक्षा और क्रम विद्या चाहिए, परंतु सामान्य गृहस्थ यह साधना सामान्य तरीके से कर सकता है

· Reviewed Sep 2026 · 04:36–04:49

वक्ता कहते हैं कि जिन्हें विशेष सिद्धि पानी होती है, वे शाक्त में दीक्षित होकर क्रम विद्या से इनकी साधना करते हैं। लेकिन एक सामान्य गृहस्थ साधक यह साधना सामान्य तरीके से कर सकता है — गृहस्थ इसे कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि जिनको विशेष सिद्धि पानी होती है, वे शाक्त में दीक्षित होकर क्रम विद्या से इनकी साधना करते हैं। लेकिन एक सामान्य गृहस्थ साधक यह साधना सामान्य तरीके से कर सकता है। गृहस्थ इसे कर सकते हैं।

14

गौरी-गणपति, गुरु और नवग्रह पूजन, फिर श्री विग्रह

प्रतिपदा को ध्यान से पहले गौरी-गणपति, फिर गुरु, फिर नवग्रह का पूजन — और घर में श्री विग्रह रखा जा सकता है

· Reviewed Sep 2026 · 04:50–05:05

प्रतिपदा तिथि को भगवती अन्नपूर्णा के पूजन के लिए पहले गौरी-गणपति पूजन करेंगे, फिर गुरु जी का पूजन करेंगे, फिर नवग्रह इत्यादि पूजन कर लेंगे। ध्यान इत्यादि करने के पश्चात भगवती अन्नपूर्णा का श्री विग्रह घर में रखा जा सकता है — बिल्कुल रखा जा सकता है।

15

6 इंच से बड़ा नहीं, और अंदर से खोखला नहीं

घर में रखे जाने वाले श्री विग्रह पर क्या सीमाएँ हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 05:06–05:16 · Also a question

वक्ता केवल इतना ध्यान रखने को कहते हैं कि श्री विग्रह 6 इंच से बड़ा न हो, और वह अंदर से खोखला न हो।

अथवा — और वक्ता कहते हैं कि बस इतना ध्यान रखें — श्री विग्रह 6 इंच से बड़ा न हो, और वह अंदर से खोखला न हो।

16

आवाहन मंत्र के लिए पुष्प, और उसी पर षोडशोपचार

फोटो पर षोडशोपचार नहीं हो सकता: उसके सामने पुष्प रखकर, पुष्प में आवाहन पढ़कर, उसी पुष्प पर पूजन

· Reviewed Sep 2026 · 05:17–05:37

श्री विग्रह हो तो स्नान इत्यादि षोडशोपचार किया जा सकता है, लेकिन फोटो पर नहीं किया जा सकता। तो फोटो के सामने एक पुष्प रखकर, पुष्प में पहले आवाहन मंत्र पढ़ेंगे, और फिर उसी पुष्प पर भगवती के नाम से षोडशोपचार पूजन इत्यादि करेंगे। यदि षोडशोपचार न कर सकें तो कम से कम पंचोपचार पूजन, स्नान और भोग लगाएँ।

17

ध्यान मंत्र, विनियोग, और डिस्क्रिप्शन में दी गई पीडीएफ

पहले जगदंबा का ध्यान मंत्र, फिर विनियोग; पूरा मंत्र विधान पीडीएफ के रूप में दिया गया है

· Reviewed Sep 2026 · 05:38–05:52

उसके पश्चात जगदंबा का ध्यान मंत्र पढ़ना चाहिए, और ध्यान मंत्र के बाद विनियोग करना चाहिए। वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र का पूरा विधान वीडियो के डिस्क्रिप्शन में पीडीएफ के एक लिंक के रूप में दे दिया जाएगा, जिसे श्रोता डाउनलोड करके देख लें।

और उसके पश्चात जगदंबा का ध्यान मंत्र पढ़ें। ध्यान मंत्र के बाद विनियोग करें। वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र का पूरा विधान इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में एक पीडीएफ के लिंक के रूप में दे दिया जाएगा। उसे डाउनलोड करके उसमें देख लीजिएगा।

18

आठ दिनों में 32000 जप, प्रतिपदा से अष्टमी तक

प्रतिपदा से अष्टमी के बीच कम से कम 32000 जप पूर्ण करना है

· Reviewed Sep 2026 · 05:53–06:08

वक्ता कहते हैं कि इस विधान से मंत्र का जप कम से कम आठ दिन में 32000 करना है — इस बात का ध्यान रखें। प्रतिपदा से अष्टमी तक 32000 जप पूर्ण हो जाना चाहिए।

इस विधान से हमें मंत्र का कितना जप करना है? वक्ता उत्तर देते हैं कि मंत्र का जप कम से कम आठ दिन में 32000 करना है। इस बात का ध्यान रखें। प्रतिपदा से लेकर अष्टमी तक 32000 जप पूर्ण हो जाना चाहिए।

