तंत्र अभिचार पूरी तरह नष्ट क्यों नहीं होता, और द्वितीया का उपाय

अभिचार कर्म अक्सर नष्ट क्यों नहीं होता, इसकी व्याख्या।

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The notes
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01

अभिचार करवाने वाले शत्रु की मानसिकता, और ऐसा शत्रु अपना ही प्रारब्ध क्यों है

धन, जन, प्राण या रोग से बर्बादी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:28–01:12

वक्ता कहते हैं कि जिसे भी आपसे शत्रुता है वह सिर्फ यही चाहेगा कि आपको किसी भी तरह बर्बाद कर दे: धन से, जन से, प्राण की हानि हो, घर के लोगों को मृत्यु तुल्य कष्ट हो, अलग-अलग प्रकार के रोग लगें। वे बताते हैं कि जानकार लोग कहते हैं कि सदैव अभिचार नहीं होता, हमारे कर्मों का भी प्रारब्ध होता है। वे श्रोता से कहते हैं कि यह बिल्कुल जान लें कि हमारे कर्मों का वही प्रारब्ध है कि कोई हमारा शत्रु बना है और उसने इतनी शत्रुता मन में पाल ली है कि हमारे विनाश और अवनति के लिए तंत्र मंत्र और अभिचार कर रहा है।

02

तंत्र काट से केवल कुछ समय की राहत क्यों मिलती है: शत्रु की दृढ़ता बनाम पीड़ित का डगमगाना

एक पैसा गिनता है, दूसरा नुकसान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:13–03:16

वक्ता कहते हैं कि साधारण रूप से हम किसी साधक के पास जाते हैं, पता चलता है कि किसी ने हम पर अभिचार किया है, उसकी काट करवाते हैं, पर कुछ समय की राहत के बाद वह चीज फिर हावी हो जाती है और अवनति पहले जैसी बनी रहती है। वे कहते हैं कि सबसे बड़ा कारण यह है कि साधक अपनी जो भी विद्या है उससे अभिचार काट कर लौटा देता है, पर शत्रु का उद्देश्य ही आपको पीड़ा पहुँचाना है: वह शत्रुता में अंधा है, पैसे को कभी नहीं देखता, और सीधा अपने बाबा के पास जाकर कहता है कि इस बार सिर्फ इतना ही हुआ, और करो। इसके विपरीत पीड़ित दस जगह के 5000, 10000 गिनता है, जिस साधक के पास गया उस पर उसका विश्वास दृढ़ नहीं होता, और चाहता है कि एक बार में पूरी प्रक्रिया सदा के लिए नष्ट हो जाए, जो वक्ता के अनुसार किसी के लिए भी संभव नहीं है।

03

कोई सुरक्षा घेरा या बंधन सदा नहीं टिकता: सूतक उसे तोड़ देता है और शत्रु उसे कटवा देता है

किस देवता के वचन का बंधन है, यह खोजना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:17–03:38

वक्ता कहते हैं कि कोई भी साधक आप पर जो भी सुरक्षा घेरा, बंधन इत्यादि लगाएगा, कितना भी करके लगाएगा, वह एक सीमित समय के लिए ही रहेगा। आप किसी सूतक में गए तो वह टूट जाएगा। और चूँकि शत्रु प्रबल अभिचार करवा रहा है, वह आपके बंधनों को काटेगा: वह देखेगा कि किस देवता के वचन से बंधन लगाए गए हैं, क्या आपने तंत्र मंत्र किया है, कौन सी शक्ति आपकी रक्षा कर रही है, और वह कटवाएगा ही कटवाएगा।

04

अपने कुल के देवी-देवता और कुल शक्तियों की नियमित पूजा ही घर को अभिचार से बचाए रखती है

उधार की शक्ति उस घर को नहीं संभालती जिसकी अपनी शक्तियाँ बँधी हों

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:39–04:23

वक्ता कहते हैं कि जब तक आप स्वयं साधना आरंभ नहीं करते, जब तक घर में देवताओं की उन्नति और नियम से पूजा पाठ आरंभ नहीं होता, जब तक अपने कुल के देवी-देवताओं और कुल शक्ति को जागृत करना और उन्हें भोग पूजन देना आरंभ नहीं करते, और जब तक उन्हें वह मिलना आरंभ नहीं हो जाता, तब तक भुगतना ही पड़ेगा। वे इसे टेक्निकली समझाते हैं: आपके घर की शक्तियाँ आपका साथ इसलिए नहीं दे रहीं क्योंकि सामने वाले ने अभिचार या वचन-बंधन से उन्हें हटा या बाँध दिया है, तो दूसरे से लाई हुई शक्ति कितनी देर साथ देगी, और दूसरों के भरोसे कितने दिन लड़ेंगे, बार-बार दूसरों को कितना देते रहेंगे। अंत में वे जोड़ते हैं कि पूरी तरह मुक्त होना हो या न हो, प्रयास अवश्य किया जा सकता है।

05

साधक की तंत्र काट को परखना: पहले उसका सामर्थ्य देखें, फिर देखें राहत कितने दिन टिकती है

