वैदिक, तांत्रिक और देवी प्रणव — कौन किसका उच्चारण करे

तीन प्रणव और किसे किसका अधिकार है।

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01

वैदिक, तांत्रिक और देवी प्रणव: कौन किसका उच्चारण करे

अधिकार के अनुसार तीन प्रणव

· 00:09–02:27

वक्ता कहते हैं कि प्रणव के तीन रूप हैं और अपने अधिकार के अनुसार ही उच्चारण करना चाहिए। वैदिक प्रणव ॐ (ओंकार, जिसमें अ, उ और म माने गए हैं) उनके लिए है जो यज्ञोपवीत धारण करते हैं, गायत्री मंत्र आदि के साथ। तांत्रिक प्रणव औं (औ अक्षर पर अनुस्वार, यानी औ और आधा म) हर वह व्यक्ति बोल सकता है जो यज्ञोपवीत धारण नहीं करता, और माताएँ-बहनें। देवी प्रणव ह्रीं का उच्चारण प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है। वे चेतावनी देते हैं कि बिना अधिकार के मंत्र जपना शास्त्रों की मर्यादा तोड़ना है और इससे हानि, कभी-कभी क्षय तक होता है, जैसे 10 एमजी की ज़रूरत पर 25 एमजी की दवा जल्दी ठीक करने के बजाय परेशानी देती है।

02

भ्रांति: पंचाक्षरी मंत्र में कोई भी वैदिक ॐ लगा सकता है

अभी लाभ, आगे लंबी हानि

· 02:28–03:32

वक्ता कहते हैं कि जिन लोगों ने जीवन में कभी यज्ञोपवीत धारण नहीं किया, पर YouTube-Facebook देखकर ज़िद करते हैं कि पंचाक्षरी मंत्र वैदिक प्रणव ॐ लगाए बिना नहीं कर सकते, वे अतिक्रमण कर रहे हैं। उन्हें लाभ अवश्य होगा, वे कहते हैं, पर कालांतर में बड़ी दीर्घ हानि होती है। तांत्रिक प्रणव औं और देवी प्रणव ह्रीं हर कोई बोल सकता है, और यज्ञोपवीत धारण करने वाले भी चाहें तो इन्हें ले सकते हैं; पर वैदिक ॐ केवल अधिकार से बोलना चाहिए। वे कहते हैं कि यही विद्वान शास्त्रों से बताते हैं, वर्तमान शंकराचार्य जी ने भी इसके बारे में बताया था, और मानना श्रोता की इच्छा है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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