उपछाया चंद्र ग्रहण में रुद्र गण एकदिवसीय सिद्धि विधान — साबरी प्रयोग की रामायण चौपाई

आंशिक या उपछाया चंद्र ग्रहण के मध्य काल में ही किया जाने वाला एकदिवसीय सिद्धि विधान — रुद्र के गणों से निवेदन के लिए साबर मंत्र की तरह प्रयुक्त रामायण की चौपाई — उसके पीछे का सिद्धांत, सामग्री, बरगद के पत्तों और लौंग बलि की प्रक्रिया, और उसके बाद का दैनिक प्रयोग।

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The notes
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01

ग्रहण के तीन प्रकार, और वे मंत्र जो केवल आंशिक या उपछाया चंद्र ग्रहण में ही जगाए जाते हैं

पूर्ण ग्रहण में कभी नहीं, सूर्य ग्रहण में कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:40–02:19

वक्ता कहते हैं कि ज्योतिष में ग्रहण के तीन प्रकार बताए जाते हैं: पूर्ण ग्रहण, आंशिक ग्रहण और उपछाया या छाया ग्रहण। कुछ विशेष मंत्र, उनके अनुसार, ऐसे होते हैं जिनकी सिद्धि या जागरण केवल आंशिक चंद्र या आंशिक सूर्य ग्रहण में होता है और पूर्ण सूर्य ग्रहण में उन्हें जगाया नहीं जा सकता। वे जो रुद्र-गण साधना बता रहे हैं वह सिर्फ और सिर्फ आंशिक चंद्र ग्रहण के समय या उपछाया चंद्र ग्रहण के दिन ही की जा सकती है — पूर्ण ग्रहण में कभी नहीं और सूर्य ग्रहण में भी नहीं। वे जोड़ते हैं कि यह जानकारी प्रायः गुरु-परिवारों तक सीमित रहती है और वे इसे इसलिए सामने रख रहे हैं कि लोगों की समस्याएँ कम हों।

02

कामना से की गई साधना देवता से पहले उनके गणों तक क्यों पहुँचती है

निष्काम सीधे जोड़ता है; सकाम चरणबद्ध चलता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:20–03:33

वक्ता कहते हैं कि न उनमें न श्रोताओं में इतनी क्षमता है कि साक्षात महादेव को प्रसन्न कर लें: जब कोई किसी महाशक्ति की सेवा-उपासना करता है तो उस क्षेत्र में उपस्थित उनके गण ही सबसे पहले बात पाते हैं, क्योंकि क्षेत्र बँटा हुआ है और हर शक्ति को ज़िम्मेदारियाँ दी गई हैं। निष्काम साधना और भक्ति, उनके अनुसार, बहुत जल्द साक्षात ईश्वर के समीप ले जाती है और सीधे जोड़ती है; लेकिन कामनाओं और शक्ति-प्राप्ति के लिए की गई साधना कभी सीधे ईश्वर तक नहीं जाती — वहाँ चरणबद्ध चलना पड़ता है और गलतियों की परख होती है, इसीलिए बहुत-सी साधनाएँ फल नहीं देतीं।

03

रुद्र के गणों से निवेदन के लिए साबर मंत्र के रूप में प्रयुक्त रामायण की चौपाई

दूज के चाँद का संबंध, और राम व रुद्र दोनों की कृपा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:34–05:43

वक्ता कहते हैं कि वे जो मंत्र बता रहे हैं वह रामायण की एक चौपाई है जिसे साबरी क्षेत्र में सबर मंत्र की तरह प्रयोग किया जाता है और जिसके एक से अधिक प्रयोग हैं। महादेव के गण, उनके अनुसार, हमारी बात उन तक पहुँचाते हैं और उन्हें रुद्र से स्वतंत्र अधिकार भी मिला है कि प्रसन्न हों तो स्वयं मनोकामना सिद्ध करें; यह मंत्र उन्हीं गणों से निवेदन है। चूँकि महादेव के शीश पर दूज का अर्धचंद्र है, पूर्ण चंद्र नहीं, और मंत्र का संबंध रुद्र के गणों से है, इसलिए यह केवल उपछाया चंद्र ग्रहण में सिद्ध किया जाता है — जैसा उन्हें बताया गया। रामचरितमानस में महादेव राम का ध्यान करते हैं और राम महादेव की पूजा — दोनों एक-दूसरे के आराध्य और सेवक — इसलिए इस एक मंत्र से राम और रुद्र दोनों की कृपा मिलती है और दो महाशक्तियों का समन्वय होता है।

