हिन्दू होकर घर में पीर-फकीर की पूजा — किसे प्रणाम करें, मुस्लिम साबर मंत्र और पूजा-स्थान की शुद्धि पर वक्ता का मत

हिंदू साधक द्वारा पीर-फकीर की पूजा पर वक्ता का मत — कौन प्रणाम के योग्य है, मुस्लिम शक्तियों वाले साबर मंत्र और घर के पूजा-स्थान में पीर की तस्वीरें कुल-शक्तियों को कैसे हानि पहुँचाती हैं, और उन्हें हटाकर घर की शुद्धि कैसे करें।

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01

क्या एक हिंदू को रास्ते में दिखने वाले पीर-फकीर के मजारों को प्रणाम करना चाहिए?

नहीं: वहाँ न्यूट्रल रहें और मन से अपने देवताओं को प्रणाम करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–01:36 · Also a question

एक साधक से किसी ने कहा था कि उनके परिवार की दुर्घटना इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने रास्ते के पीर-पैगंबर के मजारों को दुआ-सलाम नहीं की, और वक्ता कहते हैं कि यह दुविधा सबके सामने आती है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर मुस्लिमों से अधिक हिंदू चादर चढ़ाते दिखते हैं और अपनी आस्था डगमगा जाती है। उनका उत्तर है नहीं: ऐसे स्थान एक हिंदू के प्रणाम के योग्य नहीं हैं। प्रणाम अपने इष्ट और सनातन संस्कृति के देवी-देवताओं को करें — अपराध-बोध इस बात का हो कि हनुमान जी को प्रणाम न कर पाए, मजार को नहीं — और चलते हुए मन से, भगवान का नाम लेते हुए, बिना हैंडल छोड़े। इन जगहों को किसी तरह सम्मान न दें, पर अपमान भी न करें: न्यूट्रल रहें, और जब कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम न्यूट्रल रहें।

02

सनातन संस्कृति में प्रणाम के योग्य कौन: कसौटी, और लोक-वीर व क्षेत्रीय देवता

उस आचरण को प्रणाम जिससे लोक-कल्याण हुआ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:37–03:46

वक्ता कहते हैं कि साधक शक्ति को मानता है, ऊर्जा के पुंज को, जो सकारात्मक भी होता है और नकारात्मक भी; वह ऊर्जा हमारे आराध्य के श्री विग्रह में प्रतिष्ठित होती है, जो उनके आचरण, व्यवहार और लीलाओं के माध्यम से हमारे बीच है — अतः प्रणाम-योग्य वही विग्रह या शक्ति है जिसके कारण लोक का कल्याण और सनातन संस्कृति का उत्थान हुआ हो। राम, कृष्ण, जगदंबा और महादेव के अतिरिक्त उनके भक्तों के मंदिर भी इसमें आते हैं: वे लोक-वीर और क्षेत्रीय देवता जो कभी महादेव के मनुष्य भक्त थे, भक्ति से ऐसी शक्ति पाई कि उनका समाधि स्थल जागृत स्थान बन गया, किसी पर उनकी सवारी भी आती है; उनके नाम पर भंडारे, सेवा, अस्पताल और योजनाएँ चलती हैं। प्रणाम, वे कहते हैं, हम उनके आचरण और विचार को करते हैं।

03

जिन्होंने सनातन संस्कृति और उसके मंदिरों पर आघात किया वे कभी प्रणाम के योग्य नहीं, वक्ता का मत

प्रणाम की कसौटी का निषेध पक्ष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:47–04:39

वक्ता पूछते हैं: यदि किसी ने सनातन संस्कृति को ध्वस्त करने का प्रयास किया हो, तलवार तानकर कहा हो कि अपना धर्म छोड़कर हमारे धर्म में आ जाओ, आपके आराध्य के मंदिरों और शिखरों को ध्वस्त करके उन पर गुंबद लगवाए हों, आपके आराध्य को कितने समय तक बाहर रहना पड़ा हो — तो क्या ऐसा व्यक्ति योग्य या पूजित हो सकता है? वे श्रोता से कहते हैं कि प्रणाम करने से पहले अपनी आत्मा से पूछ लें, और चेतावनी देते हैं कि जो वहाँ प्रणाम करेगा वह कहीं न कहीं देवताओं द्वारा तिरस्कृत होगा।

