अष्टविनायक विधान — आठ दिशाओं में गणपति का पूजन, अग्नि आवाहन और हवन

अष्टविनायक पूजन और हवन की चरण-दर-चरण विधि।

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01

अष्टविनायक की साधना किसलिए की जाती है?

हर प्रकार का कष्ट, और बार-बार लौटने वाले संकट

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:04–00:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ashta-vinayaka की साधना जीवन के हर प्रकार के कष्ट और हर प्रकार के दुख को दूर करने में सक्षम है। इसका विशेष संकेत, वे कहते हैं, यह है कि जब किसी भी प्रकार के संकट बार-बार आ रहे हों, तब व्यक्ति को अपने जीवन में अष्टविनायक की साधना करनी चाहिए।

02

अष्टविनायक पूजन के लिए स्थान की सजावट

पान के पत्तों का अष्टदल कमल और सुपारी के गणपति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:16–00:33

वक्ता अष्टविनायक साधना की व्यवस्था दिखाते हैं: आठ पान के पत्ते अष्टदल कमल के रूप में रखे जाते हैं, उन पर दीपक सजाए जाते हैं और हर दीपक गणपति के स्वरूप की ओर रहता है। ashta-vinayaka का फोटो भी वहाँ रखा जाता है। पीले अक्षत के ऊपर कलावा लपेटी हुई सुपारी को गणपति के स्वरूप के रूप में स्थापित किया जाता है।

03

आठों गणपति में से कौन किस दिशा में विराजते हैं?

पूर्व में मयूरेश, ईशान कोण में वरद विनायक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:34–01:08 · Also a question

वक्ता आठ गणपतियों को आठ दिशाओं में स्थापित करते हैं: पूर्व में मयूरेश गणपति; अग्नि कोण में चिंतामणि गणपति; दक्षिण में महागणपति; नैऋत्य कोण में सिद्धि विनायक; पश्चिम में विघ्नेश्वर; वायव्य कोण में गिरजा आत्मज; उत्तर में बल्लालेश्वर; और ईशान कोण में वरद विनायक। इसी तरह, वे कहते हैं, इनकी स्थापना करनी है।

04

आठों विनायक में से हर एक का पूजन-क्रम

आठों के लिए एक समान उपचार, हर एक को एक लड्डू

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:09–02:09

वक्ता कहते हैं कि आठों गणपति का पूजन एक समान होगा और पूर्व के मयूरेश से आरंभ होगा। हर एक के लिए: पुष्प से आवाहन; मंत्र पढ़ते हुए तीन बार जल (हाथ धोने, आचमन और स्नान के लिए); दूर्वा; बिल्व पत्र और पुष्प; फिर नैवेद्य में एक लड्डू, जिस पर एक लौंग और एक इलायची अवश्य रखनी है; फिर पुनः तीन बार जल। आठ गणपतियों के आठ अलग-अलग लड्डू होंगे, हर एक पर लौंग-इलायची, और वे कहते हैं कि बिल्व पत्र, पुष्प और दुर्वा का क्रम आगे-पीछे हो जाए तो कोई दिक्कत नहीं। उन्होंने क्रम एक जैसा और बिल्कुल सरल रखा है ताकि सभी कर सकें, और कहते हैं कि दो-तीन चतुर्थी के पूजन के बाद सब कंठस्थ हो जाता है।

05

पूजन में आठों विनायक के नाम-मंत्र

हर अर्पण से पहले बोला जाने वाला नाम-रूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:10–08:14

वक्ता हर गणपति का पूजन करते हुए हर अर्पण से पहले उस गणपति का नाम \"श्री … गणपते नमः\" के रूप में बोलते हैं, फिर अर्पण की पंक्ति, और हर एक का समापन \"श्री … गणपते प्रसन्न भवतु\" से करते हैं। जो नाम-रूप वे बोलते हैं वे हैं: मयूरेशाय (गौरी सुताय के साथ), चिंतामणि गणपते, महागणपते, सिद्धि विनायक गणपते, विघ्नेश्वराय, गिरजा आत्मजाय, बल्लालेश्वराय और वरद विनायकाय। वे कहते हैं कि ये सब मंत्र दर्शक के लिए स्क्रीन पर लिखे हैं।

06

अष्टविनायक पूजन में जनेऊ

दर्शक का अधिकार अज्ञात होने से वीडियो से बाहर रखा गया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:15–08:33

वक्ता कहते हैं कि इस वीडियो में उन्होंने अष्टविनायक में किसी को भी जनेऊ नहीं चढ़ाया, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि दर्शक जनेऊ चढ़ाने का अधिकार रखता है या नहीं। उनका नियम: यदि आप यज्ञोपवीत पहनते हैं तो आठों विनायक को जनेऊ अवश्य समर्पित करें; नहीं पहनते तो न करें। बाद में, हवन से ठीक पहले, वे जोड़ते हैं कि गणपति जी के लिए एक जनेऊ चढ़ाना चाहिए, और जो नहीं पहनता वह भी केवल एक जनेऊ समर्पित कर दे।

07

हवन कुंड में अग्नि देवता का आवाहन कैसे किया जाता है?

उपला, अग्नि कोण में दीप, तीन बार घुमाई गई बाती

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:34–09:29 · Also a question

वक्ता दिखाते हैं: सबसे पहले हवन कुंड में गाय के गोबर के उपला का टुकड़ा रखा जाता है और सामान्य रंगोली बनाई जाती है। अग्नि कोण में एक दीप जलाया जाता है; उससे पहले दक्षिण में अग्नि देवता का दीप प्रज्वलन होता है, फिर उसे कुंड के अंदर ले जाकर दक्षिण में ही पुनः आवाहन होता है। फिर उसी लौ से एक नई बाती जलाकर हवन कुंड के ऊपर तीन बार घुमाई जाती है और कुंड के ठीक मध्य में अग्नि देवता का आवाहन किया जाता है। वे इसे संक्षिप्त, सरल और सही तरीका कहते हैं, कहते हैं कि यह बिना किसी मंत्र के भी हो जाता है, और कहते हैं कि लकड़ी पहले सजाकर कभी अग्नि देवता का आवाहन नहीं किया जाता।

08

अष्टविनायक हवन में आहुतियों का क्रम

आरंभिक श्लोक, फिर हर गणपति को पाँच स्वाहा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:38–11:45

वक्ता हवन का आरंभ श्लोक \"ओम श्री गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणं उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्\" और उसके बाद \"श्री अष्टविनायक नमो नमः\" से करते हैं। फिर पूजन के ही क्रम में हर गणपति को \"श्री … गणपतये स्वाहा\" से आहुति देते हैं — मयूरेश्वर, चिंतामणि, महागणपति, सिद्धिविनायक, विघ्नेश्वर, गिरिजात्मज, बल्लालेश्वर, वरदविनायक — हर एक को पाँच आहुति, और अंत में आठों को एक साथ एक \"श्री अष्टविनायक गणपतये स्वाहा\"।

09

अष्टविनायक हवन के बाद तर्पण और मार्जन

हर गणपति के लिए क्रम से एक तर्पण और एक मार्जन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:46–12:43

आहुतियों के बाद वक्ता आठों गणपतियों के लिए क्रम से तर्पण और मार्जन करते हैं, \"श्री … गणपतये तर्पयामि नमः\" और उसके बाद \"श्री … गणपतये मार्जयामि नमः\" के रूप में — मयूरेश्वर, चिंतामणि, महागणपति, सिद्धिविनायक, विघ्नेश्वर, गिरिजात्मज, बल्लालेश्वर और वरदविनायक के लिए। इसी से विधान का समापन होता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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