नवरात्र व्रत: कलश, अखंड ज्योत, बलि और पारण के नियम

नवरात्र व्रत के विधि संबंधी प्रश्नों के उत्तर।

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The notes
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01

अमावस्या और प्रतिपदा एक ही दिन पड़ने पर कलश स्थापना का समय

अभिजीत मुहूर्त या अगली सुबह का चौघड़िया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:53–03:44

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि में कलश स्थापना से पहले सबसे पहले यह देखें कि अमावस्या कब खत्म हो रही है और प्रतिपदा कब लग रही है। यदि प्रतिपदा उसी दिन लगकर उसी दिन समाप्त हो जाती है, तो वे कहते हैं कि उसी दिन मध्याह्न काल में अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना कर लें। यदि अमावस्या पूरे दिन रहे और प्रतिपदा दोपहर बाद लगे तथा अगले दिन सूर्योदय के बाद एक-दो घंटे के लिए भी मिल जाए, तो वे कहते हैं कि अगली सुबह शुभ चौघड़िया देखकर कलश स्थापना करें; और यदि उस छोटे समय में शुभ चौघड़िया न मिले तो उसी सुबह अभिजीत मुहूर्त या किसी शुभ मुहूर्त में स्थापना कर लें।

02

अखंड ज्योत देवी के किस ओर रखी जाए

घी का दीपक दाहिने, तिल तेल का बाएँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:20–04:45

वक्ता कहते हैं कि कलश स्थापना के बाद अखंड ज्योति जलाई जाती है। यदि वह घी की है तो वे कहते हैं कि दीपक भगवती की प्रतिमा या श्री विग्रह के दाहिने हाथ की ओर रखा जाए; यदि तिल तेल की है तो उनकी बाईं ओर।

03

नवरात्र के कलश के नीचे जवारे (जौ) बोना

त्रिकोण या षटकोण, गंगाजल की मिट्टी, बीच खाली

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:46–05:50

वक्ता कहते हैं कि यदि कलश के नीचे जवारे बोए जा रहे हों (जो कहीं-कहीं बोए जाते हैं और कहीं नहीं, विशेषकर चैत्र नवरात्रि में), तो पहले भूमि साफ करके उस पर त्रिकोण या षटकोण बनाया जाए और उसके ऊपर गंगाजल मिलाकर शुद्ध की गई मिट्टी बिछाई जाए। एक दिन पहले भिगोया हुआ जौ, ताकि अच्छे से अंकुरित हो, भगवती के जो भी मंत्र आते हों उनका उच्चारण करते हुए उसमें बोया जाए। वे कहते हैं कि बीच का भाग खाली छोड़ें ताकि कलश अच्छे से बैठे और जवारे उगने पर हिले नहीं।

04

नवरात्र में अखंड ज्योत बुझ जाए: पुनः प्रज्वलन और प्रायश्चित

तुरंत जलाएँ, क्षमा मंत्र की एक माला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:51–06:52

वक्ता कहते हैं कि अखंड ज्योति की बाती इतनी लंबी हो कि बीच में बदलनी न पड़े। फिर भी यदि किसी कारण ज्योत बुझ जाए तो वे कहते हैं कि देखते ही उसे दोबारा प्रज्वलित कर दें। फिर जब अगली बार पूजा या पाठ पर बैठें तो "या देवी सर्वभूतेषु क्षमा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः" की एक माला जप कर क्षमा याचना प्रायश्चित्त स्वरूप कर लें, चाहे ज्योत किसी भी कारण से बुझी हो। इससे, वे कहते हैं, प्रायश्चित हो जाएगा और भगवती कृपा करेंगी।

