तंत्र अभिचार पूरी तरह नष्ट क्यों नहीं होता, और द्वितीया का उपाय
अभिचार कर्म अक्सर नष्ट क्यों नहीं होता, इसकी व्याख्या।
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अभिचार करवाने वाले शत्रु की मानसिकता, और ऐसा शत्रु अपना ही प्रारब्ध क्यों है
धन, जन, प्राण या रोग से बर्बादी
वक्ता कहते हैं कि जिसे भी आपसे शत्रुता है वह सिर्फ यही चाहेगा कि आपको किसी भी तरह बर्बाद कर दे: धन से, जन से, प्राण की हानि हो, घर के लोगों को मृत्यु तुल्य कष्ट हो, अलग-अलग प्रकार के रोग लगें। वे बताते हैं कि जानकार लोग कहते हैं कि सदैव अभिचार नहीं होता, हमारे कर्मों का भी प्रारब्ध होता है। वे श्रोता से कहते हैं कि यह बिल्कुल जान लें कि हमारे कर्मों का वही प्रारब्ध है कि कोई हमारा शत्रु बना है और उसने इतनी शत्रुता मन में पाल ली है कि हमारे विनाश और अवनति के लिए तंत्र मंत्र और अभिचार कर रहा है।
कोई उपाय बताने से पहले वक्ता कहते हैं कि पहले यह जान लेना चाहिए कि अभिचार कर्म करने वाले शत्रुओं की मानसिकता क्या होती है। वे कहते हैं कि सीधी सी बात है: अगर किसी को आपसे शत्रुता है तो वह सिर्फ यही चाहेगा कि आपको किसी भी तरह बर्बाद कर दे। चाहे धन से करे, जन से करे, प्राण की हानि हो, घर के लोगों को मृत्यु तुल्य कष्ट हो, या अलग-अलग प्रकार के रोग लग जाएँ। फिर वे बताते हैं कि जानकार लोग क्या कहते हैं: कि सदैव अभिचार कर्म नहीं होता, हमारे कर्मों का भी कुछ प्रारब्धपूर्व कर्मों द्वारा पहले से गतिमान भाग्य का वह अंश — साधना व सत्कर्म इसकी तीव्रता को घटा सकते हैं, किंतु पूर्णतः मिटा नहीं सकते। होता है। वे उत्तर देते हैं कि श्रोता यह बिल्कुल जान लें: हमारे कर्मों का वही प्रारब्ध है कि कोई हमारा शत्रु बना ही है, और वह शत्रु इतनी शत्रुता मन में पाल बैठा है कि हमारे विनाश के लिए, नाश के लिए, अवनति के लिए तंत्र मंत्र, अभिचार कर्म इत्यादि कर रहा है।
तंत्र काट से केवल कुछ समय की राहत क्यों मिलती है: शत्रु की दृढ़ता बनाम पीड़ित का डगमगाना
एक पैसा गिनता है, दूसरा नुकसान
वक्ता कहते हैं कि साधारण रूप से हम किसी साधक के पास जाते हैं, पता चलता है कि किसी ने हम पर अभिचार किया है, उसकी काट करवाते हैं, पर कुछ समय की राहत के बाद वह चीज फिर हावी हो जाती है और अवनति पहले जैसी बनी रहती है। वे कहते हैं कि सबसे बड़ा कारण यह है कि साधक अपनी जो भी विद्या है उससे अभिचार काट कर लौटा देता है, पर शत्रु का उद्देश्य ही आपको पीड़ा पहुँचाना है: वह शत्रुता में अंधा है, पैसे को कभी नहीं देखता, और सीधा अपने बाबा के पास जाकर कहता है कि इस बार सिर्फ इतना ही हुआ, और करो। इसके विपरीत पीड़ित दस जगह के 5000, 10000 गिनता है, जिस साधक के पास गया उस पर उसका विश्वास दृढ़ नहीं होता, और चाहता है कि एक बार में पूरी प्रक्रिया सदा के लिए नष्ट हो जाए, जो वक्ता के अनुसार किसी के लिए भी संभव नहीं है।
