जप माला की प्राण प्रतिष्ठा कैसे करें — सामग्री, पंचगव्य स्नान, विनियोग और मनका-मनका अभिमंत्रण

जप माला को धारण करने या मंत्र जप में लाने से पहले उसकी प्राण प्रतिष्ठा की क्रमबद्ध विधि।

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01

माला अपना पूर्ण प्रभाव प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही देती है

माला का प्रयोग करने से पहले उसकी प्राण प्रतिष्ठा क्यों आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:06–00:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बिना प्राण प्रतिष्ठा किया हुआ माला अपना प्रभाव पूर्ण रूप से नहीं दे पाता। माला चाहे पहनने के लिए हो या जप के लिए, उसकी दिव्यता का पूर्ण उपयोग तभी होता है जब वह प्राण प्रतिष्ठित हो — प्राण प्रतिष्ठा और मंत्र जप के बाद गले में धारण की गई माला पूर्ण रूप से दिव्यता से युक्त हो जाती है और अपना पूर्ण प्रभाव दिखाती है।

02

सामग्री की सूची — धूप, गंगाजल, दो प्रकार का चंदन, अष्टगंध, रोली, हल्दी, दीपक, पीपल के नौ पत्ते और पंचगव्य

माला, धूप, गंगाजल, दो प्रकार का चंदन, अष्टगंध, रोली, हल्दी, दीपक, पीपल के नौ पत्ते और पंचगव्य

· Reviewed Sep 2026 · 00:35–01:10

वक्ता सामग्री गिनाते हैं: वह माला जिसकी प्राण प्रतिष्ठा करनी है, एक धूप, एक लोटा पानी, गंगाजल, दो प्रकार का चंदन, अष्टगंध, रोली, हल्दी, एक दीपक, पीपल के नौ पत्ते, और पंचगव्य — अर्थात गाय का दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र। वे कहते हैं कि पंचगव्य का एक विशेष अनुपात होता है, परंतु साधारण रूप से इन्हें मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है।

03

शुभ मुहूर्त या चौघड़िया देखना, और लौंग-इलायची अलग रख लेना

शुभ मुहूर्त, और वह न हो तो उस दिन का चौघड़िया, तथा अलग रखी हुई दो लौंग और एक इलायची

· Reviewed Sep 2026 · 01:11–01:34

वक्ता कहते हैं कि सारी सामग्री इकट्ठा कर लेने के बाद शुभ मुहूर्त देख लें; यदि शुभ मुहूर्त न हो तो कम से कम उस दिन का शुभ चौघड़िया देख लें — सुबह में कौन सा है, शाम में कौन सा। सुबह प्राण प्रतिष्ठा करना सबसे अच्छा रहेगा। साथ ही दो लौंग और एक इलायची भी पास रख लें, जिनका प्रयोग प्राण प्रतिष्ठा हो जाने के बाद किया जाएगा।

04

पीपल के नौ पत्तों को अष्टदल कमल के रूप में सजाना, साथ ही नारायण, इष्ट और कुलदेवी-देवता का नाम लेना

पीपल के नौ पत्तों से बनाया गया अष्टदल कमल, और नारायण, इष्ट तथा कुलदेवी-देवता का नाम

· Reviewed Sep 2026 · 01:35–02:50

वक्ता कहते हैं कि सर्वप्रथम पीपल के नौ पत्तों को थाली में रखकर अष्टदल कमल जैसा बनाना है। यह कार्य करते समय भगवान नारायण, अपने इष्ट देवता तथा अपनी कुलदेवी-देवता का नाम निरंतर लेते रहें, ताकि यह कार्य पूर्ण रूप से फलदायी हो सके। अच्छे, निर्दोष पीपल के पत्तों का ही प्रयोग करें। सजाने के बाद उनमें जरा सी हल्दी और कुमकुम अवश्य डालें, क्योंकि कहते हैं कि पीपल के पत्ते में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का नित्य वास होता है — इसीलिए प्राण प्रतिष्ठा के लिए सदैव पीपल के पत्तों का प्रयोग किया जाता है।

05

शुद्ध जल से प्रक्षालन, और सक्षम हों तो अनुस्वार सहित स्वर-व्यंजन का उच्चारण

सर्वप्रथम शुद्ध जल से प्रक्षालन, और सामर्थ्य हो तो अनुस्वार सहित स्वर-व्यंजन का उच्चारण

· Reviewed Sep 2026 · 02:51–03:28

वक्ता कहते हैं कि सर्वप्रथम माले को कटोरे में रखकर शुद्ध जल से स्नान कराएँ — यह प्रक्षालन शुद्ध जल से किया जाता है। वे कहते हैं कि यदि प्रक्षालन करते हुए स्वर और व्यंजनों का उच्चारण कर सकें तो बहुत ही अच्छा है: ओम से प्रारंभ करके, हर जगह अं की मात्रा लगाकर — ओम अं आं इं ईं उं ऊं — इस तरह पूरे स्वरों का और फिर पूरे व्यंजनों का उच्चारण करें।