05

नवरात्र के नौ दिनों का भोग और मधु का अर्पण

चांदी की कटोरी में मधु, अंत में प्रसाद

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:53–07:30

वक्ता कहते हैं कि जो समर्थ हैं वे नवदुर्गा के नौ स्वरूपों के अनुसार प्रतिदिन अलग-अलग भोग लगा सकते हैं; नहीं तो सामान्य भोग पर्याप्त है: दूध से बनी मिठाई, किशमिश, छुहारे और उस समय के मौसमी फल। मधु का भोग, वे कहते हैं, अवश्य लगाना चाहिए। संभव हो तो नौ दिनों तक छोटी सी चांदी की कटोरी में भगवती के सामने मधु रखें, और पाठ पूर्ण होने पर उस मधु को जल में डालकर वह जल सभी प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

06

नवरात्र की बलि: अष्टमी-नवमी का संधि काल और सरल घरेलू विधि

चामुंडा के प्रकट होने का क्षण; एक प्रहार, एक स्थायी अस्त्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:31–09:31

वक्ता कहते हैं कि बलि अष्टमी और नवमी तिथि के मिलने के संधि काल में दी जाए, जो सर्वश्रेष्ठ समय है क्योंकि उसी समय भगवती चामुंडा प्रकट हुई थीं और तब उनकी ऊर्जा समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त रहती है, शत्रु नाश, कष्ट और रोग के नाश के लिए। बलि नारियल, नींबू या केले की हो सकती है। जिन्हें विशेष विधि नहीं आती उनके लिए वे सरल विधि बताते हैं: केले का पत्ता बिछाएँ, उस पर बलि स्वरूप खीरा, केला, कुम्हड़ा आदि रखें, उसे ढकें (केले को लाल कपड़े से), हुंकार बोलते हुए इतना तीव्र प्रहार करें कि एक ही बार में दो टुकड़े हो जाएँ, फिर रोली लगाकर जल से घेरें। बलि का अस्त्र कभी बदलना नहीं चाहिए; वह सदा के लिए रखा जाता है, उसका पूजन होता है, फिर उससे बलिदान किया जाता है। वे कहते हैं कि मंत्रोक्त विशेष विधान भी है, पर वे जानबूझकर सरल विधि बता रहे हैं।

07

नवरात्र में हवन और कन्या पूजन का क्रम

पहले हवन, फिर कन्याएँ; दिन पाठ पर निर्भर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:32–09:54

कुंवारी कन्या पूजन पहले करें या हवन, इस पर वक्ता कहते हैं कि हवन सदा पहले होता है। यदि सप्तमी को पूरा पाठ पूर्ण हो गया है और अष्टमी को कन्या पूजन करना है, तो अष्टमी को पहले हवन करें और उसके बाद ही कन्या पूजन। यदि अष्टमी को पाठ पूर्ण हो रहा है तो नवमी को पहले हवन करें और हवन के बाद नवमी को ही कन्या पूजन करें।

08

नवरात्र का पारण दशमी को, कन्या पूजन के दिन नहीं

पूरे नौ दिन उपवास, नहीं तो व्रत भंग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:55–10:40

वक्ता कहते हैं कि जो नवरात्रि व्रत कर रहा है उसे पूरे नौ दिन उपवास रखना है। अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन कर लेने का अर्थ यह नहीं कि उसी दिन पारण कर लें; इसे वे गलत तरीका कहते हैं। अष्टमी को पारण कर लिया तो, वे पूछते हैं, नवरात्र के नौ दिन कहाँ पूर्ण हुए, जब अभी शैलपुत्री की पूजा और दशमी का पूरा विधान बाकी है, इसलिए व्रत भंग हो जाएगा। पारण, वे कहते हैं, दशमी तिथि लगने पर ही, यानी दशमी को ही करना है, चाहे कन्या पूजन किसी भी दिन किया हो।