04

भूली हुई कुल-शक्तियाँ भी विद्यमान हैं, और पीर के मजार पर झुकना उन्हें अप्रसन्न करता है

पूर्ण निषेध, चाहे जो कीमत हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:40–07:19

वक्ता कहते हैं कि लोग कहते हैं कि पाँच पुश्तों से पता नहीं कि कुल की शक्ति कौन है, लेकिन न मानने से कुलदेवी या कुल देवता अलग नहीं हो जाते; कुछ लोग आज किसी प्रेत या ब्रह्म राक्षस को, जो दो-चार पुश्त पहले बना होगा, कुल देवता कहकर पूजते हैं। आपकी आरंभ की कुल शक्ति सनातन संस्कृति की हैं — उन्हें यह कैसे अच्छा लगेगा कि उनके वंशज उन पीर-फकीरों को सम्मान दें जिन्होंने उन्हें कष्ट दिया? उनका निर्णय: चाहे शीश भी कट जाए तो कटवा दो, लेकिन ऐसे पीर-पैगंबरों के मजारों पर शीश झुकाना कहीं भी सही नहीं है, चाहे उसे कितना भी बड़ा संत कहा जाता हो।

05

मुसलमानी शक्तियों की दुहाई वाले साबर मंत्र: कैसे आए और वक्ता उन्हें क्यों वर्जित कहते हैं

नाथों की दीक्षा में उदारता; पराई शक्तियाँ कुल की जड़ काटती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:20–09:29

वक्ता कहते हैं कि सनातन संस्कृति की हर परंपरा के, विशेषकर नाथ परंपरा के, सिद्ध साधुओं ने दूसरे धर्म के लोगों को भी शिष्य बनाया और दीक्षा देने से मना नहीं किया; इसी उदारता को वे सबसे बड़ी कमी कहते हैं, क्योंकि उन्हीं शिष्यों के द्वारा घालमेल किया गया, और जिन नामों से लोग सकारात्मक जुड़ते हैं उनका नाम वे नहीं लेते क्योंकि वे उस घालमेल को सकारात्मक मानते ही नहीं। इसलिए यदि किसी सबर मंत्र में मुसलमानी शक्ति से जुड़ी नकारात्मक शक्ति की दुहाई हो, उन्हें बड़ा बताया गया हो या उनकी आन-शान पर चलने को कहा गया हो, तो वह मंत्र करो ही मत: नवनाथ और गुरुदत्त की परंपरा में किसी चीज़ की कमी नहीं, करोड़ों मंत्र हैं — बस आपको जानकारी नहीं। उन शक्तियों का प्रयोग, उनका दावा है, आपकी जड़ ही समाप्त कर देता है: गौ के दोष से युक्त चीज़ खाने वाले के मुख से निकली चीज़ आपकी कुल-शक्तियों का सर्वनाश कर सकती है, आपके देवी-देवता कुंठित हो जाते हैं, आप कभी आगे नहीं बढ़ते, और मृत्यु के बाद किसी योग्य नहीं रहते।

06

वाराह-दंत और गोमूत्र की परीक्षा: क्या मजार की शक्ति सनातनी है

ऊर्जा प्रक्षेपण: दैवीय के विपरीत खड़ी शक्तियाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:30–10:08

ऊर्जा प्रक्षेपण के अपने बार-बार कहे सिद्धांत से वक्ता कहते हैं कि ये शक्तियाँ एक तरह से नकारात्मक ऊर्जा से युक्त होकर हमारी दैवीय शक्तियों के विपरीत खड़ी की गई हैं। उनका प्रमाण: जंगली सूअर के दाँत को वाराह तंत्र से अभिमंत्रित करके पहनो और उस मजार में चलकर दिखाओ — आपको मारकर भगा देंगे। वे पूछते हैं कि यदि वे सनातनी शक्तियाँ हैं तो उन्हें इस चीज़ से घृणा क्यों है? गोमूत्र से क्यों भागती हैं, जबकि हमारा सनातन तो पवित्र है? वे कहते हैं कि यहीं से दिक्कत शुरू होती है।

07

घर के पूजा-स्थान में पंचायतन के साथ पीर-फकीर की तस्वीर रखने से क्या होता है?

