नए घर में देवी-देवताओं को ले जाने की सही विधि

गृह परिवर्तन पर देवताओं को नए घर ले जाने पर नोट्स।

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The notes
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01

लंबे समय से पूजित घर से कुलदेवी की मूर्ति उठने का विरोध क्यों करती है

स्थान के देवता भी पुष्ट हो रहे थे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–01:10

वक्ता ज्योतिर्मठ की एक News18 खबर का हवाला देते हैं, जहाँ लोग घर छोड़कर जा रहे थे: एक ब्राह्मण परिवार की कुलदेवी की मूर्ति अपने स्थान से उठ ही नहीं रही थी, और जब वे उसे उठाकर ले जाने लगे तो ऐसा लगा मानो कोई उन्हें धक्का दे रहा हो। वे कहते हैं कि इसका सबसे विशेष कारण यह है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक नीति-नियम और समर्पण से भगवती, इष्ट और कुल की शक्तियों की सेवा-पूजा करने से उस स्थान के देवी-देवता भी पुष्ट होते हैं, क्योंकि हर स्वस्तिवाचन, यज्ञ या हवन में स्थान देवता के नाम से भी आहुति पड़ती है। वे स्थानीय देवता नहीं चाहते कि शक्तियाँ वहाँ से जाएँ, क्योंकि परिवार के कारण उनका भी भरण हो रहा था।

02

लंबी उपासना से स्थान जाग्रत होता है: दुर्गा सप्तशती का वचन

आंशिक पाठ से भी शक्ति स्थापित होती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:11–02:01

वक्ता दुर्गा सप्तशती के तेरहवें अध्याय में जगदम्बा के राजा सुरथ और समाधि से कहे वचन का स्मरण कराते हैं: जिस स्थान पर नित्य उनके चरित्रों का पाठ होगा, वहाँ वे अपनी संपूर्ण शक्तियों के साथ विराजमान रहेंगी। वे कहते हैं कि इसी प्रकार यदि कोई पूरा सप्तशती या अपने इष्ट की सभी चीज़ों का पाठ न भी करे, पर नियम से उसके कुछ अंशों का पाठ करे, तो इस कलिकाल में ये चीज़ें फलीभूत होती हैं, शक्तियाँ वहाँ स्थापित हो जाती हैं, और जहाँ सेवा-पूजा हुई वह स्थान जाग्रत हो जाता है।

03

नेवता: घर बदलने से पहले पुराने घर में देवी-देवताओं को निमंत्रण

समय, कारण और नया स्थान बताना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:27–04:06

वक्ता कहते हैं कि नया घर बन जाने पर सबसे पहला कार्य पुराने घर के अपने पूजन स्थान पर इष्ट को नेवता देना है। पाँच प्रकार के फल, पाँच प्रकार की मिठाई, वस्त्र, दक्षिणा, अक्षत, दूर्वा और पुष्प सजाए जाते हैं, स्थान के देवी-देवताओं के लिए अलग से भोग रखा जाता है, दीप जलाकर गणेश को, फिर कुल के देवी-देवताओं को प्रणाम किया जाता है, फिर वहाँ स्थापित हर शक्ति का एक-एक करके नाम लिया जाता है। आराम से बैठकर जगदंबा को जाने का कारण बताया जाता है और निवेदन किया जाता है कि वे कल इतने समय पर प्रसन्नतापूर्वक साथ चलें, नए घर की नई मालकिन बनें और वहाँ परिवार का कल्याण करें।

04

नए घर में देवी-देवताओं का स्वागत और स्थापना

नए मेहमान की तरह सजावट, स्नान, फिर पूजन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:07–05:06