09

दशमी की विधि: अपराजिता पूजन, शमी पूजन, जवारे, विसर्जन और पारण से पहले दान

पारण से पहले देवी और उनके परिवार की विदाई

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:41–11:44

वक्ता कहते हैं कि दशमी की सुबह सर्वप्रथम अपराजिता भगवती का पूजन करें, फिर शमी पूजन, और जो जवारे उगे हैं वे सब भगवती को चढ़ाएँ। फिर विसर्जन की क्रियाएँ: पहले कलश को हिलाया जाता है और भगवती की सभी शक्तियों और उनके पूरे परिवार को यथास्थान भेजा जाता है। विसर्जन और समर्पण पूर्ण होने के बाद ही, वे कहते हैं, दान की वस्तुएँ (अन्न, फल, मसाले, तेल, घी, यथाशक्ति) छूकर रख दें और भगवती से सरल संकल्प करें कि मैं यथाशक्ति ब्राह्मण को या गरीबों को या दोनों को यह दान करूँगा ताकि मेरा व्रत-अनुष्ठान सफल हो। वस्तुएँ पारण से पहले देकर आएँ या पारण के बाद, दोनों ठीक हैं। इस तरह करने से, वे कहते हैं, नवरात्रि व्रत पूर्ण होगा।

10

विशेष स्थिति: दशमी बृहस्पतिवार को हो तो कलश घर से बाहर नहीं ले जाते

हिलाया जाता है, बाहर नहीं ले जाया जाता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:45–11:56

विसर्जन के लिए कलश कब ले जाएँ, इस पर वक्ता कहते हैं कि यदि दशमी तिथि के दिन बृहस्पतिवार पड़ जाए तो कलश को विसर्जन के लिए घर से हटाया नहीं जाता। हिलाया जरूर जाता है, वे कहते हैं, पर बाहर नहीं ले जाया जाता।

वक्ता विसर्जन के लिए कलश कब ले जाना चाहिए, इस पर एक नियम जोड़ते हैं। यदि दशमी तिथिचंद्र पंचांग की एक तिथि — कुछ प्रतिमाओं (जैसे शिवलिंग) को प्रतिदिन स्नान आवश्यक है, जबकि अन्य को केवल अपने निर्धारित साप्ताहिक दिन या तिथि पर। के दिन बृहस्पतिवार पड़ जाता है तो कलश को विसर्जन के लिए घर से हटाया नहीं जाता। हिलाया जरूर जाएगा, वे कहते हैं, पर घर से बाहर नहीं ले जाया जाता।

11

नवरात्र की अखंड ज्योत कब तक जलती रहनी चाहिए

जैसे आवाहन किया वैसे विदाई होने तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:57–12:27

वक्ता कहते हैं कि अखंड ज्योति तब तक जलती रहनी चाहिए जब तक विसर्जन के लिए कलश हिलाया न जाए। विसर्जन कर देने के बाद ज्योत अपने आप बुझ जाए तो कोई दिक्कत नहीं। पर ऐसा कभी नहीं होना चाहिए, वे कहते हैं, कि कन्या पूजन हो गया तो तेल-घी न डालकर ज्योत बुझने दी जाए। जब तक भगवती का जैसे आवाहन किया था वैसे विदाई न हो जाए, ज्योत जलती रहनी चाहिए।

12

नवरात्र के कलश पर रखा नारियल कभी नहीं फोड़ना चाहिए

वह साक्षात देवी हैं; नदी, अगला साल या रोपण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:28–13:46

वक्ता कहते हैं कि दशमी के विसर्जन पर, नदी में या घर पर, कलश पर रखे नारियल को निकालकर फोड़ना और प्रसाद में बाँटना बहुत गलत तरीका है, इससे बहुत दोष लगता है और पूरा नवरात्रि व्रत खंडित हो जाता है, चाहे कितने भी जानकार व्यक्ति ने ऐसा बताया हो। वह नारियल, वे कहते हैं, साक्षात भगवती का स्वरूप है: नौ दिन तक पूजा लेता है और जगदम्बा नौ दिन ज्योत और कलश में स्थापित रहती हैं, तो उसे फोड़ देंगे तो बचेगा क्या? विकल्प हैं: विसर्जन के बाद उसे नदी में ही छोड़ दें, या घर लाकर पूजन स्थान में रखें, पूजा करें और अगले साल विसर्जन करें। यदि नारियल जम जाए तो उसे घर में साफ-सुथरे स्थान पर रोपित करके जल देकर बढ़ा सकते हैं, जिससे घर का रक्षण होगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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