वक्ता बताते हैं कि लोग साधारण रूप से क्या करते हैं: किसी साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। के पास जाते हैं, उनसे पता चलता है कि फलाने व्यक्ति ने या किसी ने भी हम पर अभिचार कर्म किया है, तो उसकी काट करवाते हैं। लेकिन कुछ समय राहत रहने के बाद वही चीज फिर हावी हो जाती है, और अवनति पहले जैसी ही बनी रहती है, कोई लाभ नहीं होता। वे पूछते हैं कि ऐसा क्यों होता है। वे सबसे बड़ा कारण बताते हैं। एक साधारण, सरल व्यक्ति जो यह सब भुगत रहा है, जिसके पास भी जाएगा, वह अपनी जो भी विद्या है उससे अभिचार कर्म को काट देगा, वापस लौटा देगा। लेकिन शत्रु का उद्देश्य ही आपको पीड़ा पहुँचाना है। यह उसके जीवन का सबसे प्रमुख उद्देश्य है; वह अंधा हो चुका है, उसकी मति मारी गई है, जब वह शत्रुता करके ऐसे कर्म उठा लेता है कि फलाना मेरा शत्रु है, उसका पूरी तरह निर्मूलन करूँगा, पूरी तरह नाश करूँगा, तभी चैन से बैठूँगा। ऐसा व्यक्ति फिर पैसे को नहीं देखता। वक्ता कहते हैं कि जो भुगत रहा है वह पैसे को देखता है। वह दस जगह जाएगा तो बोलेगा भाई मेरा वहाँ 5000 लग गया, वहाँ 10000 लग गया, राहत नहीं मिल रही, या सिर्फ एक-दो महीने की राहत मिली। लेकिन करवाने वाला कभी नहीं देखता कि 5000 है या 10000। वह सीधा अपने बाबा के पास जाकर बोलता है: इस बार सिर्फ इतना ही हुआ, इस बार तो इसके हाथ पैर टूटे, इस बार इसके घर की गाय मरी, फिर बैल मरा, इस बार एक्सीडेंट इतना ही हुआ, सिर्फ इतना लॉस हुआ, बिजनेस में इतना लॉस हुआ; अब इसे और करो। जिस साधक के पास वह गया है, जो भी वैसे बुरे कर्म कर रहा है, उसके प्रति उसका विश्वास दृढ़ होता है। भुगतने वाला, जिस भी साधक के पास गया, बहुत दृढ़ नहीं होता। वह बोलेगा बाबा आपने किया, 15 दिन राहत मिली, फिर ऐसा हो गया, फिर वैसा हो गया। वक्ता कहते हैं कि वहाँ विश्वास दृढ़ इसलिए नहीं है क्योंकि वह चाहता है कि एक बार जाऊँ, बाबा ऐसा कुछ करें कि यह पूरी प्रक्रिया बुरी तरह नष्ट हो जाए और मैं सुरक्षित हो जाऊँ। वक्ता कहते हैं कि यह संभव नहीं होता; किसी के लिए भी संभव नहीं है।
कोई सुरक्षा घेरा या बंधन सदा नहीं टिकता: सूतक उसे तोड़ देता है और शत्रु उसे कटवा देता है
किस देवता के वचन का बंधन है, यह खोजना
वक्ता कहते हैं कि कोई भी साधक आप पर जो भी सुरक्षा घेरा, बंधन इत्यादि लगाएगा, कितना भी करके लगाएगा, वह एक सीमित समय के लिए ही रहेगा। आप किसी सूतक में गए तो वह टूट जाएगा। और चूँकि शत्रु प्रबल अभिचार करवा रहा है, वह आपके बंधनों को काटेगा: वह देखेगा कि किस देवता के वचन से बंधन लगाए गए हैं, क्या आपने तंत्र मंत्र किया है, कौन सी शक्ति आपकी रक्षा कर रही है, और वह कटवाएगा ही कटवाएगा।
वक्ता एक ऐसी सीमा बताते हैं जो सब पर लागू होती है। कोई भी साधक आपके ऊपर जो भी सुरक्षा घेरा, बंधन इत्यादि लगाएगा, कितना भी करके लगाएगा, वह एक सीमित समय के लिए रहेगा। वे उसके टूटने का एक तरीका बताते हैं: आप किसी सूतक में गए तो वह टूट जाएगा। दूसरा तरीका। सामने वाला जो आपका शत्रु है, चूँकि वह प्रबल अभिचार करवा रहा है, वह आपके बंधनों को काटेगा। वह देखेगा कि किस देवता के वचन से बंधन लगाए गए हैं, क्या आपने तंत्र मंत्र किया हुआ है, कौन सी शक्ति आपकी रक्षा कर रही है, और वह कटवाएगा ही कटवाएगा।