गोमूत्र लाए हुए अतिथि का अपमान है; दोनों एक जगह नहीं रह सकते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:09–11:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि एक सनातनी ने घर में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, भगवती का पंचायतन स्थापित किया हो और साथ में किसी मुल्ला, मौलवी, पीर, फकीर या मजार की तस्वीर रख दी हो, तो अब दोनों को दिक्कत हो गई। वहाँ गोमूत्र छिड़कोगे तो जिन्हें आप स्वयं लाकर रखे हो उनका अपमान कर रहे हो — वे अपनी जगह पर सम्मानित होते — इसलिए दोष आपको लगेगा; और उनके कारण छिड़क नहीं सकते तो आप अपने देवी-देवताओं को ही साइड कर रहे हो। ये दो चीज़ें एक जगह नहीं रह सकतीं, और इसका प्रभाव आपके जीवन में पड़ेगा ही पड़ेगा। यदि आप वाराह या वाराही की सेवा करते हो, शूकर-दंत धारण किए हो या घर के बंधन में इनका प्रयोग किया हो, और उसी जगह ऐसी तस्वीरें पूज रहे हो, तो वे चेतावनी देते हैं कि आपको बहुत दिक्कत होने वाली है।

08

पीर-पूजा छोड़ने में कोई दोष नहीं: वक्ता के कारण

महादेव-भगवती से बढ़कर कुछ नहीं; सम्मान केवल सनातन-सेवियों को

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:15–12:27

वक्ता पूछते हैं कि जिस कच्चे दूध से आप महादेव का अभिषेक करते हो, उसी गौ माता का मांस खाने वाले आपके आराध्य कैसे हो जाएँगे, आपका कल्याण कैसे करेंगे। वे कहते हैं कि तंत्र में और गहरे जाने पर ये चीज़ें इतनी निकृष्ट हैं कि एक सनातनी हिंदू महिला पर इनका प्रयोग होने पर सोचा नहीं जा सकता कि ये किस स्तर तक गिर जाती हैं — इसे वे अभी खुलकर नहीं बताते। इसलिए इन सबसे बचिए; छोड़ने में कोई दोष नहीं लगता। महादेव और भगवती से बढ़कर कुछ नहीं; सेवा, सम्मान और प्रणाम केवल उन्हीं का करें जो सनातन संस्कृति से जुड़े हों और जिन्होंने सनातन धर्म के लिए कुछ कार्य किया हो। जिन्होंने इसके पतन का षड्यंत्र रचा, उनके सामने झुकोगे तो आपके अपने देवी-देवता साथ छोड़ देंगे — आप अपने पतन का आमंत्रण दे रहे हो।

09

घर में रखी पीर-फकीर की तस्वीरें कैसे हटाएँ, और घर कैसे शुद्ध करें?

सम्मानपूर्वक विदा, फिर गोमूत्र, गंगाजल, पंचामृत, नए वस्त्र, हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:28–13:37 · Also a question

यदि घर में उन्हें स्थान दिया है, वक्ता कहते हैं, तो सम्मानपूर्वक विदा कीजिए — बिल्कुल अपमान नहीं, क्योंकि अपनी जगह पर वे भी शक्ति हैं; हाथ जोड़कर कहिए, भैया आप हमारे लिए नहीं हो। लाए आप हो, इसलिए दुर्व्यवहार से दोषी आप बनोगे — किसी को घर बुलाकर दो जूते मारोगे तो अपराधी आप बनोगे। आज सुनकर फेंक नहीं देना; तरीके से प्रवाहित कर दीजिए या उनके स्थान पर रख आइए, सब अच्छे दिन में। फिर घर और पूजन-स्थान को गोमूत्र और गंगाजल से शुद्ध कीजिए, हर विग्रह को गंगाजल, गोमूत्र, पञ्चामृत से स्नान कराइए, घर में छिड़काव कीजिए, सबका अभिषेक करके नए वस्त्र पहनाइए और हवन कीजिए। उसके बाद ही, वे कहते हैं, पूजन लगेगा और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी; नहीं तो वे तस्वीरें आपका बुरा करती ही रहेंगी।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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