04

रुद्र-गण की सिद्धि का वास्तविक अर्थ क्या है

स्वप्न से मार्गदर्शन, प्रत्यक्ष दर्शन नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:44–06:18

वक्ता ज़ोर देकर कहते हैं कि यहाँ "सिद्ध" होने का यह अर्थ कदापि नहीं है कि गण आपके सामने प्रत्यक्ष खड़े हो जाएँगे — इतना सामर्थ्य अभी नहीं हो सकता। बल्कि वे अपनी इच्छा से स्वप्न के माध्यम से आपका मार्गदर्शन करें, या आपके कर्मों के अनुसार किसी भी तरह मार्गदर्शन या सहायता करें। वे कहते हैं कि यह विशेष जानकारी विधान से पहले देनी थी।

05

रुद्र-गण मंत्र किन मनोकामनाओं के लिए प्रयोग हो सकता है: केवल सात्विक

पौष्टिक और शांति कर्म, विनाश कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:19–06:54

वक्ता कहते हैं कि यह मंत्र किसी भी सात्विक, अच्छी, शुभ मनोकामना के लिए प्रयोग हो सकता है — धन, व्यवसाय या नौकरी, परेशान करता शत्रु, रोग, किसी प्रकार की रक्षा, परीक्षा या इंटरव्यू में सफलता — लेकिन ऐसी कामना के लिए कभी नहीं जिससे किसी का नाश हो। जहाँ भी पौष्टिक कर्म या शांति कर्म करना हो, वहाँ इसका प्रयोग हो सकता है।

06

रुद्र-गण ग्रहण सिद्धि का स्थान और सामग्री

नदी, सरोवर या घर में गंगाजल का कटोरा; हल्दी, पान, लौंग, इलायची, कपूर, सौंफ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:55–08:08

वक्ता कहते हैं कि सिद्धि नदी तट, सरोवर तट या घर — तीनों जगह हो सकती है; नदी या सरोवर पर हो तो वहाँ के शिव मंदिर में करना अति उत्तम है, और घर में काँसे या पीतल के बड़े कटोरे में केवल शुद्ध गंगाजल भरकर उसके पास घर में पहले से सेवित शिवलिंग या शिव-परिवार की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। सामग्री है पिसी हल्दी (गोटा कच्ची हल्दी भी चलेगी पर उसे घिसकर स्याही बनानी होगी), पाँच पान के पत्ते, 44 लौंग, 22 इलायची, 11 कपूर, फूल, चंदन और साधारण पूजन सामग्री; बाद में वे सौंफ जोड़ते हैं जो बताना भूल गए थे। सामग्री में वे पाँच पान गिनाते हैं, जबकि विधान के भोग वाले चरण में ग्यारह पान लगते हैं।

07

पत्ते लेने से एक दिन पहले बरगद के वृक्ष को न्योता देना

कौड़ी, मौली, दक्षिणा और मुख से निवेदन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:09–09:21

वक्ता कहते हैं कि सिद्धि के लिए बरगद के पाँच पत्ते ग्रहण वाले दिन सुबह-सुबह तोड़कर लाने हैं, लेकिन एक दिन पहले वृक्ष को आमंत्रित करके: बरगद के पास जाकर उस पर मौली धागे से एक कौड़ी बाँधें (मौली), पास में कुछ दक्षिणा और चावल रखें, और कहें कि कल मैं पाँच पत्ते लेने आऊँगा, जिस कार्य में लगाऊँगा उसमें सफलता दें और पत्ते लेने की आज्ञा दें — यही न्योता है। अगली सुबह नहा-धोकर जाएँ और पाँच पत्ते ले आएँ।