06

पंचगव्य से स्नान कराते समय बोला जाने वाला वामदेव मंत्र

वामदेव मंत्र के साथ पंचगव्य से स्नान

· Reviewed Sep 2026 · 03:29–03:53

वक्ता कहते हैं कि शुद्ध जल से प्रक्षालन के बाद माले को पंचगव्य से स्नान कराया जाता है और साथ में यह मंत्र बोला जाता है: ओम वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमो श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमो कालाय नमो कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमो बलाय नमो बलप्रमथनाय नमो सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः।

07

सद्योजात मंत्र के साथ शुद्ध जल से दूसरा स्नान

शुद्ध जल से दूसरा स्नान, इस बार सद्योजात मंत्र के साथ

· Reviewed Sep 2026 · 03:54–04:11

वक्ता कहते हैं कि पंचगव्य से प्रक्षालन के बाद माले को फिर से शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है, और इस बार सद्योजात मंत्र का उच्चारण किया जाता है: ओम सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवभवाय नमः।

वक्ता कहते हैं कि इस प्रकार पंचगव्य से प्रक्षालन करने के बाद माले को फिर से शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। स्नान कराते समय पुनः यह मंत्र बोला जा सकता है: ओम सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवभवाय नमः।

08

गंधद्वारां मंत्र के साथ चंदन-जल से स्नान, और फिर माले को पीपल के पत्ते पर धारण-रूप में रखना

गंधद्वारां मंत्र के साथ चंदन-जल से स्नान, फिर पीपल के पत्ते पर उसी रूप में रखना जिस रूप में पहना जाता है

· Reviewed Sep 2026 · 04:12–04:45

वक्ता कहते हैं कि दोनों जल-स्नानों के बाद चंदन और पानी का मिश्रण बनाकर उससे माले को प्रक्षालित किया जाता है और साथ में यह मंत्र बोला जाता है: ओम गंधद्वारां दुरधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्। पूर्ण सुगंधित चंदन के इस स्नान से उसकी दिव्यता पूर्ण होती है; फिर उसे शुद्ध जल से अच्छी तरह धोकर पीपल के पत्ते पर उसी रूप में रखा जाता है जिस रूप में उसे पहना जाता है।

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09

प्राण प्रतिष्ठा मंत्र से पहले पढ़ा जाने वाला विनियोग मंत्र

प्राण प्रतिष्ठा विनियोग के साथ ही की जाती है, जो पहले पढ़ा जाता है

· Reviewed Sep 2026 · 04:46–05:23

वक्ता कहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा विनियोग के साथ ही करनी है। जो विनियोग मंत्र बोला जाता है वह है: ओम अस्य श्री प्राण प्रतिष्ठा मंत्रस्य ब्रह्मा विष्णु रुद्र ऋषयः ऋग्यजुःसामानि छन्दांसि प्राणशक्तिर्देवता आं बीजं ह्रीं शक्तिः क्रौं कीलकम् अस्मिन् माले प्राणप्रतिष्ठापने विनियोगः।

10

बाएँ हाथ में लेकर दाएँ हाथ से ढकना, फिर पहला पुष्प अर्पित करना

माले को पूरी तरह बाएँ हाथ में लेकर दाएँ हाथ से ढकना, और उसके बाद पहला पुष्प अर्पित करना

· Reviewed Sep 2026 · 05:24–05:57

वक्ता कहते हैं कि विनियोग मंत्र के बाद माले को पूर्ण रूप से बाएँ हाथ में ले लिया जाता है और दाएँ हाथ से ढक दिया जाता है; इसी स्थिति में उस पर प्राण प्रतिष्ठा मंत्र बोला जाता है। मंत्र पूर्ण हो जाने पर माले को फिर से पीपल के पत्ते पर रख दिया जाता है और उस पर पहला पुष्प अर्पित किया जाता है, यह कहते हुए: ओम सर्वशक्ति स्वरूपणे श्री मालायै नमः पुष्पम् समर्पयामि।

11

लौंग-इलायची का भोग, फिर चंदन, सुमेरु पर कुमकुम, दीप और धूप

लौंग-इलायची का भोग, फिर चंदन, सुमेरु पर कुमकुम, और धूप-दीप

· Reviewed Sep 2026 · 05:58–06:59

वक्ता कहते हैं कि पुष्प के बाद लौंग और इलायची का भोग लगाया जाता है, फिर हल्का सा चंदन चढ़ाया जाता है (ओम सर्वशक्ति स्वरूपणे श्री मालायै नमः चंदनम् समर्पयामि), फिर सुमेरु मनके पर कुमकुम (...कुमकुमम् समर्पयामि), फिर अग्नि कुंड में रखा हुआ दीपक दिखाया जाता है (...दीपम् दर्शयामि), और अंत में धूप दिखाई जाती है (...धूपम् दर्शयामि)। इसी के साथ विधि का यह चरण संपन्न होता है।