19

ब्रह्म मुहूर्त में लगभग 7:00 बजे तक, या शाम 6:00 के बाद निशा काल तक

जप ब्रह्म मुहूर्त में लगभग 7:00 बजे तक, या शाम 6:00 बजे के बाद से निशा काल तक — चाहें तो दोनों समय

· Reviewed Sep 2026 · 06:09–06:30

जप भी या तो ब्रह्म मुहूर्त में, सुबह भोर में लगभग 7:00 बजे तक कर लेना है, या फिर शाम के 6:00 बजे के बाद से आरंभ करके निशा काल तक करना है। वक्ता कहते हैं कि आप दोनों समय में भी जप कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि जप भी हमको या तो ब्रह्म मुहूर्त में, सुबह भोर में लगभग 7:00 बजे तक कर लेना है; या फिर शाम के 6:00 बजे के बाद से आरंभ करके निशा काल तक में। दोनों समय में भी आप जप कर सकते हैं।

20

ध्यान मंत्र, विनियोग, करन्यास, अंगन्यास और जप मंत्र; प्रतिदिन 4000

पीडीएफ में ध्यान मंत्र, विनियोग, करन्यास, अंगन्यास और जप मंत्र हैं; आठ दिनों में 32000 यानी प्रतिदिन 4000

· Reviewed Sep 2026 · 06:31–06:51

भगवती अन्नपूर्णा की जब भी पूजा करेंगे और जितना भी जप करेंगे, उनके मंत्र की पूरी विधि पीडीएफ में मिल जाएगी — उनका ध्यान मंत्र, उनका विनियोग, करन्यास, अंगन्यास और फिर उनका जप मंत्र। प्रतिदिन की गणना पर वक्ता यह उदाहरण लेते हैं कि यदि हम प्रतिदिन 4000 जप कर रहे हैं, तो इसलिए कि आठ दिन में 32000 करना है — अतः 4000 जप करना पड़ेगा।

21

कम से कम 3200, और संख्या आठ के गुणांक में

संख्या आठ के गुणांक में हो — 3200, 8000, 16000, 24000 — और इनमें 32000 सर्वश्रेष्ठ

· Reviewed Sep 2026 · 06:52–07:12

यदि आप इस मंत्र की सिद्धि और भगवती की परम कृपा एक बार में प्राप्त करना चाहते हैं, परंतु मान लें कि आठ दिन में 32000 जप नहीं कर पाएँगे, तो कम से कम 3200 कर लीजिए। यानी आठ के गुणांक में करना है: 8000 कीजिए, 16000 कीजिए, 24000 कीजिए अथवा 32000 कीजिए। इस तरीके से 32000 सर्वश्रेष्ठ होता है।

22

जप का दशांश काशी विश्वनाथ को, ओम केवल यज्ञोपवीतधारी के लिए

साथ में काशी विश्वनाथ का दशांश जप, जिसमें ओम केवल यज्ञोपवीत धारण करने वाला लगाएगा

· Reviewed Sep 2026 · 07:13–07:45

वक्ता कहते हैं कि जितना भी जप आप करेंगे, उसका दशांश जप भगवान काशी विश्वनाथ का करेंगे। मंत्र सामान्य रखेंगे — “काशी विश्वनाथाय नमः” या “विश्वनाथाय नमः”। यदि आप यज्ञोपवीत धारण करते हैं तो ओम लगा सकते हैं; यदि नहीं धारण करते तो ओम नहीं लगाना है। यदि आप 1000 जप कर रहे हैं तो 100 जप, यानी एक माला, काशी विश्वनाथ का होगा।

23

नवमी को दशांश हवन — 800 आहुति, यानी आठ माला

नवमी को दशांश हवन — 8000 जप पर 800 आहुति, यानी आठ माला

· Reviewed Sep 2026 · 07:46–08:02

उस व्यक्ति का उदाहरण लेकर जिसने प्रतिदिन 1000 करके 8000 जप किया: जब अष्टमी तक 8000 जप पूर्ण हो जाएगा, तब नवमी तिथि को आपको भगवती के इस मंत्र का दशांश हवन करना है, यानी 800 आहुति — आठ माला की आहुति।

जब आपका जप पूरा हो जाएगा — मान लेते हैं, वक्ता कहते हैं, कि आपने प्रतिदिन 1000 जप करके केवल 8000 का जप किया। तो अष्टमी तक जब 8000 जप पूर्ण हो जाएगा, तब नवमी तिथि को आपको भगवती के इस मंत्र का दशांश हवन करना है, यानी कि 800 आहुति। यानी आठ माला की आहुति।

