पुराने वस्त्र, मारण प्रयोग और साधक अपनी रक्षा कैसे करे

पुराने वस्त्र अभिचार का माध्यम क्यों बनते हैं, और उन्हें सुरक्षित ढंग से कैसे दें।

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01

अभिचार का माध्यम बनते पुराने वस्त्र

अपने पुराने पहने हुए वस्त्र किसी को दे देने से आप पर तांत्रिक प्रयोग का खतरा क्यों बन जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:18–00:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय से धारण किए हुए अपने वस्त्र किसी अन्य को दे देता है, तो उस व्यक्ति के मन में क्या है यह वह नहीं जान सकता, और उन्हीं वस्त्रों को माध्यम बनाकर देने वाले के ऊपर अभिचार कृत प्रयोग किया जा सकता है।

02

पूजन वस्त्र को दैनिक और गृहस्थ-अवस्था के वस्त्रों से अलग रखना

पूजन के वस्त्र सामान्य दैनिक वस्त्रों से और गृहस्थ संबंध की अवस्था में पहने वस्त्रों से अलग क्यों रखने चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:54–01:43 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि साधक हो या साधिका, पूजन का वस्त्र सदैव दैनिक जीवन के वस्त्रों से अलग रखना चाहिए, और गृहस्थ में पति-पत्नी के संबंध की अवस्था में जो वस्त्र धारण किया गया हो, उसका पूजन आदि कार्यों में शास्त्रों में निषेध बताया गया है।

03

पूजन के उपयुक्त वस्त्र और एक वस्त्र की महिमा

पूजन का वस्त्र कैसा होना चाहिए, और एक बिना सिला हुआ वस्त्र सर्वोत्तम क्यों माना गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:44–02:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूजन में पुरुष धोती, गमछा या कुर्ते का कपड़ा धारण कर सकते हैं और स्त्रियाँ सूट या साड़ी, परंतु तंत्र साधना में वर्णित पूर्ण फल एक ही लंबे, बिना सिले वस्त्र से मिलता है, जिसे नीचे से ऊपर तक लपेटकर शरीर को भली-भाँति ढका जाए।

04

जीर्ण पूजन वस्त्र से अपने लिए बिछावन सिलवाना

पूजन का वस्त्र जब पुराना या फट जाने के कारण पहनने योग्य न रहे, तब उसका क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 02:30–03:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूजन का वस्त्र जब पुराना होकर पहनने योग्य न रहे तो उसे किसी को देना नहीं चाहिए — बल्कि ऐसे कई वस्त्र इकट्ठा करके उनका अपने लिए या घर के कार्य हेतु बिछावन सिलवा लेना चाहिए, और वह वस्त्र घर से बाहर नहीं जाना चाहिए।

05

पुराने वस्त्र देने से पहले धुलाई और सेंधा नमक में भिगोना

नियमित साधना करने वाला साधक पुराने वस्त्र को किसी को देने से पहले दो बार धोकर सेंधा नमक वाले जल में भिगोता है

· Reviewed Sep 2026 · 03:12–03:44

वक्ता कहते हैं कि नियमित साधना करने वाले साधक के पूजन-वस्त्र के अतिरिक्त बाकी पुराने वस्त्र किसी को भी, यहाँ तक कि गरीब व्यक्ति को भी, देने से पहले कम से कम दो बार अच्छे से धोने चाहिए, और अंतिम बार धोते समय बड़े पात्र में सेंधा नमक (सेंधा नमक) मिले जल में कम से कम आधा घंटा भिगोकर, फिर सुखाकर ही देना चाहिए।

06

वस्त्र अदला-बदली के बजाय हमेशा के लिए देना

साधक को पुराना वस्त्र हमेशा के लिए ही क्यों देना चाहिए, और छोटे भाई-बहन के साथ भी अदला-बदली क्यों नहीं करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 03:45–04:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि साधक को अपना पहना हुआ वस्त्र छोटे भाई-बहन के साथ भी कुछ दिनों के लिए देकर वापस लेने की अदला-बदली कभी नहीं करनी चाहिए; यदि देना ही है तो हमेशा के लिए दें, वह भी अच्छे से धोकर और सेंधा नमक वाले जल में भिगोकर — और वे इस सावधानी की तुलना गुरु के आसन पर पैर न रखने की परंपरागत चेतावनी से करते हैं।

07

पुराने जूते-चप्पल दान करने से पहले धोना

पुराने जूते-चप्पल दान करने या किसी को देने से पहले उनके साथ क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 04:47–05:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पुराने जूते-चप्पल फेंकने के बजाय किसी गरीब को दान करने से पहले उन्हें भी अच्छे से धो लेना चाहिए, उतरन या जूठा चप्पल बिना साफ किए कभी नहीं देना चाहिए, और सामर्थ्य हो तो नया चप्पल दान करना अधिक अच्छा है।

08

शरीर से उतारे गए वस्त्रों और जूते-चप्पलों की सुरक्षा

शरीर पर धारण की गई वस्तुओं में पहनने वाले का अंश रह जाता है, यही इन सावधानियों का मूल कारण है

· Reviewed Sep 2026 · 05:30–05:57

वक्ता कहते हैं कि इन सावधानियों का पालन करने से साधक अपने पुराने वस्त्रों और जूते-चप्पलों का सदुपयोग भी कर सकता है और अपनी रक्षा भी, क्योंकि शरीर पर धारण किए गए ये अवयव ही वे माध्यम हैं जिनसे तंत्र में नकारात्मक प्रयोग सबसे आसानी से सिद्ध कर लिए जाते हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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