"पैसा खा गया" बाबा ने शायद काम किया था

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:24–05:14

वक्ता कहते हैं कि लोग बार-बार कहते रहते हैं कि फलाना बाबा इतना पैसा खा गया, और उत्तर देते हैं कि अरे भाई वह खाएँगे ही; उनका काम सिर्फ इतना है कि आप गए, जो काम सामने आया उन्होंने कर दिया। कुछ समय राहत मिली, शत्रु ने फिर हटा दिया, और आपने मान लिया कि उन्होंने ठीक से काम नहीं किया। वे कहते हैं कि अगर वह सच में जानकार होंगे तो किया ही होगा, क्योंकि उन्हें अपनी गद्दी का, अपने स्थान का, अपने देवताओं की शक्तियों का मान रखना है। उनका नियम: जाने से पहले देखो कि सामने वाले में सामर्थ्य है या नहीं; अगर वह सामर्थ्यशाली है और आपका कार्य कर रहा है, तो देखो कितने दिन उसका प्रभाव रहता है, आराम मिलता है या नहीं। इन सब चीजों को टेक्निकली जानो, सिर्फ हल्ला करने से नहीं होता।

06

साधक के धार पूजन से अपनी कुल शक्तियों को जानना और स्वयं उनकी पूजा आरंभ करना

आत्मरक्षा अपने घर के देवताओं से शुरू होती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:15–06:40

स्वयं अभिचार से रक्षा कैसे करें, इस पर वक्ता कहते हैं: अपनी कुल की शक्तियों को जानिए। जिस भी साधक के पास जा रहे हैं उनसे इनके विषय में जानकारी लीजिए; वे dhaar पूजन इत्यादि देकर उन्हें बुलाकर बता देंगे कि यहाँ क्या शक्तियाँ हैं, आपके घर की कौन देवी हैं, कौन देवता हैं, उनका क्या पूजन और भोग है। बताने पर उनके बताए विधि विधान से अपना पूजन पाठ आरंभ करें। वे कहते हैं कि यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, आप कर सकते हैं; सिर्फ यह देखने के लिए कि देवताओं को भोग मिल रहा है या नहीं किसी साधक की आवश्यकता पड़ सकती है, फिर भी चाहें तो स्वयं कर सकते हैं। वे कहते हैं कि जिन्हें कोई बताने वाला साधक नहीं मिलता उनके लिए वे पहले ही बहुत से विधान बता चुके हैं, घर की शक्तियों और कुल पितृ के विषय में भी।

07

जब वर्षों से अभिचार न हटा हो तो महादेव की शरण

हर अभिचारी स्वयं शिव की शरण में है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:43–07:11

यह पूछे जाने पर कि जो व्यक्ति पाँच साल से अभिचार से ग्रसित रहा, जगह-जगह जाता रहा और फिर भी अभिचार नहीं हटा, उसे क्या करना चाहिए, वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली बात भगवान महादेव की शरण ग्रहण करनी चाहिए। वे कहते हैं कि महादेव अगर प्रसन्न हो जाएँ तो हर प्रकार के अभिचार कर्म को रोकने के लिए उनसे बढ़कर कुछ नहीं है; वे चाहें तो सब कुछ नष्ट हो सकता है। कारण वे यह देते हैं: हर अभिचारी उन्हीं की शरण में रहता है और उन्हीं के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा सेवा करता है।

08

अभिचार के विरुद्ध दूज या अमावस्या को शिव पर दूध चढ़ाने का उपाय: विधि

देसी गाय के दूध का कुल्हड़, नंगे पाँव शिवलिंग तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:12–08:53

वक्ता ऐसे घर या व्यक्ति के लिए, जिस पर अभिचार का बहुत अधिक प्रभाव हो, एक छोटा पर बहुत प्रबल उपाय देते हैं, जो अमावस्या या किसी भी पक्ष की दूज को, सप्ताह का कोई भी दिन हो, प्रदोष काल में सूर्यास्त के आधे घंटे के भीतर किया जाता है। एक रंग वाली देसी गाय का दूध लें, बहुत लोगों के लिए करना हो तो सवा लीटर, केवल स्वयं के लिए तो एक पाव, उसे मिट्टी के कुल्हड़ में भरें, अपने पूजन स्थान पर रखें और महादेव से प्रार्थना करें कि घर की रक्षा करें और घर में जो भी नकारात्मक शक्ति या अभिचार का प्रवेश है उसे हटाएँ और उसका बंधन करें। फिर तुरंत, नंगे पाँव, नजदीक के किसी मंदिर में जाकर दूध शिवलिंग पर चढ़ा दें, कुल्हड़ वहीं उल्टा रख दें, प्रणाम करके लौट आएँ। और कुछ नहीं: दूध में कुछ मिलाना नहीं, धूप दीप नहीं, सिर्फ दूध। वे कहते हैं कि यह उन लोगों के लिए आरंभ है जो साधारण धूप दीप के अलावा कोई पूजा नहीं करते; एक दूसरा प्रमुख उपाय, जिसमें पूजन पाठ और थोड़ी सामग्री का खर्च लगेगा, वे अलग वीडियो के लिए रोक लेते हैं।

09

सावधानी: पहली बार दूध चढ़ाने के बाद घर में तनाव या कलह बढ़ सकती है

होने दें और देखते रहें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:54–09:03

वक्ता चेताते हैं कि जब आप पहली बार शिव पर दूध चढ़ाने का उपाय करेंगे तो कुछ न कुछ होगा: घर में बहुत ज्यादा टेंशन बढ़ेगी, या कलह होगी, जो भी हो। वे कहते हैं कि उसे होने दीजिए, और उपाय करके स्वयं देखिए।

वक्ता बताते हैं कि क्या अपेक्षा रखें। जब आप पहली बार दूध का उपाय करेंगे तो कुछ न कुछ होगा: या तो घर में बहुत ज्यादा टेंशन बढ़ेगी, या कलह होगी, जो भी हो। वे कहते हैं: होने दीजिए। उपाय करके देखिए; वे यह एक छोटा सा उपाय दे रहे हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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