अपने कुल के देवी-देवता और कुल शक्तियों की नियमित पूजा ही घर को अभिचार से बचाए रखती है
उधार की शक्ति उस घर को नहीं संभालती जिसकी अपनी शक्तियाँ बँधी हों
वक्ता कहते हैं कि जब तक आप स्वयं साधना आरंभ नहीं करते, जब तक घर में देवताओं की उन्नति और नियम से पूजा पाठ आरंभ नहीं होता, जब तक अपने कुल के देवी-देवताओं और कुल शक्ति को जागृत करना और उन्हें भोग पूजन देना आरंभ नहीं करते, और जब तक उन्हें वह मिलना आरंभ नहीं हो जाता, तब तक भुगतना ही पड़ेगा। वे इसे टेक्निकली समझाते हैं: आपके घर की शक्तियाँ आपका साथ इसलिए नहीं दे रहीं क्योंकि सामने वाले ने अभिचार या वचन-बंधन से उन्हें हटा या बाँध दिया है, तो दूसरे से लाई हुई शक्ति कितनी देर साथ देगी, और दूसरों के भरोसे कितने दिन लड़ेंगे, बार-बार दूसरों को कितना देते रहेंगे। अंत में वे जोड़ते हैं कि पूरी तरह मुक्त होना हो या न हो, प्रयास अवश्य किया जा सकता है।
वक्ता कहते हैं कि भुगतना तब तक चलता रहता है जब तक कुछ चीजें आरंभ नहीं होतीं: जब तक आप स्वयं साधना आरंभ नहीं करते; जब तक घर में देवताओं की उन्नति और नियम से उनका पूजा पाठ आरंभ नहीं होता; जब तक अपने कुल के देवी-देवताओं, कुल की शक्तियों (कुल शक्ति) को जागृत करना और उन्हें भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य।, पूजन, पाठ देना आरंभ नहीं करते; और जब तक उन्हें वह मिलना आरंभ नहीं हो जाता। तब तक, वे कहते हैं, भुगतना ही पड़ेगा। वे श्रोता से इसे टेक्निकली समझने को कहते हैं। जब आपकी रक्षा करने वाला ही कोई नहीं रहेगा, तो दूसरे से लाई हुई शक्ति कितनी देर तक साथ देगी? आपके घर की शक्तियाँ आपका साथ ही नहीं दे रहीं, क्योंकि सामने वाले ने अभिचार कर्म करके या बंधन में, वचन में लेकर उन्हें हटा दिया है, बाँध दिया है, जो भी कर दिया है। तो दूसरे के भरोसे कितने दिन लड़िएगा, और बार-बार दूसरों को कितना देते रहिएगा? बाद में, बात समाप्त करते हुए, वे कहते हैं कि आगे और वीडियो में बताएँगे कि स्वयं इन सबसे कैसे लड़ा जा सकता है, और एक बात जोड़ते हैं: पूरी तरह मुक्त होना हो या न हो, वह अलग बात है, लेकिन प्रयास अवश्य किया जा सकता है।
साधक की तंत्र काट को परखना: पहले उसका सामर्थ्य देखें, फिर देखें राहत कितने दिन टिकती है
"पैसा खा गया" बाबा ने शायद काम किया था
वक्ता कहते हैं कि लोग बार-बार कहते रहते हैं कि फलाना बाबा इतना पैसा खा गया, और उत्तर देते हैं कि अरे भाई वह खाएँगे ही; उनका काम सिर्फ इतना है कि आप गए, जो काम सामने आया उन्होंने कर दिया। कुछ समय राहत मिली, शत्रु ने फिर हटा दिया, और आपने मान लिया कि उन्होंने ठीक से काम नहीं किया। वे कहते हैं कि अगर वह सच में जानकार होंगे तो किया ही होगा, क्योंकि उन्हें अपनी गद्दी का, अपने स्थान का, अपने देवताओं की शक्तियों का मान रखना है। उनका नियम: जाने से पहले देखो कि सामने वाले में सामर्थ्य है या नहीं; अगर वह सामर्थ्यशाली है और आपका कार्य कर रहा है, तो देखो कितने दिन उसका प्रभाव रहता है, आराम मिलता है या नहीं। इन सब चीजों को टेक्निकली जानो, सिर्फ हल्ला करने से नहीं होता।
