जप माला की प्राण प्रतिष्ठा कैसे करें — सामग्री, पंचगव्य स्नान, विनियोग और मनका-मनका अभिमंत्रण

जप माला को धारण करने या मंत्र जप में लाने से पहले उसकी प्राण प्रतिष्ठा की क्रमबद्ध विधि।

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01

जप या धारण से पहले माला की प्राण प्रतिष्ठा क्यों ज़रूरी है

पूर्ण दिव्यता और प्रभाव प्रतिष्ठा के बाद ही

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–00:34

वक्ता कहते हैं कि बिना प्राण प्रतिष्ठा की हुई माला पूर्ण रूप से अपना प्रभाव नहीं दे पाती, इसलिए उसकी दिव्यता का पूरा उपयोग करने के लिए माला को प्राण प्रतिष्ठित अवश्य कर लेना चाहिए। यह पहनने और जप, दोनों के लिए लागू है: पहनने वाली माला को भी पहले प्राण प्रतिष्ठित करें, फिर उस पर मंत्र जप करें, तब गले में धारण करें; तब वह पूर्ण दिव्यता से युक्त होकर अपना पूरा प्रभाव दिखाती है।

02

माला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए सामग्री और मुहूर्त

पंचगव्य, पीपल के नौ पत्ते, सुबह का चौघड़िया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:35–01:34

वक्ता आवश्यक चीज़ें गिनाते हैं: स्वयं माला, धूप, एक लोटा पानी, गंगाजल, दो प्रकार का चंदन, अष्टगंध, रोली, हल्दी, एक दीपक, पीपल के नौ पत्ते और पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र; इसका विशेष अनुपात होता है पर साधारण रूप से मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं)। साथ में दो लौंग और एक elaichi, जिनका प्रयोग प्रतिष्ठा के बाद होगा। शुभ मुहूर्त देख लें, न हो तो कम से कम उस दिन का शुभ चौघड़िया; सुबह प्रतिष्ठा करना बहुत अच्छा रहता है, इसलिए सुबह का चौघड़िया देखें।

03

माला के लिए पीपल के नौ पत्तों का अष्टदल कमल

पीपल के पत्ते में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:35–02:50

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले पीपल के नौ अच्छे पत्तों को थाली में अष्टदल कमल जैसा सजाएं, और यह करते समय भगवान नारायण, अपने इष्ट और अपनी कुलदेवी-देवता का नाम लेते रहें ताकि यह पूर्ण फलदायी हो। सजाने के बाद पत्तों पर थोड़ी हल्दी और कुंकुम अवश्य डालें, इससे यह और दिव्य हो जाता है। प्राण प्रतिष्ठा के लिए सदैव पीपल के पत्ते इसलिए लिए जाते हैं क्योंकि पीपल के पत्ते में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का नित्य वास कहा गया है।

04

प्राण प्रतिष्ठा से पहले माला का तीन चरणों का स्नान

शुद्ध जल, पंचगव्य, फिर चंदन जल, हर एक अपने मंत्र के साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:51–04:45

वक्ता कहते हैं कि माला को कटोरे में रखकर सबसे पहले शुद्ध जल से प्रक्षालित करें; कर सकें तो इस समय स्वर और व्यंजनों का उच्चारण करें, हर एक में अं की मात्रा लगाकर, ओम से आरंभ करके (ओम अं आं इं ईं उं ऊं, इसी प्रकार पूरे स्वर और फिर पूरे व्यंजन)। फिर वामदेव मंत्र के साथ पंचगव्य से स्नान कराएं, फिर सद्योजात मंत्र के साथ पुनः शुद्ध जल से, फिर गंधद्वारां मंत्र के साथ चंदन के पानी के मिश्रण से प्रक्षालित करें, और अंत में शुद्ध जल से अच्छी तरह नहला दें। स्नान के बाद माला को पीपल के पत्तों पर उसी प्रकार रखें जिस प्रकार पहनते हैं।

05

हाथ में लेकर माला का विनियोग और प्राण प्रतिष्ठा मंत्र

बाएं हाथ में लेकर दाएं से ढकें; मूल मंत्र वीडियो में नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:46–05:44