08

ग्रहण की सिद्धि केवल मध्य काल में, स्पर्श या मोक्ष काल में कभी नहीं

ग्रहण के बीच के दो-तीन घंटे निकालें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:22–10:06

वक्ता कहते हैं कि यह सिद्धि ग्रहण के स्पर्श काल या मोक्ष काल — ग्रहण के आरंभ और अंत — में नहीं करनी है, केवल मध्य काल, पूर्ण मध्य में। सामने वाले ग्रहण के लिए, जो दोपहर से शाम तक है, वे जप का समय दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक, पूरे दो घंटे, तय करते हैं। भविष्य में किसी भी ग्रहण में, यदि स्पर्श से मोक्ष तक पाँच घंटे का ग्रहण काल हो, तो बीच के दो-तीन घंटे निकालकर उसी में साधना करें।

09

रुद्र-गण का ग्रहण-दिवस सिद्धि विधान

हल्दी की स्याही, बरगद के पत्तों पर राम, ग्यारह पान का भोग, जप, लौंग की बलि, समर्पण, रात्रि 108

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:07–14:24

वक्ता ग्रहण-दिवस का पूरा विधान बताते हैं। मध्य काल में, आसन पर आरंभिक प्रक्रिया के बाद, हल्दी और केवल वहीं के जल (नदी, सरोवर, या घर में शिव के समक्ष रखा गंगाजल) से स्याही बनाएँ; दाहिने हाथ की अनामिका से बरगद के पाँचों पत्तों पर राम लिखें — राम नहीं, रा के ऊपर अं की मात्रा — और उन्हें शिव जी पर सजा दें। ग्यारह पान पर दो-दो लौंग, दो-दो इलायची और थोड़ी सौंफ रखकर शिव के गणओं के निमित्त भोग लगाएँ; महादेव से प्रार्थना करें कि सात्विक मनोकामनाओं के लिए अपना एक प्रमुख गण नियुक्त करें और उनके आराध्य राम के मंत्र का यह अनुष्ठान पूर्ण करें; फिर मंत्र (स्क्रीन पर दिखाया गया, बोला नहीं गया) का लगातार जप करें। जप के बाद ग्यारह कपूर पर एक-एक लौंग रखकर बलि स्वरूप जलाएँ — बाएँ से दाएँ, उल्टा कभी नहीं। हाथ में हल्दी और थोड़ा जल लेकर जप समर्पित करें और हल्दी शिवलिंग या अर्घे पर लगाएँ, प्रणाम करके आ जाएँ। जप दोपहर में हुआ हो तो उसी रात घर में धूप-दीप के साथ 108 जप, रुद्र के गणों से प्रार्थना और एक कपूर पर जोड़ा लौंग की बलि। इतने से सिद्धि पूरी होती है।

10

एक ही मनोकामना के लिए रुद्र-गण मंत्र का दैनिक प्रयोग, पूरी होने तक

एक कामना, लौंग की बलि, और ग्यारह दिन में हार नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:25–16:26

वक्ता कहते हैं कि प्रयोग सिद्धि के अगले दिन से शुरू होता है: दैनिक पूजन के बाद बचे समय में बैठकर केवल एक मनोकामना लें — बहुत-सी कामनाएँ कभी नहीं — रुद्र के गणओं से उसी एक के लिए प्रार्थना करें (उनका उदाहरण: कर्ज़ समाप्ति का मार्ग), यथाशक्ति 11, 21, 51 या 108 जप करें और फिर एक कपूर पर दो लौंग बलि स्वरूप ज़रूर जलाएँ। रोज़ करते रहें जब तक समस्या पूरी तरह समाप्त न हो — एक दिन, एक महीना या एक साल; चार-पाँच-ग्यारह दिन करके छोड़ देंगे तो नहीं होगा, और किसी में इतना सामर्थ्य नहीं कि दस दिन में गण प्रत्यक्ष आकर समाधान कर दें। बीच में कोई और साधना कर सकते हैं। रुद्र के गण त्वरित फल देते हैं, वे कहते हैं, पर सब प्रारब्ध पर निर्भर है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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