वक्ता उस आदत पर बात करते हैं जिसमें लोग बार-बार बोलते रहते हैं कि फलाना बाबा इतना पैसा खा गया, चिलाना बाबा इतना पैसा खा गया। वे उत्तर देते हैं: अरे भाई, वह खाएँगे ही खाएँगे। उनका काम सिर्फ इतना है कि आप गए, जो काम उनके सामने आया, उन्होंने कर दिया। कुछ समय आपको राहत मिली। शत्रु ने उसे फिर हटा दिया। हटा दिया तो आप परेशान होना शुरू हो गए, और आपको लगा कि जिनके पास गए थे उन्होंने ठीक से काम नहीं किया। वे इसके उलट कहते हैं: काम तो उन्होंने किया ही होगा, अगर वह सच में जानकार होंगे। ऐसा नहीं होगा कि वह गद्दी का मान न रखें, अपने स्थान का मान न रखें; उन्हें अपने देवताओं की शक्तियों का मान भी रखना है, तो किया ही होगा। इसलिए, वे कहते हैं, जो दोष आप सामने वाले पर लगा देते हो कि मेरा पैसा खा गया, मेरा काम नहीं किया, उसकी जगह यह करो: पहले देख कर जाओ कि सामने वाले में सामर्थ्य है या नहीं। अगर वह सामर्थ्यशाली व्यक्ति है और आपका कार्य कर रहा है, पता लगा कर जाओ, तो फिर देखो कितने दिन तक उसका प्रभाव रहता है, कितने दिन आराम मिलता है या नहीं मिलता। वे बात समाप्त करते हैं: इन सब चीजों को टेक्निकली जानिए, सिर्फ हल्ला करने से नहीं होता।
साधक के धार पूजन से अपनी कुल शक्तियों को जानना और स्वयं उनकी पूजा आरंभ करना
आत्मरक्षा अपने घर के देवताओं से शुरू होती है
स्वयं अभिचार से रक्षा कैसे करें, इस पर वक्ता कहते हैं: अपनी कुल की शक्तियों को जानिए। जिस भी साधक के पास जा रहे हैं उनसे इनके विषय में जानकारी लीजिए; वे dhaar पूजन इत्यादि देकर उन्हें बुलाकर बता देंगे कि यहाँ क्या शक्तियाँ हैं, आपके घर की कौन देवी हैं, कौन देवता हैं, उनका क्या पूजन और भोग है। बताने पर उनके बताए विधि विधान से अपना पूजन पाठ आरंभ करें। वे कहते हैं कि यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, आप कर सकते हैं; सिर्फ यह देखने के लिए कि देवताओं को भोग मिल रहा है या नहीं किसी साधक की आवश्यकता पड़ सकती है, फिर भी चाहें तो स्वयं कर सकते हैं। वे कहते हैं कि जिन्हें कोई बताने वाला साधक नहीं मिलता उनके लिए वे पहले ही बहुत से विधान बता चुके हैं, घर की शक्तियों और कुल पितृ के विषय में भी।
वक्ता दूसरी बात पर आते हैं: स्वयं कैसे करें, स्वयं अभिचार इत्यादि से रक्षा का प्रयास कैसे करें। जैसा उन्होंने पहले कहा, अपनी कुल की शक्तियों को जानिए। जिन साधकों के पास वैसे भी जा रहे हैं, उनसे इनके विषय में जानकारी लीजिए। वे dhaar पूजन इत्यादि देकर उन्हें बुला करके बता देंगे कि यहाँ क्या शक्तियाँ हैं, आपके घर की कौन देवी हैं, कौन देवता हैं, उनका क्या पूजन और भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य। है। जब वे