किशमिश, शहद और पितृ वीसा — पूर्णिमा से अमावस्या तक सोलह दिन का पितृ प्रयोग

पितृ पक्ष में तृप्ति हेतु प्रतिदिन का पितृ प्रयोग।

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01

असंतुष्ट पितृ और जन्म कुंडली में मिलने वाला पितृ दोष

जिनका झुकाव पितरों की ओर हो, और जिनकी कुंडली में पितृ दोष हो

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:33

उनके लिए जिनका, तंत्र क्षेत्र में और आगे बढ़ने पर, झुकाव पितरों की ओर अधिक होने लगता है, और जो चाहते हैं कि कुल के पितरों के निमित्त कुछ ऐसा नैमित्तिक कर्म करें जिससे उन्हें तृप्ति की प्राप्ति हो और अपना कार्य बने। और उनके लिए जिनके पितृ बहुत अधिक असंतुष्ट हैं, या जिन्होंने जन्म कुंडली का विवेचन करवाया है जिसमें पितृ दोष संबंधी विभिन्न प्रकार के दोष उपलब्ध हैं।

02

पितृ पक्ष — भाद्रपद पूर्णिमा से सर्व पितृ अमावस्या तक सोलह दिन

भाद्रपद पूर्णिमा से सर्व पितृ अमावस्या तक — सोलह दिन, या केवल अमावस्या

· Reviewed Sep 2026 · 00:34–00:57

यह कार्य पितृ पक्ष में करें, वही सर्वश्रेष्ठ होता है। या फिर सिर्फ अमावस्या को करें। सिद्ध करने के लिए पितृ पक्ष ही होता है। पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से लेकर सर्व पितृ अमावस्या तिथि तक का सोलह दिन का समय होता है; इसी समय में करना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि यह कार्य आप पितृ पक्ष में करें — वही सर्वश्रेष्ठ होता है। या फिर सिर्फ अमावस्या को करें। सिद्ध करने के लिए पितृ पक्ष ही होता है। पितृ पक्ष वह सोलह दिन का समय है जो भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से लेकर सर्व पितृ अमावस्या तिथि तक चलता है। इसी समय में इसे करना चाहिए।

03

इक्कीस किशमिश, शहद, चांदी का पात्र, मिट्टी का अग्नि पात्र और गाय का घी

प्रतिदिन इक्कीस किशमिश, कम से कम 250 ग्राम शहद, चांदी का पात्र, मिट्टी का अग्नि पात्र और गाय का घी

· Reviewed Sep 2026 · 00:58–01:36

इसको करने के लिए आपको प्रतिदिन लगभग इक्कीस किशमिश लगेगा, और शहद लगेगा — शहद कम से कम 250 ग्राम लेकर एक बार में रख लीजिए। चांदी का एक छोटा सा पात्र लगेगा। अग्यारी जलाने के लिए, आग जलाने के लिए एक पात्र चाहिए, मिट्टी का पात्र चाहिए: चाहे गोल ले लीजिए, चौखुट्ठा ले लीजिए, जैसा भी चाहें; चतुष्कोण में भी ले सकते हैं। अन्य चीजों में थोड़ी सी गाय का देसी घी लगेगा, लगभग 50 ग्राम की मात्रा में — और यह, वे स्पष्ट करते हैं, प्रतिदिन का बता रहे हैं।

04

चांदी या तांबे में कच्चा दूध, कपूर, सफेद वस्त्र, कुशा का आसन और कुशा की पावित्री

चांदी या तांबे में कच्चा दूध, कपूर, सफेद वस्त्र, कुशा का आसन और कुशा की पावित्री

· Reviewed Sep 2026 · 01:37–02:00

आपको चांदी के गिलास में या फिर तांबे के पात्र में थोड़ा सा कच्चा दूध लगेगा; कपूर लगेंगे। सफेद वस्त्र रहेगा और कुशा का आसन रहेगा। इस क्रम में कुशा की पावित्री बहुत ही आवश्यक है — पावित्री आपके पास होनी चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि आपको चांदी के गिलास में, या फिर तांबे के पात्र में थोड़ा सा कच्चा दूध लगेगा; ये सारी चीजें लगेंगी, और कपूर लगेंगे। सफेद वस्त्र रहेगा; कुश आसन रहेगा। इस क्रम में कुशा की पावित्री बहुत ही आवश्यक है। पावित्री आपके पास होनी चाहिए।

05

सबसे छोटी उंगली की बगल वाली उंगली; तर्पण में दोनों हाथ, कम से कम दाहिना हाथ

पावित्री कहाँ से मिलती है और किस उंगली में धारण की जाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:01–02:23 · Also a question

कुशा की पावित्री आजकल दुकानों में भी मिल जाएगी, या किसी पंडित जी से बनवा करके ले सकते हैं। पावित्री कैसे धारण करनी है, यह पंडित जी से पूछ लीजिएगा तो वे बता देंगे। सामान्य रूप से पावित्री सबसे छोटी उंगली की बगल वाली उंगली में धारण की जाती है। तर्पण के समय आप दोनों हाथ में पावित्री धारण करते हैं, और यहाँ भी ऐसे कर सकते हैं — लेकिन इस कर्म को करते समय कम से कम दाहिने हाथ में पावित्री जरूर हो।

