किशमिश, शहद और पितृ वीसा — पूर्णिमा से अमावस्या तक सोलह दिन का पितृ प्रयोग

पितृ पक्ष में तृप्ति हेतु प्रतिदिन का पितृ प्रयोग।

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The notes
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01

पितृ बीसा प्रयोग किसके लिए है, और वर्ष में कब किया जाता है

असंतुष्ट पितृ, पितृ दोष, पितृ पक्ष के सोलह दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–00:50

वक्ता कहते हैं कि यह प्रयोग उनके लिए है जो तंत्र क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अपना झुकाव पितृ की ओर पाते हैं और कुल के पितरों के निमित्त कोई ऐसा नैमित्तिक कर्म करना चाहते हैं जिससे पितरों को तृप्ति मिले और अपना कार्य बने; और उनके लिए भी जिनके पितृ बहुत असंतुष्ट हैं या जिनकी जन्म कुंडली के विवेचन में पितृ दोष से जुड़े दोष निकले हैं। इसे पितृ पक्ष में करना चाहिए, जिसे वे सर्वश्रेष्ठ कहते हैं, या फिर सिर्फ अमावस्या को। सिद्ध करने के लिए, वे कहते हैं, पितृ पक्ष ही काम आता है: भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से सर्व पितृ अमावस्या तिथि तक के सोलह दिन।

02

पितृ बीसा आहुति की सामग्री: किशमिश, शहद, चाँदी, मिट्टी का अग्निपात्र और बाकी चीज़ें

रोज़ की सूची, कुशा की पवित्री तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:51–01:43

वक्ता रोज़ की ज़रूरी चीज़ें गिनाते हैं: लगभग इक्कीस किशमिश; शहद, जिसमें से कम से कम 250 ग्राम एक बार में लेकर रख लें; चाँदी का एक छोटा पात्र; अग्यारी (आग) जलाने के लिए मिट्टी का पात्र, गोल या चौखुट्टा, जैसा चाहें; लगभग 50 ग्राम गाय का देसी घृत; चाँदी के गिलास या ताँबे के पात्र में थोड़ा कच्चा दूध; कपूर; सफ़ेद वस्त्र; कुश आसन; और कुशा की पवित्री, जिसे वे इस क्रम में बहुत आवश्यक बताते हैं और कहते हैं कि वह आपके पास होनी चाहिए।

03

पितृ कर्म में कुशा की पवित्री: कहाँ से मिले और कैसे पहनी जाए

अनामिका में; तर्पण में दोनों हाथ, कम से कम दाहिना हाथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:44–02:10

वक्ता कहते हैं कि कुशा की पवित्री आजकल दुकानों में मिल जाती है, या किसी पंडित जी से बनवाकर ली जा सकती है, और पंडित जी यह भी बता देंगे कि इसे कैसे धारण करना है। सामान्य रूप से, वे कहते हैं, पवित्री सबसे छोटी उँगली की बगल वाली उँगली में धारण की जाती है। तर्पण के समय दोनों हाथों में पवित्री धारण की जाती है, और यहाँ भी ऐसा किया जा सकता है; लेकिन इस कर्म को करते समय कम से कम दाहिने हाथ में पवित्री ज़रूर हो।

04

पितृ बीसा की आहुति कहाँ और किस समय की जाए, और पूजन कक्ष में कभी क्यों नहीं

नारायण मंदिर, पीपल या नदी तट; नौ से चार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:11–02:52

वक्ता कहते हैं कि यह कार्य नारायण के किसी मंदिर में, पीपल के पेड़ के नीचे या किसी नदी तट पर करना सर्वश्रेष्ठ है। घर में करें तो वहाँ करें जहाँ आपके देवी-देवताओं का स्थान न हो — पूजन कक्ष में कभी नहीं — बल्कि घर के बाहरी हिस्से में, आँगन में, ब्रह्म स्थान में या छत पर, पहले घर का नियमित पूजन-पाठ पूरा करने के बाद। इसका कारण वे बात में आगे बताते हैं: यदि पितृ उस जगह पहले से पूजित नहीं हैं, तो वे वहाँ आ नहीं पाएँगे। समय सुबह नौ बजे के बाद से शाम चार बजे तक है; दोपहर का समय सर्वश्रेष्ठ है।