वक्ता कहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा मंत्र विनियोग के साथ ही पढ़ा जाता है, और विनियोग देते हैं: ओम अस्य श्री प्राण प्रतिष्ठा मंत्रस्य ब्रह्मा विष्णु रुद्र ऋषयः ऋग्यजुःसामानि छन्दांसि प्राणशक्तिर्देवता आं बीजं ह्रीं शक्तिः क्रौं कीलकम् अस्मिन् माले प्राणप्रतिष्ठापने विनियोगः। विनियोग के बाद पूरी माला बाएं हाथ में लेकर दाएं हाथ से ढक लें और प्राण प्रतिष्ठा मंत्र बोलें। वह मंत्र वे वीडियो में नहीं बोलते; कहते हैं कि वह डिस्क्रिप्शन में देंगे, साथ में पूरी विधि की एक पीडीएफ भी।

06

प्राण प्रतिष्ठित माला को अर्पित उपचार

पुष्प, लौंग-इलायची भोग, चंदन, सुमेरु पर कुमकुम, दीप और धूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:45–06:59

वक्ता कहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा मंत्र के बाद माला को पीपल के पत्तों पर रखकर "ओम सर्वशक्ति स्वरूपणे श्री मालायै नमः पुष्पम् समर्पयामि" के साथ पुष्प चढ़ाएं। फिर लौंग और elaichi का भोग लगाएं, फिर पुनः फूल, फिर हल्का सा चंदन और फिर कुंकुम, उसी मंत्र के अंत में "चंदनम् समर्पयामि" और "कुमकुमम् समर्पयामि" कहते हुए; कुमकुम सुमेरु पर चढ़ाना है। फिर "दीपम् दर्शयामि" के साथ दीपक दिखाकर अग्नि कुंड में रखें और "धूपम् दर्शयामि" के साथ धूप दिखाएं। यहां तक की विधि संपन्न हो जाती है।

07

ईशान, अघोर और तत्पुरुष मंत्रों से माला के एक-एक मनके का अभिमंत्रण

108 मनकों पर दो फेरे, सुमेरु हर बार अघोर से

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:00–08:49

वक्ता कहते हैं कि पूरी विधि यह है कि हर मनके को पकड़कर अनुनासिक रूप से स्वर-व्यंजन, अ से अं तक और क से क्ष तक, ओम से संपुट करके बोले जाते हैं। पर साधारण रूप से दो मंत्रों से किया जा सकता है। पहले चंदन में थोड़ा पानी मिलाकर हर मनके पर चंदन लगाते हुए ईशान मंत्र बोलें (ओम ईशानः सर्वविद्यानाम् ईश्वरः सर्वभूतानाम् ब्रह्माधिपति ब्रह्मणोऽधिपति ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवम्), क्योंकि शिव का ईशान स्वरूप सभी विद्याओं और मंत्रों का अधिपति है; पूरे 108 के बाद सुमेरु को अघोर मंत्र से अभिमंत्रित करें (ओम अघोरेभ्यो अथ घोरेभ्यो घोर घोरे तरेभ्य सर्वेभ्य सर्व सर्वेभ्यो नमः शिवेभ्य)। फिर कुमकुम से तत्पुरुष मंत्र (ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात्) बोलते हुए हर मनके पर दूसरा फेरा, सुमेरु फिर अघोर से। इससे माला का अभिमंत्रण पूर्ण हो जाता है।

08

नई प्राण प्रतिष्ठित माला पर पहला जप और विधि की समाप्ति

ग्यारह बार या एक पूरा फेरा, फिर चाहें तो कपूर आरती

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:50–09:37

वक्ता कहते हैं कि अभिमंत्रण पूर्ण होने के बाद माला को हाथ में लेकर जिस मंत्र का उस पर जप करना हो, जैसे भगवती दुर्गा या महालक्ष्मी का कोई मंत्र, उसे माला हाथ में बंद करके कम से कम ग्यारह बार जपें, या फिर हर मनके पर एक बार पूरा जप कर लें (श्रीं मंत्र हो तो हर मनके पर "ओम श्रीं नमः")। फिर माला को पुनः पीपल के पत्तों पर रख दें और चाहें तो एक बार कपूर से आरती दिखा दें। इससे माला की पूर्ण प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है और उसे जप या पहनने में प्रयोग किया जा सकता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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