06

नारायण का मंदिर, पीपल या नदी तट; पूजन कक्ष में कभी नहीं; नौ से चार

नारायण का मंदिर, पीपल या नदी तट, नौ से चार के बीच — पूजन कक्ष में कभी नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 02:24–02:58

पूर्णिमा के दिन यदि आप यह कार्य नारायण के किसी मंदिर, या पीपल वृक्ष के नीचे, या किसी नदी तट पर करते हैं तो सर्वश्रेष्ठ है। घर में कर रहे हैं तो ऐसी जगह करें जहाँ आपके देवी-देवताओं का स्थान न हो; ऐसा नहीं है कि यह कार्य पूजन रूम में करना है — पूजन रूम में इसे नहीं करना है। इसे घर के बाहरी हिस्से में कीजिए, आंगन में कीजिए, ब्रह्म स्थान में कीजिए, या छत पर कीजिए। सर्वप्रथम अपने घर का जो पूजन-पाठ करना होता है वह कर लीजिए। यह कार्य दिन में 9:00 बजे के बाद और शाम के 4:00 बजे तक करना है; दोपहर के काल में करना है, वही सर्वश्रेष्ठ होता है — 9:00 से 4:00 के बीच में।

07

गाय के गोबर के कंडे, फिर गुरु, गणपति और कुल मातृकाएँ

पहले गाय के गोबर के कंडे प्रज्वलित, फिर गुरु, गणपति और कुल मातृकाओं को घी की तीन आहुतियाँ

· Reviewed Sep 2026 · 02:59–03:42

सर्वप्रथम गाय के गोबर के कंडे सामान्य रूप से प्रज्वलित कर लें। प्रज्वलित करने के पश्चात घी से तीन बार, गुरु और गणपति जी के नाम से: पहले गुरु जी के नाम से एक आहुति देंगे, उसके बाद एक आहुति गणपति जी के नाम से, और उसके बाद कुल मातृकाओं के नाम से एक आहुति देंगे। गुरु, गणपति और कुल मातृका — तीन आहुति आप दे देंगे।

08

बीस चौपाइयाँ और शहद में डुबोई बीस किशमिश; स्वधा, स्वाहा नहीं

बीस चौपाइयाँ और शहद में डुबोई बीस किशमिश, स्वधा के साथ समापन — स्वाहा कभी नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 03:43–04:17

तत्पश्चात पितृ वीसा, जो उन्होंने इस चैनल पर दिया हुआ है, उसकी पीडीएफ फाइल वहाँ से डाउनलोड कर लीजिए। उसमें बीस लाइन हैं, बीस चौपाई हैं। प्रत्येक पाठ के बाद — प्रत्येक एक लाइन का जो चौपाई है, एक चौपाई का पाठ करने के बाद — आप एक किशमिश शहद में डुबाएंगे, शहद आपको चांदी की कटोरी में निकाल लेनी है, और जो गोबर के कंडे आपने सुलगाए हैं उन पर डालते जाएंगे। यानी कि बीस बार आहुति होगी। अंतिम बार "मम सर्व कुल पितृभ्यो नमः" यह बोल करके, स्वधा। यहाँ स्वाहा नहीं कहा जाता है, स्वधा कहा जाता है — जैसे स्वाहा बोलते हैं, वैसे ही स्वधा बोल करके डाल देंगे। और आरंभ में जो आहुति देंगे, गुरु जी का जो मंत्र डाल रहे हैं, उसमें भी स्वधा ही उच्चारण करेंगे, स्वाहा नहीं बोलेंगे।

09

पूर्णिमा से अमावस्या तक पितृ वीसा का पितरों के निमित्त सिद्ध होना

पूर्णिमा से अमावस्या तक प्रतिदिन करने पर पितृ वीसा पितरों के निमित्त सिद्ध होता है

· Reviewed Sep 2026 · 04:18–04:50

इस प्रकार से पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तिथि तक प्रतिदिन यह कार्य करने पर पितृ वीसा पितरों के निमित्त सिद्ध होता है। इसका संकल्प आपको यही लेना है कि मेरे कुल के पितृ संतुष्ट हों, शांत हों, उनकी तृप्ति हो और मेरा कल्याण करें; और पितरों के निमित्त जो भी दोष मेरे परिवार में किसी के भी कुंडली में उपस्थित है, उस दोष का शमन हो, पितृ दोष की शांति हो।

10

कोई तिर्यक प्रभाव नहीं, पर पूजन स्थान पर नहीं — अपूजित पितृ वहाँ आ नहीं पाएंगे

कोई तिर्यक प्रभाव नहीं, लेकिन पूजन स्थान पर कभी नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 04:51–05:32

इसमें कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है; कोई तिर्यक प्रभाव इसमें आपको प्राप्त नहीं होगा। लेकिन इस चीज को आपको अपने पूजन स्थान पर नहीं करना है। सिर्फ इस बात का विशेष ध्यान रखना है, क्योंकि पितृ यदि पहले से पूजित नहीं हैं तो उस जगह में नहीं आ पाएंगे। इसके पश्चात, जब भी आप पितरों के निमित्त कोई अनुष्ठान या कुछ भी करना चाहें, इसी पितृ वीसा का पाठ करते हुए वह कार्य कर सकते हैं, और उसमें, वे कहते हैं, आपको सौ प्रतिशत सफलता प्राप्त होगी।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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