05

पितृ बीसा आहुति की विधि: तीन आरंभिक आहुतियाँ, फिर शहद में डूबी बीस किशमिश

गुरु, गणपति, कुल मातृकाएँ, फिर हर चौपाई पर एक किशमिश

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:53–04:02

वक्ता कहते हैं कि पहले गाय के गोबर के कंडे सामान्य रूप से प्रज्वलित करें, फिर घी से तीन आहुतियाँ दें: एक गुरु जी के नाम से, एक गणेश जी के नाम से, एक कुल मातृकाओं के नाम से। फिर पितृ बीसा लें — एक पीडीएफ जो उन्होंने अपने चैनल पर दी है, बीस लाइन, बीस चौपाइयाँ — और हर चौपाई का पाठ करने के बाद चाँदी की कटोरी में निकाले शहद में एक किशमिश डुबोकर कंडों पर डालें, कुल बीस आहुति। अंतिम आहुति "मम सर्व कुल पितृभ्यो नमः" बोलकर और फिर स्वधा कहकर डाली जाती है।

06

पितरों के लिए दी गई आहुतियों में स्वाहा नहीं, स्वधा

आरंभ की गुरु आहुति पर भी लागू

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:03–04:17

वक्ता ज़ोर देकर कहते हैं कि इस पितृ प्रयोग में स्वाहा नहीं कहा जाता; स्वधा कहा जाता है। जैसे आहुति डालते समय स्वाहा बोलते हैं, वैसे ही उसकी जगह स्वधा बोलकर डाल दें। यह आरंभ में दी जाने वाली आहुतियों पर भी लागू है: गुरु जी का जो भी मंत्र डाल रहे हों — "ॐ गुरु…" — उसमें भी स्वधा ही उच्चारण करें, स्वाहा कभी नहीं।

07

पितृ बीसा प्रयोग का संकल्प और पक्ष भर में उसकी सिद्धि

पूर्णिमा से अमावस्या तक प्रतिदिन, तृप्ति और पितृ दोष शांति के लिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:18–04:50

वक्ता कहते हैं कि यदि यह कार्य इसी तरह पूर्णिमा से अमावस्या तिथि तक प्रतिदिन किया जाए, तो पितृ बीसा पितृ के निमित्त सिद्ध हो जाता है। इसका संकल्प बस यही लेना है: मेरे कुल के पितृ संतुष्ट हों, शांत हों, उनकी तृप्ति हो और वे मेरा कल्याण करें; और पितरों से जुड़ा जो भी दोष मेरे परिवार में किसी की भी कुंडली में हो, उसका शमन हो, पितृ दोष की शांति हो।

08

पितृ बीसा प्रयोग की सुरक्षा और बाद में किसी भी पितृ अनुष्ठान में उसका उपयोग

कोई तिर्यक प्रभाव नहीं; एक सावधानी; फिर सौ प्रतिशत सफलता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:51–05:23

वक्ता कहते हैं कि इस प्रयोग में कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है; इससे आपको कोई तिर्यक् प्रभाव नहीं मिलेगा। विशेष ध्यान बस इस बात का रखना है कि इसे अपने पूजन स्थान पर न करें, क्योंकि यदि पितृ वहाँ पहले से पूजित नहीं हैं तो वे उस जगह में आ नहीं पाएँगे। इस तरह पितृ बीसा सिद्ध हो जाने के बाद, वे कहते हैं, जब भी आप पितरों के निमित्त कोई अनुष्ठान या कुछ भी करना चाहें, इसी पितृ बीसा का पाठ करते हुए करें, और आपको सौ प्रतिशत सफलता मिलेगी।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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