बता दें, तो उनके बताए हुए उस विधि विधान से अपना पूजन पाठ आरंभ करें। वे कहते हैं कि उन्होंने अपने चैनल पर ऐसे बहुत से वीडियो डाले हैं जिनमें प्रैक्टिकली करवाया भी है: जिन लोगों को कहीं कोई जानकारी नहीं मिल रही, या कोई ऐसा साधक नहीं है जो यह सब बता सके, वे कैसे अपने घर की शक्तियों के विषय में जानकारी लें, कुल पितृ के बारे में जानें, कैसे उन्हें भोग पूजन दें, क्या करें। वे कहते हैं कि एक बार देखिए, स्वयं समझ में आएगा; आप कर सकते हैं, बहुत बड़ा रॉकेट साइंस नहीं है। वे एक शर्त जोड़ते हैं: अपने घर के देवी देवताओं को पूजन पाठ भोग देना एक बात है, पर उन्हें मिल रहा है या नहीं, इसके लिए किसी साधक की आवश्यकता पड़ सकती है। फिर भी चाहें तो कर सकते हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने बहुत से विधान बता रखे हैं, उनका अवलोकन कर लें।
जब वर्षों से अभिचार न हटा हो तो महादेव की शरण
हर अभिचारी स्वयं शिव की शरण में है
यह पूछे जाने पर कि जो व्यक्ति पाँच साल से अभिचार से ग्रसित रहा, जगह-जगह जाता रहा और फिर भी अभिचार नहीं हटा, उसे क्या करना चाहिए, वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली बात भगवान महादेव की शरण ग्रहण करनी चाहिए। वे कहते हैं कि महादेव अगर प्रसन्न हो जाएँ तो हर प्रकार के अभिचार कर्म को रोकने के लिए उनसे बढ़कर कुछ नहीं है; वे चाहें तो सब कुछ नष्ट हो सकता है। कारण वे यह देते हैं: हर अभिचारी उन्हीं की शरण में रहता है और उन्हीं के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा सेवा करता है।
वक्ता एक स्थिति रखते हैं: कोई व्यक्ति पाँच साल तक अभिचार कर्म से ग्रसित रहा, जगह-जगह जाता रहा, और उसका अभिचार नहीं हटा। उसे क्या करना चाहिए? वे उत्तर देते हैं कि सबसे पहली बात भगवान महादेव की शरण ग्रहण करनी चाहिए। महादेव अगर प्रसन्न हो जाते हैं तो हर प्रकार के अभिचार कर्मों को रोकने के लिए उनसे बढ़कर कुछ भी नहीं है। वे अगर चाहें तो सब कुछ नष्ट हो सकता है। वे कारण बताते हैं: हर अभिचारी उन्हीं की शरण में रहता है, उन्हीं के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा सेवा करता है।
अभिचार के विरुद्ध दूज या अमावस्या को शिव पर दूध चढ़ाने का उपाय: विधि
देसी गाय के दूध का कुल्हड़, नंगे पाँव शिवलिंग तक
वक्ता ऐसे घर या व्यक्ति के लिए, जिस पर अभिचार का बहुत अधिक प्रभाव हो, एक छोटा पर बहुत प्रबल उपाय देते हैं, जो अमावस्या या किसी भी पक्ष की दूज को, सप्ताह का कोई भी दिन हो, प्रदोष काल में सूर्यास्त के आधे घंटे के भीतर किया जाता है। एक रंग वाली देसी गाय का दूध लें, बहुत लोगों के लिए करना हो तो सवा लीटर, केवल स्वयं के लिए तो एक पाव, उसे मिट्टी के कुल्हड़ में भरें, अपने पूजन स्थान पर रखें और महादेव से प्रार्थना करें कि घर की रक्षा करें और घर में जो भी नकारात्मक शक्ति या अभिचार का प्रवेश है उसे हटाएँ और उसका बंधन करें। फिर तुरंत, नंगे पाँव, नजदीक के किसी मंदिर में जाकर दूध शिवलिंग पर चढ़ा दें, कुल्हड़ वहीं उल्टा रख दें, प्रणाम करके लौट आएँ। और कुछ नहीं: दूध में कुछ मिलाना नहीं, धूप दीप नहीं, सिर्फ दूध। वे कहते हैं कि यह उन लोगों के लिए आरंभ है जो साधारण धूप दीप के अलावा कोई पूजा नहीं करते; एक दूसरा प्रमुख उपाय, जिसमें पूजन पाठ और थोड़ी सामग्री का खर्च लगेगा, वे अलग वीडियो के लिए रोक लेते हैं।