24

शुद्ध गौघृत मिली पंचमेवा युक्त खीर

आहुति पंचमेवा युक्त खीर की, जिसमें शुद्ध गौघृत मिलाया गया हो

· Reviewed Sep 2026 · 08:03–08:17

आहुति किस चीज़ से देंगे? वक्ता कहते हैं कि आहुति करने के लिए आपको पंचमेवा युक्त खीर बनानी है और उसमें शुद्ध गौघृत मिलाना है, और उसी से आहुति करनी है। आरंभिक आहुतियाँ देने के बाद आप जप मंत्र की आठ माला की आहुति देंगे।

आहुति किस चीज़ से देंगे? वक्ता कहते हैं कि आहुति करने के लिए आपको पंचमेवा युक्त खीर बनानी है और उसमें शुद्ध गौघृत मिलाना है। उसी से आपको आहुति करनी है। आरंभिक आहुतियाँ देने के बाद आप जप मंत्र की आठ माला की आहुति देंगे।

25

एक माला तर्पण, 11 मार्जन, और कम से कम एक कन्या का भोजन

एक माला तर्पण, ग्यारह मार्जन, और कम से कम एक कुंवारी कन्या का भोज — नव कन्या भोजन अति उत्तम

· Reviewed Sep 2026 · 08:18–08:35

फिर उसका दशांश, यानी कम से कम एक माला, तर्पण करेंगे; 11 मार्जन करेंगे; और कम से कम एक कुंवारी कन्या का भोज करवाएँगे। नव कन्या भोजन तो वैसे भी नवरात्र में करवाते हैं, और नव कन्या भोजन हो जाए तो अति उत्तम है; नहीं तो कम से कम एक कन्या भोज जरूर करवाएँगे, उनसे आशीर्वाद लेंगे और उन्हें उपहार इत्यादि देंगे।

26

भगवती के सम्मुख प्रतिदिन सुबह-शाम यथाशक्ति जप

इससे पुरश्चरण एक बार पूर्ण होता है; उसके बाद प्रतिदिन सुबह-शाम भगवती के सम्मुख यथाशक्ति जप

· Reviewed Sep 2026 · 08:36–08:50

वक्ता कहते हैं कि यह एक बार उसका पुरश्चरण अनुष्ठान हुआ। जब एक बार आप इसका अनुष्ठान कर लेते हैं, उसके पश्चात प्रतिदिन भगवती के सम्मुख बैठकर सुबह और शाम के समय में इस मंत्र का यथाशक्ति जप कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि यह एक बार उसका पुरश्चरणनिर्धारित नियमों के अनुसार मंत्र की अनुष्ठानिक पुनरावृत्ति — तंत्र साधना में आवश्यक। अनुष्ठान हुआ। जब एक बार आप इसका अनुष्ठान कर लेते हैं, तो उसके पश्चात प्रतिदिन भगवती के सम्मुख बैठकर सुबह और शाम के समय में इस मंत्र का यथाशक्ति जप कर सकते हैं।

27

प्रतिदिन आठ माला, और आठ वर्ष तक बिना एक दिन छोड़े जप

प्रतिदिन आठ माला सर्वश्रेष्ठ, और आठ वर्ष तक बिना एक दिन छोड़े — चाहे एक ही माला — भगवती की विशेष कृपा

· Reviewed Sep 2026 · 08:51–09:28

वक्ता कहते हैं कि सर्वश्रेष्ठ यह है कि आप प्रतिदिन इस मंत्र की आठ माला जप करें। कहा जाता है कि जो व्यक्ति लगातार, बीच में एक दिन भी छोड़े बिना, आठ साल तक जप कर ले — चाहे वह एक ही माला जप करे — उस पर भगवती अत्यंत विशेष स्नेह और कृपा करती हैं। वे कहते हैं कि जब उनकी कृपा प्राप्त होती है तो उसका वर्णन ही नहीं किया जा सकता; करके देखिए।

28

पूर्णिमा से आठ दिन — सप्तमी को समापन, अष्टमी को हवन

पूर्णिमा से आरंभ करने पर आठ दिन — सप्तमी को साधना पूर्ण, अष्टमी को हवन

· Reviewed Sep 2026 · 09:29–09:46

इस संभावित प्रश्न को उठाते हुए कि किसी अन्य महीने में पूर्णिमा से आरंभ करने पर कितने दिन तक करना है, वक्ता कहते हैं कि पूर्णिमा से आरंभ करके आठ ही दिन तक करना है — यानी सप्तमी को आपकी साधना पूर्ण हो जाएगी, और अष्टमी को आप हवन कर लेंगे। इस प्रकार से आप यह साधना कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि एक प्रश्न आपका यह हो सकता है: यदि हम किसी अन्य महीने में पूर्णिमा से आरंभ करके करते हैं, तो कितने दिन तक करेंगे? पूर्णिमा से आरंभ करके आठ ही दिन तक करना है। यानी सप्तमी को आपकी साधना पूर्ण हो जाएगी, और अष्टमी को आप हवन करेंगे। इस प्रकार से आप यह साधना कर सकते हैं।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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