वक्ता कहते हैं कि नए स्थान पर पूजन स्थान को नए मेहमान के स्वागत की तरह सजाया जाता है: कम से कम मुख्य द्वार पर आम पत्र और अशोक के पत्तों का तोरण दो-चार फूल मालाओं के साथ, मिल जाए तो दोनों तरफ केले के तने या पत्ते के स्तंभ-द्वार, और देवताओं के आवाहन के लिए थोड़ी रंगोली। फिर पुराने घर से देवी-देवताओं को अच्छे से लाकर सबका स्नान कराकर स्थापित करें, और स्वयं या ब्राह्मण द्वारा यथाशक्ति पूजन कराएँ, जिसमें मुख्य देव-विग्रहों का अभिषेक-स्नान हो।

05

विशेष स्थिति: जिस घर में गृह प्रवेश या सत्यनारायण पूजा भी हो, वहाँ देवताओं की स्थापना

प्रवेश पूजन के साथ, पंडित जी के अनुसार स्थापना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:07–05:33

वक्ता कहते हैं कि यदि सत्यनारायण पूजा करवा रहे हों, या नया घर हो जहाँ पूरे विधि-विधान से गृह प्रवेश होगा, तो विधियाँ अलग हो जाती हैं। गृह प्रवेश की विधि के बाद, या पंडित जी जैसा बोलें, घर के देवी-देवताओं का पूजन गृह प्रवेश पूजन के साथ होता है, और तभी उन्हें वहाँ स्थापित करके सेवा-पूजा आरंभ की जाती है।

06

किराए के घरों के बीच देवताओं को ले जाने की सरल विधि

अक्षत, पुष्प, निवेदन, एक दिन का हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:34–05:55

वक्ता कहते हैं कि सामान्य लोग जो बृहत रूप में नहीं कर रहे, किराए के एक घर से दूसरे में शिफ्ट हो रहे हैं, उन्हें भी यह विधि छोटे रूप में ही सही, पर अवश्य करनी चाहिए। यदि भगवती ने बहुत सामर्थ्य न दिया हो, तो कम से कम सामान्य अक्षत और पुष्प से नेवता दें, निवेदन करें, फिर देवताओं को नए स्थान पर ले जाएँ और वहाँ स्वयं विधिवत एक दिन का छोटा-सा हवन अवश्य कर लें।

07

विधि से देवताओं को ले जाने पर तपोबल साथ जाता है; न करने पर कोई संकट नहीं

मन का भाव, पर एक तरीका; अंधविश्वास नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:56–06:35

वक्ता कहते हैं कि इस तरीके से करने पर पुराने स्थान पर बनी जप-तप-पूजा खंडित नहीं होती: जगदम्बा जब उस अंश को छोड़कर वहाँ से जाती हैं तो पूरे स्वरूप को लेकर आती हैं, इसलिए पुण्य और तपोबल साथ जाता है और नए स्थान पर भी कल्याण होता है, भले ही जप-मंत्र की ऊर्जा पुराने वातावरण में रह जाए। वे जोड़ते हैं कि यह सब न करने से कोई बहुत बड़ी दिक्कत नहीं होती — यह मन का भाव है, अंधविश्वास नहीं — लेकिन एक तरीका होना चाहिए: जैसे आप जा रहे हैं, उसी तरह देवी-देवताओं को लेकर जाइए।

08

लंबे समय से पूजित पुराना घर अगले निवासी के लिए चैतन्य बना रहता है

नए व्यक्ति का कल्याण आते ही शुरू

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:36–06:52

वक्ता कहते हैं कि चूँकि पुराने स्थान पर लंबे समय तक जप, हवन, पूजा-पाठ हुआ होगा, इसलिए वह स्थान चैतन्य रहेगा ही रहेगा। जो भी नया व्यक्ति वहाँ रहने आता है, उसका कल्याण पहले से ही शुरू हो जाता है। इसलिए वे कहते हैं कि तरीके से अपने देवी-देवताओं को नए स्थान पर ले जाएँ, ताकि देव शक्तियाँ भी प्रसन्नतापूर्वक वहाँ वास करें और परिवार का कल्याण करें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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