वक्ता कहते हैं कि सबसे अच्छा उपाय अमावस्या के दिन या दूज के दिन किया जाता है, और दूज से उनका मतलब शुक्ल पक्ष की दूज या कृष्ण पक्ष की दूज दोनों से है; दोनों दूज को यह छोटा सा उपाय किया जा सकता है, जिसे वे बहुत प्रबल बताते हैं। यह उस घर के लिए है जहाँ किसी व्यक्ति पर या पूरे घर वालों पर अभिचार का बहुत अधिक प्रभाव हो। समय: जिस दिन दूज पड़े, सप्ताह का कोई भी दिन हो, उस दिन शाम को, प्रदोष काल में; प्रदोष में भी यह देख लें कि सूर्य अस्त हो चुका है और उसके आधे घंटे के अंदर यह कार्य कर लें। सामग्री: एक रंग वाली गाय का दूध, देसी गाय का। बहुत सारे लोगों के लिए करना हो तो सवा लीटर लें; केवल स्वयं के लिए करना हो तो एक पाव दूध काफी है। एक मिट्टी का कुल्हड़ लें और उसमें दूध भर दें। उसे अपने पूजन स्थान पर, जहाँ भी पूजा पाठ करते हैं, रखें और महादेव से सारी चीजों के लिए प्रार्थना करें: मेरे घर की रक्षा कीजिए; घर में जो भी नकारात्मक शक्ति या अभिचार कर्म का प्रवेश है, कृपा करके उन सबको हटाइए, उन सबका बंधन कीजिए। वे कहते हैं कि यह वे उन लोगों के लिए आरंभ के रूप में बता रहे हैं जो किसी तरह का कोई पूजा पाठ नहीं करते, साधारण धूप दीप भर जलाते हैं; वे यहाँ से आरंभ करें। फिर प्रार्थना के तुरंत बाद नंगे पाँव नजदीक किसी मंदिर में जाएँ और वह दूध शिवलिंगघर व मंदिरों में पूजित शिव जी का अमूर्त (निराकार) रूप। पर चढ़ा दें। कुल्हड़ वहीं उल्टा करके रख दें, प्रणाम करके वापस आ जाएँ। बाकी कुछ नहीं करना: न उसमें कुछ मिलाना है, न धूप दीप जलाना है, न कुछ और करना है। सिर्फ जाइए, इतना कीजिए, और सिर्फ दूध। वे कहते हैं कि यह एक छोटा सा उपाय दे रहे हैं। एक दूसरा प्रमुख उपाय उन्होंने पहले दिया हुआ है, जिसके लिए अलग से विस्तृत वीडियो बनाएँगे; लेकिन वह उपाय करने के लिए पूजन पाठ करना होगा और थोड़ी सी सामग्री का खर्च स्वयं उठाना होगा। वे कहते हैं कि तब सब बता देंगे।
सावधानी: पहली बार दूध चढ़ाने के बाद घर में तनाव या कलह बढ़ सकती है
होने दें और देखते रहें
वक्ता चेताते हैं कि जब आप पहली बार शिव पर दूध चढ़ाने का उपाय करेंगे तो कुछ न कुछ होगा: घर में बहुत ज्यादा टेंशन बढ़ेगी, या कलह होगी, जो भी हो। वे कहते हैं कि उसे होने दीजिए, और उपाय करके स्वयं देखिए।
वक्ता बताते हैं कि क्या अपेक्षा रखें। जब आप पहली बार दूध का उपाय करेंगे तो कुछ न कुछ होगा: या तो घर में बहुत ज्यादा टेंशन बढ़ेगी, या कलह होगी, जो भी हो। वे कहते हैं: होने दीजिए। उपाय करके देखिए; वे यह एक छोटा सा उपाय दे रहे हैं।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।