12

हर मनके की पूर्ण अनुनासिक विधि, और दो मंत्रों वाला सरल विकल्प

हर मनके पर स्वर-व्यंजन का अनुनासिक उच्चारण — अथवा दो मंत्रों वाला सरल विकल्प

· Reviewed Sep 2026 · 07:00–07:22

वक्ता कहते हैं कि वैसे तो हर एक-एक मनके को पकड़कर, ओम से संपुटित करके, अ से अं तक के स्वरों और क से क्ष तक के व्यंजनों का अनुनासिक (नाक के द्वारा) उच्चारण करते हुए उसे प्राण प्रतिष्ठित किया जाता है। परंतु वे कहते हैं कि साधारण रूप से यह दो मंत्रों से भी किया जा सकता है।

13

हर मनके पर चंदन के साथ ईशान मंत्र, फिर सुमेरु पर अघोर मंत्र

चंदन के साथ हर मनके पर ईशान मंत्र, और सुमेरु पर अघोर मंत्र

· Reviewed Sep 2026 · 07:23–08:29

वक्ता कहते हैं कि पहला मंत्र ईशान मंत्र है, जिसे थोड़े से पानी में मिले चंदन के साथ एक-एक मनके पर लगाते हुए बोला जाता है: ओम ईशानः सर्वविद्यानाम् ईश्वरः सर्वभूतानाम् ब्रह्माधिपति ब्रह्मणोऽधिपति ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवम्। यह हर मनके पर इसलिए बोला जाता है क्योंकि भगवान शिव का ईशान स्वरूप सभी विद्याओं और सभी मंत्रों का अधिपति, राजा है। जब पूरे 108 मनकों का यह अभिमंत्रण हो जाता है, तब सुमेरु मनके को अघोर मंत्र से अभिमंत्रित किया जाता है: ओम अघोरेभ्यो अथ घोरेभ्यो घोर घोरे तरेभ्य सर्वेभ्य सर्व सर्वेभ्यो नमः शिवेभ्य — इससे विधि का एक पूर्ण चक्र हो जाता है।

14

कुमकुम के साथ तत्पुरुष मंत्र, और सुमेरु फिर से अघोर मंत्र से

वही चक्र कुमकुम और तत्पुरुष मंत्र के साथ दोहराना, सुमेरु फिर से अघोर मंत्र से

· Reviewed Sep 2026 · 08:30–08:49

वक्ता कहते हैं कि पहला चक्र पूरा हो जाने पर यही क्रम दोहराया जाता है: इस बार कुमकुम का प्रयोग किया जाता है और हर मनके को तत्पुरुष मंत्र से अभिमंत्रित किया जाता है — ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात्। जब सारे मनके फिर से पूरे हो जाते हैं, तब सुमेरु को पुनः उसी अघोर मंत्र से अभिमंत्रित किया जाता है, और इस प्रकार माले का पूर्ण अभिमंत्रण हो जाता है।

15

नियमित प्रयोग से पहले, जिस मंत्र का जप करना है उसका न्यूनतम एक चक्र

नियमित प्रयोग से पहले, जिस मंत्र के लिए माला है उसी का कम से कम एक चक्र जप

· Reviewed Sep 2026 · 08:50–09:19

वक्ता कहते हैं कि अभिमंत्रण पूर्ण हो जाने पर माले को हाथ में लेकर, जिस मंत्र का जप वस्तुतः इस माले पर करना है — जैसे भगवती दुर्गा का कोई मंत्र या महालक्ष्मी का मंत्र — उसका जप किया जाता है; हाथ में बंद करके कम से कम 11 बार, या फिर एक-एक मनके पर पूरा एक चक्र। उदाहरण के लिए श्रीम मंत्र हो तो हर मनके पर ओम श्रीम नमः बोलते हुए एक बार पूरा जप किया जाता है।

16

माले को फिर से पीपल के पत्ते पर रखना, इच्छानुसार कपूर की आरती, और माला प्रयोग के लिए तैयार

पुनः पीपल के पत्ते पर, चाहें तो कपूर की आरती, और माला तैयार

· Reviewed Sep 2026 · 09:20–09:37

वक्ता कहते हैं कि इस जप के बाद माले को फिर से पीपल के पत्ते पर रख दिया जाता है, और चाहें तो एक बार कपूर से आरती दिखा दी जाती है। इससे एक माले की पूर्ण प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है। वे अंत में कहते हैं कि यही विधि अपनाकर माले की प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए और तभी उसे जप में या पहनने में प्रयोग करना चाहिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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